लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • मम्मद भाई

    फ़ारस रोड से आप उस तरफ़ गली में चले जाइए जो सफ़ेद गली कहलाती है तो उस के आख़िरी सि...

  • उज्वला की कहानी

    रक्षाबंधन का दिन था .. सुबह का काम जल्दी निपटाकर उज्वला राखी लेकर अपने मायके निक...

  • मोती का पेड - 2

     तय मुताबिक सारे बच्चे सुबह सुबह घर के आंगन में जमा हो गए .अपनी सारे सामान...

मम्मद भाई By Saadat Hasan Manto

फ़ारस रोड से आप उस तरफ़ गली में चले जाइए जो सफ़ेद गली कहलाती है तो उस के आख़िरी सिरे पर आप को चंद होटल मिलेंगे। यूँ तो बंबई में क़दम क़दम पर होटल और रेस्तोराँ होते हैं मगर ये रेस्तोराँ...

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रंगों के पैकेट By Sarvesh Saxena

मार्च का महीना शुरु हो चुका है, चारों ओर होली की तैयारियां हो रही हैं, पेड़ पौधों में आई नन्ही कोपले अब हल्के हरे पत्तों में बदल गई हैं, घर के बाहर लगे पौधों में पानी डालते डालते...

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उज्वला की कहानी By Vrishali Gotkhindikar

रक्षाबंधन का दिन था .. सुबह का काम जल्दी निपटाकर उज्वला राखी लेकर अपने मायके निकल पडी | भैय्या कही बाहरगाव जा रहे थे इसलिये उन्होने जल्दी बुलाया था उसको | जैसे ही वो वहां पहुची भाभ...

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सातवां होल By Manisha Kulshreshtha

शाम चार बजते ही रिटायर्ड लेफ्टिनेन्ट कर्नल केशव शर्मा पांच किलोमीटर सायकिल चला कर गोल्फकोर्स पर आ डटते हैं। हालांकि अब खेलते कम हैं, शरीर में पुराना दम – खम बाकी रहा न नज़र में वो प...

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मोती का पेड - 2 By Anita salunkhe Dalvi

 तय मुताबिक सारे बच्चे सुबह सुबह घर के आंगन में जमा हो गए .अपनी सारे सामान के साथ हर एक  के पास एक बँग एक वॉटर बॅग और कुछ सामान था.रात को ही सब ने अपनी मां को बता दिया था...

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यस ! By Manisha Kulshreshtha

वह रन वे पर स्टार्टअप पॉइंट पर खड़ा था और मैं ए टी सी (एयर ट्रेफिक कंट्रोल टॉवर) में बैठी थी। आर टी ( रेडियो ट्रांसमीटर) पर उसकी खूबसूरत आवाज़ गूँजी।
' जूलियट वन ओ वन परमिशन ट...

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बड़ी मां By Krishan Kumar Ashu

दफ्तर जाते समय सुधा जब मुझे दरवाजे तक छोडऩे आई तो मेरे साथ उसकी नजर भी उस मुस्कराते चेहरे पर जा टिकी जो एकटक मंद-मंद मुस्कान के साथ मुझे निहार रहा था। इस तरह सार्वजनिक रूप से एक यु...

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सुनहरा फ्रेम By Manisha Kulshreshtha

कुछ अलौकिक पलों को दुबारा निराकार तौर पर जीने की आत्मछलना का ही दूसरा नाम है 'स्मृति'. एक स्मृति जिसमें वह खुद थी और वह था, अब वह उस पर फ्रेम लगाने की कोशिश में है. एक सुनह...

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पतझड़ By Ved Prakash Tyagi

पतझड़ पंडित नारायण राव अक्सर सोहन के पास आकार बैठ जाया करते, अपनी कोयले वाली प्रैस से सोहन लोगों के कपड़े प्रैस करता रहता और पंडितजी उसको देश दुनिया की तमाम बातें बताते रहते। पूरे गा...

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ब्रेनफीवर By Manisha Kulshreshtha

वह रसोई से बाहर निकली, आखिरी काम समेट, पल्लू से चेहरे का पसीना पोंछती। घर से लगे उसके पति के दफ्तरनुमा कमरे में आ गई। उसकी दुर्बल, छोटी देह संकोच उत्सर्जित कर रही थी। बड़ी-बड़ी आँख...

