लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • अंतर्जाल

    आज साकेत की बरसी थी। सोसाइटी के कम्यूनिटी हॉल में सब जमा थे। सभी ने कुछ क्षण मौन...

  • विंडो सीट

    It is a story which describes how a young girls get attracted to a charming boy...

  • इम्तहान - Story compitition

    टेलीफोन की ट्रिन-ट्रिन मेरे मस्तिष्क में अभी तक गूंज रही है। ओह! वेदना के दंश मे...

असली जिन By Saadat Hasan Manto

असली जिन लड़की की उम्र ज़्यादा से ज़्यादा आठ बरस थी। इकहरे जिस्म की, बड़ी दुबली पतली, नाज़ुक, पतले पतले नक़्शों वाली। गुड़िया सी। नाम उस का फ़र्ख़ंदा था। उस को अपने वालिद की मौत का दुख...

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शाम का सूरज - NATIONAL STORY COMPETITION JAN 18 By sangeeta sethi

वृद्ध जीवन की समस्या मार्मिक है बेटा प्रधान समाज में केवल बेटे की ही ज़िम्मेदारी नहीं है माँ-पिता को सम्भालना,बल्कि बेटियाँ भी आगे आ सकती हैं “ शाम का सूरज ” मेरे आसपास की ही नह...

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अलादीन का चिराग़ - National Story Competition - Jan By Neetu Singh Renuka

यह एक लेख है जो अपने अंदर की असीम ताकत का दर्शन कराता है। कभी-कभी एक छोटी सी घटना हमें ज़िंदगी के बड़े-बड़े पाठ पढ़ा जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ मेरे साथ भी।

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अंतर्जाल By Ashish Kumar Trivedi

आज साकेत की बरसी थी। सोसाइटी के कम्यूनिटी हॉल में सब जमा थे। सभी ने कुछ क्षण मौन रख कर साकेत को श्रृद्धांजली दी। उसके बाद रेनू ने बोलना शुरू किया।

आज मेरे बेटे को इस दुनिया से...

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जनवरी नेशनल स्टोरी प्रतियोगिता २०१८ By Sonia Gupta

नव विवाहिता की एक कहानी जिसमें उसको कोई ख़ुशी प्राप्त ही न हुई! हारकर उसको अपने घर सब कुछ बताना पड़ा, और आज डिप्रेशन का शिकार है वह ! माँ बाप भी परेशा !

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पुजारिन के बेटी By Ved Prakash Tyagi

भुवन जैसे ही मंदिर के दरवाजे में घुसा, वैसे ही अवनी माथा टेककर पीछे घूमी तो भुवन अवनी को देखता ही रह गया, और वह यह भी भूल गया कि वह मंदिर में आया है। चका-चौंध कर देने वाली खूबसूरती...

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विंडो सीट By Anju Gupta

It is a story which describes how a young girls get attracted to a charming boy who is not very serious towards their relationship. He leaves her without any reason and gets marrie...

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इम्तहान - Story compitition By Vimla Bhandari

टेलीफोन की ट्रिन-ट्रिन मेरे मस्तिष्क में अभी तक गूंज रही है। ओह! वेदना के दंश मेरे हृदय को बेधने लगे- जैसे किसी ने शरीर में से सारा रक्त निचोड़ लिया हो। निढ़ाल हुई मैं वहीं सोफे के क...

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निलंबन By Dr kavita Tyagi

चिकित्सा के क्षेत्र में फैले भ्रष्टाचार की मार्मिक कहानी है निलंबन । अस्पताल में जाते समय मरीज डॉक्टर को भगवान समझता है , किंतु वर्तमान समय में वही भगवान स्वार्थ के वशीभूत दवाई विक...

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लाईक, कॉमेंट और शेयर - National Story Competition-Jan By Rajesh Kumar Srivastav

यह कहानी अन्धविश्वास से सम्बंधित है कुछ लोग धर्म के प्रति इतने ज्यादे विश्वासी हो जाते है कि उन्हें इसके आगे-पीछे कुछ नहीं दीखता धर्म के प्रति अत्यधिक आसक्ति लोगों को कमजोर बन...

