लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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पगला भगत By Ashish Kumar Trivedi

जो भोला कभी मंदिर की सीढ़ियां भी नही छू सका आज उसी की भस्म से उसके आराध्य का श्रंगार हो रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे स्वयं शिव आज उस पगले भगत का आलिंगन करने हेतु बाहें फैलाए खड़े हों...

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डायन By Pawnesh Dixit

समाज की दकियानूसी रूढ़िवादी सोच पर प्रहार किया गया है कैसे एक लड़की डायन होने का अभिशाप झेलती है उसका जीवन आधुनिक मानव समाज और सभ्यता के लिए
आज भी प्रश्नचिन्ह क्यूँ बना हुआ ह...

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बेताल पच्चीसी - 17 By Somadeva

चन्द्रशेखर नगर में रत्नदत्त नाम का एक सेठ रहता था। उसके एक लड़की थी। उसका नाम था उन्मादिनी। जब वह बड़ी हुई तो रत्नदत्त ने राजा के पास जाकर कहा कि आप चाहें तो उससे ब्याह कर लीजिए। र...

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शादी से पहले और शादी के बाद By Neetu Singh Renuka

यह कहानी है एक यात्रा की, जिसके दौरान दो स्त्रियां मिलती हैं और बस मिलकर बिछुड़ जाती हैं, मगर बातचीत के दौरान छोड़ जाती हैं मन में बस यही एक प्रश्न कि स्त्री ही क्यों

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मानसिकता - एक दृष्टिकोण By VIRENDER VEER MEHTA

हाँ मुझे ऐतराज है तुम्हारे इस आधुनिक पहनावे और गैरों से खुले व्यवहार पर! अजय की आवाज अपेक्षाकृत उंची थी।
लेकिन कभी मेरी यही खूबियाँ तुम्हे अच्छी भी लगती थी अजय, फिर अब ऐसा क्या...

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माँ का कंकाल - भाग दो By Ved Prakash Tyagi

बेटे की हर खुशी में खुश होने वाली माँ को क्या पता था कि एक दिन इस बेटे के कारण ही उसकी मौत का स्वरूप इतना भयंकर होगा और बेटे को माँ की जगह मिलेगा सिर्फ कंकाल।

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मित्रलाभ - 3 By MB (Official)

मगध देश में चंपकवती नामक एक महान अरण्य था, उसमें बहुत दिनों में मृग और कौवा बड़े स्नेह से रहते थे। किसी गीदड़ ने उस मृग को हट्ठा- कट्ठा और अपनी इच्छा से इधर- उधर घूमता हुआ देखा, इसको...

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अधूरी इच्छा By Ashish Kumar Trivedi

शिक्षिका बनने की अधूरी इच्छा थी जिसे उसने वर्षों पहले अपने मन में दबा लिया था. परंतु इतने सालों से यह इच्छा एक टीस बन कर दिल में छुपी थी.
जया नही चाहती थी कि प्रेरणा की इच्छा भी...

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छोटी उम्र का तमाचा By vineet kumar srivastava

पापा के उस मौन तमाचे का यह परिणाम हुआ कि मैं पढ़ाई में सदा अव्वल आती रही और आज एक आई.ए.एस.के पद पर प्रतिष्ठित हूँ अगर पापा ने सही समय पर सही एक्शन न लिया होता तो हो सकता था कि मैं...

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माँ का कंकाल By Ved Prakash Tyagi

बेटा जब तरक्की पर तरक्की करता जाए तो माँ-बाप की खुशी का ठिकाना नहीं रहता, लेकिन क्या बेटा समझ पाया उनकी भावनाओं को जानने के लिए पढे मेरी नई कहानी माँ का कंकाल पहला और दूसरा भाग

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जूनून By Ashish Kumar Trivedi

कुछ समय बाद निकिता आती दिखाई पड़ी. वह अपने आप में खोई चली आ रही थी. जैसे ही वह पास आई विनय उसके सामने आ गया. उसे अचानक सामने देख कर वह सहम गई. फिर खुद को काबू में कर चिल्लाई अभी त...

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रक्षा By Ashish Kumar Trivedi

सुनते ही कब्र मे लगा पत्थर उसकी आँखों के सामने नाचने लगा।
पॉल मैथ्यू
जन्म 18 अगस्त 1972
मृत्यु 25 जून 2016
नितिन कुदरत के इस कारनामे को समझने में असमर्थ था।

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आपातकाल और सुंदर - तृतीय भाग By Ved Prakash Tyagi

भ्रष्ट पुलिस प्रशासन और माफिया रूपी राजनेताओं की जुगलबंदी का मुक़ाबला सुंदर नहीं कर पाया और एक तानाशाही व्यवस्था की भेंट चढ़ गया लेकिन मरने से पहले लोगों में क्रांति की लौ जगा गया, ज...

