लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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ख़ुशबू-दार तेल By Saadat Hasan Manto

“आप का मिज़ाज अब कैसा है?”

“ये तुम क्यों पूछ रही हो अच्छा भला हूँ मुझे क्या तकलीफ़ थी ”

“तकलीफ़ तो आप को कभी नहीं हुई एक फ़क़त मैं हूँ जिस के साथ कोई न कोई तकलीफ़ या आरिज़ा च...

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हलाला के बाद By Ved Prakash Tyagi

अनवर अब मन मसोस कर रह गया, अपने क्षणिक गुस्से पर पछताने लगा, क्यों आखिर क्यों मैंने बिना सोचे समझे सायरा को तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया था, मैंने तो सोचा था कि हलाला के बाद सायर...

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शीरीन By Ashish Kumar Trivedi

इकबाल तुमने मेरी खूबसूरत आवाज़ के आधार पर मेरे सुंदर चेहरे की कल्पना की थी। उसे ही मन में बसाए हुए इतने दिनों तक मुझसे बात करते रहे। तुम्हारी दोस्ती भी उसी काल्पनिक सुंदर चेहरे से...

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ख़ुवाब-ए-ख़रगोश By Saadat Hasan Manto

सुरय्या हंस रही थी। बे-तरह हंस रही थी। उस की नन्ही सी कमर इस के बाइस दुहरी होगई थी। उस की बड़ी बहन को बड़ा ग़ुस्सा आया। आगे बढ़ी तो सुरय्या पीछे हट गई। और कहा “जा मेरी बहन, बड़े ताक़...

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दाल बराबर By Neetu Singh Renuka

अगर मुर्गियों की ज़बान होती तो वो कैसे अपनी आत्मकथा बयान करती इस हास्य-व्यंग्य से भरी कहानी में एक मुर्गी अपनी आत्मकथा कह रही है जिसे कहीं-कहीं इंसानों पर भी लागू किया जा सकता है।

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वो बांझ ना थी By Ved Prakash Tyagi

मायरा मेरी पत्नी थी जिसे मैंने और मेरी माँ ने बांझ कहकर तलाक दे दिया था और घर से निकाल दिया था लेकिन इसका मतलब तो यह है कि मायरा बांझ नहीं थी शायद मेरे ही पुरुषत्व में ही कोई कमी थ...

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सोम अंकल By Ashish Kumar Trivedi

सोम को पुलिस के हवाले कर दिया गया। सामान्य होने पर अथर्व ने जो बताया उसे सुन कर नीरज और शोभा के होश उड़ गए। वह अपने आप को दोष दे रहे थे कि उन्होंने ऐसे व्यक्ति पर भरोसा कर अपना मास...

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मेरा जिम By Neetu Singh Renuka

यह कहानी एक हास्य-व्यंग्य है जो अपने ऊपर हँसना सीखाती है। आज-कल हम अपने ऊपर हँसना भूल गए हैं। अपने मोटापे पर यदि अपमानित महसूस करने की बजाए हँसना सीखें तो ज़िंदगी कितनी बेहतर हो जाए...

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अपनी देहरी By Ashish Kumar Trivedi

कुलदीप ने ने अपना सूटकेस गाड़ी से उतारा। कुछ समय इधर उधर देखते रहे। पर उन्हें लेने कोई नहीं पहुँचा था। उन्होंने अपने आने की सूचना तो दी थी। फोन पर बात हुई थी कि उनके चचेरे भाई का...

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सुविषा By Ved Prakash Tyagi

दुर्जन ने नीलम मैडम की शिकायत थाने में कर दी कि वह छोटी बच्ची से घर के भारी काम करवाती है। नीलम को जब इस बात का पता चला तो उसे बहुत दुख हुआ, तभी गणेश ने आकर नीलम को बताया कि मैडम आ...

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अतीत के पन्ने By Ashish Kumar Trivedi

मैं भीड़ में भी अकेलापन महसूस कर रहा था। मेरे अतीत के पन्ने मुझे उन दिनों की याद दिला रहे थे जब मम्मी मैं और रीमा मिलकर छोटी छोटी खुशियों का जश्न मनाते थे। आज बीते दिनों का संघर्ष...

