लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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नज़र अंदाज़ (लघुकथाएं) By Kishanlal Sharma

नजर अंदाज सरोज बाजा से लौटी तो घर जा दरवाजा बंद था।उसने दरवाजे पर दस्तक दी।माया ने दरवाजा खोला था केकिन काफी देर बाद।सरोज बेटी पर बड़बड़ाती हुई अंदर गई।अंदर दीपक मौजूद था।बेटी और दी...

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मिलन By रामानुज दरिया

आइये न प्लीज , अंदर आ जाइये आख़िर बाहर क्यों खड़े हैं, उसकी आँखें खुली और ओठ सिले हुए थे और नज़र सिर्फ़ उन अधरों पर थे जो बार - बार एक दूसरे से मिलते और बिछड़ जाते, उन अधरों को देख कर म...

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वर्जिनिटी का भूत उतर गया By S Sinha

कहानी - वर्जिनिटी का भूत उतर गया “ सुमन भाभी , शादी मुबारक हो . “ “ कौन ? सॉरी मैं तुम्हें पहचान न सकी . “ “ मैं गीता बोल रही हूँ ,...

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दिमाग बनाम दिल By राजेश ओझा

मंहगू, छोटे भाई सहतू को जैसे ही हमेशा की तरह थाने से छुड़वा कर लाया ,घर वाले पिल पड़े..पत्नी बोली.."तुम्हारे तो बीबी बच्चे हैं नही..बस जो कमाओ सब इन्हीं के ऊपर उड़ा दो"महंगू कोई जव...

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जीवन ऊट पटाँगा - 2 - ऐसे भी By Neelam Kulshreshtha

एपीसोड -२ ऐसे भी [ नीलम कुलश्रेष्ठ ] “उठ कम्मो उठ ।” कम्मो ने अपना हाथ छुड़ाते हुए दूसरी तरफ़ करवट ले ली, बिछौने से कच्ची ज़मीन पर उतर आई थी । “उठती है साली की नहीं...

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तारू - 2 By Sruti

तारू का अभी अभी ब्रेकअप हुआ था। वो बोहत ही दुखी थी। उसके बॉय फ्रेंड ने उसे चिट किया था। कॉलेज में उनकी लव स्टोरी बोहत ही मशहूर थी। हाला की तारू ने भी उसके bf को सीरियस नही लिया था...

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रसोईघर By Bhawna Shastri

नए घर में शादी के बाद आज रचना का चौथा दिन था।अब तक तो सब ठीक ही था।रचना को मायके की ही तरह प्यार और दुलार यहाँ भी मिल रहा था आज रचना का रसोई पूजन थाजिससे रचना कुछ डरी हुई थी। हाथों...

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मोहपाश By Anand M Mishra

आज का समय कलियुग कहा जाता है। वेद-पुराणों में युग चार युगों की अवधारणा है। उस कड़ी में यह चौथा और अंतिम युग है। इससे पहले तीन युग आकर चले गए, जो सत, त्रेता, द्वापर रहे थे। वैसे कलि...

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छोटा बड़प्पन By Archana Anupriya

छोटा बड़प्पनत्योहार के दिन थे और अमेजॉन से सबके लिए कपड़े,गिफ्ट्स वगैरह मँगवाये जा रहे थे।कोरोना की वजह से हर साल की तरह सबको बाजार ले जाकर उनके पसंद की चीजें खरीद पाना संभव नहीं था,...

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अभागिन... By निशा शर्मा

अलीगढ़ से करीब बीस से पच्चीस किलोमीटर दूर एक छोटा सा गाँव, बीरपुर ! उसके एक बड़े से मकान के बाहर चबूतरे पर चारपाई पर बैठी एक वृद्ध महिला जिसे देखकर ये साफ-साफ पता चलता है कि बुढ़ापा उ...

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थप्पड़ By Kishanlal Sharma

" हाय दीदी।"उमेश शाम को ऑफिस से लौटा तो प्रिया को देखकर बोला,"न कोई फोन,न चिट्टी अचानक कैसे आना हुआ?""तू इस फोटो को देख,"उमेश की बात का जवाब न देकर उसके हाथ मे एक फोटो को पकड़ाते हु...

