लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • काँटों से खींच कर ये आँचल - 6

    अब अपने आगे के नौ महीने के अज्ञातवास की भी हमें पूरी तयारी करनी थी. एक भी चूक दी...

  • एक अदद फ्लैट - 4

    नंदलाल बैठे हुए सोचने लगे...ये बुज़ुर्ग कोई पैंसठ साल के होंगे। व्यास जी पचपन के...

  • हथेली

    "जानते है पांडे जी गरीबी के साथ जब दरिद्रता आती है तब जीवन नर्क लगता है ,,,,&#39...

नदी बहती रही.... - 1 By Kusum Bhatt

‘‘सलोनी!’’
किवाड़ तो बन्द थे..., अन्दर कैसे घुस गई...! मैंने ही किये थे इन्हीं हथेलियों से .... तुम रोई थी... छटपटाई थी.... तड़फ कर कितना कुछ कह रही थी... आकुल तुम्हारी हिरनी आँखों...

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तब राहुल सांकृत्यायन को नहीं पढ़ा था - 1 By Arpan Kumar

यह कहानी अनुरंजन की कैशोर्य कल्पनाशीलता की है। उसकी अनगढ़ता और दुःसाहस की है। एक ग्रामीण किशोर की अदम्य जिजीविषा भी है यहाँ। जाने क्या है इस कहानी में और जाने क्या नहीं है! कुछ भी ह...

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मेरा और उसका इंतिक़ाम By Saadat Hasan Manto

घर में मेरे सिवा कोई मौजूद नहीं था। पिता जी कचहरी में थे और शाम से पहले कभी घर आने के आदी न थे। माता जी लाहौर में थीं और मेरी बहन बिमला अपनी किसी सहेली के हाँ गई थी! मैं तन्हा अपने...

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प्रेम — रंग, अफवाह, खुशबू By Sushma Munindra

उन्नति ने नहीं सोचा था फेस बुक पर रक्षा मिलेगी।
उन्नति का मन यॅूं भी भटका सा रहता है। जब से बेटी की शादी हुई, बेटा आई.आई.टी. करने खड़गपुर गया वह मानो लैप टॉंप पर अपने मन को भटकने क...

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नदी की उँगलियों के निशान - 2 By Kusum Bhatt

भुवन चाचा के चेहरे पर धूप की तितली बैठी, माधुरी हवा में उड़ी उसके पंख पकड़ कर मैं भी उड़ने लगी....
उस विजन में हम दो लड़कियाँ जिंदगी की नौवीं-दसवीं सीढी पर पांव रखती प्रकृति की भव्यता...

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काँटों से खींच कर ये आँचल - 6 By Rita Gupta

अब अपने आगे के नौ महीने के अज्ञातवास की भी हमें पूरी तयारी करनी थी. एक भी चूक दीक्षा की गृहस्थी के लिए घातक होती.
उसी रात को दीक्षा ने रविश को बताया कि वह मेरे साथ जल्द ही सिडनी,...

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एक अदद फ्लैट - 4 By Arpan Kumar

नंदलाल बैठे हुए सोचने लगे...ये बुज़ुर्ग कोई पैंसठ साल के होंगे। व्यास जी पचपन के और वे स्वयं भी तो पचास पार कर ही गए हैं। अलग अलग उम्र के ये तीनों अधेड़ लोग अपने अपने हिसाब से अपना ज...

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एक गधे का दर्द By Ajay Amitabh Suman

अपना गधा संपन्न था , पर सुखी नहीं। दर्द तो था , पर इसका कारण पता नहीं चल रहा था। मल्टी नेशनल कंपनी में कार्यरत होते हुए भी , अजीब सी बैचैनी थी। सर झुकाते झुकाते उसकी गर्दन तो टेड़ी...

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फ़टीचर आशिक़ By Swati Grover

"नेहा मैं तुमसे प्यार करता हूँ मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता ।" "अमन प्यार से पेट नहीं भरता ज़िन्दगी जीने के लिए और भी चीज़े चाहिए होती है, जैसे कि पैसा या...

