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वही निशा ने विजय के बारे में और पूछताछ की तो डॉक्टर ने कहा कि ऐसे के केसों के मा...
एपिसोड 63 — “जुनून, जज़्बात और छुपा तूफ़ान” कहानी — अधूरी खिताब---रात की हवा में...
वैम्पायर स्टोरी – रात का अंधेरा गाँव के ऊपर छाया हुआ था। चाँद की रोशनी पुराने हव...
: : प्रकरण - 25 : : उस एडिटर का नाम जयेश सोनी था. उस...
जहा प्रेम की बात आती हैदो ही लोग सामने आते हैं एक लड़का और एक लड़की। पढ़ने वाले...
काल दर्शी - भाग 1: अनोखी शक्तितारा की सुबह हमेशा की तरह शुरू हुई। 23 साल की यह स...
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रागिनी की बात को सुनकर सभी हक्का बक्का रह जाता है ।रागिनी फिर कहती है --रागिनी :...
भूल-102 चुनावी फंडिंग और प्रचारभ्रष्टाचार का एक प्रमुख कारण चुनावी फंडिंग है। यह...
परिचय – Mana Shankara Vara Prasad Garu“Mana Shankara Vara Prasad Garu” एक आगामी...
ऋचा पैंसठ की हो चुकी, बच्चों के शादी-ब्याह --सब संपन्न ! तीसरी पीढ़ी भी बड़ी होने लगी पूरे -पूरे दिन लगी रहती सबकी फ़रमाइशें पूरी करने में बहुत आनंद मिलता उसे फिर बहुत सी बातें...
बहुत दिनो से सोच रहा था कि आज कल के रिश्तों में वो बात क्यूँ नहीं हैं जिस रिश्तों की कहानी मैं अपने पापा माँ या फिर दादादादी से सुनता था ...क्यों अब लोगों की रिश्ते निभाने की चाह स...
मुझे नही पता कि मै ये सब क्यूँ लिख रहा हूँ ! लेकिन दिल कह रहा है बस आखिरी बार ...बस एक बार । शायद इसीलिए मरना छोड़कर लिखने बैठ गया ।जी हाँ , मरना ! मै मरने जा रहा हूँ । पंखे...
रंग थे मेरे पास लेकिन… भाग 1हमारे जिंदगी में कुछ रंग इतने मायने रखते हैं कि जैसे वोही हमारे जीने का जरिया बन जाते हैं । है मेरी भी जिंदगी में ऐसे ही कुछ रंग थे,हा सही पढ़ा थे जो सिर...
1 - पानी 2 - भविष्य 3 - रोशनी
लाहौर से बाबू हरगोपाल आए तो हामिद घर का रहा ना घाट का। उन्हों ने आते ही हामिद से कहा। “लो भई फ़ौरन एक टैक्सी का बंद-ओ-बस्त करो।” हामिद ने कहा। “आप ज़रा तो आराम कर लीजिए। इतना लंबा सफ़...
मैं आज आप को चंद शिकारी औरतों के क़िस्से सुनाऊंगा। मेरा ख़याल है कि आप को भी कभी उन से वास्ता पड़ा होगा। मैं बंबई में था। फिल्मिस्तान से आम तौर पर बर्क़ी ट्रेन से छः बजे घर पहुंच जा...
दो तीन रोज़ से तय्यारे स्याह उक़ाबों की तरह पर फुलाए ख़ामोश फ़िज़ा में मंडला रहे थे। जैसे वो किसी शिकार की जुस्तुजू में हों सुर्ख़ आंधियां वक़तन फ़वक़तन किसी आने वाली ख़ूनी हादिसे का पैग़ाम...
सन इकत्तीस के शुरू होने में सिर्फ़ रात के चंद बरफ़ाए हुए घंटे बाक़ी थे। वो लिहाफ़ में सर्दी की शिद्दत के बाइस काँप रहा था। पतलून और कोट समेत लेटा था, लेकिन इस के बावजूद सर्दी की लहरें...
नाज़िम जब बांद्रा में मुंतक़िल हुआ तो उसे ख़ुशक़िसमती से किराए वाली बिल्डिंग में तीन कमरे मिल गए। इस बिल्डिंग में जो बंबई की ज़बान में चाली कहलाती है, निचले दर्जे के लोग रहते थे। छोटी...
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