सामाजिक कहानियां कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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Featured Books

एक किस्सा ऐसा भी By Smita

छींटदार नीले रंग का पर्दा अपनी जगह पर व्यवस्थित हो चुका था. भगतजी(देवधर ) अपनी खटिया पर लेट चुके थे। अपने बेटे की पदचाप उन्हें साफ सुनाई दे रही थी। बेटा बिल्कुल बरामदे तक आ चुका था...

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कोड़ियाँ - कंचे - 5 By Manju Mahima

Part-5 कार में एक लम्बी चुप्पी छाई हुई देख गायत्री जी ने सोचा कि क्यों नहीं अपनी कुछ यादें इन लोगों से ही शेयर की जाएं, बिचारे बोर हो रहे हैं, सो कहने लगीं, ‘आप लोगों को पता...

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मेरा पति तेरा पति - 2 By Jitendra Shivhare

2 गेस्ट रूम का द्वार वह बंद करना चाहती थी मगर कमलेश के बल के आगे उसकी एक न चली। वह बैड पर जा गिरी। कमलेश उसकी तरफ बढ़ने लगा। "कमलेश जी! ये सही नहीं है। आप ये अन्याय नहीं कर सकते।"...

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स्वतंत्र सक्सेना की कहानियाँ - 4 By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

स्वतंत्र सक्सेना की कहानियाँ swatantr saxena ki kahaniyan संपादकीय...

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अजीब दास्तां है ये.. - 4 By Ashish Kumar Trivedi

(4) बात खत्म करके रेवती ने मुकुल को अपने साथ आने को कहा। वह उसे लेकर कैफ़े के बाहर चली गई। कैफ़े के बगल में एक छोटा सा गेट लगा था। उसे खोल कर रेवती अंदर चली गई। मुकुल को कुछ समझ नह...

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बेनज़ीर - दरिया किनारे का ख्वाब - 31 By Pradeep Shrivastava

भाग - ३१ मकान मालिक भी बहुत खिसियाए हुए से बोले, 'मैंने सोचा कि, आप लोग लंबा सफर करके आए हैं। उपद्द्रव में अलग परेशान हुए हैं। थके हुए होंगे, कुछ चाय-नाश्ता लेता चलूं।' यह...

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बालिश्तिया By Deepak sharma

बालिश्तिया सद्गुण प्रसाद का जाना तय हो चुका था| उसे रोडज़ छात्रवृत्ति मिल गयी थी| ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से उसकी टिकट भी खरीदी जा चुकी थी| पासपोर्ट वीज़ा सब तैयार था| दो दिन बाद...

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अनमोल सौगात - 1 By Ratna Raidani

भाग १ "मम्मी मम्मी!" पवित्रा ने घर में घुसते हुए उत्साह से आवाज़ लगायी। किन्तु उसे घर का वातावरण कुछ बोझिल सा महसूस हुआ। मुकेश हमेशा की तरह टी.वी. पर घटिया और साजिशों से भरे पारिवार...

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भारत के गावों में स्वतंत्रा संग्राम - 1 By Brijmohan sharma

(ऐक अनकही दास्तान ) 1 ग्रन्थ की विशेषताएं:यह लघु उपन्यास ग्रामीण भारत में स्वतंत्रता व गांधीजी के आन्दोलन के प्रति अलख जगाने की लोमहर्षक अनकही दस्तान है I २ स्वतत्रता सेनानी द्वारा...

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ताज़िया By आदित्य अभिनव

ताज़िया प्रो. रामेश्वर उपाध्याय नित्य नियमानुसार वॉकिंग पर जाने के लिए अपना स्पोर्टस सू पहन रहे थे कि उनका ध्यान टेलीविजन पर चल रहे चैनल...

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सुंदरा और नारली पूर्णिमा By Ramesh Yadav

सिंधुदुर्ग जिले में समुद्र किनारे बसे एक छोटे से गांव ओटव में मल्हारी और मैनावती नामक युवक और युवती रहते थे। वे दोनों कोली समाज से थे। कोली अर्थात मछुआरे। मत्स्य व्यवसाय उनका खानदा...

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राम राज By राज कुमार कांदु

प्रस्तुत है मेरी एक रचना उस वक्त की लिखी हुई जब वर्तमान महामहिम श्री रामनाथ कोविंद जी का राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में चयन हुआ था ! ?-------------------------------------...

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थप्पड़: स्वाभिमान और अभिमान की जंग By Anil Patel_Bunny

नमस्कार मित्रो, आशा है आप सभी कुशल-मंगल होंगे। इस Lockdown period में सब लोगो की आम समस्या ये थी कि समय कैसे बिताए? हंमेशा की तरह हर सवाल का जवाब अपने पास ही होता है। सभी...

