लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • शपथपत्र

    सेवानिवृत्त होने से पहले क्या क्या रंगीन सपने थे सिन्हा साहेब की आँखों में. सोचत...

  • दिल के आंसू

    महामहिम राष्ट्र्पति महोदय से पुरस्कार लेते समय गोपाल बाबू और उनकी पत्नी भाव विभो...

  • जंगल का दोस्त

    बहुत पुराने समय की बात है, मिनकाई गाँव में एक युवक रहता था कोराबैबू। वह अकेला ही...

शताब्दी By Ashok Gupta

वह युवक, जो अपने बूढे माता पिता को लेकर शताब्दी एक्सप्रेस के चेयर कार कोच में तीर्थयात्रा के लिए अभी अभी बैठा है, श्रवण कुमार उसका असली नाम नहीं है. उसके पिता के भी रिटायर होने में...

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मौसी By Ramnika Gupta

‘‘मैं अपने लिए दुलहिन खोजूँ या फूफी के लिए दूल्हा?’’ चिल्ला-चिल्लाकर, सुना-सुनाकर कह रहा था मोहना और मौसी (मोहना की फुआ को सभी मौसी कहकर पुकारते थे) को पटक-पटककर मार रहा था। थप्पड़...

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अब कहीं और नहीं By Ratan Chand Ratnesh

शर्मा जी फफक कर रो पड़े। जैसे सदियों से जबरन बांधकर रखी हुई नदी को अचानक बहने का रास्ता मिल गया हो। अपनी हथेली से आंसुओं को पोंछते हुए वे बोले, अब तुम्हें क्या बताता कि वे जाकर एक...

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बिना टिकट By Dinesh Tripathi 'Shams'

हां भाई फैजाबाद!
मगर कोई न बोला तो कन्डक्टर ताव खाता बोल पड़ा ,
बोलते क्यों नही किसका टिकट बाकी है फ़ैजाबाद का ?
अरे भाई गाड़ी बढ़ाओ . इतनी गर्मी , कि जान जा रही है.
लो एक टिकट मेर...

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शपथपत्र By Arunendra Nath Verma

सेवानिवृत्त होने से पहले क्या क्या रंगीन सपने थे सिन्हा साहेब की आँखों में. सोचते थे जीवन भर जिन जिन शौकों के लिए समय निकालने के लिए तरसते रह गये उन्हें पूरा करने का अवसर अंत में आ...

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ब्रैड पकोड़ा By Ved Prakash Tyagi

रविवार के अवकाश मे गुप्तजी घर पर ही थे, घर पर दो मेहमान भी आए हुए थे। गुप्तजी विजयनगर गाज़ियाबाद मे रह रहे थे। गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा बसाई गयी इस कॉलोनी मे गुप्तजी का एक छ...

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दिल के आंसू By Dr Pradeep Gupta

महामहिम राष्ट्र्पति महोदय से पुरस्कार लेते समय गोपाल बाबू और उनकी पत्नी भाव विभोर हो गये। उनकी नम आॅखों से चारों ओर की तस्वीर धूंधली दिखाई देने लगी , और मन-मस्तिष्क में अमित का चेह...

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जंगल का दोस्त By Dr Sunita

बहुत पुराने समय की बात है, मिनकाई गाँव में एक युवक रहता था कोराबैबू। वह अकेला ही था। माता-पिता बचपन में गुजर गए थे। शुरू में तो गाँव वालों ने उसकी परवाह की, फिर कहा, “अब तुम खुद शि...

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पत्नी का पत्र By Rabindranath Tagore

आज हमारे विवाह को पंद्रह वर्ष हो गए, लेकिन अभी तक मैंने कभी तुमको चिट्ठी न लिखी। सदा तुम्हारे पास ही बनी रही - न जाने कितनी बातें कहती सुनती रही, पर चिट्ठी लिखने लायक दूरी कभी नहीं...

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Sikandar ki Sapath By Jayshankar Prasad

सिकन्दर की शपथ जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ जयशंकर प्रसाद © COPYRIGHTS This book is copyrighted content of the concerned author as well as Matrubharti. Matrubharti has exclusive digi...

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तमाशबीन By Bhagwati Prasad Dwivedi

तमाशबीन अपरार्िं दो से रात्रिा नौ बजे तक टेलीपफोन आपरेटरी करने के बाद जब मैं थका—माँदा लगभग दस बजे डेरे पर लौटा तो वहाँ का दृश्य देख एकाएक मुझे काठ मार गया । निस्तब्ध् रात का घुप्प...

