सामाजिक कहानियां कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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भारत के गावों में स्वतंत्रा संग्राम - 7 By Brijmohan sharma

7 स्वतंत्र भारतअंग्रेज सरकार पिछले अनेक सालो से भारत को स्वायत्तता देने की बात कर रही थी किन्तु मोहम्मद अली जिन्ना मुस्लिमो के लिऐ ऐक अलग देश की मांग रखकर उसके मार्ग में अवरोध उत्प...

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अपनत्व By Saroj Verma

बेटा, सौजन्य आओ नाश्ता लग गया है, juice लोगे या दूध शेखर ने अपने बेटे सौजन्य को आवाज लगाई। मुझे नाश्ता नहीं करना, बहुत देर हो गई है, मैं जा रहा हूं, सौजन्य तैयार होकर बाहर तो आया ल...

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मेरा पति तेरा पति - 7 By Jitendra Shivhare

7 "अरे नहीं! इसमें प्राॅब्लम कैसी?" अनिता ने जवाब दिया। "ठीक है अनिता! कभी किसी से चीज़ की जरूरत हो तो बिना संकोच के बता देना। मैं चलता हूं।" अमर बोला। "एक मिनिट रूको अमर! अब आप दो...

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कोड़ियाँ - कंचे - 10 - अंतिम भाग By Manju Mahima

Part- 10 अन्दर बहुत सारी महिलाएं घूँघट निकाले बैठी थीं, गायत्री जी थोड़ी चकित हुई, पराग ने आगे बढ़कर ‘मम्मी’ कहा और उनको लेकर गायत्री जी के साथ अलग कमरे में ले आया. गौरी...

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अजीब दास्तां है ये.. - 9 By Ashish Kumar Trivedi

(9) रेवती रात दिन ईश्वर से प्रार्थना करती रहती थी कि कोई राह निकालें जिससे वह इस स्तिथि से निकल सके। एक दिन उसका धैर्य और विश्वास रंग लाया। जिस कमरे में वह बंद थी उसके वॉशरूम की ना...

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अनमोल सौगात - 6 By Ratna Raidani

भाग ६ रवि कॉलेज के बाहर नीता का इंतज़ार कर रहा था। दोपहर के १२ बजे तक नीता नहीं आयी। रवि की बैचेनी बढ़ने लगी थी। उसने पास के P.C.O. से नीता के घर पर फोन लगाया किन्तु हर बार उर्मिला न...

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एक यात्रा समानान्तर - 2 By Gopal Mathur

2 होटल के काॅरीडोर के आखिर में छोर पर है उसका कमरा, जहाँ इस समय वह अकेली लेटी हुई है. रात आहिस्ता आहिस्ता सरकती आ रही है, पर ड्रिंक्स के बावजूद भी उसकी आँखों में नींद नहीं है. शाम...

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Broken with you... - 5 By Alone Soul

{गजब ज़िन्दगी है हम राइटर की 500 सिगरेट , 15 घंटे बैठे बैठे पिछवाड़ा सुन्न हो जाता है , तब भी ये खाली पन्ना नहीं पूरा होता है , अरे रहने दीजिए दोस्तो तो हम कहा थे ??}प्रिया बेटा ये...

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बीच में कहीं By Gopal Mathur

गोपाल माथुर क्या आपने कभी किसी अनजान शहर में ऐसी शाम बिताई है, जहाँ आपको ऐसे व्यक्ति की प्रतीक्षा करनी पड़े, जिसे आना ही नहीं था ? नहीं, मैं वेटिंग फाॅर गोदो के गोदो की बात नहीं कर...

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यादों के झरोखों से—निश्छल प्रेम (7) By Asha Saraswat

संसार में कुछ लोगों का सानिध्य ठंडी फुआर की तरह जीवन में ठंडक दे जाता है ।महाराज जी ऐसे ही व्यक्ति थे।वह कोई पीले ,नारंगी या केसरिया कपड़े नहीं पहनते थे।साधारण सफ़ेद...

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गिर्दागिर्द By Deepak sharma

गिर्दागिर्द अमला के अस्पताल में दाखिल होने का समाचार जिस समय सुभाष को दिया गया, वह अपने पड़ोसी को अपने बचपन का एक किस्सा सुना रहा था| जिस के अन्तिम छोर पर पहुँचते ही पड़ोसी, गिरीश और...

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पुराने पन्ने By Deepak sharma

पुराने पन्ने इस सन् २०१६ के नवम्बर माह का विमुद्रीकरण मुझे उन टकों की ओर ले गया है साठ साल पहले हमारे पुराने कटरे के सर्राफ़, पन्ना लाल, के परिवार के पाँच सदस्यों की जानें धर ली थीं...

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स्वतंत्र सक्सेना की कहानियाँ समीक्षा - 8 By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

समीक्षा - काव्य कुंज-स्व.श्री नरेन्द्र उत्सुक समीक्षक स्वतंत्र कुमार सक्सेना पुस्तक का नाम- काव्य कुंज कवि -नरेन्द्र उत्सुक सम्पादक- रामगोपाल भावुकसहसम्पादक- वेदराम प्रजापति ‘मदमस्...

