लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • बिछुड़ा प्यार

    एक ऐसी कहानी है जिसमे लोग अपने झूठे अहम के लिए अपने ही बच्चों की खुशिओं का बलिद...

  • जुहू बीच

    लोग देख रहे थे कि मैं भगवान की मूर्ति के साथ छेड़-छाड़ कर रहा हूँ. मगर किसी ने मुझ...

  • सन चौरासी देखा न गया

    सन चौरासी के दंगो का यह मंजर भुलाए नहीं भूलता जिसने इंसानियत की सभी हदें पार कर...

अलिफ़ लैला - 24 By MB (Official)

सिंदबाद ने कहा कि मेरी विचित्र दशा थी। चाहे जितनी मुसीबत पड़े मैं कुछ दिनों के आनंद के बाद उसे भूल जाता था और नई यात्रा के लिए मेरे तलवे खुजाने लगते थे। इस बार भी यही हुआ। इस बार म...

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बेताल पच्चीसी - 8 By Somadeva

अंग देश के एक गाँव मे एक धनी ब्राह्मण रहता था। उसके तीन पुत्र थे। एक बार ब्राह्मण ने एक यज्ञ करना चाहा। उसके लिए एक कछुए की जरूरत हुई। उसने तीनों भाइयों को कछुआ लाने को कहा। वे तीन...

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गुनहगार By Pradeep Mishra

Police waalon aur Netaaon ke prati janta janaardan mein humesha se ghor asantosh ka bhaav raha hai Par ek bachhe k jeevan mein inke aatmiya vyavhaar ne jo prabhaav daala wahi is...

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भंवर By Ashish Kumar Trivedi

वासना लालच ईर्ष्या और क्रोध के भंवर में फँसी तीन जिंदगियां तबाह हो गईं। रोबिन अस्पताल में कोमा में पड़ा था और सोनिया जेल की सलाखों के पीछे। लालच का भंवर सबको लील जाता है। लालच बुरी...

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बिछुड़ा प्यार By Ved Prakash Tyagi

एक ऐसी कहानी है जिसमे लोग अपने झूठे अहम के लिए अपने ही बच्चों की खुशिओं का बलिदान कर देते हैं यहाँ तक कि अपने बच्चों का भी बलिदान करने से नहीं हिचकिचाते।

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जुहू बीच By Qais Jaunpuri

लोग देख रहे थे कि मैं भगवान की मूर्ति के साथ छेड़-छाड़ कर रहा हूँ. मगर किसी ने मुझसे कुछ कहा नहीं. मूर्ति पूरी रेत से सनी हुई थी. मैंने अगली लहर में मूर्ति को धोने के इरादे से पानी म...

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उड़नखटोला By Ashish Kumar Trivedi

चंदा और कई बच्चे साईकिल से रेस लगा रहे हैं। चंदा उन सबसे आगे है। वह तेज़ी से साईकिल चलाती हुई स्कूल जा रही है। वह बहुत खुश है।

यह कोई सपना नहीं सच है। मिसेज़ मालिक के स्टोररूम में...

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सन चौरासी देखा न गया By Ved Prakash Tyagi

सन चौरासी के दंगो का यह मंजर भुलाए नहीं भूलता जिसने इंसानियत की सभी हदें पार कर दी थी। आज भी याद आता है तो रूह काँप जाती है। आप पढ़ेंगे तो आपको भी ऐसा ही एहसास होगा।

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डॉलफिनें By Vinita Shukla

कुंठा में डूबी प्रौढ़ स्त्री, दूसरी स्त्रियों को शिकार की तरह देखती है. उन्हें अपनी मीठी मीठी बातों में फंसाकर , वह उनका फायदा उठाना चाहती है. उसके इस मनोविकार का कारण क्या है- जा...

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एक चिता अचानक By sushil yadav

वो किस्से-कहानी मिलाकर, हम लोगों को बताता कि, कैसे पिछली रात उस नुक्कड़ पर भूत- प्रेत से पाला पड गया था बमुश्किल जान बचा कर भागा एक लेम्प का कांच तभी टूट पड़ी प्रमाण में वो टूटा...