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मेरी नजर से देखो - भाग 3 - सरकारी दफ्तर की महंगी चाय By Rajat Singhal

...कि मेरी पत्नी के भाई यानी मेरे साले मजबूरदास की काॅल आ गई। अपनी जीजी से मिलने को आ रहा था। मैने अपनी पत्नी को कहा तेरा भाई आ रहा है, कुछ पकवान बना लो। वैसे तो हमारे साले साहब की...

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नया सवेरा By सुधाकर मिश्र ” सरस ”

भास्कर और चांदनी के बीच रोज - रोज की बहसबाजी से दोनों की एकमात्र संतान किरण जो की अभी चौथी क्लास में थी , परेशान होती रहती। उसके समझ में नहीं आता था कि कौन ग़लत है और कौन सही। हाला...

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बड़े होकर तुम क्या बनोगे By DIPAK CHITNIS. DMC

बड़े होकर तुम क्या बनोगे DIPAKCHITNIS(dchitnis3@gmail.com) एक दफा में एक स्कूल में गया था l पहली कतार में बैठा हुआ पहले लड़के से मैंने पूछा, “ तू कौन है ?” उसने कहा, “ब्राह्...

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सरप्राइज By S Sinha

कहानी - सरप्राइज मैं ग्रेजुएशन कर चुकी थी . मेरे माता पिता मेरी शादी के लिए अच्छे वर की तलाश में थे . मेरे पिता के पास...

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नागिन का इंतकाम By Datta Shinde

हम काहाणी शुरु करते हे नंदिनी और ‌‌राज शिवमंदिर मे होते हे तब कोछ शेतान उन्हे मार देते है तब वाहा पे नागेश्वरी आती है तब वो मोहिनी को उठा लेती हे तब वो बोलती हे शिवजी इसे मे संभाल...

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पिताजी By Dr Darshita Babubhai Shah

यहां आएं, फॉर्म भरें। क्या आप रोगी से संबंधित हैं? भइया क्या हुआ बेन सिर में मारा गया है। क्यों? मुझे नहीं पता, मैं इसे उसके ससुर से लाया था। रक्तचाप? पता नहीं नहीं मिला। उल्टी? पत...

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चाचीजी का प्रेम By Anand M Mishra

सदा की तरह वार्षिक अवकाश में अपने गृहनगर पहुंचा। अपने चाचाजी के यहाँ मिलने के लिए गया तो दादी की तस्वीर पर ‘हार’ चढ़ा देखा। मन में दादी के साथ बिताए पल याद आने लगे। कैसे दादी कम संस...

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एक नई राह By राज कुमार कांदु

अमित भट्टाचार्य जी की पत्नी बीमार थीं। परिवार में और कोई नहीं था इसीलिए उन्होंने आज दफ्तर से अवकाश लिया हुआ था। खुद कभी किचन में झाँकने का मौका कभी मिला ही नहीं था। उनकी पत्नी रश्म...

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आत्महत्या By Kishanlal Sharma

"मेरा हाथ क्यों पकड़ा?"वह एक लड़की से प्यार करता था।लड़की भी उसे चाहती थी और उससे शादी का वादा कर चुकी थी।एक दिन एक अमीर उसकी जिंदगी में आ गया और उसने उस अमीर से शादी कर ली।प्रेमिका क...

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अस्तित्व By Jayu Nagar

नमस्ते। आशा करती हु इस covid महामारी मे आप सब सुरक्षित और कुशल होगे। ये मेरी पहली लघुकथा है जो में मातृृृभारती में प्रकाशित करने जा रही हूँ। आशा करती हूँ ये लघुकथा आपको पसंद आए...

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तुम साथ हो जब मेरे... By Ravi maharshi

यह कहानी है एक ऐसे परिवार की जो लॉक डाउन होने के बाद मुसीबतों का सामना कर रहा था और एक दिन उसे आशा की किरण दिखती हैसंदीप एक पढ़ा-लिखा नौजवान है लेकिन वह कुछ परेशान...

