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इधर उधर की By Kishanlal Sharma

इधर उधर की में मैं अपने वो अनुभव या घटनाएं शेयर करूंगा जिनका मैं चश्मदीद रहा या जिनको मैने सुनाप पहले मैं आपको सन2008 की घटना सुनाता हूँ।

उस समय मे आगरा फोर्ट पर DCI के पद पर था...

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रक्तरेखा By Pappu Maurya

पत्तों की सरसराहट थम चुकी थी।

आसमान फट पड़ा था — और मानो देवताओं के क्रोध से बरस रहा था पानी।

हर पेड़, हर झाड़ी, हर तिनका काँप रहा था। हवा में मिट्टी, कीचड़ और काई की गंध घुल...

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प्रयाग यात्रा By संदीप सिंह (ईशू)

प्रयागराज गंगा-यमुना-सरस्वती अर्थात त्रिवेणी या संगम की पावन नगरी है।

प्रयागराज को लोग "तीर्थों का राजा " (तीर्थराज) के नाम से जानते हैं।

हिन्दू मान्यता के अनुसार, यह...

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ब्रम्हदैत्य By mayur pokale

रात के 12 बज चुके थे, एक टेबल लैंप जल रहा था और रिया अभी भी पढ़ाई में व्यस्त थी; क्योंकि कल से उसके बीकॉम के फाइनल ईयर के एग्जाम्स शुरू होने वाले थे, रिया की मां सुनीता और छोटा भाई...

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मेगा 325 By Harish Kumar Amit

मेगा 325 हरीश कुमार 'अमित' (1) ''वैरी-वैरी हैप्पी बर्थडे, बड़े दादू।'' कहते हुए शशांक ने दादा जी को जगाया. शशांक की आवाज़ सुनते ही बड़े दादा जी एकदम से उठ गए....

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मिडिल बर्थ By Ajay Kumar Awasthi

रात काफी हो चुकी थी ट्रेन अभी अभी प्लेटफार्म में आकर रुकी थी और मैं अपनी बर्थ पर आकर बैठ गया ,मेरी लोवर बर्थ थी । मेरे सामने की मिडिल बर्थ पर एक लड़की बैठी थी,वो अब तक जाग रही थी और...

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भुइंधर का मोबाइल By Pradeep Shrivastava

भुइंधर का मोबाइल - प्रदीप श्रीवास्तव भाग १ अम्मा आज विवश होकर आपको यह पत्र लिख रही हूँ , क्योंकि मोबाइल पर यह सारी बातें कह पाने की हिम्मत मैं नहीं जुटा पाई। आप जानती हैं कि मैं ऐस...

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सन्नाटे में शनाख़्त By Pradeep Shrivastava

उसने अचानक ही उस पर घूँसे-लात बरसा कर, उसे बेड से नीचे धकेल दिया। टाइल्स लगे फ़र्श पर अकस्मात्‌ गिरने से उसके सिर में गहरी चोट आ गई है। ख़ून के धब्बे पड़ने लगे हैं। उसने पेट पर लात इत...

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ईश्वर चुप है By Neela Prasad

ईश्वर चुप है नीला प्रसाद (1) रंजना मंदिर की सीढ़ियां चढ़ती ठिठक रही है। ईश्वर से उसका रिश्ता बहुत पेचीदा होता जा रहा है। उसे इस रिश्ते को रेशे - रेशे कर समझने का मन होता है। हर बार...

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दास्तानगो By Priyamvad

अंतिम फ़्रांसीसी उपनिवेश के अंतिम अवशेषों पर, पूरे चाँद की रात का पहला पहर था जब यह द्घटना द्घटी। समुद्र की काली और खुरदरी चट्टानों पर चिपके केकड़े किनारे की ओर सरकना शुरू कर चुके थे...

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न... किसी से कम नहीं ट्रेंडी By Pranava Bharti

1 अंतर्राष्ट्रीय -कला-संस्थान के हॉल में तालियों की गड़गड़ाहट सुनकर सुगंधा की आँखों में पानी छलक आया | विश्वास होने, न होने की मानसिकता में झूलती सुगंधा को विश्वास ही नहीं हो रहा था...

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तक्सीम By Pragya Rohini

ये शहर भी अजीब हैं न अनोखे? लाख गाली दे दिया करें रोज मैं और तू इन्हें पर इनके बिना तेरे-मेरे जैसों का कोई गुजारा है बोल? कितने साल बीत गए हम दोनों को यहां आए। अब तो ये ही दूसरा घर...