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एक चिडियाघर ऐसा भी By Neetu Singh Renuka

कभी-कभी हमारे साथ कुछ अदभुत घटनाएं घट जाती हैं जैसे किसी दफ्तर का एक चिडियाघर में तब्दील हो जाना। ऐसे में ज़रा कल्पना किजीए कि आपके कौन से कर्मचारी किस जानवर में परिवर्तित होंगे

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प्रेमचंद की बेनमून लघु कहानियाँ By Munshi Premchand

प्रेमचंद की बेनमून लघु कहानियाँ

1. ईदगाह
2. नमक का दरोगा
3. पूस की रात
4. शतरंज के खिलाड़ी

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अम्मा By Amita Joshi

ammaa is a story of an old lady who works as a maid and has immense silent love for the family she works for and is a true picture of motherhood .She leaves a deep impression on t...

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घड़ी By Aachaarya Deepak Sikka

It is a short story which is written in Haasya Ras . It is a story about a dream of a boy. The dream is very interesting. The story is written in Hindi Language.

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सिद्धार्थ - सम्पूर्ण उपन्यास By Herman Hesse

सिद्धार्थ हरमन हेस द्वारा रचित उपन्यास है, जिसमें बुद्ध काल के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप के सिद्धार्थ नाम के एक लड़के की आध्यात्मिक यात्रा का वर्णन किया गया है।

यह पुस्तक हेस का न...

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यूनान की भव्य कथाएं By MB (Official)

यूनान की भव्य कथाएं

1. ईफीसस की नारी
2. ज़्यूस की प्रेम-कथाएँ
3. प्रमथ्यु का विद्रोह
4. गिलगमेश की महागाथा
5. जादुई किताब

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आखिरी झूठ By MB (Official)

आखिरी झूठ

1. अप्रैल की एक खूबसूरत सुबह बिल्कुल 2. सही लड़की को देखने के बाद
3. आखिरी झूठ
4. कानून के दरवाजे पर
5. दूसरे देश में
6. धनिया की साड़ी
7. प्रेम का अत्याचार...

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अखबार वाला लड़का By Ved Prakash Tyagi

अगले दिन शीना नीरज को सारी बात बताती है और मंदिर चलने के लिए कहती है। पुजारी शीना को हिन्दी से मुसलमान बनाने के लिए मना कर देता है, तब शीना की पुजारी से बहस हो जाती है।

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दूर की सोंच By Ashish Kumar Trivedi

ह्रदय नारायण कुछ देर सोंच कर बोले हो सकता है मेरा तर्क सुन कर तुम सोंचो कि यह पागल हो गए हैं। लेकिन मैंने यह केस मेरे तुम्हारे और हम जैसे उन सब लोगों के लिए लिया है जो धीरे धीरे ब...

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लुब्बू By Pawnesh Dixit

लुब्बू एक गिलहरी है जिसका रंग रूप आकर्षक है उसकी कहानी की तरह ,कैसे एक घटना से उसका रंग बदल जाता है इंसानों के सापेक्ष उसकी दुनिया कितनी बड़ी है ,उससे मिलने का एक छोटा सा वृत्तान...

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डुप्लीकेट साड़ी By Neetu Singh Renuka

यह कहानी वो साड़ी कहानी के आगे की कहानी है। कभी ऐसा भी हो जाता है कि बड़ी दिक्कतों से हासिल की अपनी मनपसंद चीज़ से हमें हमेशा-हमेशा के लिए घृणा हो जाए। कुछ ऐसा ही हुआ उस नीली साड़ी क...

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चम्बा बाली By Amita Joshi

its a short story about an old lady who is deeply attached to her belongings in a small box and has not shared the memories associated with them with anyone..will her only loving g...

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जल-समाधि By Arpan Kumar

युद्ध की विसंगतियों को चित्रित करती एक कहानी...युद्ध क्या है ! राष्ट्रवाद के उन्माद में शहादतें होती हैं, दुश्मन और दोस्त तय किए जाते हैं। कई दोस्त मिलकर कई दुश्मनों को मारते हैं।...

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एक अमूल्य हीरा- ओडोना By Sonia Gupta

एक ऐसे योद्धा की कहानी जो विश्वयुद्ध समाप्त होने के बाद भी अपने देश के लिए लड़ता रहा अंतिम पल तक जब तक उसको यकीन नहीं हुआ ! विश्वयुद्ध के बाद पनपती एक और गाथा

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दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह का इतिहास By Mahatma Gandhi

अफ्रीका संसार के बड़े से बड़े महाद्वीपों में से एक है। हिंदुस्तान भी एक महाद्वीप के जैसे देश माना जाता है। परंतु अफ्रीका के भू-भाग में से केवल क्षेत्रफल की दृष्टि से चार या पाँच हिंद...