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आपातकाल और सुंदर - दूसरा भाग By Ved Prakash Tyagi

आपातकाल में लोग तरह-तरह के अत्याचार सह रहे थे, युवा तानाशाह के नाम पर पूरा प्रशासन और पुलिस बल युवा नेता बने गुंडों के साथ मिल कर जनता में आतंक फैला रहे थे, तब एक आशा की किरण दिख...

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अलिफ़ लैला - 29 By MB (Official)

मंत्री जाफर ने कहा कि पहले जमाने में मिस्र देश में एक बड़ा प्रतापी और न्यायप्रिय बादशाह था। वह इतना शक्तिशाली था कि आस-पड़ोस के राजा उससे डरते थे। उसका मंत्री बड़ा शासन- कुशल, न्या...

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ज़ेहाद... By Rajesh Kumar Srivastav

जेहाद एक वतनपरस्त माँ की कहानी है जो अपने वतन के लिए अपने बेटे को, जो बाहरी बहकावे में आकर देश और अपने समाज के साथ गद्दारी पर उतर आया है, को कुर्बान कर देती है यह कहानी उन युवकों...

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विषधर By Ashish Kumar Trivedi

अधिकाधिक पाने की लालसा इंसान की बुद्धी भ्रष्ट कर देती है। लालच मे फंसे दंपत्ति की कथा। जो बहुत पाने के लालच मे सब गंवा बैठे। कहीं के नही रहे। लालच के विषधर ने डस लिया।

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बंजर By Ashish Kumar Trivedi

जब सुनीता के दिल में छाए ईर्ष्या के बादल छंटे और क्रोध की ज्वाला शांत हुई तब उसे एहसास हुआ कि वह क्या कर बैठी है। उसने अपने ही हांथों खुद को बाँझ बना दिया।

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साध्वी By Dharm

क्या होता है जब मोहब्बत को बेकार कहने वालों को खुद ही मोहब्बत हो जाती है. जो सारे जमाने के सामने इसे बेशर्मी और संस्कृति का हनन बोलते हैं उन्हें ही मोहब्बत हो जाती है. जो साध्वी प्...

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छोटू नहीं - घर का मुखिया By Ved Prakash Tyagi

जिन बच्चों को हम चाय की दुकान या ढाबे पर अक्सर छोटू कहकर पुकारते हैं वो वास्तव में अपने घर के मुखिया होते हैं। मेरी इस कहानी में एक बच्चे के बारे में बताया गया है कि कैसे वह छोटू...

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लोहमार्गी कथाएँ By Sachin Godbole

रेलगाडी ने बचपन से ही हम लोगों को आकर्षित किया है। रेल सिर्फ एक आवागमन का साधन मात्र ना रहकर एक संस्कृति बन गयी है और रेलवे स्टेशन इस संस्कृति का तीर्थ। रेल्वे स्टेशन पर एक अलग ही...

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रंगीन टी.वी. By Ashish Kumar Trivedi

बृजेश जैसे मौका देख रहा था। फ़ौरन बोला अरे इसके घर तो ब्लैक एंड वाइट टी.वी. भी नहीं है। ये क्या खरीदेगा। यह कह कर वह ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा। और कई स्वर भी उसके साथ जुड़ गए। गग...

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ज़िंदा है मन्टो By SHABD MASIHA

This is short story book. Part-1 already available in market for sale. Part-II is under print. The Short Stories describes about the system, society, religion , cast ism, corrupti...

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भिखारिन अम्मा By Dharm

हम जिसको किसी लायक नहीं समझते कभी वो हमारे बहुत काम आ जाता है. इस कहानी में एक भिखारिन बुढ़िया इसी तरह बलवीर के काम आयी. वलबीर ने कभी सोचा भी न था कि एक भिखारिन उनकी इतनी बड़ी मदद कर...

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झूठी औरत By Qais Jaunpuri

उसने उस औरत की हालत देखी और अब वो उसके गाने के बोल का मतलब निकालने लगा. अब औरत गाये जा रही है और वो उसके एक–एक लफ़्ज़ का मतलब निकाल रहा है. महलों की रानी... इसी पे वो बार-बार अटक जा...

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जाको राखे रब By Ved Prakash Tyagi

कई बार मृत्यु जब किसी को खींच कर ले जा रही हो, उसे अफ्नो के प्रयास और रब की मर्जी उसको जीवनदान देने के लिए पर्याप्त हैं। इसीलिए कहते हैं जाको राखे रब, बचा लेते हैं सब

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नन्हकू By Ashish Kumar Trivedi

अँधेरा बढ़ गया था और ताई दिन भर की भूखी प्यासी वहीँ पर बैठी थीं। तभी उन्हें लगा जैसे की गेट पर कोई है। कहीं वही तो नहीं। ताई ने लपक कर बिजली जलाई। उनका नन्हकू ही था। बूढ़े शारीर में...