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तीन दस्तक By Ratan Chand Ratnesh

एक हत्या के चश्मदीद गवाह की क्या मानसिक स्थिति होती है, रतन चंद रत्नेश की यह यह कहानी उस ओर इशारा करती है। कहानी की शुरुआती अंश का आधार प्रसिद्ध कहानीकार मोहन राकेश की कहानी एक...

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पदचाप By Hanif Madaar

‘पदचाप’ एक ऐसे जरुरतमंद किसान की कथा है जिसके पास पर्याप्त धन न होने के कारण खेत की जुताई आधुनिक उपकरण के माध्यम से नहीं कर सकता है जिस कारण वह अपने दोनों बच्चों को भी खेत में का...

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कहानी किस्मत की By Shanti Purohit

कहानी किस्मत की ,मेरी मौलिक ,अप्रकाशित रचना है

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रूट नंबर थर्टीन By Ashok Gupta

अगर किसी दहब वह बस ज़मीन पर न चल रही होती तो हवाई जहाज़ की कहलाती. बात एरोफ्लोट क्लब की चार्टर्ड बस रूट नंबर थर्टीन की हो रही है जो महानगर के दूर-दराज़ इलाकों की पॉश कालोनियों से उड़ते...

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साहित्यसाधना में अंतिम आहुति By Arunendra Nath Verma

अपने पहले उपन्यास के प्रकाशित होने के पहले ही से प्रायवेट सेक्टर की नौकरी से उनका मन उचट गया था. शिकायत करते रहते थे कि सरस्वती के पुजारियों को पेट की अग्नि शांत करने के लिए अपनी स...

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Vibhav Da ki Dadhi By Vinod Viplav

जातीयता और साम्प्रदायिकता की पड़ताल करती कहानी विभव दा की दाढ़ी बिहार की पृष्ठभूमि पर लिखी गयी है जहां जाती का भेदभाव धार्मिक भेदभाव से अधिक गहरा है। विनोद विप्लव की कलम से लिखी...

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Sankraman By Manish Kumar Singh

यह कहानी निम्न वर्ग के प्रति झूठी सहानुभूति रखने वाली मध्यमवर्गीय मानसिकता को उजागर करती है। ऊपरी दिखावा करते हुए ऐन वक्त पर हम अपना वर्गीय चरित्र दिखा देते हैं।

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नई रोशनी By Rabindranath Tagore

बाबू अनाथ बन्धु बी. ए. में पढ़ते थे। परन्तु कई वर्षों से निरन्तर फेल हो रहे थे। उनके सम्बन्धियों का विचार था कि वह इस वर्ष अवश्य उत्तीर्ण हो जाएंगे, पर इस वर्ष उन्होंने परीक्षा देन...

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एक थीं लच्छो चाची By Dr Sunita

नन्ही नीना से अगर कोई पूछता कि उसे दुनिया में सबसे अच्छा क्या लगता है, तो वह बखटके कहती—नानी...नानी का गाँव।
सच! पूरे साल भर वह नानी के पास... नानी के गाँव जाने के लिए ऐसे तरसती,...

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हेलिकॉप्टर वाले भइया By Sanjay Kundan

यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है, जो हेलिकॉप्टर में घूमने का सपना देखता है और उसके बारे में तरह-तरह की झूंठी बातें बनाता रहता है। संयोग से वह राजनीति में चला जाता है और हेलिकॉप्टर से...

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राग चिरंतन भोर वितान By Ashok Gupta

शाम तीन बज कर बीस मिनट हो ही रहे है की गली में खडंजे वाले रास्ते पर साइकिल की आहट होती है और जानकी समझ जाती है की पिताजी आ पहुंचे हैं. तभी साइकिल की घंटी बजती है. यह संकेत है कि...

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मेरी ख़ुशी By Shanti Purohit

मेरी ख़ुशी ,मेरी मौलिक ,अप्रकाशित रचना है

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गुरु दक्षिणा By Manju Gupta

शिक्षिका , समाज सेविका राधा ने प्रौढ़ शिक्षा का महत्त्व दे बेरोजगार अनपढ़ , गरीब , गंवई गवार नवयुवक को शिक्षित कर साक्षरता की मिसाल बनी ।

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ईमानदारी By Asha Ashish Shah

After huge response to 11 eBooks in Gujarati...I am presenting my 1st eBook in Hindi. ईमानदारी के वचन से बंधे गोपालदासजी की पीठ़ को ताक्त...