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एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा....... By zeba Praveen

पहली बार वह मुझे तब दिखी थी जब वो पौधों में पानी डालने आयी थी, उसके होंटो पर हँसी जैसे चिपक सी गयी थी ऐसा लग रहा था जैसे वो पेड़ पौधों से बातें कर रही हो, अपने दुपट्टे को पौधों पर ल...

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मास्टरनीजी By S Sinha

कहानी - मास्टरनीजी सरला ने बी ए पास करने के बाद कुछ समय तक नौकरी पाने का प्रयास किया था ....

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खुशनसीब By भूपेन्द्र चौहान“राज़”

“प्रिय रवि, सुना है,अभी तुम्हारा वहाँ मन नहीं लग रहा है। वापस घर आने का मन बना रहे हो, ऐसा कुविचार तुम्हारे मन में क्यूँ आया? बताओ ऐसी भी क्या वजह हो गयी, रजनी बता रही थी, भैया स...

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आधुनिक गिरगिट By Anand M Mishra

राष्ट्र्भूमि केंद्र विद्यालय का समाज में बहुत नाम है। यहाँ से पढ़कर निकलनेवाले छात्र उच्च पदों पर सुशोभित हैं। इस विद्यालय को सजाने-संवारने में यहाँ के अध्यापकों, शिक्षकेतर कर्मचारि...

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टिकैत बाबा और मनचाहे गीत By Bhupendra Singh chauhan

तब रामू की उम्र 13-14 वर्ष रही होगी जब वह अपनी भैंस चराने दूर खेतों में ले जाता था।हर रोज दोपहर 3 बजे स्कूल से आने के बाद वह झटपट खाना खाता और अपनी प्यारी छड़ी(जिसे वह भैंस चराने के...

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हरखू By shubham mishra

अभी सुबह होने में कुछ देर बाकी थी | हरखू , बाबू जी जमीदार की घर की ओर भगा जा रहा था| भोथरे काका जिनका द्वार हरखू से सटा हुआ था बाहर ही पुरवाई का आनन्द लेने के लिए चारपाई डाले हुए थ...

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एक सच By अनुराधा अनुश्री

अजीब सी कहानी है एक अनकहा सा सच जिसे बताने कि कोशिश तो की गई लेकिन बताया जा ना सका ...लेकिन किसी की जिंदगी से जुड़ी है।पता नहीं इसे पढ़ कर आप सब क्या सोचो।ये कहानी 2011 मार्च से शु...

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रमेश का घर और उड़न तश्तरी By Shakti Singh Negi

रमेश ने एक बहुत पुराना घर खरीदा। परंतु यह घर बहुत मजबूत था। यह उसे नाममात्र की कीमत पर सामान सहित मिल गया। घर पुस्तकों व पुराने सामान से अटा पड़ा था। रमेश ने फालतू पुस्तकों व फा...

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मेरी अधूरी प्रेम कहानी By AJMAL SHAKIL

वो दिन अभी भी याद आता है जब पापा से बहुत जिद करने के बाद 5 रूपए मांगे थे क्यूंकि क्लास में तुमने कहा था तुम्हे गोलगप्पे बहुत पसंद हैं…और मुझे तुम अच्छी लगती थीं…तुम्हारा और मेरा घर...

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डोर ज़िंदगी की By Missamittal

दो आंखें लगातार छोटे से शीशे के दूसरी तरफ बेड पर पड़ी औरत को देख रही थी और मैं उन आंखों को देख रहा था आंखों में डर फिक्र चिंता वह सब कुछ था जो 15 साल के बच्चे की आंखों में नहीं होन...

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जिंदगी - 2 By Jay Khavada

ए कहानी उस कहानी से थोड़ी सी अलग ही हे । किसी शहर में दो भाई रहते थे। उनमें से एक शहर का सबसे बड़ा बिजनेसमैन था तो दूसरा निठल्ला और शराबी था। लोगों को उन्हें देखकर हैरत होती थी कि...

