मंथन 8

(4.8k)
  • 8.1k
  • 3.2k

मंथन 8 आठ आपातकाल समाप्त हो गया। लोक सभा के चुनाव बीत गये। दिल्ली में नई सरकार बन गई। विधान सभा क चुनावों में बशीर साहब को भी तमाम प्रयत्नों के बाद भी किसी पार्टी से चुनाव लड़ने का टिकिट नहीं मिल पाया। बशीर साहब को निराश होकर घर बैठ जाना पड़ा। अब तो रवि उनसे कई बार कह चुका कि आप इस पार्टी को छोड़ दो। रश्मि भी बार-बार यही कहती-‘जो पार्टी ईमानदार लोगों की कद्र करना नहीं जानती है, वह देश का क्या हित करेगी ?‘ लेकिन बशीर साहब हर बार यह कहकर टाल देते हैं-