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अस्पताल बीमार है By Ratan Chand Ratnesh

जापान जैसे मुल्कों में व्यवस्था या सरकार के प्रति किसी बात का विरोध जताना हो तो लोग अधिक से अधिक काम कर उसे प्रकट करते हैं। काले बिल्ले लगाकर भी विरोध करना एक उचित माध्यम है परंतु...

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दादी की मुसकान By Dr Sunita

कोयना के घर में उसके मम्मी-पापा और भाई के अलावा दादा-दादी भी रहते हैं। कोयना और आशु का बचपन दादी की गोद में ही बीता है। यहाँ तक कि पिछले साल तक को दादी ही दोनों बच्चों को स्कूल बस...

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गूंगी By Rabindranath Tagore

कन्या का नाम जब सुभाषिणी रखा गया था तब कौन जानता था कि वह गूंगी होगी। इसके पहले,उसकी दो बड़ी बहनों के सुकेशिनी और सुहासिनी नाम रखे जा चुके थे, इसी से तुकबन्दी मिलाने के हेतु उसके पि...

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दलाल का एक दिन By Sanjay Kundan

एक बौद्धिक व्यक्ति को लगता है कि दलाली करके ही सफलता मिल सकती है। और वह इस रास्ते से सफलता हासिल भी करता है। लेकिन उसका मन कचोटता है। वह पश्चाताप की आग में जलता रहता है।

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Kiston Ki mout By Sandeep Meel

‘‘इंसान रोज ही नहीं हर पल मरता है, जब वह अंतिम रूप से मरता है तो दुनियां को लगता है कि फलां मर गया। लेकिन रोजाना जो किस्तों में मरता है उसका क्या ?’’ राजस्थान के मरुस्थल में टीलों...

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दर्द By Pawnesh Dixit

दर्द मेरी पहली कहानी है हँसते गुदगुदाते हुए , थोड़ा गंभीर बनाते हुए , ये रुनझुन नामक लड़की पर आधारित कहानी जब मर्मांतकता पर अचानक पहुँचती है और तभी परिदृश्य का बदलाव करुण...

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फिर हुई मुलाकात By Shanti Purohit

मेरी तीसरी कहानी फिर हुई मुलाकात

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प्रतिध्वनि By Ashok Gupta

करीब चालीस मिनट बीतने को आये थे. वह घायल लड़का अस्पताल के बराम्दे में एक नंगे बेड पर लिटा छोड़ा गया था. अमित उस लड़के को अपनी गाडी में उस सरकारी अस्पताल में लगभग ढो कर लाया था. वह लड़...

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एक छूटा हुआ हस्ताक्षर By Ratan Chand Ratnesh

A short-story depicting the suffering of an old common man facing in the lacklustre system.

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सिक्के चमड़े के By Arunendra Nath Verma

जब किसी की किस्मत में लिखा हो कि चमड़े की मशक ढोते रहने से छिल रहे उसके दुखते कन्धों पर एक दिन मुल्क की बादशाहत आ बैठेगी, तो फिर बाकायदा ऐसा होकर ही रहता है. यह सब होता भी है कितनी...

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कवि का हृदय By Rabindranath Tagore

चांदनी रात में भगवान विष्णु बैठे मन-ही-मन गुनगुना रहे थे-
'मैं विचार किया करता था कि मनुष्य सृष्टि का सबसे सुन्दर निर्माण है, किन्तु मेरा विचार भ्रामक सिध्द हुआ। कमल के उस फूल...

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जग्गू जैसा कोई नहीं By Dr Sunita

पुराने समय की बात है, हरसू गाँव में पंडित शिवशंकर रहते थे। वे बूढ़े हो चुके थे। घर-परिवार में कोई और नहीं था। गाँव के अपने बड़े-से घर में अकेले ही रहते थे। दिन भर वे यहाँ-वहाँ घूमा...

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ममता एक माँ की By Shanti Purohit

मेरी लिखी एक कहानी शीर्षक ( ममता एक माँ की )

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एक दिन का राजा By Sanjay Kundan

तीन गरीब दोस्त इस पर बात करते हैं कि अचानक उनके पास धन आ जाए तो उनकी किस्मत बदल जाएगी पर उनमें से एक बताता है कि उसे ऐसा मौका मिल चुका है। उसने हाथ में आए धन को ठुकरा दिया। उसे लगा...