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अतिथि देवो भव By vineet kumar srivastava

रिश्तों को अपनी सीमा में रहकर प्रेम और अपनेपन से निभाया जाए तो रिश्तो में शहद सी मिठास घुल जाती है अन्यथा वही रिश्ते नीम से कड़ुए प्रतीत होते हैं अक्सर हम बड़े लोग भी बचकानी हरकतें...

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होली बाद नमाज़ By Qais Jaunpuri

तभी भीड़ में से एक सवाल और हुआ, “ये रंग आपको जहन्नुम में ले जाएँगे.” अब अहद को गुस्सा आने लगा, क्योंकि उससे सवाल करने वाले जाहिल लोग थे, जिन्हें ख़ुद जन्नत और जहन्नुम के बारे में ठीक...

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पंडीत जी By Pradeep Mishra

Samaaj me vyaapt andhvishvaas, dharma ke naam par dikhaawa va masoom gareeb insaano ke shoshan ko kendra banakar likhi gayi is kahani mein Pandit Ji pag-pag par Ramu ka shoshan kar...

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डायरी By Ashish Kumar Trivedi

अब तक जिस व्यक्ति को मैंने सिर्फ तस्वीर में देखा था उसका सम्पूर्ण व्यक्तित्व इस डायरी के माध्यम से मेरी आँखों के सामने था। उनसे मेरा रक्त सम्बन्ध तो था ही लेकिन आज उनके विचारों और...

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रिश्तों का रेगिस्तान By Ved Prakash Tyagi

रिश्तों का रेगिस्तान उस इंसान की कहानी है जो अपनी मेहनत के बल पर अपनी ज़िंदगी और संपत्ति अर्जित करता है लेकिन उसकी अपनी ही औलाद उसके विरुद्ध हो जाती है जब वो गरीब बच्चों के लिए एक...

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जनपथ का दर्द By Ved Prakash Tyagi

स्व रोजगार करके अपनी रोजी कमाकर रोटी खाने वाले लोगों के सामने नगर निगम और पुलिस किस तरह अडचने पैदा करते हैं जिसका नगर निगम या पुलिस को तो कोई लाभ नहीं है लेकिन गरीब का भारी नुकसान...

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एक टुकड़ा आसमान By Ashish Kumar Trivedi

समीर मारिया को जाते हुए देख रहा था। उसने अपने जज़्बातों को काबू करने की कोशिश की किंतु फिर भी आँखें छलक पड़ीं। उसने आसमान की तरफ देखा। आसमान में तारे टिमटिमा रहे थे। भले ही उसका प्या...

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पूर्वाग्रह By Vinita Shukla

विवाह के बाद, पत्नी सुजाता के प्रति देवेन का पूर्वाग्रह, उन दोनों का मन मिलने नहीं देता. आगे क्या होता है ....क्या देवेन अपने पूर्वाग्रह से निकल पाटा है, पढ़िये इस कहानी में.

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हट जा रे खड़ूस! By Qais Jaunpuri

पाँच रुपए उसने अपनी सलवार के नेफ़े में ठूँस लिए और तसल्ली से अपनी कमीज़ नीचे सरका दी, ऐसे, जैसे उसने वो पाँच का सिक्का ज़मीन में गाड़ दिया है और अब किसी की नज़र उसपे पड़ने वाली नहीं.

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शारदा माँ By Ved Prakash Tyagi

वास्तव में शारदा माँ सरस्वती का ही एक स्वरूप थी, निडर साहसी एवं आत्मविश्वास से परिपूर्ण अपने जीवन के हर क्षेत्र में सफल रही यहाँ तक कि अपने आखिरी समय में भी वे यही कह रही थी कि मुझ...

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केंद्र बिंदु By Ashish Kumar Trivedi

अपने पापा का दर्द आरव समझ गया। कुछ रुक कर बोला पापा बचपन में आप मुझे ज्योमेट्री पढ़ाते थे। आपने मुझे सर्कल के बारे में बताया था। उसकी परिधि का हर बिंदु समान रूप से केंद्र से जुड़ा...

