"मै मॉ बनने वाली हूं"।ज्यो हीी संदीप ने मोबाइल हाथ मे लिया, उसकी नजर जूूूलिया के मैैसेज पर पडी।भारत से जाने के इतने दिनो बाद?जूलिया का नाम पढते ही उसकी ऑखो मे चमक आ गई।चेहरा ऐसे खिल उठा, मानो वर्ष्षो बाद अपना कोई बिछुडा मिल गया हो।अतीत का पन्ना फडफडाकर उसकी ऑखो के सामने खुल गया।"ट्रिन ट्रिनकी आवाज सुनकर उसकी नींद खुल गई थी।उसने घडी मे समय देखा।पांच बजने वाले थे।इतनी सुबह दरवाजे पर कौन हो सकता है?वह उठना नहीं चाहता था।लेकिन डोरबेल लगातार बज रही थी।इसलिए अनमने मन से उसे उठना पडा था।दरवाजा खोलते ही उसकी नजर युवती पर