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नींद By Ashok Gupta

शहर की सड़क से मीलों दूर, खेत खेत और पगडण्डी पगडण्डी भीतर पहुंचते उस ठेठ गांव में अगर कोई जरा सी भी ढंग की जगह कही जा सकती थी तो वह थी पोस्ट मास्टर साहब की बैठक. उस गांव में पोस्ट...

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माँ-बेटाः भारत पाक विभाजन की कहानियां-1 By Hayatulla Ansari

मोहिना आँधी और पानी में रात-भर भागती रही, ठिठुरती रही और भागती रही। अँधेरा इस गजब का था कि दो कदम आगे का दरख्त तक नहीं सुझाई देता था। खेत और मेढ़, टीला और खाई, पूरब और पश्चिम, ज़मीन...

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अपरिचिता By Rabindranath Tagore

आज मेरी आयु केवल सत्ताईस साल की है। यह जीवन न दीर्घता के हिसाब से बड़ा है, न गुण के हिसाब से। तो भी इसका एक विशेष मूल्य है। यह उस फूल के समान है जिसके वक्ष पर भ्रमर आ बैठा हो और उसी...

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शताब्दी By Ashok Gupta

वह युवक, जो अपने बूढे माता पिता को लेकर शताब्दी एक्सप्रेस के चेयर कार कोच में तीर्थयात्रा के लिए अभी अभी बैठा है, श्रवण कुमार उसका असली नाम नहीं है. उसके पिता के भी रिटायर होने में...

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मौसी By Ramnika Gupta

‘‘मैं अपने लिए दुलहिन खोजूँ या फूफी के लिए दूल्हा?’’ चिल्ला-चिल्लाकर, सुना-सुनाकर कह रहा था मोहना और मौसी (मोहना की फुआ को सभी मौसी कहकर पुकारते थे) को पटक-पटककर मार रहा था। थप्पड़...

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अब कहीं और नहीं By Ratan Chand Ratnesh

शर्मा जी फफक कर रो पड़े। जैसे सदियों से जबरन बांधकर रखी हुई नदी को अचानक बहने का रास्ता मिल गया हो। अपनी हथेली से आंसुओं को पोंछते हुए वे बोले, अब तुम्हें क्या बताता कि वे जाकर एक...

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बिना टिकट By Dinesh Tripathi 'Shams'

हां भाई फैजाबाद!
मगर कोई न बोला तो कन्डक्टर ताव खाता बोल पड़ा ,
बोलते क्यों नही किसका टिकट बाकी है फ़ैजाबाद का ?
अरे भाई गाड़ी बढ़ाओ . इतनी गर्मी , कि जान जा रही है.
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शपथपत्र By Arunendra Nath Verma

सेवानिवृत्त होने से पहले क्या क्या रंगीन सपने थे सिन्हा साहेब की आँखों में. सोचते थे जीवन भर जिन जिन शौकों के लिए समय निकालने के लिए तरसते रह गये उन्हें पूरा करने का अवसर अंत में आ...

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ब्रैड पकोड़ा By Ved Prakash Tyagi

रविवार के अवकाश मे गुप्तजी घर पर ही थे, घर पर दो मेहमान भी आए हुए थे। गुप्तजी विजयनगर गाज़ियाबाद मे रह रहे थे। गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा बसाई गयी इस कॉलोनी मे गुप्तजी का एक छ...

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दिल के आंसू By Dr Pradeep Gupta

महामहिम राष्ट्र्पति महोदय से पुरस्कार लेते समय गोपाल बाबू और उनकी पत्नी भाव विभोर हो गये। उनकी नम आॅखों से चारों ओर की तस्वीर धूंधली दिखाई देने लगी , और मन-मस्तिष्क में अमित का चेह...

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जंगल का दोस्त By Dr Sunita

बहुत पुराने समय की बात है, मिनकाई गाँव में एक युवक रहता था कोराबैबू। वह अकेला ही था। माता-पिता बचपन में गुजर गए थे। शुरू में तो गाँव वालों ने उसकी परवाह की, फिर कहा, “अब तुम खुद शि...

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पत्नी का पत्र By Rabindranath Tagore

आज हमारे विवाह को पंद्रह वर्ष हो गए, लेकिन अभी तक मैंने कभी तुमको चिट्ठी न लिखी। सदा तुम्हारे पास ही बनी रही - न जाने कितनी बातें कहती सुनती रही, पर चिट्ठी लिखने लायक दूरी कभी नहीं...

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Sikandar ki Sapath By Jayshankar Prasad

सिकन्दर की शपथ जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ जयशंकर प्रसाद © COPYRIGHTS This book is copyrighted content of the concerned author as well as Matrubharti. Matrubharti has exclusive digi...

