लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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Featured Books
  • मिस फ़र्या

    शादी के एक महीने बाद सुहेल परेशान होगया। उस की रातों की नींद और दिन का चैन हराम...

  • फादर्स डे

    मुझे रात को जल्दी सोने की आदत है। अपने बेटा बहू की तरह मैं देर रात तक जागना पसंद...

  • ट्रांसफर

    "रीमा बहुत-बहुत बधाई हो! आज तुम्हारा सपना पूरा हो गया। तुम्हारा चुनाव आई.ए.एस. क...

डिजिटल भी और सिंगल भी By Ajay Amitabh Suman

पबजी गेम में उसकी शिकारी निगाहें दुश्मनों को बड़ी मुश्तैदी से साफ कर रहीं थी। तकरीबन आधे घंटे की मशक्कत के बाद वो जोर जोर से चिल्लाने लगा। हुर्रे, हुर्रे, हिप हिप हुर्रे। आखिकार लेब...

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काँटों से खींच कर ये आँचल - 3 By Rita Gupta

“रेगिस्तान में उगे किसी कैक्टस की ही भांति मेरा जीवन शुष्क और कंटीला है. संभल कर रहना अनुभा कहीं मेरे कांटे तुम्हें भी जख्मी ना कर दें”,
इन्होने कहा तो मैं चौंक गयी कि कैक्टस पर म...

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खिलता है बुरांश ! - 1 By Kusum Bhatt

....आज सांवली शाम का जादू गायब था! वह टहलुई सी चलती रही..., मन का बेड़ा अभी अचानक उठे तूफान के बीच फंसा था...! एक पल को उसके जेहन में खौफनाक विचार उठा - समाप्त कर दे काया माँ... निर...

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कांट्रैक्टर - 4 By Arpan Kumar

राकेश हल्का सा मुस्कुराता हुआ चुप ही रहा। वह कुछ संकोच में भी आ रहा था। चरणजीत ने बिकास की बात को पूरी शिद्दत से आगे बढ़ाते हुए और पहले राकेश एवं बाद में बिकास चटर्जी की ओर देखते हु...

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मिस फ़र्या By Saadat Hasan Manto

शादी के एक महीने बाद सुहेल परेशान होगया। उस की रातों की नींद और दिन का चैन हराम होगया।

उस का ख़याल था कि बच्चा कम अज़ कम तीन साल के बाद पैदा होगा मगर अब एक दम ये मालूम करके उस क...

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नैहर आँचल समाय... By Dr Vinita Rahurikar

नैहर आँचल समाय पूरे पांच साल बाद आ रही थी प्रांजल अपने मायके. लेकिन यह पांच साल उसे युगों जितने लम्बे लग रहे थे. तभी अमेरिका से जब वह दिल्ली आई तो दोनों बच्चों को सास के पास...

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अँधेरे में जुगनू - 2 By Kusum Bhatt

घर से निकलते समय उसने एक बार भी नहीं सोचा। तूफान का मुकाबला करने की ताकत नहीं थी उसमें। पति ने मारपीट की- बच्चों के सामने! ग्लानि हुई! रोज़-रोज़ गाली-गलौज़, मारपीट... तंग आ गयी थी। वह...

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फादर्स डे By Ankita Bhargava

मुझे रात को जल्दी सोने की आदत है। अपने बेटा बहू की तरह मैं देर रात तक जागना पसंद नहीं करता। शाम का खाना जल्दी खाना और खाने के बाद थोड़ी देर टहलने जाना और फिर एक गहरी निद्रा का आनंद...

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दूर है किनारा By Anju Sharma

तपन ने आसमान की ओर सर उठाकर देखा तो कुछ देर बस देखता ही रहा! आकाश तो वहां भी था पर इतना खुला कभी नहीं लगा, खूब खुला, निस्सीम, अनंत! और ये हवा, ये भी तो वहां थी पर इतनी आजाद, इतनी ख...

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मुझे चाँद चाहिए By Shraddha Thawait

एक दिन चाँद को आसमान से धरती में झांकने पर एक झरोखे से निकलती सतरंगी आभा दिखी. चाँद ने आसमान में धीरे से नीचे आकर, थोडा सा झुक कर देखा. उसे पलंग पर बैठी हुई एक लड़की दिखी. वह सतरंगी...