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स्पर्श रेखाएं By Deepak sharma

स्पर्श रेखाएं झगड़े के बाद माँ अकसर इस मंदिर आया करतीं| घंटे, दो घंटे में जब मेरा गुस्सा उतर कर चिन्ता का रूप धारण करने लगता तो उन्हें घर लिवाने मैं यहीं इसी मंदिर आती| एक-एक कर मैं...

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तिश्नगी By Abdul Gaffar

तिश्नगी (कहानी) लेखक - अब्दुल ग़फ़्फ़ार __________________1980 के दशक में गौना के बाद मायके से जब दुल्हन की दूसरी बिदाई होती थी तो उसे हमारे यहां दोंगा बोला जाता था। तब सीधे शादी...

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एक दूजे के लिए (अंतिम भाग) By Kishanlal Sharma

"थैंक्स।इतने बड़े महानगर में अगर तुम न होते तो"दोस्ती मैं थैंक्स कैसा?तुम्हारा दोस्त और रूम पार्टनर के नाते मेरा फर्ज था।तुम्हारी देखभाल करना।जो मैने निभाया।कोई एहसान नही किया है,तु...

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यादों के झरोखों से-निश्छल प्रेम (5) By Asha Saraswat

शादी के बाद मुझे ससुराल में रहने का अवसर तो मिला लेकिन जहॉं पैत्रिक घर था , सासू मॉं रहती थीं वहाँ रहने का अवसर मुझे नहीं मिला था।शादी के समय में परीक्षा थी,परीक्षा अच्छी नहीं हुई।...

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आर्टिफिशियल By Sunita Bishnolia

आर्टिफीशियल ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठकर रीना ने गले में मोटे मोती वाली माला पहनी। परन्तु दुबारा देखने पर लगा कि ये सिल्वर बार्डर वाली ग्रे साड़ी पर सूट नहीं हो रही। तब उसने फटाफट...

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प्रजा का रक्षक By Ramesh Yadav

मावल प्रांत में कान्होजी नामक एक पराक्रमी सरदार था। उसे अपने राजा द्वारा जागीरदारों जैसा सम्मान प्राप्त था। जागीरदारी देने की परंपरा उसके राजा के दरबार में नहीं थी। शत्रुओं से मुका...

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अपने-अपने कारागृह - 28 - अंतिम भाग By Sudha Adesh

अपने-अपने कारागृह-28 अगले हफ्ते हमें बेंगलुरु जाना था । जाने का पहला कारण प्रिया का बार-बार उलाहना देना था कि आप मुझसे अधिक भैया को चाहते हो तभी उनके पास लंदन चले गए पर बेंगलुरु...

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सिद्धपुरुष By Deepak sharma

सिद्धपुरुष ‘आपसे एक हस्ताक्षर लेना है, मामा,’ अपने नाश्ते के बाद अपनी पहिएदार कुर्सी पर बैठा मैं अपना आई-फोन खोलने ही लगा हूँ कि युगल मेरे कमरे में आन धमका है| युगल मान...

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एक पल By Upasna Siag

सुधा जब से किट्टी पार्टी से लौटी है तभी से चुप है। जैसे कुछ सोच रही है। हाँ, सोच तो रही है वह। आज जो बातें किट्टी में हुई। वे बातें उसे थोडा आंदोलित कर रही है। कभी -कभी वह खुद अपने...

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शामियाना By Chaya Agarwal

कहानी- शामियाना"रिश्तों की समझ नही है तुम्हें या रिश्तों की माँग से अनभिज्ञ हो तुम, उठा लेते हो बीच में अपनेपन की खुशबूदार अनुभूति जो पहले ही पीछे छूट चुकी है या पाट दी गयी है अपने...

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गरीब किसान और जिन्न By Ramesh Yadav

एक गांव में ज्ञानेश्वर नामक एक गरीब किसान रहता था। वह अभी कुछ जवान था इसलिए उसमें कुछ कर गुजरने का माद्दा था। उसने धनवान होने का सपना अपने जेहन में पाल रखा था। धनवान होने के लिए उस...

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छत और छाता... By Dr Vinita Rahurikar

मन भर कर शॉपिंग करने के बाद ढेर सारी शॉपिंग बैग्स से लदी नेहा अपने पाँच वर्षीय बेटे के साथ जूस पीने के लिए एक रेस्टोरेंट की तरफ बढ़ी। बहुत देर से वह शॉपिंग कर रही थी तो थक भी गई थी...

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कल, आज और हम By Annada patni

अन्नदा पाटनी स्टडी के कमरे से झल्लाने की आवाज आ रही थी,” क्या कर रहा है ? जल्दी हाथ चला, नहीं तो पूरा गेम बिगाड़ देगा । ”और भी न जाने क्या कह रहा था, मेरे तो पल्ले ही न...