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विदाई - By Neetu Singh Renuka

एक दुल्हन की विदाई और एक शहीद की विदाई में कितना अंतर होता है। मगर जब दोनों साथ-साथ करना पड़े तो क्या अंतर रह जाता है। देखें उमा की ऐसी ही हृदय विदारक स्थिति ...

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सरनेम By Kavita Nandan

यह कहानी समाज में फैले जातिवाद के बारे में हैं. दलितों की भलाई और उनकी शिक्षा के नाम पर अपनी जेबें भरने वाली संस्थाओं और लोगों की बात करती हुई यह कहानी बताती है किस तरह पढ़े लिखे लो...

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टुकड़ा-टुकड़ा ख़त By Dinesh Tripathi 'Shams'

किशोर मनोविज्ञान को उकेरती यह कहानी पुरुष सत्तात्मक समाज के दोहरे मापदंडों को उजागर करती है । बिना लाउड हुए ये कहानी नारी समानता का संदेश देती है ।
(राष्ट्रीय प्रतियोगिता हेतु कहा...

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कॉलेज की मस्ती By Ved Prakash Tyagi

इसका फैसला बाकी मित्रों ने दोनों के नाम की पर्ची डाल कर किया और पर्ची विनोद से ही उठवाई, पर्ची खोली तो उसमे रिया का नाम आया, अब रिया खुश होकर अपनी मर्जी से नरेंद्र के पास से उठकर...

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फौजी की बेटी By Dr kavita Tyagi

कानून की दृष्टि में बेटा-बेटी को समानता प्राप्त होने के बावजूद आज भी समाज की सोच में पूर्ण परिवर्तन नहीं दिखाई पड़ता है । फौजी की बेटी एक यथार्थ घटना पर आधारित कहानी है जिसमें मा...

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दाँत By Neetu Singh Renuka

सुमंगली ने जीवन पर्यंत दिया ही, मगर लिया कुछ नहीं। अपनी वृद्धावस्था में यदि वह अपने लिए कुछ सहेजना चाहे भी, तो परिवार अपनी ज़रूरतों के आगे उसकी उस इच्छा का भी मान रखने को तैयार नहीं...

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मंटो की कहानियां By Saadat Hasan Manto

सआदत हसन मंटो का जन्म- 11 मई, 1912 को समराला, पंजाब में हुआ था। आप कहानीकार और लेखक थे। मंटो ने फ़िल्म और रेडियो पटकथा लेखन व पत्रकारिता भी की। 18 जनवरी, 1955 को लाहौर में इस कहानी...

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कबूतर बाज By Ved Prakash Tyagi

बच्चू का समय खराब चल रहा था, एक एक करके सभी दुकाने शर्तों में हारता जा रहा था, जुआ खेलने की आदत और पड़ गई थी। बच्चू की इन आदतों से तंग आकर उसकी धर्मपत्नी राम वती बीमार रहने लगी।

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बिन पानी सब सून By Dr kavita Tyagi

पानी के अभाव से उत्पन्न मानसिक विकृति एवं दूरदर्शिता को दर्शाती इस कहानी में शहर की एक कॉलोनी में रहने वाली आयुषी पानी को लेकर छिड़े विवाद में अपने माता पिता को खोने के पश्चात छोटे...

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जानकी By Neetu Singh Renuka

यह सदियों से होता आया है कि निर्मूल लाँछनों का दंश स्त्रियों को ही झेलना पड़ता है। किसी और पुरूष की उद्दंडता के कारण पग-पग पर सतर्कता से चलने वाली स्त्री को भी कब और कैसे समाज से घो...