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अभिमन्यु लड़ रहा है By Kavita Verma

रात का सन्नाटा अपने चरम पर था। गली भी दूधिया रोशनी में ऊँघ रही थी। अपने इलाके की लड़ाई लड़ते कुत्ते अब थक कर किसी ओटले की ओट में गुड़ीमुड़ी एक दूसरे से सटे एक दूसरे को गर्मी पहुँचाने क...

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अपना By Ashish Kumar Trivedi

उसी समय नाज़नीन का भाई बाहर आ गया। उसने उसे पहचाना नहीं या जानबूझ कर अनजान बना रहा अरे क्यों वापस कर रही हो। खुशी के मौके पर नाचना गाना तो इनका काम है। नाज़नीन को देख कर बोला तु...

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जिहादी या अपराधी By Ved Prakash Tyagi

एक खोजी पत्रकार ने जब इस घटना की तहक़ीक़ात की तो उस पत्रकार की खोज से सच्चाई तो पता चली लेकिन क्या हिंदुओं का खोया हुआ सम्मान इस घटना की सच्चाई जानने के बाद वापस मिल सकता था

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राजा दाहिर सेन By Neelima Kumar

The story of Raja Dahir Sen, King of Sindh, who was the first martyr in saving India from invaders. This story is not appearing anywhere either in Indian history nor in the history...

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शुभ घड़ी By Ashish Kumar Trivedi

शर्माजी बिना कुछ बोले भीतर चले गए. वैभव और गायत्री असमंजस में थे कि उनका निर्णय क्या होगा. कुछ देर बाद शर्माजी बाहर आए. उनके हाथ में पूजा की थाली थी. उन्होंने वैभव को तिलक लगाया और...

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भारत माँँ का वीर सपूत : आदित्य विक्रम पेठिया By Dr kavita Tyagi

1971 के भारत-पाक युद्ध जोकि एक सैन्य संघर्ष था में सक्रिय भूमिका निभाते हुए 5 दिसंबर 1971 को फ्लाइट लेफ्टिनेंट आदित्य विक्रम पेठिया पश्चिमी सेक्टर में लीडर के रूप में नियुक्त हुए...

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वो साड़ी By Neetu Singh Renuka

शॉपिंग की दीवानगी वैसे ही कोई ठिकाना नहीं होता। ऐसे में अगर कहीं सेल लगी हो तो सोचिए शॉपिंग के दीवानों को क्या हाल हो। उस पर भी सेल साड़ी की हो तो फिर क्या कहना

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चरित्रहीन - 2 By Deepak Shah

आज के इस दौर में हम इंसानी जज़्बातों का अपने निजी तौर पे जो तर्जुमा, जो अनुवाद करते हैं वो किस हद तक सही है ये सवाल मैं एक अरसे से खुद से पूछता रहा हूँ। आख़िर ये सवाल सबके सामने उठा...

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जज़्बा-ए-शहादत By Anita Lalit

एक गुप्तचर का जीवन इतना एकाकी और आत्मकेंद्रित होता है कि उसमें उसके अपने भी नहीं झाँक सकते! मोहनलाल के माता-पिता, यहाँ तक कि उसकी पत्नी को भी, उसके काम का पता नहीं था! यह भी पता नह...

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आहुती किसकी By Ved Prakash Tyagi

यह हमारा डर ही तो है जो हम हमेशा कहते रहते हैं हिन्दू मुस्लिम भाई भाई, जबकि सच यह है कि हम डर की वजह से मुस्लिमों को भाई बोलते हैं लेकिन आज तक कोई भी मुसलमान किसी हिन्दू को भाई नही...

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शूरवीर पृथ्वीराज चौहान By Amrita shukla

यह कहानी शूरवीर हिन्दू राजा पृथ्वीराज चौहान की है।अपने नाना के गोद लेने के बाद मात्र ग्यारह वर्ष की उप्र में वे अजमेर और दिल्ली के शासक बन कर कुशलता पूर्वक शासन संचालित किया।यह बात...