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छाया भ्रम या जाल By Meenakshi Mini

शहर के शोर-शराबे से बहुत दूर, एक शांत और आधुनिक अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स की नौवीं मंजिल पर, छाया ने अपनी ज़िंदगी की एक नई पारी शुरू की थी. कंक्रीट के इस जंगल में, उसका नया 2BHK फ्लैट...

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पतझड़ के बाद - एक सच्चा इंतजार By Neha kariyaal

एक छोटा-सा शहर, जो खूबसूरत पहाड़ों पर बसा था। वहाँ का मौसम कुछ ऐसा था, जैसे मन को सुकून देने वाली कोई पुरानी धुन — चिड़ियों की चहचहाहट, ठंडी हवा की सरसराहट और आसमान में तैरते बादल।...

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बारह पन्ने - अतीत की शृंखला से By Mamta

बारह पन्ने अतीत की शृंखला के बचपन इंसान की ज़िंदगी का सबसे सुनहरा दौर जिसे शायद अंतिम साँस तक नही भुलाया जा सकता ।जीवन का सबसे स्वर्णिम काल ,चिंतारहित खेलना खाना ,बेपरवाह सी ज...

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लाल बैग By BleedingTypewriter

रात का समय था। एक बूढ़ा आदमी अपने पुराने से घर में अकेला बैठा था। सामने टीवी पर तेज़ आवाज़ में समाचार चल रहा था।

“आज शहर के सबसे बड़े बैंक में हुई 5 करोड़ की चोरी से हड़कंप मच ग...

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मानो या न मानो By Koushik B

ये बात २००५ की तब हम लखनऊ इसी आलमबाग रेलवे क्वार्टर में रहते थे। हमारा परिवार तीसरे माले में रहता था। एक रात सोटे हुए अचानक मेरी आंख खुल गई। में बाथरूम की तरफ से बड़ा तो मुझे किसी...

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समरादित्य महाकथा By Kapil Jain

समरादित्य महाकथा एक 2 आत्माओ की कहानी है कि कैसे 2 जीव अपने अपने व्यवहार में बदल जाते है और सिर्फ एक छोटी गलतफहमी के कारण दोनो आत्माओ को 9 भव का सफर करना पड़ता है उसमे से एक आत्मा अ...

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काली किताब. By Shailesh verma

शैली: रहस्य, थ्रिलर, अलौकिक

अध्याय 1: पुरानी गलियों का रहस्य

लखनऊ की पुरानी चौक बाज़ार में कई गलियाँ ऐसी हैं जो मानो समय के साथ थम गई हों। एक ऐसी ही गली है — “क़ाफ़िला गली”,...

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महाराजा रणजीत सिंह By Sudhir Sisaudiya

आदिकाल से ही भारत देश में, जीवन के हर क्षेत्र में, असाधारण व्यक्तियों का प्रादुर्भाव होता रहा है। हमारा इतिहास ऐसे महान लोगों के नामों से भरा पड़ा है; जिनकी कला, साहित्य, राजनीति,...

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कहानी किससे ये कहें! By Neela Prasad

कहानी किससे ये कहें! नीला प्रसाद (1) 31 अगस्त 1991. सुबह-सुबह आसमान में छाए घने काले बादल इंगित कर रहे हैं कि किसी भी क्षण वर्षा शुरू हो जा सकती है। लगभग साढ़े तीन दशक लंबी नौकरी क...

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कापुरुष By S Sinha

“ अरे जवान लड़के पर इस तरह कोई हाथ उठाता है क्या ? . “ माँ सीता देवी ने अपने बड़े बेटे डॉक्टर सोनी से कहा .

सोनी को अपने छोटे भाई हीरा के गाल पर जोरदार तमाचा लगाते देख...

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एमी By Pradeep Shrivastava

मुझे बाइक चलाना बहुत पसंद है। बहुत ज़्यादा। जुनून की हद तक। जब मैं एट स्टैंडर्ड में पहुँची तो स्कूल जाने के लिए फ़ादर ने लेडी बर्ड साइकिल दी। उन्हें यक़ीन था कि नई साइकिल पाकर मैं ख़ु...

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हनुमान शतक- समीक्षा एवं पद्य By Ram Bharose Mishra

हनुमान शतक सवैया कविता और दोहों में रचा गया 100 छंदों का ग्रंथ है। जो महा कवि करुणेश "द्वारका" द्वारा सम्वत 2012 के वैशाख माह की तृतीया तिथि रविवार को रचे गए छंदों का संकलन...