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मिट्टी के मन By Dharm

मोहन और सुमन, जो अनजाने में एकदूसरे से प्रेम कर बैठे. न सुमन को पता चला और न मोहन को. लेकिन ये सब इतना आसान नहीं था. उनकी की एक प्रेम कहानी. जिसमें वही सब है जो हमारे आसपास होता है...

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बेटियों के लिए By Ved Prakash Tyagi

डौटेर्स वीक के उपलक्ष में सभी बेटियों को समर्पित है ये कहानी जो एक बेटी के त्याग, तपस्या और समझदारी की मिसाल है, उसका आदर्श जीवन सभी के लिए एक प्रेरणा है

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लोहमार्गी कथाएँ By Sachin Godbole

रेलगाडी ने बचपन से ही हम लोगों को आकर्षित किया है। रेल सिर्फ एक आवागमन का साधन मात्र ना रहकर एक संस्कृति बन गयी है और रेलवे स्टेशन इस संस्कृति का तीर्थ। रेल्वे स्टेशन पर एक अलग ही...

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मुखाग्नि By Ashish Kumar Trivedi

समाज की रूढ़ियों को तोड़ती एक लड़की की कहानी जिसने सबको अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा लिया था। किंतु बेटे की चाह रखने वाली माँ ने सदैव उसका तिरस्कार किया।

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कसर By Ayushi

ज़िन्दगी की उलझनों में तमाम जद्दोजहद के बाद भी कुछ ना कुछ रह जाता है। ऐसी ही कहानी है नीलिमा, अजय और रोहन की। अब क्या कसर रही ये तो पढ़कर ही मालूम होगा। आशा करती हूँ आप सबको पसन्द आए...

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‘वैसी’ लड़की By Qais Jaunpuri

कामिनी ने उसे जिस दलदल में फँसाया था, नीतू को उसमें मज़ा आ रहा था. बड़े शहर की चकाचौंध में उसे असलियत दिखायी नहीं दे रही थी. कभी-कभी उसका मन, उसे ये सब करने को रोकता भी था, लेकिन उसन...

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जाली नोट By Ved Prakash Tyagi

एक ऐसे युवक की कहानी है जो अधिक महत्वाकांक्षी होने के कारण नकली नोट बनाने वालों के चक्कर मे पड़ जाता है, लेकिन किस्मत उसका साथ देती है किसी की सहायता से अपराधी पकड़े जाते हैं, उसक...

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सौर By Ashish Kumar Trivedi

घर से निकल कर दिनेश यूँ ही सड़क पर चलने लगा। उसकी आमदनी की सौर इतनी छोटी थी की पाँव सिकोड़ते सिकोड़ते घुटने दुखने लगे थे। उसके मन के भीतर बहुत कुछ चल रहा था। क्या ज़िन्दगी है दिन भर...

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पगला भगत By Ashish Kumar Trivedi

जो भोला कभी मंदिर की सीढ़ियां भी नही छू सका आज उसी की भस्म से उसके आराध्य का श्रंगार हो रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे स्वयं शिव आज उस पगले भगत का आलिंगन करने हेतु बाहें फैलाए खड़े हों...

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बेताल पच्चीसी - 17 By Somadeva

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मगध देश में चंपकवती नामक एक महान अरण्य था, उसमें बहुत दिनों में मृग और कौवा बड़े स्नेह से रहते थे। किसी गीदड़ ने उस मृग को हट्ठा- कट्ठा और अपनी इच्छा से इधर- उधर घूमता हुआ देखा, इसको...

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अधूरी इच्छा By Ashish Kumar Trivedi

शिक्षिका बनने की अधूरी इच्छा थी जिसे उसने वर्षों पहले अपने मन में दबा लिया था. परंतु इतने सालों से यह इच्छा एक टीस बन कर दिल में छुपी थी.
जया नही चाहती थी कि प्रेरणा की इच्छा भी...

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छोटी उम्र का तमाचा By vineet kumar srivastava

पापा के उस मौन तमाचे का यह परिणाम हुआ कि मैं पढ़ाई में सदा अव्वल आती रही और आज एक आई.ए.एस.के पद पर प्रतिष्ठित हूँ अगर पापा ने सही समय पर सही एक्शन न लिया होता तो हो सकता था कि मैं...