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ट्रांसफर By Swati Grover

"रीमा बहुत-बहुत बधाई हो! आज तुम्हारा सपना पूरा हो गया। तुम्हारा चुनाव आई.ए.एस. के लिए हो गया। तुम्हारा सपना पूरा हो गया। बस तुम अब सारी चिंता छोड़ दो। जहाँ तुम्हारी पोस्टिंग हो वहा...

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फण्डा यह है कि By Sushma Munindra

तीस वर्ष का समय बहुत होता है किसी युवा के स्नायुओं को ढीला और नजर को कमजोर कर बूढ़ा बना देने के लिये। इसीलिये अब खिलाड़ी की धसकती कमर में वह पुष्टता नहीं दिखाई देती जो मूर्तियों की स...

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गली नंबर दो By Anju Sharma

पुत्तर छेत्ती कर, वेख, चा ठंडी होंदी पई ए।
बीजी की तेज़ आवाज़ से उसकी तन्द्रा भंग हुई। रंग में ब्रश डुबोते हाथ थम गए। पिछले एक घंटे में यह पहला मौका था, जब भूपी ने मूर्ति, रंग और ब...

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निवि By Anjali Raghuvanshi

आठ साल हुए, काफी अरसे बाद मैं उनसे मिलने वाला था, वो अपना शान्त सा पहाड़ी शहर छोड़ के दिल्ली में एक कॉलेज की प्रोफेसर थी, कभी सोचता हूँ उस सुकून तलाशने वाली लड़की ने क्यूँ इस शोर से भ...

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नयी सहर By Ankita Bhargava

निधी के सोने जाने के बाद पीछे पीछे मोहित भी अपने कमरे में चला आया वह मुंह दूसरी ओर किये लेटी थी मोहित समझ रहा था वह रो रही है मगर उसके आंसुओं का सामना करने की हिम्मत अभी मोहित मे...

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एक नींद हज़ार सपने By Anju Sharma

उस नामुराद रात का दूसरा पहर भी बीत चुका था! दिन भर की चहलकदमी और तमाशे से ऊबी गली अब चाँद के साए में झपकियां ले रही थी और दूर किसी कोने से आती किसी कुत्ते की आवाज़ पर रह-रहकर जाग उठ...

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मुक्ति और भय By Shraddha Thawait

वह पिछले पैतीस वर्षों से रोज अपने ऑफिस में कलम घिसते आ रहे थे, इस आशा में कि यह घिसाई शायद किसी के हित का हेतु बन जाये, पर उनकी यह घिसाई फाइलों के लाल फीते से बंध कर रह जाती या किस...

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चम्पा चुड़ैल By Swati Grover

बड़ी देर से खुद को शीशे मैं निहारते हुए बोली, "कि अब  पहले  से  ज्यादा  डरावनी  लग  रही हूँ । त्वचा  बिलकुल  काली  हो  गई&nbsp...

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भव्यता में भयावहता भी होती है By Sushma Munindra

कॉंल बेल की घ्वनि सुन माधुरी बाहरी बरामदे में आई। शुक्ला प्रणामी मुद्रा में तैनात मिले —
‘‘मैडम, मैं शुक्ला। टी.सी. । आप और डॉंक्टर साहब जबलपुर जा रहे थे। मैं ए.सी. कोच में ड्‌यूट...

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अनंत यात्रा.. By Arpan Kumar

माधुरी सांगवान हरियाणा में पली-बढ़ी एक महिला हैं। इन दिनों वे दिल्ली में रह रही हैं। अपने दोनों बच्चों को अपने साथ रखकर। वे एक महत्वाकांक्षी और सजग महिला है जो अपने बल-बूते दिल्ली क...

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नृत्यांगना सुरभि By Ved Prakash Tyagi

नृत्यांगना सुरभि सुरभि ने अपनी माँ को मनाने की बहुत कोशिश की लेकिन टस से मस नहीं हुई, भैया, भाभी और पिताजी को इस बारे में अभी कुछ बताया ही नहीं था। सुरभि जानती थी कि एक बार माँ राज...

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आज शाम है बहुत उदास By Anju Sharma

लोहामंडी..… कृषि कुंज...… इंदरपुरी...… टोडापुर .....ठक ठक ठक.........खटारा ब्लू लाइन के कंडक्टर ने खिड़की से एक हाथ बाहर निकाल बस के टीन को पीटते हुये ज़ोर से गला फाड़कर आवाज़ लगाई, मा...