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THIEF BECOME A PRESEDENT By saif Ansari

गायब हैंडल का रहस्य
सुबह के 10 बजे थे। बरेली के एक व्यस्त बैंक में लोगों की ऐसी भीड़ थी, मानो कुंभ का मेला लगा हो। सब अपने-अपने काम में ऐसे डूबे थे, जैसे चींटी शक्कर के दाने पर। कि...

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एहसास By Vartikareena

वो एक कॉलेज का एंट्रेंस था । सारे स्टुडेंट कॉलेज से बाहर आ रहे थे । एक लड़का और लड़की दोनों साथ में बाहर आ रहे थे । लड़की के चेहरे पर कुछ परेशानी थी और लड़का! वो तो कहीं खोया हुआ थ...

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खेल खेल में - जादूई By Kaushik Dave

"खेल खेल में - जादूई"जिंदगी एक खेल है ऐसा कुछ लोग मानते हैं।लेकिन जिंदगी को सिरीयस में लेना चाहिए।एक ऐसी कहानी है जिसमें नायक को एक जादूई किताब मिलती है और उस किताब के जरिए...

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अंधेरी कोठरी का रहस्य By Pawan

एक बार की बात है...

राजस्थान के एक शांत, धूल से भरे गाँव "कुंभसर" में एक पुरानी हवेली थी, जिसे लोग “चौधरियों की कोठरी” कहते थे। ये हवेली अब वीरान थी, लेकिन गाँव के बुज़ु...

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सम्राट- अपने सच से अनजान By Khushwant Singh

एक आलिशान विला,

सुबह के 8 बजे,

विला के सभी नौकर अपने-अपने कामों में व्यस्त है। वही दूसरी तरफ सीढियों से एक 52 वर्ष के व्यक्ति फोर्मल सूट पहने हुए नीचे डाईनिंग एर...

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त्रिशूलगढ़: काल का अभिशाप By Gxpii

हवा में अजीब सी घुटन थी। आसमान में बादल थे, लेकिन बिजली नहीं चमक रही थी।
सिर्फ एक बेचैनी थी — जो हर दिशा से वेद को घेर रही थी।

उसका गांव छोटा था, शांत और पहाड़ियों से घिरा हुआ।...

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आवारा अदाकार By Vikram Singh

आवारा अदाकार विक्रम सिंह (1) ’’मुश्किलें दिल के इरादे आजमाती हैं, स्वप्न के परदे निगाहों से हटाती हैं। हौसला मत हार गिरकर ओ मुसाफिर,ठोकरें इन्सान को चलना सिखाती हैं। (रामधारी सिंह...

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नागिन का आखरी इंतकाम By Appa Jaunjat

हे एक गाव मै एक लडकी और उसका पती और उसके मा बाबा रहथे थे लेकीन ऊन चारो को कोई तो मारदेता हे उसे किसने मारा देखेगे हम एक शहर में एक शुभांगी नाम की एक लडकी रेहती थी उसके घरमे program...

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सौंदर्य एक अभिशाप! By Kaushik Dave

खूबसूरती सबको पसंद होती है।

लोग शरीर की सुंदरता पर मोहित हो जाते हैं।
पुराने जमाने में भी ऋषि मुनियों भी अप्सराओं से मोहित हो गये थे।
खैर वह पुराने जमाने की बातें हैं।
अब अप्...

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वो खोफनाक रात By Khushwant Singh

दिल्ली,

शहर की दुर्गा कॉलोनी ,

आलोक शर्मा जी का घर,

आलोक शर्मा एक कम्पनी में सॉफ्टवेयर हैं। सुबह-सुबह हॉल में बैठकर चाय पीते हुए अखबार पढ़ रहे हैं।


सुबह के तकरीबन 8...

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Rebirth in Novel Villanes By Aaliya khan

“आलीज़ा, जल्दी चलो! मगरिब का वक़्त हो गया है।”
ज़ायरा की आवाज़ फिर कमरे में गूंजी, लेकिन आलीज़ा को जैसे सुनाई ही नहीं दे रहा था। वो अपने बिस्तर पर अधलेटी, गहरी निगाहों से किताब के...

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अधूरा सच By Gaurav Pathak

अजीब रात

रात का सन्नाटा कुछ अलग ही था। शहर की गलियों में हल्की धुंध तैर रही थी। स्ट्रीट लाइट की टिमटिमाती पीली रोशनी इस धुंध को और रहस्यमयी बना रही थी। हवा ठंडी थी, लेकिन उस ठंड...

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अंजामे मुहाब्बत By Sarah

ठंडी हवा के झोंके पेड़ो को झूमने पर मजबूर कर रहे थे।शाम का धुंदलका छा रहा था। हर चीज सुर्खी लिए हुए महसूस हो रही थी।सूरज नीले आसमान पर अपनी मंजिल तय करता हुआ चारों तरफ सुर्खी बिखेर...