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आभासी रिश्ता By Ashish Kumar Trivedi

जीवन के अंतिम पड़ाव में किसी के साथ की सबसे अधिक ज़रूरत होती है। वर्तमान में जब बच्चे अपने कैरियर व जीवन में व्यस्त हो जाते हैं तब जीवनसाथी ही साथ देता है। लेकिन यदि जीवनसाथी भी ना...

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जो लौट के फिर न आए By Jahnavi Suman

वरुण ऑटो से बाहर निकला उसके दोनों हाथों में सामान था। मुकेश ने जल्दी से दौड़ कर वरुण का सामान अपने कंधे पर उठा लिया। पिता ख़ुशी से वहीं के वहीं खड़े रह गए। माँ बोली, अंदर आ सबसे पहले...

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चिनहट की लड़ाई और रेज़िडेंसी की घेराबंदी By Ashish Kumar Trivedi

सन 1856 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने अवध की रियासत पर कब्ज़ा कर उसके नवाब वाजिद अली शाह को गिरफ्तार कर कलकत्ता भेज दिया। अवध की प्रजा अंग्रेज़ों के इस फैसले से खुश नहीं थी। जनत...

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ख़ुशबू-दार तेल By Saadat Hasan Manto

“आप का मिज़ाज अब कैसा है?”

“ये तुम क्यों पूछ रही हो अच्छा भला हूँ मुझे क्या तकलीफ़ थी ”

“तकलीफ़ तो आप को कभी नहीं हुई एक फ़क़त मैं हूँ जिस के साथ कोई न कोई तकलीफ़ या आरिज़ा च...

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हलाला के बाद By Ved Prakash Tyagi

अनवर अब मन मसोस कर रह गया, अपने क्षणिक गुस्से पर पछताने लगा, क्यों आखिर क्यों मैंने बिना सोचे समझे सायरा को तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया था, मैंने तो सोचा था कि हलाला के बाद सायर...

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शीरीन By Ashish Kumar Trivedi

इकबाल तुमने मेरी खूबसूरत आवाज़ के आधार पर मेरे सुंदर चेहरे की कल्पना की थी। उसे ही मन में बसाए हुए इतने दिनों तक मुझसे बात करते रहे। तुम्हारी दोस्ती भी उसी काल्पनिक सुंदर चेहरे से...

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ख़ुवाब-ए-ख़रगोश By Saadat Hasan Manto

सुरय्या हंस रही थी। बे-तरह हंस रही थी। उस की नन्ही सी कमर इस के बाइस दुहरी होगई थी। उस की बड़ी बहन को बड़ा ग़ुस्सा आया। आगे बढ़ी तो सुरय्या पीछे हट गई। और कहा “जा मेरी बहन, बड़े ताक़...

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दाल बराबर By Neetu Singh Renuka

अगर मुर्गियों की ज़बान होती तो वो कैसे अपनी आत्मकथा बयान करती इस हास्य-व्यंग्य से भरी कहानी में एक मुर्गी अपनी आत्मकथा कह रही है जिसे कहीं-कहीं इंसानों पर भी लागू किया जा सकता है।

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वो बांझ ना थी By Ved Prakash Tyagi

मायरा मेरी पत्नी थी जिसे मैंने और मेरी माँ ने बांझ कहकर तलाक दे दिया था और घर से निकाल दिया था लेकिन इसका मतलब तो यह है कि मायरा बांझ नहीं थी शायद मेरे ही पुरुषत्व में ही कोई कमी थ...

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सोम अंकल By Ashish Kumar Trivedi

सोम को पुलिस के हवाले कर दिया गया। सामान्य होने पर अथर्व ने जो बताया उसे सुन कर नीरज और शोभा के होश उड़ गए। वह अपने आप को दोष दे रहे थे कि उन्होंने ऐसे व्यक्ति पर भरोसा कर अपना मास...

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मेरा जिम By Neetu Singh Renuka

यह कहानी एक हास्य-व्यंग्य है जो अपने ऊपर हँसना सीखाती है। आज-कल हम अपने ऊपर हँसना भूल गए हैं। अपने मोटापे पर यदि अपमानित महसूस करने की बजाए हँसना सीखें तो ज़िंदगी कितनी बेहतर हो जाए...