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जिद By Seema Saxena

जिद अरे अतुल तुम यहाँ ? मैं तो तुम्हें यहाँ देखकर चौंक रहा हूँ ! कब आई ? बिलकुल अभी ! और तुम ? मैं भी आज ही आया हूँ ! अच्छा ठीक है, मैं चलती हूँ ! बाय !! कहाँ चलती हूँ, यार दो...

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तो By Ankita Bhargava

संजना जब तक अपना नाश्ता लेकर आई राज ऑफिस के लिए निकल चुके थे, आज फिर संजना डाईनिंग टेबल पर अकेली बैठी प्लेट में चम्मच घुमा रही थी। उसे तो याद भी नहीं आता कितने दिन बीत गए उसे राज क...

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नेक कर्मों की फिहरिश्त (A tribute to mother’s love) By Bhupendra kumar Dave

नेक कर्मों की फिहरिश्त (A tribute to mother’s love) ..... भूपेन्द्र कुमार दवे जिन्दगी पहले अपना अर्थ बताती है और फिर अपना मकसद जताने का प्रयास करती है। हम जैसे जैस...

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पगडंडी... By Shraddha Thawait

सुदूर जंगलों में जहाँ तक चौड़ी राहें न जाती, न आती हैं. लोग अपनी पुरानी मान्यताओं में जकड़े हुए हैं. जहाँ कई प्रसव जंगल में घास काटने, महुआ बीनने या लकड़ी इकठ्ठा करते हुए हो जाते हो....

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कृपया ध्यान दीजिए By Arpan Kumar

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर कई घंटों से कमलेश माथुर बैठा हुआ था, अपने गंतव्य की ओर जानेवाली ट्रेन का इंतज़ार करता हुआ। बाकी दिनों की ही तरह उस दिन भी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर गहमा-गह...

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पापा, आप एक जगह टिक कर क्यों नहीं रहते! By Arpan Kumar

जिस नए स्कूल में कुछ मुश्किल से सुयश का एडमिशन हुआ था, वहाँ हो रही आवधिक परीक्षाओं में क्रमशः उसका रिजल्ट गिरने लगा। वह अपनी उम्र से अधिक चिड़चिड़ा हो गया था। उसके मनोजगत की गाड़ी मान...

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स्टेशन की मुलाकात By Hansraj Puvar

बहुत अर्से पहले की बात हैं जब मैं छोटा था, समय की इस छलांग लगाकर वह जगह आज वापस जाने का मन कयों होगया वो पता नहीं, पर बहुत अजीब था वो समय | जब हमें सिर्फ हमारी दुनिया ही सब से अच्छ...

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महात्मा की खोज में (A horror story) By Bhupendra kumar Dave

महात्मा की खोज में(A horror story) ‘उठो शिवा, उठो’ यह आवाज सुन मैं एकदम हड़बड़ाकर उठ बैठा। मैं गहरी नींद में था और एक सपना देख रहा था। कहते हैं कि सपने अचानक टूट जाने से वे विस्मृत ह...

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वो दूसरी औरत By Neelam Kulshreshtha

वो दूसरी औरत [नीलम कुलश्रेष्ठ ] बरसों से कहूं या युगों से किस...

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गुडनाइट माइनस लव यू By Arpan Kumar

पहले लोग बड़ी संख्या में कोई न कोई किताब पढ़ते थे। उस पर परिवार के सदस्यों तो मित्रों के बीच चर्चा किया करते थे। कई उत्साही पाठक उस पर अपनी प्रतिक्रिया पत्र के माध्यम से उसके लेखकों...

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डिजिटल भी और सिंगल भी By Ajay Amitabh Suman

पबजी गेम में उसकी शिकारी निगाहें दुश्मनों को बड़ी मुश्तैदी से साफ कर रहीं थी। तकरीबन आधे घंटे की मशक्कत के बाद वो जोर जोर से चिल्लाने लगा। हुर्रे, हुर्रे, हिप हिप हुर्रे। आखिकार लेब...

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काँटों से खींच कर ये आँचल - 3 By Rita Gupta

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खिलता है बुरांश ! - 1 By Kusum Bhatt

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राकेश हल्का सा मुस्कुराता हुआ चुप ही रहा। वह कुछ संकोच में भी आ रहा था। चरणजीत ने बिकास की बात को पूरी शिद्दत से आगे बढ़ाते हुए और पहले राकेश एवं बाद में बिकास चटर्जी की ओर देखते हु...