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दर्द से जीत तक By Renu Chaurasiya

नवंबर का महीना था।

आसमान से हल्की-हल्की बारिश गिर रही थी। बूंदों की नमी में ठंड और भी तेज़ लग रही थी।

चारों ओर हरियाली छाई हुई थी, जैसे धरती ने हरे रंग की चादर ओढ़ ली हो।...

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तेरा इश्क है मेरी सल्तनत By shama parveen

आरोही जो 18 साल की है और उसने बारहवीं क्लास पास कर ली है अपने कमरे मे बैठी हुई अपनी फ्रेंड नैना से बात करती है।

नैना बोलती है, "तूने बात की अपने बाबा से ???

तब आरोही बोलत...

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हरिसिंह हरीश की कुछ और रचनाएं व समीक्षा By राज बोहरे

दर्द की सीढ़ियां (ग़ज़ल संग्रह)

हरि सिंह हरीश अपनी युवावस्था के समय से ही लिखने के प्रति बड़े समर्पित रहे हैं। वह कहते थे कि जब वह छठवें क्लास में पढ़ रहे थे तो होमवर्क की कॉपिय...

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सत्या के लिए By Pradeep Shrivastava

वह उस बार में रोज़ ही देर शाम को बैठ कर घंटे भर तक व्हिस्की पीती है, जो शहर का एक ठीक-ठाक बार कहा जाता है। जगह ज़्यादा बड़ी होने के कारण शान्ति से देर तक बैठ कर पीने वालों का वह पसंद...

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प्यार की पहचान By Aman Mishra

अभिषेक एक मध्यमवर्गीय लड़का था और प्रिय एक business man (सुनील ठक्कर) की बेटी थी। कॉलेज के शुरुवाती दिनों मे दोनों अपने अपने समूह मे व्यस्त रहते थे। अभिषेक शुरू से ही हमेशा पढाई मे...

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Aapke Aa Jaane Se By Aamir Raza Khan

हर सुबह वही सूरज उगता है, पर उसकी रोशनी हर जगह अलग कहानी बुनती है। कहीं वो नरम सी किरणों के साथ धीरे-धीरे अंधेरे को मिटाता है, तो कहीं नई उम्मीदें जगाकर दिलों में ताज़गी भर देता है...

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Zom-Bai By Tabish Sultan

"लेफ्ट राईट, लेफ्ट राईट लेफ्ट …..पापा मेरे कदमताल सही जा रहें हैं ना….क्या मैं भी आपकी तरह मेजर बन पाउँगा",

8 साल का रुहान अपने पापा मेजर अक्षय सिंह राठौर की तरह ही आर्म...

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चिंदी चिंदी सुख थान बराबर दुःख By Divya Shukla

चिंदी चिंदी सुख थान बराबर दुःख (1) इवनिंग वाक से लौट कर अभी गेट खोल ही रही थी कि फोन की घंटी बजने लगी | स्क्रीन पर अनजान नंबर चमक रहा था सोचा अभी चेंज कर के ही फोन रिसीव करुँगी |नं...

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सर्वथा मौलिक चिंतन By Brijmohan sharma

मित्रों

उपनिषद कहता है सर्व खल्विदं बृम्ह,सबकुछ परमात्मा है

मै ऐक पुजारी खानदान मे पैदा हुआ,मेरा परिवार घोर रूढिवादी रहा है । किंतु मैने पोटग्रेजुऐशन साईंस मेथ्स से किया है अ...

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नुसरत By Pradeep Shrivastava

नुसरत मिठाई का डिब्बा लिए हुए के.पी. साहब के चैंबर के सामने पहुँची। अर्दली कुर्सी पर बैठा मोबाईल में व्यस्त था। नुसरत ने उससे पूछा, “साहब बैठे हैं क्या?”

अर्दली ने एक दृष्टि मि...

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Super Villain Series By parth Shukla

स्थान: उत्तराखंड की बर्फीली पहाड़ियों के बीच छुपा एक अजीबोगरीब घाटी — “त्रि-गह्वर”
काल: कलियुग का वह समय जब धर्म का संतुलन डगमगाने लगा था…

हिमालय की गोद में एक घाटी थी, जो न त...

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क्रान्तिकारी By Roop Singh Chandel

क्रान्तिकारी (1) समस्या ज्यों-की त्यों विद्यमान थी. सात महीने सोचते हुए बीत गये थे, लेकिन न तो शैलजा ही कोई उपाय सोच पायी और न ही शांतनु. ज्यों-ज्यों दिन निकट आते जा रहे थे शैलजा क...

