अंतिम सांझ का दर्द

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अंतिम सांझ का दर्द आज पिंकी को मरे पांच दिन हो चुके थे लेकिन अमित और सुमित अभी तक घर नहीं पहुंचे थे। खेत की मेढ़ पर बैठा बसंतु बार-बार यह सोचकर दुखी हो जाता था कि क्या उसके अपने बेटे भी इतने पत्थर दिल और स्वार्थी हो सकते हैं? जिस मां ने उन्हें कभी भी जरा से दुख-तकलीफ का अहसास तक न होने दिया। जिनकी हर गलती के लिए वह लोगों के सामने झुकती रही। कभी उसकी ममता में जरा भी कमी न आई। वही लड़के उसके बिमार होने पर तो क्या आए लेकिन उसकी अंतिम विदाई के वक्त