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ट्रिपलेट्स भाग 4लेखक राज फुलवरे अध्याय 8 : अंडरग्राउंड लैब — जहाँ इंसान प्रयोग ब...
ये कहानी पूरी तरह काल्पनिक है। आतंकियों के खिलाफ दो अफ़सर और दो लेडी ऑफिसर का खत...
जंगल के उस हिस्से में लोग कदम रखने से डरते थे। उसे “शिकार वन” कहा जाता था। कहा ज...
जब खामोशी ने सवाल पूछा पाँच साल बाद…मुंबई अब भी वही थी—भागती हुई, शोर से भरी हुई...
वर्शाली एकांश की आंखों में अपने लिए प्रेम देख पा रही थी। वर्शाली एक टक नजर से एक...
कहते हैं, प्यार कभी दूरियों का मोहताज नहीं होता—वह बिना पास आए भी किसी को बेहद क...
नमस्कार मेरा नाम जूही उपाध्याय है मैं मनोविज्ञान व्याख्याता हूंँ।अपनी कुछ बातों...
मीठे नमकीन दलिया 1 . इसिडुडु ...
अस्पताल से लौटकर शाम ढलने तक हम सब चुपचाप एक साथ बैठे रहे। मौसी के कमरे की डरावन...
. वेदांत 2.0 भाग 21 अध्याय 30भूमिकायह अध्याय मानव संबंधों के उन अदृश्य सत्यों को...
" इच्छा... तुम... नहीं नहीं तुम मेरी इच्छा नहीं हो सकती... " जोरो से हॅसते हुए आवाज गूंजती है.... " सही पहचाना में तेरी इच्छा नहीं हूँ मै.. वो हूँ जो तू सोच भी नही...
कुछ यादें अचानक गायब नहीं होतीं। वे बस धीरे-धीरे पीछे खिसक जाती हैं, इस तरह कि हमें लगता है हमने ही उन्हें छोड़ दिया है। और जब वे लौटती हैं, तो शोर नहीं करतीं—बस चुपचाप अपनी जगह...
प्रतिज्ञा और पुराना घर भविष्य की चकाचौंध और अत्याधुनिक तकनीक से लैस शहर की ऊँची इमारतों के बीच, सिया का मन अशांत था। वह एक माहिर गेमर था, लेकिन आज उसके सामने ज़िंदगी का सबसे कठि...
W-22 : The Door That Should Not Exist SEASON 1 – “The First Crossing” कहते हैं कुछ जगहें खाली नहीं होतीं, बस हमारी आँखें उन्हें देख नहीं पातीं। अरावली के जंगलों के बीच एक टूटा...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
ब्लैक फॉर्मल ड्रेस में सजी हुई, आँखों पर ब्लॉक गॉगल्स लगाए, अर्शित रॉय—शहर का जाना माना, प्रसिद्ध और ताकतवर C.E.O—ऑफिस के दरवाज़े से बाहर निकला। उसके हर कदम में उच्चस्तरीय आत्मविश्...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
सुनीति ऑफिस से वापस आती है। उसके चेहरे पर थकान और उदासी साफ झलक रही है। आज ऑफिस में बॉस ने उसे डाँट दिया था। पहली बार उसे अपने आप पर भरोसा टूटा हुआ लगा। कमरे में आते ही वो ज़मीन पर...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक है इसका किसी जीवित, जंतु, मानव संसाधन से कोई लेना देना नही है अगर ऐसा होता है तो ये मात्र एक सयोग होगा ,,, जय हिन्द, इस कहानी को लिखने का उद्देश्य क...
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