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अपनी देहरी By Ashish Kumar Trivedi

कुलदीप ने ने अपना सूटकेस गाड़ी से उतारा। कुछ समय इधर उधर देखते रहे। पर उन्हें लेने कोई नहीं पहुँचा था। उन्होंने अपने आने की सूचना तो दी थी। फोन पर बात हुई थी कि उनके चचेरे भाई का...

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सुविषा By Ved Prakash Tyagi

दुर्जन ने नीलम मैडम की शिकायत थाने में कर दी कि वह छोटी बच्ची से घर के भारी काम करवाती है। नीलम को जब इस बात का पता चला तो उसे बहुत दुख हुआ, तभी गणेश ने आकर नीलम को बताया कि मैडम आ...

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अतीत के पन्ने By Ashish Kumar Trivedi

मैं भीड़ में भी अकेलापन महसूस कर रहा था। मेरे अतीत के पन्ने मुझे उन दिनों की याद दिला रहे थे जब मम्मी मैं और रीमा मिलकर छोटी छोटी खुशियों का जश्न मनाते थे। आज बीते दिनों का संघर्ष...

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एक चिडियाघर ऐसा भी By Neetu Singh Renuka

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प्रेमचंद की बेनमून लघु कहानियाँ By Munshi Premchand

प्रेमचंद की बेनमून लघु कहानियाँ

1. ईदगाह
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3. पूस की रात
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अम्मा By Amita Joshi

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घड़ी By Aachaarya Deepak Sikka

It is a short story which is written in Haasya Ras . It is a story about a dream of a boy. The dream is very interesting. The story is written in Hindi Language.

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सिद्धार्थ - सम्पूर्ण उपन्यास By Herman Hesse

सिद्धार्थ हरमन हेस द्वारा रचित उपन्यास है, जिसमें बुद्ध काल के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप के सिद्धार्थ नाम के एक लड़के की आध्यात्मिक यात्रा का वर्णन किया गया है।

यह पुस्तक हेस का न...

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यूनान की भव्य कथाएं By MB (Official)

यूनान की भव्य कथाएं

1. ईफीसस की नारी
2. ज़्यूस की प्रेम-कथाएँ
3. प्रमथ्यु का विद्रोह
4. गिलगमेश की महागाथा
5. जादुई किताब

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आखिरी झूठ By MB (Official)

आखिरी झूठ

1. अप्रैल की एक खूबसूरत सुबह बिल्कुल 2. सही लड़की को देखने के बाद
3. आखिरी झूठ
4. कानून के दरवाजे पर
5. दूसरे देश में
6. धनिया की साड़ी
7. प्रेम का अत्याचार...

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अखबार वाला लड़का By Ved Prakash Tyagi

अगले दिन शीना नीरज को सारी बात बताती है और मंदिर चलने के लिए कहती है। पुजारी शीना को हिन्दी से मुसलमान बनाने के लिए मना कर देता है, तब शीना की पुजारी से बहस हो जाती है।

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दूर की सोंच By Ashish Kumar Trivedi

ह्रदय नारायण कुछ देर सोंच कर बोले हो सकता है मेरा तर्क सुन कर तुम सोंचो कि यह पागल हो गए हैं। लेकिन मैंने यह केस मेरे तुम्हारे और हम जैसे उन सब लोगों के लिए लिया है जो धीरे धीरे ब...

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लुब्बू By Pawnesh Dixit

लुब्बू एक गिलहरी है जिसका रंग रूप आकर्षक है उसकी कहानी की तरह ,कैसे एक घटना से उसका रंग बदल जाता है इंसानों के सापेक्ष उसकी दुनिया कितनी बड़ी है ,उससे मिलने का एक छोटा सा वृत्तान...

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डुप्लीकेट साड़ी By Neetu Singh Renuka

यह कहानी वो साड़ी कहानी के आगे की कहानी है। कभी ऐसा भी हो जाता है कि बड़ी दिक्कतों से हासिल की अपनी मनपसंद चीज़ से हमें हमेशा-हमेशा के लिए घृणा हो जाए। कुछ ऐसा ही हुआ उस नीली साड़ी क...

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जल-समाधि By Arpan Kumar

युद्ध की विसंगतियों को चित्रित करती एक कहानी...युद्ध क्या है ! राष्ट्रवाद के उन्माद में शहादतें होती हैं, दुश्मन और दोस्त तय किए जाते हैं। कई दोस्त मिलकर कई दुश्मनों को मारते हैं।...