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हथेली By Ajay Kumar Awasthi

"जानते है पांडे जी गरीबी के साथ जब दरिद्रता आती है तब जीवन नर्क लगता है ,,,,' अपनी कटी हुई हथेली को देखते हुए राज ने कहा,, "पांडे जी, जब गावँ में हम चार भाई साथ साथ थे तब कुल ए...

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परावर्तन By Sushma Munindra

जज ने चोर को सजा सुनाई। चोर ने जज से कहा — साहब सजा मुझे नहीं मेरी मॉं को दो । मॉं ने बचपन में मुझे चोरी करने से रोका होता तो मैं चोर न बनता ——
प्रेरक को यह कहानी सुजान ने सुनाई औ...

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हिवड़ो अगन संजोय By Anju Sharma

ऐ तवा ल्यो, कड़ाही ल्यो, चिमटा ल्यो, दरांत ल्यो .... बलखाती हुई आवाज़ के साथ वह लचककर मूलिया दर्जी की दुकान के नुक्कड़ से घूमी तो चौराहे पर मौजूद नज़रें उसी दिशा में उठ गईं! हर कदम के...

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भोलू और शेरू By Amita Joshi

एक आठ साल का लड़का था नाम था भोलू वो गांव में अपने घर में रहता था और पढ़ने के लिए गांव से दस किलोमीटर दूर एक स्कूल में जाता था उसके घर के आसपास चीड़ के पेड़ों का घना जंगल था जिसम...

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तीसरी आँख By Kusum Bhatt

हमारे बीच युगों की धुंध थी.....
पृथ्वी के इस छोर पर मैं हूँ, दूसरे छोर पर सिगरेट का धुआं उड़ाता वह, पश्चिम में अस्त होने को अकुलाता मेरी उंगली पर टंगा सूरज... मुझे उम्मीद है कल फिर...

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समयरेखा By Anju Sharma

छह बजने में आधा घंटा बाक़ी है और अभी तक तुम तैयार नहीं हुई! पिक्चर निकल जाएगी, जानेमन!!!
मानव ने एकाएक पीछे से आकर मुझे बाँहों में भरते हुए ज़ोर से हिला दिया! बचपन से उसकी आदत थी,...

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खूँटे - 2 By Kusum Bhatt

दूसरी तरफ वह जगह इस पर रामदेई नानी जिसे हम छोटी नानी कहते अलाव जलाया करती थी जाड़े के दिनांे पूरा गांव आकर घेर लेता था अलाव... आँच से दहकते चेहरे बतरस बांटने एक दूसरे से गोया... इतन...

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भरोसा अभी कायम है By Anju Sharma

“किसी गिरोह की दुश्मनी तुम्हे इस बात पर आमादा न कर दे कि इन्साफ से फिर जाओ...इंसाफ करो अगर अल्लाह की रज़ा चाहते हो .....
छोटी मस्जिद से निकली लाउडस्पीकर की आवाज़ पूरे इलाके की फिज़ा...

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हवा में फड़फड़ाती चिट्ठी By Shraddha Thawait

वह ओस से भीगी-धुली सुबह होगी. जब एक जंगल की पगडण्डी में हम यूँ ही टहलते हुए, बहुत दूर निकल जायेंगे. मैं एक खुमारी में चल रहा होऊंगा, तुम्हारे साथ की खुमारी में. तुम क्यों चलती रहोग...

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स्पेस By Seema Jain

रात के नौ बज गए थे, रेखा चिंता के कारण परेशान हो रही थी। पुत्र अभय अभी तक नहीं आया था ना फोन उठा रहा था। ड्राइंग रूम में पति हिमांशु और पुत्री इला टीवी देखने में मस्त थे। एक दो बार...

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सोने की मछली By Amita Joshi

एक नदी किनारे छोटी सी झोपड़ी में चुनमुन नाम की छह साल की लड़की रहती थी दिन भर वो माँ के आसपास उछलती कूदती और माँ के काम में हाथ बंटाती उसके बाबा पास के जंगल में सुबह सवेरे लकड़ी ल...