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मेरा विश्वास By Ved Prakash Tyagi

मेरी सतर्कता पूरे क्षेत्र के लिए तब वरदान बन गयी जब राम मंदिर व बाबरी मस्जिद ढांचा गिराए जाने के बाद पूरे क्षेत्र में जगह जगह हिन्दू मुस्लिम दंगे हो रहे थे।

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बारिश वाला पास्ता By Sangeeta Gandhi

आज के दौर में एक कामकाजी स्त्री व उसकी बेटी के एक दिन की संवेदना की कहानी। कामकाजी स्त्रियों व उनके बच्चों को किस तरह के उतार चढ़ाव से गुजरना पड़ता है ।कौन कौन सी तकलीफें आती हैं ।उन...

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मीरा भक्तिन By Dr kavita Tyagi

प्रस्तुत कहानी मीरा भक्तिन हमारे समाज की उस संस्कृति से अवगत कराती है, जहां आज भी सोलहवीं शताब्दी की धारणाएँ प्रचलित है । समय के प्रवाह के साथ युग बदल चुका है, किंतु यहाँँ पर पुरुष...

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फुल-रानी By Manish Gode

फुलरानी... हमारे जीवन में खुशीयाँ लानेवाली, सविता की सूनी गोद भरने वाली...! उसे ‘माँ ‘ बनाने वाली, हमारे सपनों को पुरा करने वाली... हमारी... फुलरानी...!!!

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दूसरा खाता By Neetu Singh Renuka

हम अपने जीवन में अपना बैंक खाता भरने में इतना मशगूल हो गए हैं कि अपने दूसरे खाते की ओर ध्यान ही नहीं जाता है। मगर नत्थूराम नहीं भूले हैं। क्या है ये दूसरा खाता

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सफाई वाला By Ved Prakash Tyagi

एक दिन एक ड्राईवर रोते हुए सूरज के पास काम मांगने आया, पहले तो सूरज ने मना कर दिया लेकिन वह व्यक्ति सूरज के पैरों में गिर कर गिड्गिड़ाने लगा। जो व्यक्ति धार्मिक प्रवृति का हो, दया भ...

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अपना घर By Dr kavita Tyagi

प्रस्तुत कहानी मीरा भक्तिन हमारे समाज की उस संस्कृति से अवगत कराती है, जहां आज भी सोलहवीं शताब्दी की धारणाएं प्रचलित हैं । समय के प्रवाह के साथ युग बदल चुका है, किंतु यहां पर पुर...

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फाइल By Neetu Singh Renuka

हमारे यहाँ भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी मज़बूत हैं कि इसने पूरे देश को खोखला कर दिया है। ऐसे में सौम्या हैरान है कि एक छोटी सी पहल जो होने जा रही थी तो भ्रष्टाचारियों ने बचन की क्या तरकी...

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लालपान की बेगम By Phanishwar Nath Renu

लालपान की बेगम फणीश्वरनाथ रेणु 'क्यों बिरजू की माँ, नाच देखने नहीं जाएगी क्या?' बिरजू की माँ शकरकंद उबाल कर बैठी मन-ही-मन कुढ़ रही थी अपने आँगन में। सात साल का लड़का बिरजू...

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पहचान By Rajesh Zarpure

पहचान राजेश झरपुरे जब सुरेश मास्साब बस में चढ़े तो ड्राइविंग सीट पर मरियल सा आदमी बैठा दिखा। हालाँकि रोज़ कोई और उस सीट पर बैठा होता। वे उसे अच्छी तरह जानते थे। उसका नाम भूरा है। वह...

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पार्वती चाची By Neerja Dewedy

पार्वती चाची नीरजा द्रिवेदी पार्वती चाची नई नवेली दुल्हन के स्वागत की तैयारी मे व्यस्त थीँ. कितने चाव से अपने मझले बेटे के लिये रिश्ता पक्का किया था. पहली बार इस गाँव मे एक ब...

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जितना छोड़ोगे उतना जोड़ोगे By Ved Prakash Tyagi

लालाजी की समझ में बात आ गयी, पंडित जी वापस गंगा घाट चले गए और लालाजी सब कुछ दान करके भगत बन गए जिनको लोगों ने नरसी भगत कहा, वही नरसी भगत जिसके पास अपनी बहन के यहाँ भात देने के लिए...