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बदलते रंग By Vinita Shukla

स्त्री और पुरुष के चरित्र को लेकर, समाज के दोहरे मानदंडों पर प्रश्न उठाती हुई कहानी. समाज से मिली कुंठा में डूबी हुई नायिका, अपनी मनोग्रंथि से कैसे उबर पाती है- इस कहानी में यही द...

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कागज़ की कश़्ती By Ashish Kumar Trivedi

जब बड़ा हुआ तब स्त्री होने की वेदना समझ में आई कि एक लड़की तो अपने मन को बड़ा कर माँ की भूमिका निभा सकती है लेकिन यह समाज उसकी एक भूल को उदारता से सह नही सकता. उसके प्रायश्चित में...

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दायरे By Vinita Shukla

विवाह के बाद, पति के जान- पहचान के लोगों के साथ समायोजन करती नायिका. पति के परिचितों के साथ एडजेस्ट करने में, उसे खासी दिक्कत का सामना करना पड़ता है.

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काम की धुन By Ved Prakash Tyagi

कैसे एक व्यक्ति अपने काम मे इतना मशगूल हो गया कि यह भी भूल गया कि उसकी पत्नी अस्पताल केन प्रांगण मे उसका शाम तक इंतज़ार करती रही और वह उसको वहीं भूल कर घर पहुँच गया।

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अगर तुम ना होते By Ashish Kumar Trivedi

यह कहानी पति पत्नी के रिश्ते के लिए आवश्यक आपसी विश्वास को दिखाती है। बिना आपसी विश्वास के यह रिश्ता खोखला है। आपसी विश्वास ही इसकी नींव है। यही प्रेम का आधार भी है।

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रक्तबीज By Vinita Shukla

बचपन से ही माँ को खो चुका किशोर, उसके बारे में उल्टी- पुलटी बातें सुनता रहता है जिसके चलते, उसे अपनी माँ से ही घृणा हो जाती है लेकिन एक दिन उसे अपनी सोच को बदलना पड़ता है. जानिये...

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गन्दा ख़ून By Qais Jaunpuri

वसीम ग़ुस्से में सामने पड़ी शराब की बोतल को काफ़ी देर से घूर रहा है. उसका जी चाह रहा है कि शराब की बोतल को दाँतों से कूच के थूक दे और फिर शीशे के टुकड़ों को अपने पैरों तले कुचल के मिट्...

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मन के मोती - 11 By Ashish Kumar Trivedi

यह मेरी कहानियों का संग्रह है यह सभी कहानियां जीवन के विभिन्न मनोभावों को दिखाती हैं. जीवन के उतार चढ़ाव में डटे रहने वा उम्मीद न छोड़ने की प्रेरणा देती हैं।

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जीने की वो कशमकश By Vinita Shukla

पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान बना चुका नायक, एक ऐसी परिस्थिति से गुजरता है, जब उसे अपने अतीत की अप्रिय यादों से बारम्बार गुजरना पड़ता है. ऐसा क्या होता है उसके साथ

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देसी घी का खाली कनस्तर By Ved Prakash Tyagi

गाँव की एक अनपढ़ बुढ़िया ने एक दुकानदार को ऐसा उल्लू बनाया जो उसको ज़िंदगी भर के लिए याद रहेगा कि उसका पाला भी किसी सवा सेर से पड़ा था। अभी तक तो अपने से ज्यादा होशियार किसी को नहीं स...

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सच से मुठभेड़ By Vinita Shukla

सोशल मीडिया के आकर्षण में जकड़ी नायिका, अंतर्जाल के जाल में फंस कर रह जाती है और आभासी दुनियां का जादू उसके सर पर चढ़कर बोलने लगता है. क्या कभी वह इस जाल से निकल पाएगी

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राजपूत कैदी By Munshi Premchand

धर्म सिंह नामी राजपूत राजपूताना की सेना में एक अफसर था। एक दिन माता की पत्री आई कि मैं बूढ़ी होती जाती हूँ, मरने से पहले एक बार तुम्हें देखने की अभिलाषा है, यहाँ आकर मुझे विदा कर आ...

