बेचैनी को चैन मिले तो

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बेचैनी को चैन मिले तो मैं कुछ सोचूँ,बेख्याली को ध्यान में रखूँ तो मैं कुछ पाऊं।जीवन इतना सरल कहाँ,अमृत में ही गरल पड़ा,नीरव हो गए स्वपन भी अपने,आँखों से भी तरल चुका।बेदिली को दिल में धरूं तो धैर्य कहाँ से लाऊं।उसका सपना था एक नर्स बनने का।गाँव के सरकारी स्कूल में पढ़ते हुए राजरानी बहनजी की छोटी बहन गाँव के ही नजदीक बड़े अस्पताल में नर्स लगी थी।वह अपनी यूनिफॉर्म में ही अपनी बहन से मिलने आई थीउनकी नई यूनिफार्म जो चकाचक प्रेस करी गई थी,उनके गोरी त्वचा पर खूब फब रही थी।उसके मुकाबले रीठे से धुला बगैर प्रेस किया