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प्रेमम पिंजरम - 4 By Srishtichouhan

12 जनवरी 1946,पॉलंपल्लाईं मद्रास, 9:00 बजे, रात का समयप्रिय डायरी, क्या मेरे कान सुन्न हो गए है? या मेरा भ्रम है कि तुम सच मूूच में आ रहे हो? सच में! मतलब क्या यह बात सच है कि माधव...

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तोहफा By Heena_Pathan

बाते करे तोहफे की तो हम कुछ तोहफे याद के लिए तो कुछ रिवाज समझकर देते है ! पुराने ज़माने में जहा सिर्फ शादियों और जनम दिन की पार्टियों में गिफ्ट देने का कल्चर था, आजकल गृहप्रवेश से...

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नागिन का इंतकाम - 4 By Appa Jaunjat

पिछले अध्याय मैं हमणे देखा कि नंदिनी फिरसे अपनी काहानी लिखणे जा रही है और वो फिरसे पुनर्जन्म लेने वाली हे तो अब हम काहाणी शुरू करते हे एक लडकी काॅलेज जाती हे और तब उसकी दोस्त बोलती...

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नौकरानी की बेटी By Missamittal

देखा मम्मी जी आज फिर कमला काम पर नहीं आई , अब इसका रोज-रोज का हो गया है एक दिन आती है एक दिन आती नहीं , मिसेज शर्मा की बहू ने गुस्से में आते हुए ,मिसेज शर्मा से कहा ""वह आगे कुछ बो...

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एक और अफसोस By Kamal Maheshwari

लघु कथाकहानीकार - कमल माहेश्वरीशीर्षक- एक और अफसोस पिताजी सरकारी नौकरी में थे, उस दिन वह किसी प्रोजेक्ट पर बड़े ध्यान से कार्य कर रहे थे । मैं और मेरी छोटी बहन मस्ती में इतने डूब...

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भूख : एक व्यथा By Ganesh

भूख, ये ऐसा शब्द है जो अमीर के लिए कुछ भी नही है, परंतु गरीब किए सब कुछ है। वो इसके लिए जीता है, इसके लिए ही काम करता है। भूख अमीर लोगो किए महज दो टाइम का खाना जैसा है। गरीब इसी भू...

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भाग रहीं हूं, मैं By सीमा कपूर

_*_*_*_*_*मैं सीमा कपूर भाग रहीं हूं ,आखि़र किससेशायद अपने आप से/शायद अपने डर से/ या फिर यह कहलो अपनो की इमोशनल ब्लैक मेलिंग से।थक चुकी हूं,हार महसूस कर रही हूंं,जीना चाहती हूं,खुल...

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प्रेम का उदय By Kumar Kishan Kirti

पत्नी उदास बैठी है. मन ही मन कुढ़ रही है और अपने पति पर गुस्सा कर रही है. गलती उसी की है, जो एक शायर और लेखक से प्रेम विवाह कर ली हैक्या जरूरत थीउस को इतनी ज्यादा आशा रखने की अपन...

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आदमखोर By sudha bhargava

कहानी /सुधा भार्गव आदमखोर “हा--–हा-- घबरा गए मुझे देखकर । हाँ !हाँ मैं आदमखोर हूँ । किसे –किसे मारोगे ?कुछ दिनों पहने एक हाथी को गोली मार दी थी । परसों एक चीते को फांसी की स...

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मैं कब गलत थी ? By S Sinha

अक्सर औरत को जीवन में मजबूर हो कर हालात से समझौता करना पड़ता है , कभी ख़ुशी से तो कभी मजबूरी से …. कहानी - मैं कब गलत थी ? वह एक दिवाली की रात थी...

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पोशाक By Geeta Kaushik Ratan

रतन घर का सबसे बड़ा बेटा और घर-परिवार में सबका लाड़ला भी था। पिताजी गाँव के लम्बरदार थे, इसीलिए अपनी ज़मीनों के सिलसिले में वे अक्सर व्यस्त ही रहते। रुतबे पैसे के साथ-साथ आसपास के...