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अलिफ़ लैला - 24 By MB (Official)

सिंदबाद ने कहा कि मेरी विचित्र दशा थी। चाहे जितनी मुसीबत पड़े मैं कुछ दिनों के आनंद के बाद उसे भूल जाता था और नई यात्रा के लिए मेरे तलवे खुजाने लगते थे। इस बार भी यही हुआ। इस बार म...

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बेताल पच्चीसी - 8 By Somadeva

अंग देश के एक गाँव मे एक धनी ब्राह्मण रहता था। उसके तीन पुत्र थे। एक बार ब्राह्मण ने एक यज्ञ करना चाहा। उसके लिए एक कछुए की जरूरत हुई। उसने तीनों भाइयों को कछुआ लाने को कहा। वे तीन...

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गुनहगार By Pradeep Mishra

Police waalon aur Netaaon ke prati janta janaardan mein humesha se ghor asantosh ka bhaav raha hai Par ek bachhe k jeevan mein inke aatmiya vyavhaar ne jo prabhaav daala wahi is...

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भंवर By Ashish Kumar Trivedi

वासना लालच ईर्ष्या और क्रोध के भंवर में फँसी तीन जिंदगियां तबाह हो गईं। रोबिन अस्पताल में कोमा में पड़ा था और सोनिया जेल की सलाखों के पीछे। लालच का भंवर सबको लील जाता है। लालच बुरी...

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बिछुड़ा प्यार By Ved Prakash Tyagi

एक ऐसी कहानी है जिसमे लोग अपने झूठे अहम के लिए अपने ही बच्चों की खुशिओं का बलिदान कर देते हैं यहाँ तक कि अपने बच्चों का भी बलिदान करने से नहीं हिचकिचाते।

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जुहू बीच By Qais Jaunpuri

लोग देख रहे थे कि मैं भगवान की मूर्ति के साथ छेड़-छाड़ कर रहा हूँ. मगर किसी ने मुझसे कुछ कहा नहीं. मूर्ति पूरी रेत से सनी हुई थी. मैंने अगली लहर में मूर्ति को धोने के इरादे से पानी म...

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उड़नखटोला By Ashish Kumar Trivedi

चंदा और कई बच्चे साईकिल से रेस लगा रहे हैं। चंदा उन सबसे आगे है। वह तेज़ी से साईकिल चलाती हुई स्कूल जा रही है। वह बहुत खुश है।

यह कोई सपना नहीं सच है। मिसेज़ मालिक के स्टोररूम में...

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सन चौरासी देखा न गया By Ved Prakash Tyagi

सन चौरासी के दंगो का यह मंजर भुलाए नहीं भूलता जिसने इंसानियत की सभी हदें पार कर दी थी। आज भी याद आता है तो रूह काँप जाती है। आप पढ़ेंगे तो आपको भी ऐसा ही एहसास होगा।

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डॉलफिनें By Vinita Shukla

कुंठा में डूबी प्रौढ़ स्त्री, दूसरी स्त्रियों को शिकार की तरह देखती है. उन्हें अपनी मीठी मीठी बातों में फंसाकर , वह उनका फायदा उठाना चाहती है. उसके इस मनोविकार का कारण क्या है- जा...

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एक चिता अचानक By sushil yadav

वो किस्से-कहानी मिलाकर, हम लोगों को बताता कि, कैसे पिछली रात उस नुक्कड़ पर भूत- प्रेत से पाला पड गया था बमुश्किल जान बचा कर भागा एक लेम्प का कांच तभी टूट पड़ी प्रमाण में वो टूटा...

