यादें..

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कितने साल बीत गए, आज मैं इतने सालों बाद गांव जा रहा हूं। इतने में बस रूकी और कंडक्टर की आवाज सुनाई दी_ चंदननगर की सवारी नीचे उतरो भाई!! सबके साथ मैं भी उतर पड़ा, नीचे उतर कर बसस्टैंड का नज़ारा देखकर काफी हैरानी हुई कितना कुछ बदल चुका है यहां पर। लेकिन गांव के भीतर जाने के लिए शायद अभी भी वहीं दोनों पुराने रास्ते हैं, एक गांव के किले से हाट तक का रास्ता जो पूरा बाजार घूमाता हुआ ले जाता था और दूसरा गांव के बाहर का घुमावदार रास्ता उस रास्ते में महुए के पेड़ के नीचे