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वस्तुगत By Dr kavita Tyagi

वस्तुगत कहानी में एक बेटी द्वारा उन रूढ़ियों पर प्रखर प्रहार किया गया है, जो संस्कृति एवं परंपरा की आड़ लेकर उसको अस्तित्वहीन बनाती हैं । वस्तुगत की बेटी कन्यादान जैसी देशव्यापी...

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रसप्रिया By Phanishwar Nath Renu

रसप्रिया - (फणीश्वरनाथ रेणु)

धूल में पड़े कीमती पत्थर को देख कर जौहरी की आँखों में एक नई झलक झिलमिला गई - अपरूप-रूप!

चरवाहा मोहना छौंड़ा को देखते ही पँचकौड़ी मिरदंगिया की मुँ...

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लिफ्ट By Neetu Singh Renuka

हमने अक्सर समाज में और परिवारों में पीढ़ियों का अंतर देखा है। हमने पाया है कि कैसे उनकी आवश्यकताओं और अपेक्षाओं में कितना गहरा अंतर होता है। आइए एक लिफ्ट में खड़े एक ही कार्यलय की वि...

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काश वो दिन वापस आ जाते........ By zeba Praveen

अनसुनी कहानी !
ये एक काल्पनिक कथा है और इसका वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नहीं है,इस कहानी का उदेश्य किसी के अहसासों को ठेस पहुँचाना नहीं है बल्कि मैं अपनी काल्पनिक रचनाओं को लोगो त...

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पोली आंटी की बगिया By maheshwar sharma

और डेनियल ने क्रिसमस मनाया


काफी दिन हो गए थे डेनियल स्कूल नहीं आ रहा था। डेनियल स्कूल क्यों नहीं आ रहा है इस बात की चिंता किसी को नहीं थी। न टीचर्स को न क्लास के दूसरे बच्चों...

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प्रभात की ऊषा By Ved Prakash Tyagi

शाम को जब ऊषा कार्यालय से वापस आई तो उसने प्रभात की माँ को अपने घर में बैठा पाया। घर में घुसते ही प्रभात की माँ ने ऊषा को अपने पास बिठा लिया एवं कहने लगी, बेटी! मैंने तेरे जैसी त...

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मुआवजा By Dr kavita Tyagi

प्रस्तुत कहानी मुआवजा में रूपा और प्रेयस की प्रेम कहानी के माध्यम से विकृत मानसिकता वाले धनाढ्य लोगों की संवेदनहीनता और कपटाचरण को प्रकाशित किया गया है, जिसमें एक निम्न मध्यवर्गी...

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मारे गये गुलफाम By Phanishwar Nath Renu

मारे गये गुलफाम एक कहानी है जिसके रचायिता फणीश्वर नाथ रेणु हैं। इसपर हिन्दी में एक फिल्म तीसरी कसम बनाई गई है

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तंग गलियों से भी दिखता है आकाश By Bharatiya Jnanpith

तंग गलियोंं से भी दिखता है आकाश करीब दो दशक पहले यादवेन्द्र जी से परिचय विज्ञान लेखक के रूप में हुआ था और इस रूप में भी मैं उनका मुरीद था। फिर पिछले कुछ वर्षों में उनके एक नये रूप...

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नि:संतान By Neetu Singh Renuka

मनुष्य होने के नाते हमें जानवरों से अधिक संवेदनशील एवं ममतामयी होना चाहिए। मगर होता बिल्कुल उल्टा है। जितनी क्रूरता मनुष्य करता है यदि जानवर आपका किया आपको लौटाए तो

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और वो शहीद हो गयी By Ved Prakash Tyagi

आरती के मन में अब एक बलिदान की भावना भर गयी थी जिससे उसके अंदर का भाय समाप्त हो गया था अतः वह वहाँ से बाहर निकाल आई। बाहर बैठे पान वाले और उसके दो आदमियों ने उसे पकड़ने की कोशिश की...