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यह भी खूब रही By S Sinha

कहानी - यह भी खूब रही ¨ भरता , तेरी भाभी बोल रही है अब तुम्हें शादी कर लेनी चाहिए . ये रोज रोज होटल का खाना स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है . भाभी ने...

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नज़र अंदाज़ (लघुकथाएं) By Kishanlal Sharma

नजर अंदाज सरोज बाजा से लौटी तो घर जा दरवाजा बंद था।उसने दरवाजे पर दस्तक दी।माया ने दरवाजा खोला था केकिन काफी देर बाद।सरोज बेटी पर बड़बड़ाती हुई अंदर गई।अंदर दीपक मौजूद था।बेटी और दी...

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मिलन By रामानुज दरिया

आइये न प्लीज , अंदर आ जाइये आख़िर बाहर क्यों खड़े हैं, उसकी आँखें खुली और ओठ सिले हुए थे और नज़र सिर्फ़ उन अधरों पर थे जो बार - बार एक दूसरे से मिलते और बिछड़ जाते, उन अधरों को देख कर म...

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वर्जिनिटी का भूत उतर गया By S Sinha

कहानी - वर्जिनिटी का भूत उतर गया “ सुमन भाभी , शादी मुबारक हो . “ “ कौन ? सॉरी मैं तुम्हें पहचान न सकी . “ “ मैं गीता बोल रही हूँ ,...

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दिमाग बनाम दिल By राजेश ओझा

मंहगू, छोटे भाई सहतू को जैसे ही हमेशा की तरह थाने से छुड़वा कर लाया ,घर वाले पिल पड़े..पत्नी बोली.."तुम्हारे तो बीबी बच्चे हैं नही..बस जो कमाओ सब इन्हीं के ऊपर उड़ा दो"महंगू कोई जव...

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जीवन ऊट पटाँगा - 2 - ऐसे भी By Neelam Kulshreshtha

एपीसोड -२ ऐसे भी [ नीलम कुलश्रेष्ठ ] “उठ कम्मो उठ ।” कम्मो ने अपना हाथ छुड़ाते हुए दूसरी तरफ़ करवट ले ली, बिछौने से कच्ची ज़मीन पर उतर आई थी । “उठती है साली की नहीं...

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तारू - 2 By Sruti

तारू का अभी अभी ब्रेकअप हुआ था। वो बोहत ही दुखी थी। उसके बॉय फ्रेंड ने उसे चिट किया था। कॉलेज में उनकी लव स्टोरी बोहत ही मशहूर थी। हाला की तारू ने भी उसके bf को सीरियस नही लिया था...

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रसोईघर By Bhawna Shastri

नए घर में शादी के बाद आज रचना का चौथा दिन था।अब तक तो सब ठीक ही था।रचना को मायके की ही तरह प्यार और दुलार यहाँ भी मिल रहा था आज रचना का रसोई पूजन थाजिससे रचना कुछ डरी हुई थी। हाथों...

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मोहपाश By Anand M Mishra

आज का समय कलियुग कहा जाता है। वेद-पुराणों में युग चार युगों की अवधारणा है। उस कड़ी में यह चौथा और अंतिम युग है। इससे पहले तीन युग आकर चले गए, जो सत, त्रेता, द्वापर रहे थे। वैसे कलि...

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छोटा बड़प्पन By Archana Anupriya

छोटा बड़प्पनत्योहार के दिन थे और अमेजॉन से सबके लिए कपड़े,गिफ्ट्स वगैरह मँगवाये जा रहे थे।कोरोना की वजह से हर साल की तरह सबको बाजार ले जाकर उनके पसंद की चीजें खरीद पाना संभव नहीं था,...

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अभागिन... By निशा शर्मा

अलीगढ़ से करीब बीस से पच्चीस किलोमीटर दूर एक छोटा सा गाँव, बीरपुर ! उसके एक बड़े से मकान के बाहर चबूतरे पर चारपाई पर बैठी एक वृद्ध महिला जिसे देखकर ये साफ-साफ पता चलता है कि बुढ़ापा उ...