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बदलते प्यार की परिभाषा - 3 By Aarav Ki Kalam

घर आकर अहाना फ्रेश होकर स्टडी टेबल पर बैठ कर आराम से फोन यूज़ करती है। टिंडर ओपन करती है। वहा मेसेजेस की बौछार हो रही होती है। "हेल्लो मैडम" "हेल्लो अहाना" "हेल्लो फैशन डिज़ाइनर" "आप...

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कैथार्सिस - 3 - अंतिम भाग By Amita Neerav

अमिता नीरव 3 ‘दिस इज आउट ऑफ एट्टिकेट्स... ’ – कहकर कर उसने अपना विरोध दर्ज किया।  ‘लाइक स्टूडेंट एंड टीचर....’ – कहकर अथर्व मुस्कुराया था।...

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नीला आसमान खो गया By BALDEV RAJ BHARTIYA

कहानी नीला आसमान खो गया. . बलदेव राज भारतीय (1)"क्या तुम पिछले वर्ष गर्मियों के पश्चात पहली बौछार को भूल सकती हो?" चातक ने अपनी चातकी से पूछा।"कैसे भूल सकती हूँ? भयंकर...

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Broken with you... - 3 By Alone Soul

ये जो बनारसी रंग है , आज भी जहा जाता है अपनी छाप दे जाता है। बस मन ले कर अपनी गंगा मईया के पास बैठ जाओ तुम तो वहीं रहोगे पर दिल , मन , आत्मा गहरे पानी में चले जाए गे क्यों...

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चचेरी By Deepak sharma

चचेरी “प्रभात कुमार?” वाचनालय के बाहर वाले गलियारे में अपने मोबाइल से उलझ रहे प्रभात कुमार को चीन्हने में मुझे अधिक समय नहीं लगा| “जी..... जी हाँ,” वह अचकचा...

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हुँकार By Ramnarayan Sungariya

कहानी हुँकार -आर. एन. सुनगरया...

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एक किस्सा ऐसा भी By Smita

छींटदार नीले रंग का पर्दा अपनी जगह पर व्यवस्थित हो चुका था. भगतजी(देवधर ) अपनी खटिया पर लेट चुके थे। अपने बेटे की पदचाप उन्हें साफ सुनाई दे रही थी। बेटा बिल्कुल बरामदे तक आ चुका था...

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Part-5 कार में एक लम्बी चुप्पी छाई हुई देख गायत्री जी ने सोचा कि क्यों नहीं अपनी कुछ यादें इन लोगों से ही शेयर की जाएं, बिचारे बोर हो रहे हैं, सो कहने लगीं, ‘आप लोगों को पता...

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मेरा पति तेरा पति - 2 By Jitendra Shivhare

2 गेस्ट रूम का द्वार वह बंद करना चाहती थी मगर कमलेश के बल के आगे उसकी एक न चली। वह बैड पर जा गिरी। कमलेश उसकी तरफ बढ़ने लगा। "कमलेश जी! ये सही नहीं है। आप ये अन्याय नहीं कर सकते।"...

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(4) बात खत्म करके रेवती ने मुकुल को अपने साथ आने को कहा। वह उसे लेकर कैफ़े के बाहर चली गई। कैफ़े के बगल में एक छोटा सा गेट लगा था। उसे खोल कर रेवती अंदर चली गई। मुकुल को कुछ समझ नह...

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भाग - ३१ मकान मालिक भी बहुत खिसियाए हुए से बोले, 'मैंने सोचा कि, आप लोग लंबा सफर करके आए हैं। उपद्द्रव में अलग परेशान हुए हैं। थके हुए होंगे, कुछ चाय-नाश्ता लेता चलूं।' यह...

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राम राज By राज कुमार कांदु

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स्पर्श रेखाएं By Deepak sharma

स्पर्श रेखाएं झगड़े के बाद माँ अकसर इस मंदिर आया करतीं| घंटे, दो घंटे में जब मेरा गुस्सा उतर कर चिन्ता का रूप धारण करने लगता तो उन्हें घर लिवाने मैं यहीं इसी मंदिर आती| एक-एक कर मैं...

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शादी के बाद मुझे ससुराल में रहने का अवसर तो मिला लेकिन जहॉं पैत्रिक घर था , सासू मॉं रहती थीं वहाँ रहने का अवसर मुझे नहीं मिला था।शादी के समय में परीक्षा थी,परीक्षा अच्छी नहीं हुई।...

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आर्टिफीशियल ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठकर रीना ने गले में मोटे मोती वाली माला पहनी। परन्तु दुबारा देखने पर लगा कि ये सिल्वर बार्डर वाली ग्रे साड़ी पर सूट नहीं हो रही। तब उसने फटाफट...

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एक पल By Upasna Siag

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शामियाना By Chaya Agarwal

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चचेरी By Deepak sharma

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