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असमंजस By Dr kavita Tyagi

संविधान द्वारा बेटे-बेटी को समान अधिकार देने के बावजूद हमारे समाज एवं परिवार में बेटियों को पुत्र-सम-भाव से स्वीकार्यता नहीं मिल सकी है । पैतृक संपत्ति के विषय में कहें, तो वे व्य...

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असली जिन By Saadat Hasan Manto

असली जिन लड़की की उम्र ज़्यादा से ज़्यादा आठ बरस थी। इकहरे जिस्म की, बड़ी दुबली पतली, नाज़ुक, पतले पतले नक़्शों वाली। गुड़िया सी। नाम उस का फ़र्ख़ंदा था। उस को अपने वालिद की मौत का दुख...

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शाम का सूरज - NATIONAL STORY COMPETITION JAN 18 By sangeeta sethi

वृद्ध जीवन की समस्या मार्मिक है बेटा प्रधान समाज में केवल बेटे की ही ज़िम्मेदारी नहीं है माँ-पिता को सम्भालना,बल्कि बेटियाँ भी आगे आ सकती हैं “ शाम का सूरज ” मेरे आसपास की ही नह...

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अलादीन का चिराग़ - National Story Competition - Jan By Neetu Singh Renuka

यह एक लेख है जो अपने अंदर की असीम ताकत का दर्शन कराता है। कभी-कभी एक छोटी सी घटना हमें ज़िंदगी के बड़े-बड़े पाठ पढ़ा जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ मेरे साथ भी।

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अंतर्जाल By Ashish Kumar Trivedi

आज साकेत की बरसी थी। सोसाइटी के कम्यूनिटी हॉल में सब जमा थे। सभी ने कुछ क्षण मौन रख कर साकेत को श्रृद्धांजली दी। उसके बाद रेनू ने बोलना शुरू किया।

आज मेरे बेटे को इस दुनिया से...

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जनवरी नेशनल स्टोरी प्रतियोगिता २०१८ By Sonia Gupta

नव विवाहिता की एक कहानी जिसमें उसको कोई ख़ुशी प्राप्त ही न हुई! हारकर उसको अपने घर सब कुछ बताना पड़ा, और आज डिप्रेशन का शिकार है वह ! माँ बाप भी परेशा !

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पुजारिन के बेटी By Ved Prakash Tyagi

भुवन जैसे ही मंदिर के दरवाजे में घुसा, वैसे ही अवनी माथा टेककर पीछे घूमी तो भुवन अवनी को देखता ही रह गया, और वह यह भी भूल गया कि वह मंदिर में आया है। चका-चौंध कर देने वाली खूबसूरती...

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विंडो सीट By Anju Gupta

It is a story which describes how a young girls get attracted to a charming boy who is not very serious towards their relationship. He leaves her without any reason and gets marrie...

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इम्तहान - Story compitition By Vimla Bhandari

टेलीफोन की ट्रिन-ट्रिन मेरे मस्तिष्क में अभी तक गूंज रही है। ओह! वेदना के दंश मेरे हृदय को बेधने लगे- जैसे किसी ने शरीर में से सारा रक्त निचोड़ लिया हो। निढ़ाल हुई मैं वहीं सोफे के क...

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निलंबन By Dr kavita Tyagi

चिकित्सा के क्षेत्र में फैले भ्रष्टाचार की मार्मिक कहानी है निलंबन । अस्पताल में जाते समय मरीज डॉक्टर को भगवान समझता है , किंतु वर्तमान समय में वही भगवान स्वार्थ के वशीभूत दवाई विक...

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लाईक, कॉमेंट और शेयर - National Story Competition-Jan By Rajesh Kumar Srivastav

यह कहानी अन्धविश्वास से सम्बंधित है कुछ लोग धर्म के प्रति इतने ज्यादे विश्वासी हो जाते है कि उन्हें इसके आगे-पीछे कुछ नहीं दीखता धर्म के प्रति अत्यधिक आसक्ति लोगों को कमजोर बन...