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अतिथि देवो भव By vineet kumar srivastava

रिश्तों को अपनी सीमा में रहकर प्रेम और अपनेपन से निभाया जाए तो रिश्तो में शहद सी मिठास घुल जाती है अन्यथा वही रिश्ते नीम से कड़ुए प्रतीत होते हैं अक्सर हम बड़े लोग भी बचकानी हरकतें...

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होली बाद नमाज़ By Qais Jaunpuri

तभी भीड़ में से एक सवाल और हुआ, “ये रंग आपको जहन्नुम में ले जाएँगे.” अब अहद को गुस्सा आने लगा, क्योंकि उससे सवाल करने वाले जाहिल लोग थे, जिन्हें ख़ुद जन्नत और जहन्नुम के बारे में ठीक...

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पंडीत जी By Pradeep Mishra

Samaaj me vyaapt andhvishvaas, dharma ke naam par dikhaawa va masoom gareeb insaano ke shoshan ko kendra banakar likhi gayi is kahani mein Pandit Ji pag-pag par Ramu ka shoshan kar...

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डायरी By Ashish Kumar Trivedi

अब तक जिस व्यक्ति को मैंने सिर्फ तस्वीर में देखा था उसका सम्पूर्ण व्यक्तित्व इस डायरी के माध्यम से मेरी आँखों के सामने था। उनसे मेरा रक्त सम्बन्ध तो था ही लेकिन आज उनके विचारों और...

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रिश्तों का रेगिस्तान By Ved Prakash Tyagi

रिश्तों का रेगिस्तान उस इंसान की कहानी है जो अपनी मेहनत के बल पर अपनी ज़िंदगी और संपत्ति अर्जित करता है लेकिन उसकी अपनी ही औलाद उसके विरुद्ध हो जाती है जब वो गरीब बच्चों के लिए एक...

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जनपथ का दर्द By Ved Prakash Tyagi

स्व रोजगार करके अपनी रोजी कमाकर रोटी खाने वाले लोगों के सामने नगर निगम और पुलिस किस तरह अडचने पैदा करते हैं जिसका नगर निगम या पुलिस को तो कोई लाभ नहीं है लेकिन गरीब का भारी नुकसान...

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एक टुकड़ा आसमान By Ashish Kumar Trivedi

समीर मारिया को जाते हुए देख रहा था। उसने अपने जज़्बातों को काबू करने की कोशिश की किंतु फिर भी आँखें छलक पड़ीं। उसने आसमान की तरफ देखा। आसमान में तारे टिमटिमा रहे थे। भले ही उसका प्या...

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पूर्वाग्रह By Vinita Shukla

विवाह के बाद, पत्नी सुजाता के प्रति देवेन का पूर्वाग्रह, उन दोनों का मन मिलने नहीं देता. आगे क्या होता है ....क्या देवेन अपने पूर्वाग्रह से निकल पाटा है, पढ़िये इस कहानी में.

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हट जा रे खड़ूस! By Qais Jaunpuri

पाँच रुपए उसने अपनी सलवार के नेफ़े में ठूँस लिए और तसल्ली से अपनी कमीज़ नीचे सरका दी, ऐसे, जैसे उसने वो पाँच का सिक्का ज़मीन में गाड़ दिया है और अब किसी की नज़र उसपे पड़ने वाली नहीं.

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शारदा माँ By Ved Prakash Tyagi

वास्तव में शारदा माँ सरस्वती का ही एक स्वरूप थी, निडर साहसी एवं आत्मविश्वास से परिपूर्ण अपने जीवन के हर क्षेत्र में सफल रही यहाँ तक कि अपने आखिरी समय में भी वे यही कह रही थी कि मुझ...

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केंद्र बिंदु By Ashish Kumar Trivedi

अपने पापा का दर्द आरव समझ गया। कुछ रुक कर बोला पापा बचपन में आप मुझे ज्योमेट्री पढ़ाते थे। आपने मुझे सर्कल के बारे में बताया था। उसकी परिधि का हर बिंदु समान रूप से केंद्र से जुड़ा...