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तमाशबीन By Bhagwati Prasad Dwivedi

तमाशबीन अपरार्िं दो से रात्रिा नौ बजे तक टेलीपफोन आपरेटरी करने के बाद जब मैं थका—माँदा लगभग दस बजे डेरे पर लौटा तो वहाँ का दृश्य देख एकाएक मुझे काठ मार गया । निस्तब्ध् रात का घुप्प...

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तीन दस्तक By Ratan Chand Ratnesh

एक हत्या के चश्मदीद गवाह की क्या मानसिक स्थिति होती है, रतन चंद रत्नेश की यह यह कहानी उस ओर इशारा करती है। कहानी की शुरुआती अंश का आधार प्रसिद्ध कहानीकार मोहन राकेश की कहानी एक...

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पदचाप By Hanif Madaar

‘पदचाप’ एक ऐसे जरुरतमंद किसान की कथा है जिसके पास पर्याप्त धन न होने के कारण खेत की जुताई आधुनिक उपकरण के माध्यम से नहीं कर सकता है जिस कारण वह अपने दोनों बच्चों को भी खेत में का...

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कहानी किस्मत की By Shanti Purohit

कहानी किस्मत की ,मेरी मौलिक ,अप्रकाशित रचना है

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रूट नंबर थर्टीन By Ashok Gupta

अगर किसी दहब वह बस ज़मीन पर न चल रही होती तो हवाई जहाज़ की कहलाती. बात एरोफ्लोट क्लब की चार्टर्ड बस रूट नंबर थर्टीन की हो रही है जो महानगर के दूर-दराज़ इलाकों की पॉश कालोनियों से उड़ते...

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साहित्यसाधना में अंतिम आहुति By Arunendra Nath Verma

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Vibhav Da ki Dadhi By Vinod Viplav

जातीयता और साम्प्रदायिकता की पड़ताल करती कहानी विभव दा की दाढ़ी बिहार की पृष्ठभूमि पर लिखी गयी है जहां जाती का भेदभाव धार्मिक भेदभाव से अधिक गहरा है। विनोद विप्लव की कलम से लिखी...

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Sankraman By Manish Kumar Singh

यह कहानी निम्न वर्ग के प्रति झूठी सहानुभूति रखने वाली मध्यमवर्गीय मानसिकता को उजागर करती है। ऊपरी दिखावा करते हुए ऐन वक्त पर हम अपना वर्गीय चरित्र दिखा देते हैं।

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नई रोशनी By Rabindranath Tagore

बाबू अनाथ बन्धु बी. ए. में पढ़ते थे। परन्तु कई वर्षों से निरन्तर फेल हो रहे थे। उनके सम्बन्धियों का विचार था कि वह इस वर्ष अवश्य उत्तीर्ण हो जाएंगे, पर इस वर्ष उन्होंने परीक्षा देन...

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एक थीं लच्छो चाची By Dr Sunita

नन्ही नीना से अगर कोई पूछता कि उसे दुनिया में सबसे अच्छा क्या लगता है, तो वह बखटके कहती—नानी...नानी का गाँव।
सच! पूरे साल भर वह नानी के पास... नानी के गाँव जाने के लिए ऐसे तरसती,...

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हेलिकॉप्टर वाले भइया By Sanjay Kundan

यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है, जो हेलिकॉप्टर में घूमने का सपना देखता है और उसके बारे में तरह-तरह की झूंठी बातें बनाता रहता है। संयोग से वह राजनीति में चला जाता है और हेलिकॉप्टर से...

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राग चिरंतन भोर वितान By Ashok Gupta

शाम तीन बज कर बीस मिनट हो ही रहे है की गली में खडंजे वाले रास्ते पर साइकिल की आहट होती है और जानकी समझ जाती है की पिताजी आ पहुंचे हैं. तभी साइकिल की घंटी बजती है. यह संकेत है कि...

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मेरी ख़ुशी By Shanti Purohit

मेरी ख़ुशी ,मेरी मौलिक ,अप्रकाशित रचना है

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गुरु दक्षिणा By Manju Gupta

शिक्षिका , समाज सेविका राधा ने प्रौढ़ शिक्षा का महत्त्व दे बेरोजगार अनपढ़ , गरीब , गंवई गवार नवयुवक को शिक्षित कर साक्षरता की मिसाल बनी ।

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ईमानदारी By Asha Ashish Shah

After huge response to 11 eBooks in Gujarati...I am presenting my 1st eBook in Hindi. ईमानदारी के वचन से बंधे गोपालदासजी की पीठ़ को ताक्त...