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विदाई - By Neetu Singh Renuka

एक दुल्हन की विदाई और एक शहीद की विदाई में कितना अंतर होता है। मगर जब दोनों साथ-साथ करना पड़े तो क्या अंतर रह जाता है। देखें उमा की ऐसी ही हृदय विदारक स्थिति ...

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सरनेम By Kavita Nandan

यह कहानी समाज में फैले जातिवाद के बारे में हैं. दलितों की भलाई और उनकी शिक्षा के नाम पर अपनी जेबें भरने वाली संस्थाओं और लोगों की बात करती हुई यह कहानी बताती है किस तरह पढ़े लिखे लो...

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टुकड़ा-टुकड़ा ख़त By Dinesh Tripathi 'Shams'

किशोर मनोविज्ञान को उकेरती यह कहानी पुरुष सत्तात्मक समाज के दोहरे मापदंडों को उजागर करती है । बिना लाउड हुए ये कहानी नारी समानता का संदेश देती है ।
(राष्ट्रीय प्रतियोगिता हेतु कहा...

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कॉलेज की मस्ती By Ved Prakash Tyagi

इसका फैसला बाकी मित्रों ने दोनों के नाम की पर्ची डाल कर किया और पर्ची विनोद से ही उठवाई, पर्ची खोली तो उसमे रिया का नाम आया, अब रिया खुश होकर अपनी मर्जी से नरेंद्र के पास से उठकर...

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फौजी की बेटी By Dr kavita Tyagi

कानून की दृष्टि में बेटा-बेटी को समानता प्राप्त होने के बावजूद आज भी समाज की सोच में पूर्ण परिवर्तन नहीं दिखाई पड़ता है । फौजी की बेटी एक यथार्थ घटना पर आधारित कहानी है जिसमें मा...

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दाँत By Neetu Singh Renuka

सुमंगली ने जीवन पर्यंत दिया ही, मगर लिया कुछ नहीं। अपनी वृद्धावस्था में यदि वह अपने लिए कुछ सहेजना चाहे भी, तो परिवार अपनी ज़रूरतों के आगे उसकी उस इच्छा का भी मान रखने को तैयार नहीं...

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मंटो की कहानियां By Saadat Hasan Manto

सआदत हसन मंटो का जन्म- 11 मई, 1912 को समराला, पंजाब में हुआ था। आप कहानीकार और लेखक थे। मंटो ने फ़िल्म और रेडियो पटकथा लेखन व पत्रकारिता भी की। 18 जनवरी, 1955 को लाहौर में इस कहानी...

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कबूतर बाज By Ved Prakash Tyagi

बच्चू का समय खराब चल रहा था, एक एक करके सभी दुकाने शर्तों में हारता जा रहा था, जुआ खेलने की आदत और पड़ गई थी। बच्चू की इन आदतों से तंग आकर उसकी धर्मपत्नी राम वती बीमार रहने लगी।

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बिन पानी सब सून By Dr kavita Tyagi

पानी के अभाव से उत्पन्न मानसिक विकृति एवं दूरदर्शिता को दर्शाती इस कहानी में शहर की एक कॉलोनी में रहने वाली आयुषी पानी को लेकर छिड़े विवाद में अपने माता पिता को खोने के पश्चात छोटे...

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जानकी By Neetu Singh Renuka

यह सदियों से होता आया है कि निर्मूल लाँछनों का दंश स्त्रियों को ही झेलना पड़ता है। किसी और पुरूष की उद्दंडता के कारण पग-पग पर सतर्कता से चलने वाली स्त्री को भी कब और कैसे समाज से घो...

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मेरा विश्वास By Ved Prakash Tyagi

मेरी सतर्कता पूरे क्षेत्र के लिए तब वरदान बन गयी जब राम मंदिर व बाबरी मस्जिद ढांचा गिराए जाने के बाद पूरे क्षेत्र में जगह जगह हिन्दू मुस्लिम दंगे हो रहे थे।

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बारिश वाला पास्ता By Sangeeta Gandhi

आज के दौर में एक कामकाजी स्त्री व उसकी बेटी के एक दिन की संवेदना की कहानी। कामकाजी स्त्रियों व उनके बच्चों को किस तरह के उतार चढ़ाव से गुजरना पड़ता है ।कौन कौन सी तकलीफें आती हैं ।उन...