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शादी के एक महीने बाद सुहेल परेशान होगया। उस की रातों की नींद और दिन का चैन हराम होगया।

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नैहर आँचल समाय... By Dr Vinita Rahurikar

नैहर आँचल समाय पूरे पांच साल बाद आ रही थी प्रांजल अपने मायके. लेकिन यह पांच साल उसे युगों जितने लम्बे लग रहे थे. तभी अमेरिका से जब वह दिल्ली आई तो दोनों बच्चों को सास के पास...

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घर से निकलते समय उसने एक बार भी नहीं सोचा। तूफान का मुकाबला करने की ताकत नहीं थी उसमें। पति ने मारपीट की- बच्चों के सामने! ग्लानि हुई! रोज़-रोज़ गाली-गलौज़, मारपीट... तंग आ गयी थी। वह...

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फादर्स डे By Ankita Bhargava

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दूर है किनारा By Anju Sharma

तपन ने आसमान की ओर सर उठाकर देखा तो कुछ देर बस देखता ही रहा! आकाश तो वहां भी था पर इतना खुला कभी नहीं लगा, खूब खुला, निस्सीम, अनंत! और ये हवा, ये भी तो वहां थी पर इतनी आजाद, इतनी ख...

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मुझे चाँद चाहिए By Shraddha Thawait

एक दिन चाँद को आसमान से धरती में झांकने पर एक झरोखे से निकलती सतरंगी आभा दिखी. चाँद ने आसमान में धीरे से नीचे आकर, थोडा सा झुक कर देखा. उसे पलंग पर बैठी हुई एक लड़की दिखी. वह सतरंगी...

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"रीमा बहुत-बहुत बधाई हो! आज तुम्हारा सपना पूरा हो गया। तुम्हारा चुनाव आई.ए.एस. के लिए हो गया। तुम्हारा सपना पूरा हो गया। बस तुम अब सारी चिंता छोड़ दो। जहाँ तुम्हारी पोस्टिंग हो वहा...

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तीस वर्ष का समय बहुत होता है किसी युवा के स्नायुओं को ढीला और नजर को कमजोर कर बूढ़ा बना देने के लिये। इसीलिये अब खिलाड़ी की धसकती कमर में वह पुष्टता नहीं दिखाई देती जो मूर्तियों की स...

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गली नंबर दो By Anju Sharma

पुत्तर छेत्ती कर, वेख, चा ठंडी होंदी पई ए।
बीजी की तेज़ आवाज़ से उसकी तन्द्रा भंग हुई। रंग में ब्रश डुबोते हाथ थम गए। पिछले एक घंटे में यह पहला मौका था, जब भूपी ने मूर्ति, रंग और ब...

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निवि By Anjali Raghuvanshi

आठ साल हुए, काफी अरसे बाद मैं उनसे मिलने वाला था, वो अपना शान्त सा पहाड़ी शहर छोड़ के दिल्ली में एक कॉलेज की प्रोफेसर थी, कभी सोचता हूँ उस सुकून तलाशने वाली लड़की ने क्यूँ इस शोर से भ...

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नयी सहर By Ankita Bhargava

निधी के सोने जाने के बाद पीछे पीछे मोहित भी अपने कमरे में चला आया वह मुंह दूसरी ओर किये लेटी थी मोहित समझ रहा था वह रो रही है मगर उसके आंसुओं का सामना करने की हिम्मत अभी मोहित मे...

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एक नींद हज़ार सपने By Anju Sharma

उस नामुराद रात का दूसरा पहर भी बीत चुका था! दिन भर की चहलकदमी और तमाशे से ऊबी गली अब चाँद के साए में झपकियां ले रही थी और दूर किसी कोने से आती किसी कुत्ते की आवाज़ पर रह-रहकर जाग उठ...

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वह पिछले पैतीस वर्षों से रोज अपने ऑफिस में कलम घिसते आ रहे थे, इस आशा में कि यह घिसाई शायद किसी के हित का हेतु बन जाये, पर उनकी यह घिसाई फाइलों के लाल फीते से बंध कर रह जाती या किस...

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चम्पा चुड़ैल By Swati Grover

बड़ी देर से खुद को शीशे मैं निहारते हुए बोली, "कि अब  पहले  से  ज्यादा  डरावनी  लग  रही हूँ । त्वचा  बिलकुल  काली  हो  गई&nbsp...

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नृत्यांगना सुरभि सुरभि ने अपनी माँ को मनाने की बहुत कोशिश की लेकिन टस से मस नहीं हुई, भैया, भाभी और पिताजी को इस बारे में अभी कुछ बताया ही नहीं था। सुरभि जानती थी कि एक बार माँ राज...

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