लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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यारी - 1 By Prem Rathod

शाम के 5:00 बजे थे मैंने बैंक से बाइक स्टार्ट करके अपने घर की तरफ जाने के लिए निकल पड़ा। घर पहुंच कर सीधा अपने रूम में पहुंचा और फ्रेश होकर अपने बेड पर लेटा,पर पता नहीं क्यों आज सु...

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दस्तक By Arjit Mishra

कबीर मुंबई में एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में कार्यरत है| उसकी पत्नी नेहा एक प्रतिष्ठित स्कूल में अध्यापिका है| उनकी एक बेटी त्रिशाला बारह साल की और एक बेटा विवान दस साल का है| दोनों ब...

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अोफिडियोफोबिया By Abhinav Bajpai

बापू.. बापू.. सूरज सर पे चढ़ आया है, उठोगे नहीं, अम्मा गुस्सा हो रही है। भैंस का चारा - सानी नहीं करना है।' कहते हुए सरजू की लड़की इमली उसे जगाती है।सरजू - ' हां… उठ रहा हू...

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उत्तम खेती मध्यम बान निषिद्ध चाकरी भीख निदान By Vijay Singh Tyagi

उत्तम खेती मध्यम बान निषिद्ध चाकरी भीख निदान एक जमाना था , जब विज्ञान की कोई चमक-दमक नहीं थी और न कोई औद्योगिक विकास ही हुआ था, तब खेती को उत्तम दर्जे का पेशा माना जाता था। उस समय...

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एक अजनबी से मुलाकात.. By Gal Divya

वो दिन बड़ा ही सुहाना सा था , ‌‌‌‌‌‌ वो मुलाकात बड़ी सुहानी सी थी, वेसे तो कोई रीस्ता न था पर, वो अजनबी अपना सा था ।।...

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जनता का पैसा By Neelam Kulshreshtha

" जनता का पैसा " [ नीलम कुलश्रेष्ठ ] अवध एक्सप्रेस के ए.सी. टू टियर के पर्दों के बीच में से एक हष्ट पुष्ट टी.टी.की आकृति झांकी, ठिठकी, फिर आगे बढ़ गयी. एक मिनट बाद वही आकृति वापिस आ...

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जिम्मेदारी - 2 By VANDANA VANI SINGH

सुमन से पहले उनके पाती बीमार थे उनका ऑपरेशन हुआ था । कुछ दवाई के कारण उनका दिमागी संतुलन बिगड़ गया था। राकेश इक सरकारी डफ्तर में काम करते उनकी दैनिक दिनचर्या और दफ्तर जाना अना इसके...

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कीमत पांच रुपये की By Vishesh Gupta

" कीमत पांच रुपये की" मुझे याद है आज भी वो दिवाली का दिन। शाम का वो वक़्त था लोगों के घर तो रोशन थे इतने कि आंखें चुंधिया जाए।। ओर दूसरी तरफ था मेरा घर जिसमे...

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पिंजरा By Sneh Goswami

पिंजरा महानगर की यह एक छोटी सी कालोनी है । कालोनी में किसी किचन में एक के ऊपर एक रखे डिब्बों जैसे फ़्लैट । फ़्लैट क्या छोटा सा पिंजरे नुमा आकार जिसमें 10* 12 का कमरा जिसके एक कोने...

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मेरी दस चुनिंदा लघुकथाएं By Krishna manu

#लोकतंत्र बूढ़ा सोमर बड़ी कठिनाई से अपनी झोपड़ी के देहरी तक आ सका। एक मिनट की भी देर होने पर वह रास्ते में ही बेहोश हो सकता था। बाबू साहब के खेतों में कभी दिन-दिन भर काम करने वाले...

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लत का गुलाम By Vijay Singh Tyagi

लत का गुलाम अगहन का महीना था, सर्दी पड़नी शुरू हो गई थी। फसल पानी मांग रही थी, तभी आसमान में घटा होने लगी। शायद वर्षा हो, ऐसा लगने लगा था। इसी इंतजार में आसमान की तरफ देखते-देखते...