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मीरा भक्तिन By Dr kavita Tyagi

प्रस्तुत कहानी मीरा भक्तिन हमारे समाज की उस संस्कृति से अवगत कराती है, जहां आज भी सोलहवीं शताब्दी की धारणाएँ प्रचलित है । समय के प्रवाह के साथ युग बदल चुका है, किंतु यहाँँ पर पुरुष...

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फुल-रानी By Manish Gode

फुलरानी... हमारे जीवन में खुशीयाँ लानेवाली, सविता की सूनी गोद भरने वाली...! उसे ‘माँ ‘ बनाने वाली, हमारे सपनों को पुरा करने वाली... हमारी... फुलरानी...!!!

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दूसरा खाता By Neetu Singh Renuka

हम अपने जीवन में अपना बैंक खाता भरने में इतना मशगूल हो गए हैं कि अपने दूसरे खाते की ओर ध्यान ही नहीं जाता है। मगर नत्थूराम नहीं भूले हैं। क्या है ये दूसरा खाता

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सफाई वाला By Ved Prakash Tyagi

एक दिन एक ड्राईवर रोते हुए सूरज के पास काम मांगने आया, पहले तो सूरज ने मना कर दिया लेकिन वह व्यक्ति सूरज के पैरों में गिर कर गिड्गिड़ाने लगा। जो व्यक्ति धार्मिक प्रवृति का हो, दया भ...

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अपना घर By Dr kavita Tyagi

प्रस्तुत कहानी मीरा भक्तिन हमारे समाज की उस संस्कृति से अवगत कराती है, जहां आज भी सोलहवीं शताब्दी की धारणाएं प्रचलित हैं । समय के प्रवाह के साथ युग बदल चुका है, किंतु यहां पर पुर...

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फाइल By Neetu Singh Renuka

हमारे यहाँ भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी मज़बूत हैं कि इसने पूरे देश को खोखला कर दिया है। ऐसे में सौम्या हैरान है कि एक छोटी सी पहल जो होने जा रही थी तो भ्रष्टाचारियों ने बचन की क्या तरकी...

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लालपान की बेगम By Phanishwar Nath Renu

लालपान की बेगम फणीश्वरनाथ रेणु 'क्यों बिरजू की माँ, नाच देखने नहीं जाएगी क्या?' बिरजू की माँ शकरकंद उबाल कर बैठी मन-ही-मन कुढ़ रही थी अपने आँगन में। सात साल का लड़का बिरजू...

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पहचान By Rajesh Zarpure

पहचान राजेश झरपुरे जब सुरेश मास्साब बस में चढ़े तो ड्राइविंग सीट पर मरियल सा आदमी बैठा दिखा। हालाँकि रोज़ कोई और उस सीट पर बैठा होता। वे उसे अच्छी तरह जानते थे। उसका नाम भूरा है। वह...

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पार्वती चाची By Neerja Dewedy

पार्वती चाची नीरजा द्रिवेदी पार्वती चाची नई नवेली दुल्हन के स्वागत की तैयारी मे व्यस्त थीँ. कितने चाव से अपने मझले बेटे के लिये रिश्ता पक्का किया था. पहली बार इस गाँव मे एक ब...

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जितना छोड़ोगे उतना जोड़ोगे By Ved Prakash Tyagi

लालाजी की समझ में बात आ गयी, पंडित जी वापस गंगा घाट चले गए और लालाजी सब कुछ दान करके भगत बन गए जिनको लोगों ने नरसी भगत कहा, वही नरसी भगत जिसके पास अपनी बहन के यहाँ भात देने के लिए...

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वस्तुगत By Dr kavita Tyagi

वस्तुगत कहानी में एक बेटी द्वारा उन रूढ़ियों पर प्रखर प्रहार किया गया है, जो संस्कृति एवं परंपरा की आड़ लेकर उसको अस्तित्वहीन बनाती हैं । वस्तुगत की बेटी कन्यादान जैसी देशव्यापी...

