धुन्‍ध

(1.8k)
  • 9.4k
  • 1.7k

कहानी— धुन्‍ध आर. एन. सुनगरया, प्रात: ऑंखें खुलीं तो, तरो-ताजा मेहसूस हुआ, ‘’बेटे की शादी हर्षोल्‍लास से सम्‍पन्‍न हो गई।‘’ ‘’प्रणाम! पिताजी।‘’ नवबधु ने चरण स्‍पर्श