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वो थॉमस था By Devendra Prasad

बात उन दिनों की है जब मै श्री रामेश्वर मंदिर में रहता था / उस वक्त हम मंदिर में नए नए आये थे / मेरी उम्र करीब ६ साल थी/ मेरे पिताजी मंदिर के पुजारी थे / पहले तो पिताजी मंदिर में सु...

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और मानव धर्म बन ना सका By Neelam Kulshreshtha

"---------और मानव धर्म बन ना सका " नीलम कुलश्रेष्ठ एक अंतरराष्ट्रीय एन. जी. ओ. ने संयुक्त राष्ट्र संघ के न्यूयॉर्क स्थित कार्यालय के निकट की एक इमारत में स्थित एक कम्पनी के बोर्ड र...

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कोर्ट के भुत By milind rane

कोर्ट के भुत लेखक : श्री.मिलिंद गीता रामदास राणे शाम को काम खत्म करके मै घर के लिए निकलही रहा था। तभी पड़ोसी सहयोगी राजीव ने मुझे पूछा कि पाटिल आज देर रात तक रुक के...

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बजरंगी भाईजान By Arjit Mishra

उन दिनों हमारी पोस्टिंग मेरठ में थी| सरकारी क्वार्टर मिला हुआ था सो अपनी धर्मपत्नी के साथ वहीँ रहते थे| यूँ तो जब से हमने घर से बाहर रहना शुरू किया था, यानि की स्नातक की पढाई करने...

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गीदड़ और धुनकी की लोक-कथा By Vijay Singh Tyagi

गीदड़ और धुनकी की लोक-कथा एक जंगल में एक बड़ा ही चालाक और दबंग गीदड़ रहता था। जंगल के सभी गीदड़ उससे डरते थे , इसलिए सारे जंगल में वह निर्भय होकर घूमता था। अपनी चालाकी का उसे बड़ा...

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ब्रांडेड By Amita Joshi

कविता हर वर्ष की भांति दीदी के घर सर्दियों की छुट्टियां बिताने जा रही थी ।यही वह समय होता था जब वह फुर्सत से अपने बीमार पिता और मां के संग कुछ समय बिताती थी । उच्च पदासीन दीदी जीज...

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कोरोना के संग बटूक की जंग By Chiranjiv

“आइस कि माँ जल्दी दरवाजा खोलो, देखो क्या लाये है।” बटूक ने जोर जोर से दरवाजा खटखटाते हुए कहा। उवासी लेते हुए बटूक के पत्नी गीता ने दरवाजा खोला। “ बड़ी जल्दी नही आ गये। “ मुँह बिचका...

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दि ट्रेन By Arjit Mishra

कबीर की नौकरी केंद्रीय सरकार के विभाग में होने की वजह से अंतर्प्रदेशीय तबादले होते रहते थे| उस समय उसकी तैनाती गुजरात के पोरबंदर में थी| वैसे तो कबीर का घर लखनऊ से बहुत दूर था किन्...

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डॉक्टर जॉन By S Sinha

कहानी -डॉक्टर जॉन झारखण्ड की एक नगरी देवघर है जिसे बैद्यनाथधाम भी कहते हैं ....

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पवित्र अग्नि By Rajesh Mehra

पवित्र अग्नि'भाभी, में ठीक तो कर रही हूँ न?' निशा ने अपनी भाभी की तरफ आशा भरी निगाहों से देखकर पूछा।निशा की भाभी कुछ नही बोल पाई लेकिन उसकी चुप्पी में हां की स्वीकृति थी, न...

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किस्सा बेईमानी का By Vijay Singh Tyagi

किस्सा बेईमानी का हुआ कुछ यूं था कि एक जमाने में औरतें हाथ के चरखे से सूत कातती थीं। उनमें से कुछ तो अपना ही सूत कातकर बाजार में बेचती थीं, कुछ दुकानदारों की ही रुई लेकर सूत की कता...