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रसप्रिया By Phanishwar Nath Renu

रसप्रिया - (फणीश्वरनाथ रेणु)

धूल में पड़े कीमती पत्थर को देख कर जौहरी की आँखों में एक नई झलक झिलमिला गई - अपरूप-रूप!

चरवाहा मोहना छौंड़ा को देखते ही पँचकौड़ी मिरदंगिया की मुँ...

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लिफ्ट By Neetu Singh Renuka

हमने अक्सर समाज में और परिवारों में पीढ़ियों का अंतर देखा है। हमने पाया है कि कैसे उनकी आवश्यकताओं और अपेक्षाओं में कितना गहरा अंतर होता है। आइए एक लिफ्ट में खड़े एक ही कार्यलय की वि...

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काश वो दिन वापस आ जाते........ By zeba Praveen

अनसुनी कहानी !
ये एक काल्पनिक कथा है और इसका वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नहीं है,इस कहानी का उदेश्य किसी के अहसासों को ठेस पहुँचाना नहीं है बल्कि मैं अपनी काल्पनिक रचनाओं को लोगो त...

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पोली आंटी की बगिया By maheshwar sharma

और डेनियल ने क्रिसमस मनाया


काफी दिन हो गए थे डेनियल स्कूल नहीं आ रहा था। डेनियल स्कूल क्यों नहीं आ रहा है इस बात की चिंता किसी को नहीं थी। न टीचर्स को न क्लास के दूसरे बच्चों...

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प्रभात की ऊषा By Ved Prakash Tyagi

शाम को जब ऊषा कार्यालय से वापस आई तो उसने प्रभात की माँ को अपने घर में बैठा पाया। घर में घुसते ही प्रभात की माँ ने ऊषा को अपने पास बिठा लिया एवं कहने लगी, बेटी! मैंने तेरे जैसी त...

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मुआवजा By Dr kavita Tyagi

प्रस्तुत कहानी मुआवजा में रूपा और प्रेयस की प्रेम कहानी के माध्यम से विकृत मानसिकता वाले धनाढ्य लोगों की संवेदनहीनता और कपटाचरण को प्रकाशित किया गया है, जिसमें एक निम्न मध्यवर्गी...

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मारे गये गुलफाम By Phanishwar Nath Renu

मारे गये गुलफाम एक कहानी है जिसके रचायिता फणीश्वर नाथ रेणु हैं। इसपर हिन्दी में एक फिल्म तीसरी कसम बनाई गई है

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तंग गलियों से भी दिखता है आकाश By Bharatiya Jnanpith

तंग गलियोंं से भी दिखता है आकाश करीब दो दशक पहले यादवेन्द्र जी से परिचय विज्ञान लेखक के रूप में हुआ था और इस रूप में भी मैं उनका मुरीद था। फिर पिछले कुछ वर्षों में उनके एक नये रूप...

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नि:संतान By Neetu Singh Renuka

मनुष्य होने के नाते हमें जानवरों से अधिक संवेदनशील एवं ममतामयी होना चाहिए। मगर होता बिल्कुल उल्टा है। जितनी क्रूरता मनुष्य करता है यदि जानवर आपका किया आपको लौटाए तो

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और वो शहीद हो गयी By Ved Prakash Tyagi

आरती के मन में अब एक बलिदान की भावना भर गयी थी जिससे उसके अंदर का भाय समाप्त हो गया था अतः वह वहाँ से बाहर निकाल आई। बाहर बैठे पान वाले और उसके दो आदमियों ने उसे पकड़ने की कोशिश की...

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असमंजस By Dr kavita Tyagi

संविधान द्वारा बेटे-बेटी को समान अधिकार देने के बावजूद हमारे समाज एवं परिवार में बेटियों को पुत्र-सम-भाव से स्वीकार्यता नहीं मिल सकी है । पैतृक संपत्ति के विषय में कहें, तो वे व्य...

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