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रोशनीघर की लड़की By Yogesh Kanava

रोशनीघर की लड़की रात का गहरा सन्नाटा था, कभी कभी कुत्तों के भौंकने की आवाज़ नीरवता को तोड़ देती थी। कई बार ऐसा होता कि नींद नहीं आती थी खाण्डेकर जी को आज भी ऐसा ही हो रहा था, बिस्तर प...

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आखिरी विदा By Suryabala

सूर्यबाला सुबह से तीन बार रपट चुकी थीं वे। एक बार, किचेन में टँगी जाली की आलमारी से खीर के लिए इलायची की डिब्बी निकालते हुए। दूसरी बार, पूजा वाले ताख से भभूती उतारते हुए। और तीसरी...

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कोख - दोषी कौन (पार्ट 1) By Kishanlal Sharma

"सॉरी",डॉक्टर रत्ना,कृतिका का चेकअप करने के बाद बोली,"अब तुम कभी भी माँ नही बन सकती।"कृतिका से प्रवीण की मुलाकात एक फैशन पार्टी में हुई थी।प्रवीण को कृतिका की सुंदरता ने मोहित कर...

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क्या मालूम By Suryabala

सूर्यबाला अधबूढ़ी-सी मैं...। सोचा था, हवेली भी अधबूढ़ी ही मिलेगी। उखड़ी-पखड़ी, झँवाई, निस्‍तेज। पर वह तो जैसे बरसों-बरस की बतकहियों वाली पिटारी लिए, आकुल-व्‍याकुल बैठी थी मेर...

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विजित पोत By Deepak sharma

विजित पोत यह संयोग ही था कि अस्थिर उन दिनों अंतर्राष्ट्रीय एक सेमिनार में भागीदारी के निमंत्रण पर स्वराज्या देश के बाहर, जिनेवा गयी हुई थीं जब स्वतंत्रता को कस्बापुर सरकारी अस्पताल...

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पश्चाताप के आंसू By Gyaneshwar Anand Gyanesh

कहानी "पश्चाताप के आँसू" आज हमारा समाज अनेक बुराइयों और कुरीतियों से ग्रस्त है। जिसमें सबसे बड़ी और भयंकर बुराई है "दहेज प्रथा" आज इसी बुराई के कारण हमारे समाज में अनेक लड़कियों की...

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रुका न पंछी पिंजरे में By आदित्य अभिनव

रुका न पंछी पिंजरे में धनेसर को यह समझ में नहीं आ रहा है कि क्या हो गया है, जिसको देखो वहीं मास्क ल...

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बेनज़ीर - दरिया किनारे का ख्वाब - 33 - अंतिम भाग By Pradeep Shrivastava

भाग - ३३ मेरेअब कई-कई घंटे, कई-कई दिन, ऐसे ही दीवार के उस पार ज़ाहिदा के परिवार को सोचते-सोचते गुजरते जा रहे थे। मुन्ना भी अक्सर ऐसी रातों के इस गहन सन्नाटे में मेरे साथ होते। एक दि...

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और उदासी छंट गई विस्तार वात्सल्य का By Alka Agrawal

निधि सुबह उठकर बाहर बरामदे में बैठकर अखबार पढ़ती है। बरसों से यहा नियम है, सुबह की चाय के साथ दोनों पति-पत्नी समाचारों का आनन्द लेते हैं। गर्मी में, उनके बगीचे से आने वाली शीतल, सु...

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भारत के गावों में स्वतंत्रा संग्राम - 7 By Brijmohan sharma

7 स्वतंत्र भारतअंग्रेज सरकार पिछले अनेक सालो से भारत को स्वायत्तता देने की बात कर रही थी किन्तु मोहम्मद अली जिन्ना मुस्लिमो के लिऐ ऐक अलग देश की मांग रखकर उसके मार्ग में अवरोध उत्प...

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मेरा पति तेरा पति - 7 By Jitendra Shivhare

7 "अरे नहीं! इसमें प्राॅब्लम कैसी?" अनिता ने जवाब दिया। "ठीक है अनिता! कभी किसी से चीज़ की जरूरत हो तो बिना संकोच के बता देना। मैं चलता हूं।" अमर बोला। "एक मिनिट रूको अमर! अब आप दो...

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कोड़ियाँ - कंचे - 10 - अंतिम भाग By Manju Mahima

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अजीब दास्तां है ये.. - 9 By Ashish Kumar Trivedi

(9) रेवती रात दिन ईश्वर से प्रार्थना करती रहती थी कि कोई राह निकालें जिससे वह इस स्तिथि से निकल सके। एक दिन उसका धैर्य और विश्वास रंग लाया। जिस कमरे में वह बंद थी उसके वॉशरूम की ना...

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गिर्दागिर्द अमला के अस्पताल में दाखिल होने का समाचार जिस समय सुभाष को दिया गया, वह अपने पड़ोसी को अपने बचपन का एक किस्सा सुना रहा था| जिस के अन्तिम छोर पर पहुँचते ही पड़ोसी, गिरीश और...

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