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  • कॉल - 2

    हर सुबह एक नई शुरुआत लेकर आती है, लेकिन आर्य की ज़िंदगी में ऐसा नहीं था। जब उसकी...

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    हेलो दोस्तों, मैं आपकी कहानीकार काजल सोम। तो मैं आपको आज एक कहानी सुनाऊंगी शिवां...

  • बंटवारा

    कहानी बंटवारा   "ममा ये कैसा खाना है?हमसे नहीं खाया जा रहा।" रीशु झुंझला कर कहा...

  • तुम और मैं - 2

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  • सत्य पथी

    ऋगुवेद सूक्ति--(२७) की व्याख्या  मन्त्र —“मा प्रगाम पथोवयम्”  ऋग्वेद_ १०.५७.१भाव...

  • नीली रोशनी - 4

    जब राजन ने कहा विदेशी युवतीयों के दाढ़ी और मूंछें वाले युवक बहुत पसंद आते हैं इत...

  • शून्य से नौ तक:अस्तित्ववेदांत 2.0

    वेदांत 2.0 का 0–9 मॉडल एक ऐसा संरचनात्मक ढाँचा प्रस्तुत करता है जो साधारण दशमलव...

  • The Last Promise - 7

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  • अंतर्जगत का रूपांतरण और मांसाहार का सच

    अंतर्जगत का रूपांतरण और मांसाहार का सच: एक आध्यात्मिक व पर्यावरणवादी दृष्टिकोण ~...

  • श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 7

    श्री अंदर चली गई । हरि और श्री सोफे पर आ कर बैठ गए हरि ने लैपटॉप ओपन किया और श्र...

दस दरवाज़े By Subhash Neerav

घंटाभर चलकर बस रुकती है। मैं और राणा हैरान-से होकर उतरते हैं कि यह भला कौन-सी जगह हुई। बिल्कुल अनजान-सी। सोचते हैं कि कंडक्टर ने हमें सही जगह ही उतारा होगा। वह जानता था कि हमें बाल...

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टुकड़ा-टुकड़ा ज़िन्दगी By प्रियंका गुप्ता

ढोलक की थापों के साथ बन्ना घोड़ी गाने वाली का सुर भी तार-सप्तक नापने लगता था। बीच-बीच में कहीं सुर धीमा पड़ता तो नसीबन खाला की हाँक...अरे, सुबह कुछ खाया-पीया नहीं क्या लड़कियों...? बि...

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पीताम्बरी By Meena Pathak

घर में उत्सव जैसा माहौल था सभी के चेहरों पर उत्साह झलक रहा था बड़की चाची. रामपुर वाली चाची, पचरूखिया वाली चाची, सभी दोगहा में जा कर द्वार पर बैठे युवक को झाँक-झाँक देख कर निहाल...

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झिरी By प्रियंका गुप्ता

चाँद किसी बदमाश बच्चे सा पेड़ की फुनगी पर जा टँगा था...गोल मटोल से चेहरे पर शरारती मुस्कान लिए हुए...जैसे अभी अभी लाद-फाँद कर कमरे में फेंक से दिए गए बंटी बाबू की हालत का पूरा मज़ा ल...

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खुशियों की आहट By Harish Kumar Amit

किशोर उपन्यास ‘खुशियों की आहट’ का सार
यह कहानी है एक किशोर छात्र, मोहित,की। मोहित के मम्मी-पापा नौकरी करते हैं। पापा नौकरी करने के साथ - साथ बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाते हैं। मम्मी क...

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कहानी ऐसे थोड़े न लिखी जाती है... By प्रियंका गुप्ता

कई दिनो से सोच रही हूँ, कोई कहानी लिखूँ। आप भी सोचेंगे, ये कहानी लिखने का आइडिया मेरे दिमाग़ में आया कहाँ से...? मैं ठहरी एक आम सी, सीधे-साधे ढंग से अपनी गृहस्थी चलाने वाली साधारण औ...

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असली आज़ादी वाली आज़ादी By devendra kushwaha

देश को आज़ाद कराना आसान नही था बहुत त्याग और संघर्ष के बाद इस देश को आज़ादी नसीब हुई। आजादी बेशकीमती थी क्योंकि लाखों लोगों ने इसे पाने के लिए बिना कुछ सोंचे समझें अपनी जान न्योछावर...

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कभी यूँ भी तो हो... By प्रियंका गुप्ता

नर्स ने आकर मुझे झकझोरा तो सहसा मैं जैसे एक बहुत गहरे कुऍ से बाहर आई। दो पल को तो समझ ही नहीं आया, मैं हूँ कहाँ...फिर एक झटके से सब साफ़ हो गया...। मैं माँ के साथ थी...इंटेन्सिव केय...

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पश्चाताप By Meena Pathak

अमिता फूट फूट कर रो रही थी अब उसे अपने किये पर पश्चाताप हो रहा था शायद उसे उन बुजुर्गों की हाय लगी थी जिसे रोता बिलखता वह छोड़ आई थी कितना रोका था उन लोगों ने पर उसने उनकी एक...

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उदास क्यों हो निन्नी...? By प्रियंका गुप्ता

आज पूरे बारह साल बाद इस कमरे के उस खुले हिस्से पर बैठी हूँ, जिसके लिए बरसों बाद भी कोई सही शब्द नहीं खोज पाई...। कुछ-कुछ छज्जे जैसा, पर छज्जा तो बिलकुल नहीं था वो...। छज्जे में तो...

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