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A Secret Letter - 5 By Hardik Chande

पुलिस स्टेशन पहुँचते ही राजवंश महेश्वर के परिवार को फोन करके पुलिस स्टेशन बुला लेता है।15-20 मिनीट में ही जैसे तैसे जीवा और उसकी मम्मी पुलिस स्टेशन पहुँच जाते है, जब उनको इंस्पेक्ट...

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चुनिंदा लघुकथाएँ - 7 By Lajpat Rai Garg

लाजपत राय गर्ग की चुंनंदा लघुकथाएँ (7) सब एक समान एक बार एक वकील और एक सरदार में बहस हो रही थी। बहस के बीच सरदार ने कहा - ‘वकील साहब, सिक्ख कौम मार्शल कौम है, सुपीरियर कौम है।’ वकी...

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डॉ सतीश राज पुष्करणा जी की लघुकथाओं पर मेरा अभ्यास - 2 By Kalpana Bhatt

अभ्यास क्रम 2जनरेशन गैप अपने पुत्र अरुण को डॉक्टर बनाने के लिए राधे ने रिक्शा चलाते-चलाते जवानी में ही बुढ़ापे को न्योता दे दिया था | क्योंकि उसकी स्वर्गीय पत्नी की हार्दिक इच्छा थी...

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कैब ड्राइवर By Swati Grover

रात के ग्यारह बज चुके थे। मेहर ने नोएडा सेक्टर-56 के अपने ज्वेलरी के शौरूम से बाहर निकली और अपनी बुक की हुई कैब को देखने लगी। पर दूर-दूर तक कोई गाड़ी नज़र नहीं आई ।...

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में समय हूँ ! - 5 By Keval

(अबतक : अक्षरवंशिका के राजा अभयराज के गुप्तचर बंदी बना लिए गए है। गुप्त सूचनाए प्राप्त करनेके सारे स्रोत बंध हो गए है। अपरिचित महाराज को समजाता है कि उसके गुप्तचर सहीसलामत है। मध्य...

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कहानी... By Sohail

हर किसी का एक कल होता है एक कहानी होती है जो उसके आज को तबाह कर देती है कभी कभी वो होता है जो हम नहीं सोचते और कभी वो नहीं होता जो हम सोचते है एक मौत एक कातिल एक ज़िन्दगी एक रिश्ता...

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सौंदर्य By Seema Jain

दिपाली अपनी मां के सत्तरवें जन्मदिन पर मिलने आई थी। मां उम्र के साथ सिकुड़ती जा रही थी, इतनी बड़ी कुर्सी पर बैठी छोटी सी बच्ची लग रही थी। छोटे-छोटे सफेद बाल, चेहरे और शरीर पर झुर्र...

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MY FRIEND'S SECRET By YK.

MY FRIEND’S SECRET :- YashVardhan. Zoya एक software engineer है । वो एक software बनाने का सोच रही थी। एक एसा software जो android phone मे install करने से जब भी phone की battery 30...

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सरकारी भावना By GOVT SR SEC SCHOOL MAHAROLI

वह अक्सर अपने कॉलेज जाते टाइम अपने मोटर साइकिल को मुख्या सड़क से ही ले जाता था. रास्ते में उसका स्कूटर अचानक अपने आप ही रुक जाता था. सड़क क उस पार बने हुए उन टेंट्स को देखकर उसका...

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लोरिया मैम By Surendra Tandon

अंग्रेज़ों ने एशिआई देशों में अपने धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए धर्म स्थलों का निर्माण, चंदे की रसीदों,डिब्बों, दान पात्रों एवं नजूल की मुफ़्त ज़मीनों पर कब्ज़ा करने जैसे कार्यों से ख़ु...