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बदलते रंग By Vinita Shukla

स्त्री और पुरुष के चरित्र को लेकर, समाज के दोहरे मानदंडों पर प्रश्न उठाती हुई कहानी. समाज से मिली कुंठा में डूबी हुई नायिका, अपनी मनोग्रंथि से कैसे उबर पाती है- इस कहानी में यही द...

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कागज़ की कश़्ती By Ashish Kumar Trivedi

जब बड़ा हुआ तब स्त्री होने की वेदना समझ में आई कि एक लड़की तो अपने मन को बड़ा कर माँ की भूमिका निभा सकती है लेकिन यह समाज उसकी एक भूल को उदारता से सह नही सकता. उसके प्रायश्चित में...

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दायरे By Vinita Shukla

विवाह के बाद, पति के जान- पहचान के लोगों के साथ समायोजन करती नायिका. पति के परिचितों के साथ एडजेस्ट करने में, उसे खासी दिक्कत का सामना करना पड़ता है.

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काम की धुन By Ved Prakash Tyagi

कैसे एक व्यक्ति अपने काम मे इतना मशगूल हो गया कि यह भी भूल गया कि उसकी पत्नी अस्पताल केन प्रांगण मे उसका शाम तक इंतज़ार करती रही और वह उसको वहीं भूल कर घर पहुँच गया।

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अगर तुम ना होते By Ashish Kumar Trivedi

यह कहानी पति पत्नी के रिश्ते के लिए आवश्यक आपसी विश्वास को दिखाती है। बिना आपसी विश्वास के यह रिश्ता खोखला है। आपसी विश्वास ही इसकी नींव है। यही प्रेम का आधार भी है।

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रक्तबीज By Vinita Shukla

बचपन से ही माँ को खो चुका किशोर, उसके बारे में उल्टी- पुलटी बातें सुनता रहता है जिसके चलते, उसे अपनी माँ से ही घृणा हो जाती है लेकिन एक दिन उसे अपनी सोच को बदलना पड़ता है. जानिये...

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गन्दा ख़ून By Qais Jaunpuri

वसीम ग़ुस्से में सामने पड़ी शराब की बोतल को काफ़ी देर से घूर रहा है. उसका जी चाह रहा है कि शराब की बोतल को दाँतों से कूच के थूक दे और फिर शीशे के टुकड़ों को अपने पैरों तले कुचल के मिट्...

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मन के मोती - 11 By Ashish Kumar Trivedi

यह मेरी कहानियों का संग्रह है यह सभी कहानियां जीवन के विभिन्न मनोभावों को दिखाती हैं. जीवन के उतार चढ़ाव में डटे रहने वा उम्मीद न छोड़ने की प्रेरणा देती हैं।

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जीने की वो कशमकश By Vinita Shukla

पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान बना चुका नायक, एक ऐसी परिस्थिति से गुजरता है, जब उसे अपने अतीत की अप्रिय यादों से बारम्बार गुजरना पड़ता है. ऐसा क्या होता है उसके साथ

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देसी घी का खाली कनस्तर By Ved Prakash Tyagi

गाँव की एक अनपढ़ बुढ़िया ने एक दुकानदार को ऐसा उल्लू बनाया जो उसको ज़िंदगी भर के लिए याद रहेगा कि उसका पाला भी किसी सवा सेर से पड़ा था। अभी तक तो अपने से ज्यादा होशियार किसी को नहीं स...

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सच से मुठभेड़ By Vinita Shukla

सोशल मीडिया के आकर्षण में जकड़ी नायिका, अंतर्जाल के जाल में फंस कर रह जाती है और आभासी दुनियां का जादू उसके सर पर चढ़कर बोलने लगता है. क्या कभी वह इस जाल से निकल पाएगी

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राजपूत कैदी By Munshi Premchand

धर्म सिंह नामी राजपूत राजपूताना की सेना में एक अफसर था। एक दिन माता की पत्री आई कि मैं बूढ़ी होती जाती हूँ, मरने से पहले एक बार तुम्हें देखने की अभिलाषा है, यहाँ आकर मुझे विदा कर आ...

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