उसने घर के खुले दरवाजे में एक पैर रखा और अपना स्कूलबैग वहीं से इस अंदाज में उछलकर फेंका कि बैग आंगन को पार करता हुआ बरामदे में रखे तख़्त पर जाकर गिरा।उसे ऐसा करते देख उसकी मां ने देखा और वहीं बैठी बैठी चिल्लाई,"ठहर जा कमीने!अभी तेरी हड्डियां सेंकती हूं।"उसने मां की धमकी सुना अनसुना किया और गली भागकर पार कर गया।बच्चे का नाम गोपाल और उसकी मां का नाम शकुंतला था।लेकिन मां सब जगह कुंतो और बेटा गोपी के नाम से जाना जाता है।गोपी की माँ कुंतो उस वक़्त अपनी घनिष्ठ सहेली दिलजीत कौर के साथ बैठी हुई