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थप्पड़ By Kishanlal Sharma

" हाय दीदी।"उमेश शाम को ऑफिस से लौटा तो प्रिया को देखकर बोला,"न कोई फोन,न चिट्टी अचानक कैसे आना हुआ?""तू इस फोटो को देख,"उमेश की बात का जवाब न देकर उसके हाथ मे एक फोटो को पकड़ाते हु...

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मेरी नजर से देखो - भाग 3 - सरकारी दफ्तर की महंगी चाय By Rajat Singhal

...कि मेरी पत्नी के भाई यानी मेरे साले मजबूरदास की काॅल आ गई। अपनी जीजी से मिलने को आ रहा था। मैने अपनी पत्नी को कहा तेरा भाई आ रहा है, कुछ पकवान बना लो। वैसे तो हमारे साले साहब की...

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नया सवेरा By सुधाकर मिश्र ” सरस ”

भास्कर और चांदनी के बीच रोज - रोज की बहसबाजी से दोनों की एकमात्र संतान किरण जो की अभी चौथी क्लास में थी , परेशान होती रहती। उसके समझ में नहीं आता था कि कौन ग़लत है और कौन सही। हाला...

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बड़े होकर तुम क्या बनोगे By DIPAK CHITNIS. DMC

बड़े होकर तुम क्या बनोगे DIPAKCHITNIS(dchitnis3@gmail.com) एक दफा में एक स्कूल में गया था l पहली कतार में बैठा हुआ पहले लड़के से मैंने पूछा, “ तू कौन है ?” उसने कहा, “ब्राह्...

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सरप्राइज By S Sinha

कहानी - सरप्राइज मैं ग्रेजुएशन कर चुकी थी . मेरे माता पिता मेरी शादी के लिए अच्छे वर की तलाश में थे . मेरे पिता के पास...

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नागिन का इंतकाम By Datta Shinde

हम काहाणी शुरु करते हे नंदिनी और ‌‌राज शिवमंदिर मे होते हे तब कोछ शेतान उन्हे मार देते है तब वाहा पे नागेश्वरी आती है तब वो मोहिनी को उठा लेती हे तब वो बोलती हे शिवजी इसे मे संभाल...

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पिताजी By Dr Darshita Babubhai Shah

यहां आएं, फॉर्म भरें। क्या आप रोगी से संबंधित हैं? भइया क्या हुआ बेन सिर में मारा गया है। क्यों? मुझे नहीं पता, मैं इसे उसके ससुर से लाया था। रक्तचाप? पता नहीं नहीं मिला। उल्टी? पत...

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चाचीजी का प्रेम By Anand M Mishra

सदा की तरह वार्षिक अवकाश में अपने गृहनगर पहुंचा। अपने चाचाजी के यहाँ मिलने के लिए गया तो दादी की तस्वीर पर ‘हार’ चढ़ा देखा। मन में दादी के साथ बिताए पल याद आने लगे। कैसे दादी कम संस...

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एक नई राह By राज कुमार कांदु

अमित भट्टाचार्य जी की पत्नी बीमार थीं। परिवार में और कोई नहीं था इसीलिए उन्होंने आज दफ्तर से अवकाश लिया हुआ था। खुद कभी किचन में झाँकने का मौका कभी मिला ही नहीं था। उनकी पत्नी रश्म...

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आत्महत्या By Kishanlal Sharma

"मेरा हाथ क्यों पकड़ा?"वह एक लड़की से प्यार करता था।लड़की भी उसे चाहती थी और उससे शादी का वादा कर चुकी थी।एक दिन एक अमीर उसकी जिंदगी में आ गया और उसने उस अमीर से शादी कर ली।प्रेमिका क...

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अस्तित्व By Jayu Nagar

नमस्ते। आशा करती हु इस covid महामारी मे आप सब सुरक्षित और कुशल होगे। ये मेरी पहली लघुकथा है जो में मातृृृभारती में प्रकाशित करने जा रही हूँ। आशा करती हूँ ये लघुकथा आपको पसंद आए...