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करसरा की काजल का कलेजा कसकता है By Sushma Munindra

जो लोग हर स्थिति—परिस्थिति में सकारात्मक भाव रखने का मानस बना लेते हैं, जानते हैं जीवन किसी का भी हो पूर्णतः बाधारहित नहीं होता। इसीलिये ये लोग बाधाओं में भी काम लायक मसला ढॅूंढ़ ले...

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कांट्रैक्टर - 6 By Arpan Kumar

देखते-देखते एक साल और बीत गया। रजिंदर मित्तल का तीन वर्षों का कार्यकाल पूरा हो चुका था। एक आदेश जारी हुआ और रजिंदर मित्तल रायपुर से दिल्ली के लिए रवाना हुए। जाते-जाते भी टीसीएस ने...

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बंद खिड़की खुल गई By Anju Sharma

उस रोज़ सूरज ने दिन को अलविदा कहा और निकल पड़ा बेफिक्री की राह पर! इधर वह बड़ी तेज़ी से भाग रही थी, इस उम्मीद में कि इस सड़क पर हर अगला कदम उसके घर की दहलीज़ के कुछ और करीब ले जाएगा! तेज़...

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लाजवन्ती By Ved Prakash Tyagi

लाजवन्ती मैं तो अपनी बेटी को डॉक्टर बनाऊँगा, नमिता के पेट पर हाथ फिराते हुए राजेन्द्र ने कहा, और अगर बेटा हुआ तो, नमिता ने अपने पेट को दोनों हाथों का सहारा देते हुए पूछा, बेटा हुआ...

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मैं ही क्यों By Ankita Bhargava

उस दिन मनस्वी कॉलेज से आई तो उसे घर का माहौल हर रोज़ से कुछ अलग लगा। मम्मा-पापा कुछ व्यस्त लग रहे थे। उसने उन्हें डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा और अपने कमरे में चली आई। कमरे में एक लि...

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खिलता है बुरांश ! - 2 By Kusum Bhatt

भाई आकुल व्याकुल घर के आगे लान में टहल रहा था, बार बार मोबाइल कान पर लगाता उसे देखते ही झल्ला गया ‘‘ओफ्फो! एक फोन तो कर ही सकती थी न दीदी... कहाँ रह गई इतनी रात.... ‘‘उसने कलाई घड़ी...

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माय फर्स्ट किस By Yayawargi (Divangi Joshi)

डियर डायरी , तुजे पता है न तेरी बातुनी याशु ऊटी जाने वाली थी कॉलेज कैंप के लिए! आज तक मैंने तुजे हर राज़ बताए है ओर बताती भी किसे तेरे अलावा, मैंरी बात सुनता ही कोन है या ये क...

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पत्ता टूटा डाल से By Anju Sharma

गामे की माँ, कुछ सुना तूने, पाई बीमार है बड़ा.....
ईश्वरी देवी ने अपने सिर की सफ़ेद चुन्नी संभालते हुए, घुटनों पर हाथ रख, मंजी पर बैठते हुए ऐलान किया तो मंजी पर बैठी गामे की माँ चौ...

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हल्की सी रेखा By Shraddha Thawait

पृथ्वी के आधे भाग ने अपने सियामीज जुड़वा भाई, दूसरे आधे भाग को अपनी रात की चादर ओढ़ा दी और खुद जाग गया. पहले जुड़वा भाई का दिन ढल गया. एक नयी कहानी लिखकर. नये अनुभवों की पोटलियां लोगो...

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अकेली By Seema Jain

नीलम कमरे में सिर झुकाए बैठी थी, और सब उपस्थित जन झुंझलाहट और गुस्से से उसकी तरफ देख रहे थे। सब की एक ही शिकायत थी बीस दिन से पति अमर अस्पताल में भर्ती था और वह एक बार भी देखने नही...

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इस्तेमाल By Sushma Munindra

रोज की तरह वे सुबह जल्दी जाग गये। पुलिस विभाग की नौकरी ने जल्दी जागने की जो आदत डाल दी है वह सेवा निवृत्ति के बाद भी कायम है। मधु मालती की छतनार बेल पर रात भर सोई समूह भर चिड़िया चह...