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लता सांध्य-गृह By Rama Sharma Manavi

प्रथम अध्याय----------------- आज मैं अत्यंत प्रसन्न हूँ क्योंकि मैंने अपनी पत्नी लता के एक अहम स्वप्न को साकार रूप दे दिया है।आज हमारे वृद्धराश्रम का आधिकारिक रूप से शुभारंभ ह...

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इधर उधर की By Kishanlal Sharma

इधर उधर की में मैं अपने वो अनुभव या घटनाएं शेयर करूंगा जिनका मैं चश्मदीद रहा या जिनको मैने सुनाप पहले मैं आपको सन2008 की घटना सुनाता हूँ।

उस समय मे आगरा फोर्ट पर DCI के पद पर था...

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रक्तरेखा By Pappu Maurya

पत्तों की सरसराहट थम चुकी थी।

आसमान फट पड़ा था — और मानो देवताओं के क्रोध से बरस रहा था पानी।

हर पेड़, हर झाड़ी, हर तिनका काँप रहा था। हवा में मिट्टी, कीचड़ और काई की गंध घुल...

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प्रयाग यात्रा By संदीप सिंह (ईशू)

प्रयागराज गंगा-यमुना-सरस्वती अर्थात त्रिवेणी या संगम की पावन नगरी है।

प्रयागराज को लोग "तीर्थों का राजा " (तीर्थराज) के नाम से जानते हैं।

हिन्दू मान्यता के अनुसार, यह...

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ब्रम्हदैत्य By mayur pokale

रात के 12 बज चुके थे, एक टेबल लैंप जल रहा था और रिया अभी भी पढ़ाई में व्यस्त थी; क्योंकि कल से उसके बीकॉम के फाइनल ईयर के एग्जाम्स शुरू होने वाले थे, रिया की मां सुनीता और छोटा भाई...

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मेगा 325 By Harish Kumar Amit

मेगा 325 हरीश कुमार 'अमित' (1) ''वैरी-वैरी हैप्पी बर्थडे, बड़े दादू।'' कहते हुए शशांक ने दादा जी को जगाया. शशांक की आवाज़ सुनते ही बड़े दादा जी एकदम से उठ गए....

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मिडिल बर्थ By Ajay Kumar Awasthi

रात काफी हो चुकी थी ट्रेन अभी अभी प्लेटफार्म में आकर रुकी थी और मैं अपनी बर्थ पर आकर बैठ गया ,मेरी लोवर बर्थ थी । मेरे सामने की मिडिल बर्थ पर एक लड़की बैठी थी,वो अब तक जाग रही थी और...

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भुइंधर का मोबाइल By Pradeep Shrivastava

भुइंधर का मोबाइल - प्रदीप श्रीवास्तव भाग १ अम्मा आज विवश होकर आपको यह पत्र लिख रही हूँ , क्योंकि मोबाइल पर यह सारी बातें कह पाने की हिम्मत मैं नहीं जुटा पाई। आप जानती हैं कि मैं ऐस...

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सन्नाटे में शनाख़्त By Pradeep Shrivastava

उसने अचानक ही उस पर घूँसे-लात बरसा कर, उसे बेड से नीचे धकेल दिया। टाइल्स लगे फ़र्श पर अकस्मात्‌ गिरने से उसके सिर में गहरी चोट आ गई है। ख़ून के धब्बे पड़ने लगे हैं। उसने पेट पर लात इत...

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ईश्वर चुप है By Neela Prasad

ईश्वर चुप है नीला प्रसाद (1) रंजना मंदिर की सीढ़ियां चढ़ती ठिठक रही है। ईश्वर से उसका रिश्ता बहुत पेचीदा होता जा रहा है। उसे इस रिश्ते को रेशे - रेशे कर समझने का मन होता है। हर बार...

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अंतिम फ़्रांसीसी उपनिवेश के अंतिम अवशेषों पर, पूरे चाँद की रात का पहला पहर था जब यह द्घटना द्घटी। समुद्र की काली और खुरदरी चट्टानों पर चिपके केकड़े किनारे की ओर सरकना शुरू कर चुके थे...

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न... किसी से कम नहीं ट्रेंडी By Pranava Bharti

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तक्सीम By Pragya Rohini

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छाया भ्रम या जाल By Meenakshi Mini

शहर के शोर-शराबे से बहुत दूर, एक शांत और आधुनिक अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स की नौवीं मंजिल पर, छाया ने अपनी ज़िंदगी की एक नई पारी शुरू की थी. कंक्रीट के इस जंगल में, उसका नया 2BHK फ्लैट...