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तुम साथ हो जब मेरे... By Ravi maharshi

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एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा....... By zeba Praveen

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मास्टरनीजी By S Sinha

कहानी - मास्टरनीजी सरला ने बी ए पास करने के बाद कुछ समय तक नौकरी पाने का प्रयास किया था ....

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खुशनसीब By भूपेन्द्र चौहान“राज़”

“प्रिय रवि, सुना है,अभी तुम्हारा वहाँ मन नहीं लग रहा है। वापस घर आने का मन बना रहे हो, ऐसा कुविचार तुम्हारे मन में क्यूँ आया? बताओ ऐसी भी क्या वजह हो गयी, रजनी बता रही थी, भैया स...

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आधुनिक गिरगिट By Anand M Mishra

राष्ट्र्भूमि केंद्र विद्यालय का समाज में बहुत नाम है। यहाँ से पढ़कर निकलनेवाले छात्र उच्च पदों पर सुशोभित हैं। इस विद्यालय को सजाने-संवारने में यहाँ के अध्यापकों, शिक्षकेतर कर्मचारि...

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टिकैत बाबा और मनचाहे गीत By Bhupendra Singh chauhan

तब रामू की उम्र 13-14 वर्ष रही होगी जब वह अपनी भैंस चराने दूर खेतों में ले जाता था।हर रोज दोपहर 3 बजे स्कूल से आने के बाद वह झटपट खाना खाता और अपनी प्यारी छड़ी(जिसे वह भैंस चराने के...

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हरखू By shubham mishra

अभी सुबह होने में कुछ देर बाकी थी | हरखू , बाबू जी जमीदार की घर की ओर भगा जा रहा था| भोथरे काका जिनका द्वार हरखू से सटा हुआ था बाहर ही पुरवाई का आनन्द लेने के लिए चारपाई डाले हुए थ...

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एक सच By अनुराधा अनुश्री

अजीब सी कहानी है एक अनकहा सा सच जिसे बताने कि कोशिश तो की गई लेकिन बताया जा ना सका ...लेकिन किसी की जिंदगी से जुड़ी है।पता नहीं इसे पढ़ कर आप सब क्या सोचो।ये कहानी 2011 मार्च से शु...

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रमेश का घर और उड़न तश्तरी By Shakti Singh Negi

रमेश ने एक बहुत पुराना घर खरीदा। परंतु यह घर बहुत मजबूत था। यह उसे नाममात्र की कीमत पर सामान सहित मिल गया। घर पुस्तकों व पुराने सामान से अटा पड़ा था। रमेश ने फालतू पुस्तकों व फा...

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मेरी अधूरी प्रेम कहानी By AJMAL SHAKIL

वो दिन अभी भी याद आता है जब पापा से बहुत जिद करने के बाद 5 रूपए मांगे थे क्यूंकि क्लास में तुमने कहा था तुम्हे गोलगप्पे बहुत पसंद हैं…और मुझे तुम अच्छी लगती थीं…तुम्हारा और मेरा घर...

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डोर ज़िंदगी की By Missamittal

दो आंखें लगातार छोटे से शीशे के दूसरी तरफ बेड पर पड़ी औरत को देख रही थी और मैं उन आंखों को देख रहा था आंखों में डर फिक्र चिंता वह सब कुछ था जो 15 साल के बच्चे की आंखों में नहीं होन...

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जिंदगी - 2 By Jay Khavada

ए कहानी उस कहानी से थोड़ी सी अलग ही हे । किसी शहर में दो भाई रहते थे। उनमें से एक शहर का सबसे बड़ा बिजनेसमैन था तो दूसरा निठल्ला और शराबी था। लोगों को उन्हें देखकर हैरत होती थी कि...

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प्रेमम पिंजरम - 4 By Srishtichouhan

12 जनवरी 1946,पॉलंपल्लाईं मद्रास, 9:00 बजे, रात का समयप्रिय डायरी, क्या मेरे कान सुन्न हो गए है? या मेरा भ्रम है कि तुम सच मूूच में आ रहे हो? सच में! मतलब क्या यह बात सच है कि माधव...