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अफ्रीका संसार के बड़े से बड़े महाद्वीपों में से एक है। हिंदुस्तान भी एक महाद्वीप के जैसे देश माना जाता है। परंतु अफ्रीका के भू-भाग में से केवल क्षेत्रफल की दृष्टि से चार या पाँच हिंद...

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अपना By Ashish Kumar Trivedi

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एक खोजी पत्रकार ने जब इस घटना की तहक़ीक़ात की तो उस पत्रकार की खोज से सच्चाई तो पता चली लेकिन क्या हिंदुओं का खोया हुआ सम्मान इस घटना की सच्चाई जानने के बाद वापस मिल सकता था

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राजा दाहिर सेन By Neelima Kumar

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शुभ घड़ी By Ashish Kumar Trivedi

शर्माजी बिना कुछ बोले भीतर चले गए. वैभव और गायत्री असमंजस में थे कि उनका निर्णय क्या होगा. कुछ देर बाद शर्माजी बाहर आए. उनके हाथ में पूजा की थाली थी. उन्होंने वैभव को तिलक लगाया और...

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भारत माँँ का वीर सपूत : आदित्य विक्रम पेठिया By Dr kavita Tyagi

1971 के भारत-पाक युद्ध जोकि एक सैन्य संघर्ष था में सक्रिय भूमिका निभाते हुए 5 दिसंबर 1971 को फ्लाइट लेफ्टिनेंट आदित्य विक्रम पेठिया पश्चिमी सेक्टर में लीडर के रूप में नियुक्त हुए...

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वो साड़ी By Neetu Singh Renuka

शॉपिंग की दीवानगी वैसे ही कोई ठिकाना नहीं होता। ऐसे में अगर कहीं सेल लगी हो तो सोचिए शॉपिंग के दीवानों को क्या हाल हो। उस पर भी सेल साड़ी की हो तो फिर क्या कहना

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चरित्रहीन - 2 By Deepak Shah

आज के इस दौर में हम इंसानी जज़्बातों का अपने निजी तौर पे जो तर्जुमा, जो अनुवाद करते हैं वो किस हद तक सही है ये सवाल मैं एक अरसे से खुद से पूछता रहा हूँ। आख़िर ये सवाल सबके सामने उठा...

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जज़्बा-ए-शहादत By Anita Lalit

एक गुप्तचर का जीवन इतना एकाकी और आत्मकेंद्रित होता है कि उसमें उसके अपने भी नहीं झाँक सकते! मोहनलाल के माता-पिता, यहाँ तक कि उसकी पत्नी को भी, उसके काम का पता नहीं था! यह भी पता नह...

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आहुती किसकी By Ved Prakash Tyagi

यह हमारा डर ही तो है जो हम हमेशा कहते रहते हैं हिन्दू मुस्लिम भाई भाई, जबकि सच यह है कि हम डर की वजह से मुस्लिमों को भाई बोलते हैं लेकिन आज तक कोई भी मुसलमान किसी हिन्दू को भाई नही...

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शूरवीर पृथ्वीराज चौहान By Amrita shukla

यह कहानी शूरवीर हिन्दू राजा पृथ्वीराज चौहान की है।अपने नाना के गोद लेने के बाद मात्र ग्यारह वर्ष की उप्र में वे अजमेर और दिल्ली के शासक बन कर कुशलता पूर्वक शासन संचालित किया।यह बात...

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आभासी रिश्ता By Ashish Kumar Trivedi

जीवन के अंतिम पड़ाव में किसी के साथ की सबसे अधिक ज़रूरत होती है। वर्तमान में जब बच्चे अपने कैरियर व जीवन में व्यस्त हो जाते हैं तब जीवनसाथी ही साथ देता है। लेकिन यदि जीवनसाथी भी ना...

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जो लौट के फिर न आए By Jahnavi Suman

वरुण ऑटो से बाहर निकला उसके दोनों हाथों में सामान था। मुकेश ने जल्दी से दौड़ कर वरुण का सामान अपने कंधे पर उठा लिया। पिता ख़ुशी से वहीं के वहीं खड़े रह गए। माँ बोली, अंदर आ सबसे पहले...

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चिनहट की लड़ाई और रेज़िडेंसी की घेराबंदी By Ashish Kumar Trivedi

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