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पतझड़ के बाद - एक सच्चा इंतजार By Neha kariyaal

एक छोटा-सा शहर, जो खूबसूरत पहाड़ों पर बसा था। वहाँ का मौसम कुछ ऐसा था, जैसे मन को सुकून देने वाली कोई पुरानी धुन — चिड़ियों की चहचहाहट, ठंडी हवा की सरसराहट और आसमान में तैरते बादल।...

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बारह पन्ने - अतीत की शृंखला से By Mamta

बारह पन्ने अतीत की शृंखला के बचपन इंसान की ज़िंदगी का सबसे सुनहरा दौर जिसे शायद अंतिम साँस तक नही भुलाया जा सकता ।जीवन का सबसे स्वर्णिम काल ,चिंतारहित खेलना खाना ,बेपरवाह सी ज...

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लाल बैग By BleedingTypewriter

रात का समय था। एक बूढ़ा आदमी अपने पुराने से घर में अकेला बैठा था। सामने टीवी पर तेज़ आवाज़ में समाचार चल रहा था।

“आज शहर के सबसे बड़े बैंक में हुई 5 करोड़ की चोरी से हड़कंप मच ग...

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मानो या न मानो By Koushik B

ये बात २००५ की तब हम लखनऊ इसी आलमबाग रेलवे क्वार्टर में रहते थे। हमारा परिवार तीसरे माले में रहता था। एक रात सोटे हुए अचानक मेरी आंख खुल गई। में बाथरूम की तरफ से बड़ा तो मुझे किसी...

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समरादित्य महाकथा By Kapil Jain

समरादित्य महाकथा एक 2 आत्माओ की कहानी है कि कैसे 2 जीव अपने अपने व्यवहार में बदल जाते है और सिर्फ एक छोटी गलतफहमी के कारण दोनो आत्माओ को 9 भव का सफर करना पड़ता है उसमे से एक आत्मा अ...

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काली किताब. By Shailesh verma

शैली: रहस्य, थ्रिलर, अलौकिक

अध्याय 1: पुरानी गलियों का रहस्य

लखनऊ की पुरानी चौक बाज़ार में कई गलियाँ ऐसी हैं जो मानो समय के साथ थम गई हों। एक ऐसी ही गली है — “क़ाफ़िला गली”,...

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महाराजा रणजीत सिंह By Sudhir Sisaudiya

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कहानी किससे ये कहें! By Neela Prasad

कहानी किससे ये कहें! नीला प्रसाद (1) 31 अगस्त 1991. सुबह-सुबह आसमान में छाए घने काले बादल इंगित कर रहे हैं कि किसी भी क्षण वर्षा शुरू हो जा सकती है। लगभग साढ़े तीन दशक लंबी नौकरी क...

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कापुरुष By S Sinha

“ अरे जवान लड़के पर इस तरह कोई हाथ उठाता है क्या ? . “ माँ सीता देवी ने अपने बड़े बेटे डॉक्टर सोनी से कहा .

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एमी By Pradeep Shrivastava

मुझे बाइक चलाना बहुत पसंद है। बहुत ज़्यादा। जुनून की हद तक। जब मैं एट स्टैंडर्ड में पहुँची तो स्कूल जाने के लिए फ़ादर ने लेडी बर्ड साइकिल दी। उन्हें यक़ीन था कि नई साइकिल पाकर मैं ख़ु...

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हनुमान शतक- समीक्षा एवं पद्य By Ram Bharose Mishra

हनुमान शतक सवैया कविता और दोहों में रचा गया 100 छंदों का ग्रंथ है। जो महा कवि करुणेश "द्वारका" द्वारा सम्वत 2012 के वैशाख माह की तृतीया तिथि रविवार को रचे गए छंदों का संकलन...

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THIEF BECOME A PRESEDENT By saif Ansari

गायब हैंडल का रहस्य
सुबह के 10 बजे थे। बरेली के एक व्यस्त बैंक में लोगों की ऐसी भीड़ थी, मानो कुंभ का मेला लगा हो। सब अपने-अपने काम में ऐसे डूबे थे, जैसे चींटी शक्कर के दाने पर। कि...

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एहसास By Vartikareena

वो एक कॉलेज का एंट्रेंस था । सारे स्टुडेंट कॉलेज से बाहर आ रहे थे । एक लड़का और लड़की दोनों साथ में बाहर आ रहे थे । लड़की के चेहरे पर कुछ परेशानी थी और लड़का! वो तो कहीं खोया हुआ थ...