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तोहफा By Heena_Pathan

बाते करे तोहफे की तो हम कुछ तोहफे याद के लिए तो कुछ रिवाज समझकर देते है ! पुराने ज़माने में जहा सिर्फ शादियों और जनम दिन की पार्टियों में गिफ्ट देने का कल्चर था, आजकल गृहप्रवेश से...

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नागिन का इंतकाम - 4 By Appa Jaunjat

पिछले अध्याय मैं हमणे देखा कि नंदिनी फिरसे अपनी काहानी लिखणे जा रही है और वो फिरसे पुनर्जन्म लेने वाली हे तो अब हम काहाणी शुरू करते हे एक लडकी काॅलेज जाती हे और तब उसकी दोस्त बोलती...

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नौकरानी की बेटी By Missamittal

देखा मम्मी जी आज फिर कमला काम पर नहीं आई , अब इसका रोज-रोज का हो गया है एक दिन आती है एक दिन आती नहीं , मिसेज शर्मा की बहू ने गुस्से में आते हुए ,मिसेज शर्मा से कहा ""वह आगे कुछ बो...

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एक और अफसोस By Kamal Maheshwari

लघु कथाकहानीकार - कमल माहेश्वरीशीर्षक- एक और अफसोस पिताजी सरकारी नौकरी में थे, उस दिन वह किसी प्रोजेक्ट पर बड़े ध्यान से कार्य कर रहे थे । मैं और मेरी छोटी बहन मस्ती में इतने डूब...

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भूख : एक व्यथा By Ganesh

भूख, ये ऐसा शब्द है जो अमीर के लिए कुछ भी नही है, परंतु गरीब किए सब कुछ है। वो इसके लिए जीता है, इसके लिए ही काम करता है। भूख अमीर लोगो किए महज दो टाइम का खाना जैसा है। गरीब इसी भू...

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भाग रहीं हूं, मैं By सीमा कपूर

_*_*_*_*_*मैं सीमा कपूर भाग रहीं हूं ,आखि़र किससेशायद अपने आप से/शायद अपने डर से/ या फिर यह कहलो अपनो की इमोशनल ब्लैक मेलिंग से।थक चुकी हूं,हार महसूस कर रही हूंं,जीना चाहती हूं,खुल...

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प्रेम का उदय By Kumar Kishan Kirti

पत्नी उदास बैठी है. मन ही मन कुढ़ रही है और अपने पति पर गुस्सा कर रही है. गलती उसी की है, जो एक शायर और लेखक से प्रेम विवाह कर ली हैक्या जरूरत थीउस को इतनी ज्यादा आशा रखने की अपन...

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आदमखोर By sudha bhargava

कहानी /सुधा भार्गव आदमखोर “हा--–हा-- घबरा गए मुझे देखकर । हाँ !हाँ मैं आदमखोर हूँ । किसे –किसे मारोगे ?कुछ दिनों पहने एक हाथी को गोली मार दी थी । परसों एक चीते को फांसी की स...

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मैं कब गलत थी ? By S Sinha

अक्सर औरत को जीवन में मजबूर हो कर हालात से समझौता करना पड़ता है , कभी ख़ुशी से तो कभी मजबूरी से …. कहानी - मैं कब गलत थी ? वह एक दिवाली की रात थी...

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पोशाक By Geeta Kaushik Ratan

रतन घर का सबसे बड़ा बेटा और घर-परिवार में सबका लाड़ला भी था। पिताजी गाँव के लम्बरदार थे, इसीलिए अपनी ज़मीनों के सिलसिले में वे अक्सर व्यस्त ही रहते। रुतबे पैसे के साथ-साथ आसपास के...

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यह भी खूब रही By S Sinha

कहानी - यह भी खूब रही ¨ भरता , तेरी भाभी बोल रही है अब तुम्हें शादी कर लेनी चाहिए . ये रोज रोज होटल का खाना स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है . भाभी ने...

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