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अस्पताल बीमार है By Ratan Chand Ratnesh

जापान जैसे मुल्कों में व्यवस्था या सरकार के प्रति किसी बात का विरोध जताना हो तो लोग अधिक से अधिक काम कर उसे प्रकट करते हैं। काले बिल्ले लगाकर भी विरोध करना एक उचित माध्यम है परंतु...

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दादी की मुसकान By Dr Sunita

कोयना के घर में उसके मम्मी-पापा और भाई के अलावा दादा-दादी भी रहते हैं। कोयना और आशु का बचपन दादी की गोद में ही बीता है। यहाँ तक कि पिछले साल तक को दादी ही दोनों बच्चों को स्कूल बस...

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गूंगी By Rabindranath Tagore

कन्या का नाम जब सुभाषिणी रखा गया था तब कौन जानता था कि वह गूंगी होगी। इसके पहले,उसकी दो बड़ी बहनों के सुकेशिनी और सुहासिनी नाम रखे जा चुके थे, इसी से तुकबन्दी मिलाने के हेतु उसके पि...

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दलाल का एक दिन By Sanjay Kundan

एक बौद्धिक व्यक्ति को लगता है कि दलाली करके ही सफलता मिल सकती है। और वह इस रास्ते से सफलता हासिल भी करता है। लेकिन उसका मन कचोटता है। वह पश्चाताप की आग में जलता रहता है।

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Kiston Ki mout By Sandeep Meel

‘‘इंसान रोज ही नहीं हर पल मरता है, जब वह अंतिम रूप से मरता है तो दुनियां को लगता है कि फलां मर गया। लेकिन रोजाना जो किस्तों में मरता है उसका क्या ?’’ राजस्थान के मरुस्थल में टीलों...

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दर्द By Pawnesh Dixit

दर्द मेरी पहली कहानी है हँसते गुदगुदाते हुए , थोड़ा गंभीर बनाते हुए , ये रुनझुन नामक लड़की पर आधारित कहानी जब मर्मांतकता पर अचानक पहुँचती है और तभी परिदृश्य का बदलाव करुण...

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फिर हुई मुलाकात By Shanti Purohit

मेरी तीसरी कहानी फिर हुई मुलाकात

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प्रतिध्वनि By Ashok Gupta

करीब चालीस मिनट बीतने को आये थे. वह घायल लड़का अस्पताल के बराम्दे में एक नंगे बेड पर लिटा छोड़ा गया था. अमित उस लड़के को अपनी गाडी में उस सरकारी अस्पताल में लगभग ढो कर लाया था. वह लड़...

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एक छूटा हुआ हस्ताक्षर By Ratan Chand Ratnesh

A short-story depicting the suffering of an old common man facing in the lacklustre system.

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सिक्के चमड़े के By Arunendra Nath Verma

जब किसी की किस्मत में लिखा हो कि चमड़े की मशक ढोते रहने से छिल रहे उसके दुखते कन्धों पर एक दिन मुल्क की बादशाहत आ बैठेगी, तो फिर बाकायदा ऐसा होकर ही रहता है. यह सब होता भी है कितनी...

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कवि का हृदय By Rabindranath Tagore

चांदनी रात में भगवान विष्णु बैठे मन-ही-मन गुनगुना रहे थे-
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जग्गू जैसा कोई नहीं By Dr Sunita

पुराने समय की बात है, हरसू गाँव में पंडित शिवशंकर रहते थे। वे बूढ़े हो चुके थे। घर-परिवार में कोई और नहीं था। गाँव के अपने बड़े-से घर में अकेले ही रहते थे। दिन भर वे यहाँ-वहाँ घूमा...

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ममता एक माँ की By Shanti Purohit

मेरी लिखी एक कहानी शीर्षक ( ममता एक माँ की )

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एक दिन का राजा By Sanjay Kundan

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नींद By Ashok Gupta

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माँ-बेटाः भारत पाक विभाजन की कहानियां-1 By Hayatulla Ansari

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आज मेरी आयु केवल सत्ताईस साल की है। यह जीवन न दीर्घता के हिसाब से बड़ा है, न गुण के हिसाब से। तो भी इसका एक विशेष मूल्य है। यह उस फूल के समान है जिसके वक्ष पर भ्रमर आ बैठा हो और उसी...

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