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खेल खेल में - जादूई By Kaushik Dave

"खेल खेल में - जादूई"जिंदगी एक खेल है ऐसा कुछ लोग मानते हैं।लेकिन जिंदगी को सिरीयस में लेना चाहिए।एक ऐसी कहानी है जिसमें नायक को एक जादूई किताब मिलती है और उस किताब के जरिए...

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अंधेरी कोठरी का रहस्य By Pawan

एक बार की बात है...

राजस्थान के एक शांत, धूल से भरे गाँव "कुंभसर" में एक पुरानी हवेली थी, जिसे लोग “चौधरियों की कोठरी” कहते थे। ये हवेली अब वीरान थी, लेकिन गाँव के बुज़ु...

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सम्राट- अपने सच से अनजान By Khushwant Singh

एक आलिशान विला,

सुबह के 8 बजे,

विला के सभी नौकर अपने-अपने कामों में व्यस्त है। वही दूसरी तरफ सीढियों से एक 52 वर्ष के व्यक्ति फोर्मल सूट पहने हुए नीचे डाईनिंग एर...

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त्रिशूलगढ़: काल का अभिशाप By Gxpii

हवा में अजीब सी घुटन थी। आसमान में बादल थे, लेकिन बिजली नहीं चमक रही थी।
सिर्फ एक बेचैनी थी — जो हर दिशा से वेद को घेर रही थी।

उसका गांव छोटा था, शांत और पहाड़ियों से घिरा हुआ।...

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आवारा अदाकार By Vikram Singh

आवारा अदाकार विक्रम सिंह (1) ’’मुश्किलें दिल के इरादे आजमाती हैं, स्वप्न के परदे निगाहों से हटाती हैं। हौसला मत हार गिरकर ओ मुसाफिर,ठोकरें इन्सान को चलना सिखाती हैं। (रामधारी सिंह...

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नागिन का आखरी इंतकाम By Appa Jaunjat

हे एक गाव मै एक लडकी और उसका पती और उसके मा बाबा रहथे थे लेकीन ऊन चारो को कोई तो मारदेता हे उसे किसने मारा देखेगे हम एक शहर में एक शुभांगी नाम की एक लडकी रेहती थी उसके घरमे program...

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सौंदर्य एक अभिशाप! By Kaushik Dave

खूबसूरती सबको पसंद होती है।

लोग शरीर की सुंदरता पर मोहित हो जाते हैं।
पुराने जमाने में भी ऋषि मुनियों भी अप्सराओं से मोहित हो गये थे।
खैर वह पुराने जमाने की बातें हैं।
अब अप्...

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वो खोफनाक रात By Khushwant Singh

दिल्ली,

शहर की दुर्गा कॉलोनी ,

आलोक शर्मा जी का घर,

आलोक शर्मा एक कम्पनी में सॉफ्टवेयर हैं। सुबह-सुबह हॉल में बैठकर चाय पीते हुए अखबार पढ़ रहे हैं।


सुबह के तकरीबन 8...

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Rebirth in Novel Villanes By Aaliya khan

“आलीज़ा, जल्दी चलो! मगरिब का वक़्त हो गया है।”
ज़ायरा की आवाज़ फिर कमरे में गूंजी, लेकिन आलीज़ा को जैसे सुनाई ही नहीं दे रहा था। वो अपने बिस्तर पर अधलेटी, गहरी निगाहों से किताब के...

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अधूरा सच By Gaurav Pathak

अजीब रात

रात का सन्नाटा कुछ अलग ही था। शहर की गलियों में हल्की धुंध तैर रही थी। स्ट्रीट लाइट की टिमटिमाती पीली रोशनी इस धुंध को और रहस्यमयी बना रही थी। हवा ठंडी थी, लेकिन उस ठंड...

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अंजामे मुहाब्बत By Sarah

ठंडी हवा के झोंके पेड़ो को झूमने पर मजबूर कर रहे थे।शाम का धुंदलका छा रहा था। हर चीज सुर्खी लिए हुए महसूस हो रही थी।सूरज नीले आसमान पर अपनी मंजिल तय करता हुआ चारों तरफ सुर्खी बिखेर...

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दर्द से जीत तक By Renu Chaurasiya

नवंबर का महीना था।

आसमान से हल्की-हल्की बारिश गिर रही थी। बूंदों की नमी में ठंड और भी तेज़ लग रही थी।

चारों ओर हरियाली छाई हुई थी, जैसे धरती ने हरे रंग की चादर ओढ़ ली हो।...