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ठाकुर की थाली By Pammy Rajan

मलकु सवेरे-सवेरे ही आकर रघु काका के दरवाजे की सांकल बजाते हुए चिल्लाया - " उठो काका, आज ठाकुर ने उमा को शहर से बुलवाया है। "रघु काका का बेटा उमा शहर में सरकारी विभाग में अफसर...

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डिजिटल भी और सिंगल भी By Ajay Amitabh Suman

पबजी गेम में उसकी शिकारी निगाहें दुश्मनों को बड़ी मुश्तैदी से साफ कर रहीं थी। तकरीबन आधे घंटे की मशक्कत के बाद वो जोर जोर से चिल्लाने लगा। हुर्रे, हुर्रे, हिप हिप हुर्रे। आखिकार लेब...

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नदी बहती रही.... - 1 By Kusum Bhatt

‘‘सलोनी!’’
किवाड़ तो बन्द थे..., अन्दर कैसे घुस गई...! मैंने ही किये थे इन्हीं हथेलियों से .... तुम रोई थी... छटपटाई थी.... तड़फ कर कितना कुछ कह रही थी... आकुल तुम्हारी हिरनी आँखों...

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तब राहुल सांकृत्यायन को नहीं पढ़ा था - 1 By Arpan Kumar

यह कहानी अनुरंजन की कैशोर्य कल्पनाशीलता की है। उसकी अनगढ़ता और दुःसाहस की है। एक ग्रामीण किशोर की अदम्य जिजीविषा भी है यहाँ। जाने क्या है इस कहानी में और जाने क्या नहीं है! कुछ भी ह...

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मेरा और उसका इंतिक़ाम By Saadat Hasan Manto

घर में मेरे सिवा कोई मौजूद नहीं था। पिता जी कचहरी में थे और शाम से पहले कभी घर आने के आदी न थे। माता जी लाहौर में थीं और मेरी बहन बिमला अपनी किसी सहेली के हाँ गई थी! मैं तन्हा अपने...

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प्रेम — रंग, अफवाह, खुशबू By Sushma Munindra

उन्नति ने नहीं सोचा था फेस बुक पर रक्षा मिलेगी।
उन्नति का मन यॅूं भी भटका सा रहता है। जब से बेटी की शादी हुई, बेटा आई.आई.टी. करने खड़गपुर गया वह मानो लैप टॉंप पर अपने मन को भटकने क...

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नदी की उँगलियों के निशान - 2 By Kusum Bhatt

भुवन चाचा के चेहरे पर धूप की तितली बैठी, माधुरी हवा में उड़ी उसके पंख पकड़ कर मैं भी उड़ने लगी....
उस विजन में हम दो लड़कियाँ जिंदगी की नौवीं-दसवीं सीढी पर पांव रखती प्रकृति की भव्यता...

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काँटों से खींच कर ये आँचल - 6 By Rita Gupta

अब अपने आगे के नौ महीने के अज्ञातवास की भी हमें पूरी तयारी करनी थी. एक भी चूक दीक्षा की गृहस्थी के लिए घातक होती.
उसी रात को दीक्षा ने रविश को बताया कि वह मेरे साथ जल्द ही सिडनी,...

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एक अदद फ्लैट - 4 By Arpan Kumar

नंदलाल बैठे हुए सोचने लगे...ये बुज़ुर्ग कोई पैंसठ साल के होंगे। व्यास जी पचपन के और वे स्वयं भी तो पचास पार कर ही गए हैं। अलग अलग उम्र के ये तीनों अधेड़ लोग अपने अपने हिसाब से अपना ज...

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एक गधे का दर्द By Ajay Amitabh Suman

अपना गधा संपन्न था , पर सुखी नहीं। दर्द तो था , पर इसका कारण पता नहीं चल रहा था। मल्टी नेशनल कंपनी में कार्यरत होते हुए भी , अजीब सी बैचैनी थी। सर झुकाते झुकाते उसकी गर्दन तो टेड़ी...

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फ़टीचर आशिक़ By Swati Grover

"नेहा मैं तुमसे प्यार करता हूँ मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता ।" "अमन प्यार से पेट नहीं भरता ज़िन्दगी जीने के लिए और भी चीज़े चाहिए होती है, जैसे कि पैसा या...