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माँ का कंकाल By Ved Prakash Tyagi

बेटा जब तरक्की पर तरक्की करता जाए तो माँ-बाप की खुशी का ठिकाना नहीं रहता, लेकिन क्या बेटा समझ पाया उनकी भावनाओं को जानने के लिए पढे मेरी नई कहानी माँ का कंकाल पहला और दूसरा भाग

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जूनून By Ashish Kumar Trivedi

कुछ समय बाद निकिता आती दिखाई पड़ी. वह अपने आप में खोई चली आ रही थी. जैसे ही वह पास आई विनय उसके सामने आ गया. उसे अचानक सामने देख कर वह सहम गई. फिर खुद को काबू में कर चिल्लाई अभी त...

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रक्षा By Ashish Kumar Trivedi

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आपातकाल में लोग तरह-तरह के अत्याचार सह रहे थे, युवा तानाशाह के नाम पर पूरा प्रशासन और पुलिस बल युवा नेता बने गुंडों के साथ मिल कर जनता में आतंक फैला रहे थे, तब एक आशा की किरण दिख...

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ज़ेहाद... By Rajesh Kumar Srivastav

जेहाद एक वतनपरस्त माँ की कहानी है जो अपने वतन के लिए अपने बेटे को, जो बाहरी बहकावे में आकर देश और अपने समाज के साथ गद्दारी पर उतर आया है, को कुर्बान कर देती है यह कहानी उन युवकों...

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विषधर By Ashish Kumar Trivedi

अधिकाधिक पाने की लालसा इंसान की बुद्धी भ्रष्ट कर देती है। लालच मे फंसे दंपत्ति की कथा। जो बहुत पाने के लालच मे सब गंवा बैठे। कहीं के नही रहे। लालच के विषधर ने डस लिया।

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बंजर By Ashish Kumar Trivedi

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साध्वी By Dharm

क्या होता है जब मोहब्बत को बेकार कहने वालों को खुद ही मोहब्बत हो जाती है. जो सारे जमाने के सामने इसे बेशर्मी और संस्कृति का हनन बोलते हैं उन्हें ही मोहब्बत हो जाती है. जो साध्वी प्...

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जिन बच्चों को हम चाय की दुकान या ढाबे पर अक्सर छोटू कहकर पुकारते हैं वो वास्तव में अपने घर के मुखिया होते हैं। मेरी इस कहानी में एक बच्चे के बारे में बताया गया है कि कैसे वह छोटू...

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लोहमार्गी कथाएँ By Sachin Godbole

रेलगाडी ने बचपन से ही हम लोगों को आकर्षित किया है। रेल सिर्फ एक आवागमन का साधन मात्र ना रहकर एक संस्कृति बन गयी है और रेलवे स्टेशन इस संस्कृति का तीर्थ। रेल्वे स्टेशन पर एक अलग ही...

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बृजेश जैसे मौका देख रहा था। फ़ौरन बोला अरे इसके घर तो ब्लैक एंड वाइट टी.वी. भी नहीं है। ये क्या खरीदेगा। यह कह कर वह ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा। और कई स्वर भी उसके साथ जुड़ गए। गग...

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नन्हकू By Ashish Kumar Trivedi

अँधेरा बढ़ गया था और ताई दिन भर की भूखी प्यासी वहीँ पर बैठी थीं। तभी उन्हें लगा जैसे की गेट पर कोई है। कहीं वही तो नहीं। ताई ने लपक कर बिजली जलाई। उनका नन्हकू ही था। बूढ़े शारीर में...

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मिट्टी के मन By Dharm

मोहन और सुमन, जो अनजाने में एकदूसरे से प्रेम कर बैठे. न सुमन को पता चला और न मोहन को. लेकिन ये सब इतना आसान नहीं था. उनकी की एक प्रेम कहानी. जिसमें वही सब है जो हमारे आसपास होता है...

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कसर By Ayushi

ज़िन्दगी की उलझनों में तमाम जद्दोजहद के बाद भी कुछ ना कुछ रह जाता है। ऐसी ही कहानी है नीलिमा, अजय और रोहन की। अब क्या कसर रही ये तो पढ़कर ही मालूम होगा। आशा करती हूँ आप सबको पसन्द आए...

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कामिनी ने उसे जिस दलदल में फँसाया था, नीतू को उसमें मज़ा आ रहा था. बड़े शहर की चकाचौंध में उसे असलियत दिखायी नहीं दे रही थी. कभी-कभी उसका मन, उसे ये सब करने को रोकता भी था, लेकिन उसन...

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सौर By Ashish Kumar Trivedi

घर से निकल कर दिनेश यूँ ही सड़क पर चलने लगा। उसकी आमदनी की सौर इतनी छोटी थी की पाँव सिकोड़ते सिकोड़ते घुटने दुखने लगे थे। उसके मन के भीतर बहुत कुछ चल रहा था। क्या ज़िन्दगी है दिन भर...

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