बस रुकी तो वह ख्यालों की दुनिया से बाहर आया।"जेल!जेल!!"कंडक्टर कह रहा था।उसे याद आया कि उसे यो इसी स्टैंड पर उतरना था।एकदम वह अपनी सीट से उठा और लपक कर बस से बाहर!हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी का एक पुराना सा बोर्ड सड़क किनारे ही लगा था जिस पर नीले अक्षरों की लिखावट मिट सी रही थी।वह कॉलोनी की सड़क पर आगे बढ़ा।उसे मकान नम्बर 17 में जाना था।एक आटा चक्की में आटे से सना एक व्यक्ति दिखाई दिया।उसके सिवा पूरी गली निर्जन थी।पीछे अरावली पहाड़ की एक श्रृंखला दूर तक जा रही थी।"भाई जी!सत्रह नम्बर मकान कहां होगा।"उसने उसी व्यक्ति