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हथेली By Ajay Kumar Awasthi

"जानते है पांडे जी गरीबी के साथ जब दरिद्रता आती है तब जीवन नर्क लगता है ,,,,' अपनी कटी हुई हथेली को देखते हुए राज ने कहा,, "पांडे जी, जब गावँ में हम चार भाई साथ साथ थे तब कुल ए...

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परावर्तन By Sushma Munindra

जज ने चोर को सजा सुनाई। चोर ने जज से कहा — साहब सजा मुझे नहीं मेरी मॉं को दो । मॉं ने बचपन में मुझे चोरी करने से रोका होता तो मैं चोर न बनता ——
प्रेरक को यह कहानी सुजान ने सुनाई औ...

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हिवड़ो अगन संजोय By Anju Sharma

ऐ तवा ल्यो, कड़ाही ल्यो, चिमटा ल्यो, दरांत ल्यो .... बलखाती हुई आवाज़ के साथ वह लचककर मूलिया दर्जी की दुकान के नुक्कड़ से घूमी तो चौराहे पर मौजूद नज़रें उसी दिशा में उठ गईं! हर कदम के...

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भोलू और शेरू By Amita Joshi

एक आठ साल का लड़का था नाम था भोलू वो गांव में अपने घर में रहता था और पढ़ने के लिए गांव से दस किलोमीटर दूर एक स्कूल में जाता था उसके घर के आसपास चीड़ के पेड़ों का घना जंगल था जिसम...

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तीसरी आँख By Kusum Bhatt

हमारे बीच युगों की धुंध थी.....
पृथ्वी के इस छोर पर मैं हूँ, दूसरे छोर पर सिगरेट का धुआं उड़ाता वह, पश्चिम में अस्त होने को अकुलाता मेरी उंगली पर टंगा सूरज... मुझे उम्मीद है कल फिर...

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समयरेखा By Anju Sharma

छह बजने में आधा घंटा बाक़ी है और अभी तक तुम तैयार नहीं हुई! पिक्चर निकल जाएगी, जानेमन!!!
मानव ने एकाएक पीछे से आकर मुझे बाँहों में भरते हुए ज़ोर से हिला दिया! बचपन से उसकी आदत थी,...

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खूँटे - 2 By Kusum Bhatt

दूसरी तरफ वह जगह इस पर रामदेई नानी जिसे हम छोटी नानी कहते अलाव जलाया करती थी जाड़े के दिनांे पूरा गांव आकर घेर लेता था अलाव... आँच से दहकते चेहरे बतरस बांटने एक दूसरे से गोया... इतन...

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भरोसा अभी कायम है By Anju Sharma

“किसी गिरोह की दुश्मनी तुम्हे इस बात पर आमादा न कर दे कि इन्साफ से फिर जाओ...इंसाफ करो अगर अल्लाह की रज़ा चाहते हो .....
छोटी मस्जिद से निकली लाउडस्पीकर की आवाज़ पूरे इलाके की फिज़ा...

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हवा में फड़फड़ाती चिट्ठी By Shraddha Thawait

वह ओस से भीगी-धुली सुबह होगी. जब एक जंगल की पगडण्डी में हम यूँ ही टहलते हुए, बहुत दूर निकल जायेंगे. मैं एक खुमारी में चल रहा होऊंगा, तुम्हारे साथ की खुमारी में. तुम क्यों चलती रहोग...

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स्पेस By Seema Jain

रात के नौ बज गए थे, रेखा चिंता के कारण परेशान हो रही थी। पुत्र अभय अभी तक नहीं आया था ना फोन उठा रहा था। ड्राइंग रूम में पति हिमांशु और पुत्री इला टीवी देखने में मस्त थे। एक दो बार...

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सोने की मछली By Amita Joshi

एक नदी किनारे छोटी सी झोपड़ी में चुनमुन नाम की छह साल की लड़की रहती थी दिन भर वो माँ के आसपास उछलती कूदती और माँ के काम में हाथ बंटाती उसके बाबा पास के जंगल में सुबह सवेरे लकड़ी ल...

