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एपिसोड 29: अंधेरे का अंतिम द्वार---शहर की बेचैनीकक्ष से लौटने के बाद रोहन को लगा...
सगाई की तारीख तय हो चुकी थी।यह सिर्फ़ एक तारीख नहीं थी... यह उन दो दिलों के वर्ष...
जैसे ही अंकिता की बात खत्म हुई, उसने मुस्कुराते हुए पूछा— "तो सर, आप इनमें...
अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 28: छाया द्वार का चुना हुआ नामराजगढ़ महल की...
उस दिन विद्यालय का सभागार खचाखच भरा था। शांतनु मंच पर खड़ा था। उसकी आवाज़ में न...
**माफिया की दीवानगी - सीजन 2****(ऑथर नोट: हेलो मेरे प्यारे रीडर्स! पिछले पार्ट...
उसके गुस्से की सीमा अब मर्यादा लांघ चुकी थी। उसने झटके से उसका हाथ पकड़ा और उसे...
अध्याय 14 राघव जोशी का अपमानअगले दिन विराज इंदौर शहर की मुख्य बाजार से होकर गुजर...
रक्षाबंधन प्रीति सुबह का काम खत्म कर, बच्चों का टिफिन पैक कर अपनी साहित्यक पत्र...
(घने जंगल में रात की भयावह शांति। उल्लुओं के बोलने की आवाज़ और सूखी पत्तियों के...
1999, 27 साल की अनु सॉफ्टवेअर प्रोफेशनल, राजधानी में एक ऊंचे पद पर काम करती है। अकेली अपने शर्तों पर रहती है। पिता गोपालन केरल से हैं और मां निशिगंधा पुणे से। अनु की जिंदगी में मात...
किशन की मां चने-मुरमुचे भून-भूनकर और रात-दिन चिन्ता करके वहुत ही गरीबी में उसे चौदह वर्ष का करके मर गई। किशन के लिए गांव में कही खडे होने के लिए भी जगह नहीं रही। उसकी सौतेली वडी बह...
दिसंबर का दूसरा सप्ताह शुरू हो चुका है। ठंड ने अपनी रफ्तार पकड़ ली है। पांच बजते-बजते शाम हो जा रही है। सूर्यास्त होते ही अंधेरा घना होने लगा है। समायरा को स्कूल की छुट्टी के बाद घर...
अपना आखिरी पीरियड लगाने के बाद जैसे ही निर्मल ने डिपार्टमेंट से बाहर कदम बढ़ाये कि उसका सामना बेमौसम की बारिश की हल्की—हल्की बूँदों से हुआ। इसकी परवाह किये बिना कि हॉस्टल तक पहुँचते...
इस धरती पर एक विशिष्ट प्रकार के लोग भी वसते है। यह फूस की आग की तरह होते हैं। वह झट से जल उठते हैं और फिर चटपट बुझ जाते हैं। व्यक्तियों के पीठे हर समय एक ऐसा व्यक्ति रहना चाहिए जो...
सहभागी लेखिकायें डॉ. सुधा श्रीवास्तव, डॉ. प्रणव भारती, नीलम कुलश्रेष्ठ, मधु सोसी गुप्ता, डॉ. मीरा रामनिवास, निशा चन्द्रा [अस्मिता, महिला बहुभाषी साहित्यिक मंच, अहमदबाद ] *** आभ...
लड़की के विवाह योग्य आयु होने के सम्बन्ध में जितना भी झूठ बोला जा सकता है, उतना झूठ बोलने के बाद भी उसकी सीमा का अतिक्रमण किया जा चुका है और अब तो विवाह होने की आशा भी समाप्त हो चु...
विचारों में डूबे हुए गुरूचरण बापु एकांत कमरे में बेठें थे। उनकी छोटी पुत्री ने आकर कहा-‘बाबू! बाबू। माँ ने एक नन्हीं सी बच्ची को जन्म दिया है।’ यह शुभ समाचार गुरूचरण बाबू के हृदय म...
यादें...यादें...और यादें...। कितनी अजीब होती हैं न यादें...? कभी ब्लैक एण्ड व्हाइट, तो कभी सतरंगे इंद्रधनुष-सी रंग-बिरंगी...। वही यादें जो कभी तो जीने का संबल बन जाती हैं तो कभी वह...
अपूर्व के मित्र मजाक करते, 'तुमने एम. एस-सी. पास कर लिया, लेकिन तुम्हारे सिर पर इतनी लम्बी चोटी है। क्या चोटी के द्वारा दिमाग में बिजली की तरंगें आती जाती रहती हैं?' अपूर्...
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