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लॉकडाउन By Siraj Ansari

आज इंटों के मकान में कैद हुआ तो ख्याल आया,क्यों चहकना भूल जाते हैं परिंदे पिंजरे की कैद में!!दोस्तों! आज कोरोना महामारी के तहत मुल्क के यह हालात हैं कि हम सब लोग अपने ही घरों में क...

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क्षम (लघुकथा) By Kishanlal Sharma

"मै तहेदिल से आपसे माफी मॉगता हूं।ऐसा करते समय मैंने नही सोचा था।आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा को आघात लगेगा।आपके दिल पर कया गुजरेगी?""लेकिन तुमने ऐसी बेहूदी घिनौनी हरकत की ही कयो?" जूूल...

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मानव धर्म By Seema Jain

अचानक इंसान महसूस करता है जीवन कितना छोटा है और हमेशा जैसा कुछ नहीं है ।सब कुछ मन मुताबिक घट रहा था, कोई कमी नहीं थी तो नीतू को गुमान हो गया अपनी योग्यता से कुछ भी हासिल किया जा स...

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एक और किस्सा निर्भया नहीं और दिखता By Deepti Khanna

भाभी 10:00 बज रहे हैं होली के दिन है क्या मुझे कोई घर छोड़ देगा l दीप्ति " भैया को आने दे"काजल " भाभी आप छोड़ आओ ""होली का महोत्सव हो रहा है हमारी गली में l आपक...

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भूख By praveen singh

अमित चाय की दुकान पर बैठा हुआ था| उसकी नजर चाय की दुकान पर चाय की दुकान पर चाय बनाने वाली लड़की रेनू पर था| साहब,चाय लाऊ क्या? रेनू ने अमित के पास जाकर पूछा| हाँ ले आओ और एक सिगरेट...

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कौआ मुँडेर पर By श्रुत कीर्ति अग्रवाल

कौआ मुँडेर पर लेखिका : श्रुत कीर्ति अग्रवाल मुँडेर पर कौआ काँए-काँए किये जा रहा था। मन अनसा गया उनका... चुप हो जा नासपीटे, अब नहीं अच्छा लगता किसी का आना-जाना। आज कल तो वो अपनी जिं...

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पछतावा - (लघु कहानी) By Manoj kumar shukla

पछतावा (लघु कथा) मनोज कुमार शुक्ल " मनोज " किचन के हर बर्तनों की अपनी एक प्रकृति होती है और उनका कठोर व नाजुक स्वभाव होता है। जैसे लोहे की कड़ाहीे, तवा, स्टील की गंजियाँ,...

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बड़ा स्कूल By Chandresh Kumar Chhatlani

चतुर्वेदी जी का बेटा साढ़े तीन वर्ष का हो गया था, उसका अच्छे स्कूल में एडमिशन कराना था। चतुर्वेदी जी अपने बेटे को सुसंस्कारित, बड़ों का सम्मान करने वाला, अनुशासित, विनम्र, शिक्षित,...

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पिंजरा By Sneh Goswami

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मेरी दस चुनिंदा लघुकथाएं By Krishna manu

#लोकतंत्र बूढ़ा सोमर बड़ी कठिनाई से अपनी झोपड़ी के देहरी तक आ सका। एक मिनट की भी देर होने पर वह रास्ते में ही बेहोश हो सकता था। बाबू साहब के खेतों में कभी दिन-दिन भर काम करने वाले...

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भूख By praveen singh

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कौआ मुँडेर पर By श्रुत कीर्ति अग्रवाल

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पछतावा - (लघु कहानी) By Manoj kumar shukla

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बड़ा स्कूल By Chandresh Kumar Chhatlani

चतुर्वेदी जी का बेटा साढ़े तीन वर्ष का हो गया था, उसका अच्छे स्कूल में एडमिशन कराना था। चतुर्वेदी जी अपने बेटे को सुसंस्कारित, बड़ों का सम्मान करने वाला, अनुशासित, विनम्र, शिक्षित,...

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