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बर्बाद इश्कएपिसोड 16 — जब असली तूफ़ान आयामुंबई में कहते हैं कि जब एक मुसीबत जाती...
बचपन की मौलिकता और मौलिक प्रश्नों की मृत्यु (वेदांत 2.0 का एक दृष्टिकोण) म...
नमस्ते दोस्तों!मैं एक ऐसी कहानी लेकर आई हूँ, जो इतिहास से मिलती-जुलती ज़रूर है,...
लघु कथा रिश्ते दोपहर के 2 बजे थे। सुमन ने रसोई का काम खत्म किया और थक कर बेडरूम...
तीन दिन हो चुके थे। तीनों एक ही घर में थे, एक ही छत के नीचे, पर दिलों के बीच की...
अक्सर जब हम विद्यार्थी जीवन में होते हैं तो हमें अपने दोस्तों के साथ बिताये वो द...
रघु काका की आँखों से आंसुओं की धार बह निकली। उन्होंने गहरी सांस ली और कहानी को उ...
म्याओ नीचे गिरने वाले होती है तभी जेन उसे पकड़ लेती है। थोड़ी देर के लिए दोनों ए...
एपिसोड 13करीब एक घंटे का सफ़र तय करने के बाद बस आखिरकार लखनऊ के सबसे मशहूर सिटी...
अंधेरे में कोई है लेखक: विजय शर्मा एरी (Vijay Sharma Erry)रात के बारह बज चुक...
1)गृह प्रवेश--------------नंदिनी आज सुबह से ही उतावली थी । उसने पूजा की सारी तैयारी कर ली थी बस अपने माता- पिता के आने का इंतजार कर रही थी । नंदिनी के पति और उसके दोनों बच्चे उसके...
आज मे आपक एक कहानी सुनाती हु जिसका मे हिस्सा भी हु ओर किस्सा हु।साम के साडे सात बजे थेे ,घर मे चहल पहल थी, अचाानक घर मे एक इन्सान का आना हुआ , वो सीधे चलकर रसोईघर तक चला गया जह...
आकाश अहुजा , newspaper. Read कर रहे थे , अचानक उनकी नजर एक खबर पर आकर रुक गई । वह एक business news थी। उसमें कहा गया है कि excess inspection office ने आज एक नया मुकाम हा...
भाग 1 - यह कहानी सिंगल पेरेंटिंग की कहानी है जिसमें दिखाने की कोशिश की गयी है कि पत्नी के जाने के बाद एक अकेला पुरुष किस तरह अपनी बेटी को पालपोस कर बड़ा करता है ........
कहानी - मासूम की बद्दुआ Part 1 “ शिखा , कहाँ हो ? “ “ आ रही हूँ , दो मिनट और लगेगा विक्रम .मूसलाधार ब...
भाग - 1 कहानी - प्रतिशोध प्लस टू की बोर्ड परीक्षा समाप्त हो चुकी थी . रूपाली अपने क्लास की कुछ लड़कियों के साथ जबलपुर के भे...
ख़ुशियों का एहसास शनिवार होने के कारण दफ़्तर में छुट्टी थी. घर में था, पर तनाव बेहद ज़्यादा था. कुछ परेशानियाँ दफ़्तर की थीं, कुछ घर की. ज़िन्दगी जैसे एक बहुत बड़ी मुसीबत लगने लगी थी...
सन्देशा अरे सुनती हो कितना समय हो गया है उठ भी जाओ अब धूप सर पे चढने को है और महारानी अभी तक सो रही है। बगल के घर से - अम्मा आप ही ने चढ़ा रखा है सर पे वरना हम भी तो है घर का सारा क...
तुम और मैं — बचपन के कुछ किस्सों और कहानियों से निकाली गई एक छोटी सी लेखनी है। मैं Rahul Pandey ( poetpahadi ) आशा करता हूँ की आपको यह कोशिश ज़रूर पंसद आयेगी। और साथ ही साथ विनती क...
शाम होने को आयी थी | दोपहर से कभी तेज तो कभी हलकी हो रही बारिश अब थम चुकी थी | विनायक बाबू सुहानी शाम का मजा लेने बारिश थमते ही तुरंत अपने बिल्डिंग की छत पर पहुँच गए | आसमान अब साफ़...
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