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करसरा की काजल का कलेजा कसकता है By Sushma Munindra

जो लोग हर स्थिति—परिस्थिति में सकारात्मक भाव रखने का मानस बना लेते हैं, जानते हैं जीवन किसी का भी हो पूर्णतः बाधारहित नहीं होता। इसीलिये ये लोग बाधाओं में भी काम लायक मसला ढॅूंढ़ ले...

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देखते-देखते एक साल और बीत गया। रजिंदर मित्तल का तीन वर्षों का कार्यकाल पूरा हो चुका था। एक आदेश जारी हुआ और रजिंदर मित्तल रायपुर से दिल्ली के लिए रवाना हुए। जाते-जाते भी टीसीएस ने...

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बंद खिड़की खुल गई By Anju Sharma

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लाजवन्ती मैं तो अपनी बेटी को डॉक्टर बनाऊँगा, नमिता के पेट पर हाथ फिराते हुए राजेन्द्र ने कहा, और अगर बेटा हुआ तो, नमिता ने अपने पेट को दोनों हाथों का सहारा देते हुए पूछा, बेटा हुआ...

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मैं ही क्यों By Ankita Bhargava

उस दिन मनस्वी कॉलेज से आई तो उसे घर का माहौल हर रोज़ से कुछ अलग लगा। मम्मा-पापा कुछ व्यस्त लग रहे थे। उसने उन्हें डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा और अपने कमरे में चली आई। कमरे में एक लि...

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भाई आकुल व्याकुल घर के आगे लान में टहल रहा था, बार बार मोबाइल कान पर लगाता उसे देखते ही झल्ला गया ‘‘ओफ्फो! एक फोन तो कर ही सकती थी न दीदी... कहाँ रह गई इतनी रात.... ‘‘उसने कलाई घड़ी...

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डियर डायरी , तुजे पता है न तेरी बातुनी याशु ऊटी जाने वाली थी कॉलेज कैंप के लिए! आज तक मैंने तुजे हर राज़ बताए है ओर बताती भी किसे तेरे अलावा, मैंरी बात सुनता ही कोन है या ये क...

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पत्ता टूटा डाल से By Anju Sharma

गामे की माँ, कुछ सुना तूने, पाई बीमार है बड़ा.....
ईश्वरी देवी ने अपने सिर की सफ़ेद चुन्नी संभालते हुए, घुटनों पर हाथ रख, मंजी पर बैठते हुए ऐलान किया तो मंजी पर बैठी गामे की माँ चौ...

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हल्की सी रेखा By Shraddha Thawait

पृथ्वी के आधे भाग ने अपने सियामीज जुड़वा भाई, दूसरे आधे भाग को अपनी रात की चादर ओढ़ा दी और खुद जाग गया. पहले जुड़वा भाई का दिन ढल गया. एक नयी कहानी लिखकर. नये अनुभवों की पोटलियां लोगो...

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नीलम कमरे में सिर झुकाए बैठी थी, और सब उपस्थित जन झुंझलाहट और गुस्से से उसकी तरफ देख रहे थे। सब की एक ही शिकायत थी बीस दिन से पति अमर अस्पताल में भर्ती था और वह एक बार भी देखने नही...

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रोज की तरह वे सुबह जल्दी जाग गये। पुलिस विभाग की नौकरी ने जल्दी जागने की जो आदत डाल दी है वह सेवा निवृत्ति के बाद भी कायम है। मधु मालती की छतनार बेल पर रात भर सोई समूह भर चिड़िया चह...

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ठाकुर की थाली By Pammy Rajan

मलकु सवेरे-सवेरे ही आकर रघु काका के दरवाजे की सांकल बजाते हुए चिल्लाया - " उठो काका, आज ठाकुर ने उमा को शहर से बुलवाया है। "रघु काका का बेटा उमा शहर में सरकारी विभाग में अफसर...

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डिजिटल भी और सिंगल भी By Ajay Amitabh Suman

पबजी गेम में उसकी शिकारी निगाहें दुश्मनों को बड़ी मुश्तैदी से साफ कर रहीं थी। तकरीबन आधे घंटे की मशक्कत के बाद वो जोर जोर से चिल्लाने लगा। हुर्रे, हुर्रे, हिप हिप हुर्रे। आखिकार लेब...

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