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तेरा इश्क है मेरी सल्तनत By shama parveen

आरोही जो 18 साल की है और उसने बारहवीं क्लास पास कर ली है अपने कमरे मे बैठी हुई अपनी फ्रेंड नैना से बात करती है।

नैना बोलती है, "तूने बात की अपने बाबा से ???

तब आरोही बोलत...

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हरिसिंह हरीश की कुछ और रचनाएं व समीक्षा By राज बोहरे

दर्द की सीढ़ियां (ग़ज़ल संग्रह)

हरि सिंह हरीश अपनी युवावस्था के समय से ही लिखने के प्रति बड़े समर्पित रहे हैं। वह कहते थे कि जब वह छठवें क्लास में पढ़ रहे थे तो होमवर्क की कॉपिय...

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सत्या के लिए By Pradeep Shrivastava

वह उस बार में रोज़ ही देर शाम को बैठ कर घंटे भर तक व्हिस्की पीती है, जो शहर का एक ठीक-ठाक बार कहा जाता है। जगह ज़्यादा बड़ी होने के कारण शान्ति से देर तक बैठ कर पीने वालों का वह पसंद...

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प्यार की पहचान By Aman Mishra

अभिषेक एक मध्यमवर्गीय लड़का था और प्रिय एक business man (सुनील ठक्कर) की बेटी थी। कॉलेज के शुरुवाती दिनों मे दोनों अपने अपने समूह मे व्यस्त रहते थे। अभिषेक शुरू से ही हमेशा पढाई मे...

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Aapke Aa Jaane Se By Aamir Raza Khan

हर सुबह वही सूरज उगता है, पर उसकी रोशनी हर जगह अलग कहानी बुनती है। कहीं वो नरम सी किरणों के साथ धीरे-धीरे अंधेरे को मिटाता है, तो कहीं नई उम्मीदें जगाकर दिलों में ताज़गी भर देता है...

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Zom-Bai By Tabish Sultan

"लेफ्ट राईट, लेफ्ट राईट लेफ्ट …..पापा मेरे कदमताल सही जा रहें हैं ना….क्या मैं भी आपकी तरह मेजर बन पाउँगा",

8 साल का रुहान अपने पापा मेजर अक्षय सिंह राठौर की तरह ही आर्म...

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चिंदी चिंदी सुख थान बराबर दुःख By Divya Shukla

चिंदी चिंदी सुख थान बराबर दुःख (1) इवनिंग वाक से लौट कर अभी गेट खोल ही रही थी कि फोन की घंटी बजने लगी | स्क्रीन पर अनजान नंबर चमक रहा था सोचा अभी चेंज कर के ही फोन रिसीव करुँगी |नं...

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सर्वथा मौलिक चिंतन By Brijmohan sharma

मित्रों

उपनिषद कहता है सर्व खल्विदं बृम्ह,सबकुछ परमात्मा है

मै ऐक पुजारी खानदान मे पैदा हुआ,मेरा परिवार घोर रूढिवादी रहा है । किंतु मैने पोटग्रेजुऐशन साईंस मेथ्स से किया है अ...

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नुसरत By Pradeep Shrivastava

नुसरत मिठाई का डिब्बा लिए हुए के.पी. साहब के चैंबर के सामने पहुँची। अर्दली कुर्सी पर बैठा मोबाईल में व्यस्त था। नुसरत ने उससे पूछा, “साहब बैठे हैं क्या?”

अर्दली ने एक दृष्टि मि...

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Super Villain Series By parth Shukla

स्थान: उत्तराखंड की बर्फीली पहाड़ियों के बीच छुपा एक अजीबोगरीब घाटी — “त्रि-गह्वर”
काल: कलियुग का वह समय जब धर्म का संतुलन डगमगाने लगा था…

हिमालय की गोद में एक घाटी थी, जो न त...

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क्रान्तिकारी By Roop Singh Chandel

क्रान्तिकारी (1) समस्या ज्यों-की त्यों विद्यमान थी. सात महीने सोचते हुए बीत गये थे, लेकिन न तो शैलजा ही कोई उपाय सोच पायी और न ही शांतनु. ज्यों-ज्यों दिन निकट आते जा रहे थे शैलजा क...

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लता सांध्य-गृह By Rama Sharma Manavi

प्रथम अध्याय----------------- आज मैं अत्यंत प्रसन्न हूँ क्योंकि मैंने अपनी पत्नी लता के एक अहम स्वप्न को साकार रूप दे दिया है।आज हमारे वृद्धराश्रम का आधिकारिक रूप से शुभारंभ ह...

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