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मांस By Neelam Samnani

भरी गर्मी के दिन थे सूरज आग लेकर सर पर खड़ा था पसीना बूंदों की जगह पानी की धार बनकर बह रहा था कहने को आस- पास पानी  बहुत था पर बदन के नमक वाला पानी ही सूरज को चाहिए था जैसे उस...

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क्लासमेट By Krishan Kumar Ashu

'मकान का नक्शा न हुआ। ताजमहल का टेंडर हो गया। आखिर कब तक चक्कर लगवाएंगे ये लोग? बड़बड़ाते हुए विपिन नगर परिषद परिसर में ही बनी कैंटीन में आकर बैठ गया।

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सिन्ड्रेला By Swati Grover

आज सुबह से ही बारिश हो रही हैं! जनवरी के महीने में इतनी बारिश होना थोड़ा अजीब लगता है पर शायद नीमा खुद आँसू नहीं बहा सकती इसीलिए यह काम आसमान कर रहा हैं! खिड़की के पास खड़े कब से नीमा...

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दाग दिल के.... By Rachna Bhola

दाग दिल के.... 'नहीं-नहीं’, छोड़ दो, मुझे और परेशान मत करो।’ मीरा ने झटके से पैर हिलाया और गोंगियाने लगी। नींद गहरी थी इसलिए सपना टूटने में भी समय लगा। जागी तो पता चला कि वह किसी...

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समुद्री घोड़ा By Manisha Kulshreshtha

वह दोनों तरफ से अंधेरे अधर में लटके किसी रस्सों से बने पुल पर भाग रहा था। डगमग झूलता हुआ। जिसके एक ओर से कुत्तों का झुंड उस पर भौंक रहा था, दूसरी तरफ कुछ अजब आकृतियाँ फुसफुसा रहीं...

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मजदूर बाजार By Rajesh Kumar Dubey

भीड़ में हलचल मच गई। सोनेलाल जब भी आता है, सब उसे जिज्ञासा से देखने लगते हैं। मंजरी चहक गई। सुरती ने चुटकी लेते हुए कहा, “देख तेरा यार आ गया” मंजरी ने झिडकते हुए कहा-...

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किरदार By Manisha Kulshreshtha

बहुत कुछ ...छोड़ गई थी वह हमारे कमरे में. कंघे में फँसे बाल. नीली, उतारी हुई नाईटी को अपनी आदत के उलट, उल्टा ही कम्प्यूटर टेबल की कुर्सी के हत्थे में टाँग कर वह स्ट्डीरूम में चली ग...

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ब्लैकहोल By Manisha Kulshreshtha

आखिरकार मैं पिता हूँ. मेरी हथेलियों को ग्लानि नम कर गई है, जिसे मैं बार – बार पौंछ रहा हूं, अपनी पतलून से। वह लाल पोल्का डॉट वाली स्कर्ट में जो खड़ी है, अपने कॉलेज के गेट पर मुड़ क...

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चप्पल वाला दुध By Ajay Amitabh Suman

रमेश को बहुत आश्चर्य हुआ।मोन उसके हाथ में चप्पल पकड़ा रहा था। रमेश ने लेने से मना किया तो मोनू रोने लगा। रमेश के मामा ने समझाया, भाई हाथ में पकड़ लो, वरना मोनू दुध नहीं पियेगा। रमेश...

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बुजुर्गों के फायदे By r k lal

बुजुर्गों के फायदे आर0 के0 लाल मुझे निर्मल के साथ कहीं जाना था। जब उसके घर पहुंचा तो अंदर से तेज तेज लड़ने की आवाजें आ रहीं थी और निर्मल के माता पिता बाहर बैठक में मुंह लटकाए ब...

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ठगिनी By Manisha Kulshreshtha

मरूस्थल के आठ गांवों में वह इकलौता ताल था, थे तो जेठ के गरम दिन, लेकिन रात ठंडी थी और चांदनी रात थी। ताल चांदी के तारों की कढ़ी हरी नीली चूनरी सा चमक रहा था। बगल से जाती आठ कोस की क...

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मी टू By Swati Grover

आज ऑफिस में कैंटीन में यही बातें चल रही थी ये जो इतने दिनों न्यूज़, इन्टरनेट और अखबार में आए दिन मी टू से सम्बन्धित लगातार खबरें आ रही हैं। रमेश ने कहा, “यार ये सब ऐसे ही हैं नाना प...

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मधुमक्खियाँ By Manisha Kulshreshtha

बहुत अलग थी वह शाम, अबाबीलें सर पर गोल चक्कर काट रहीं थीं. बावड़ी की मेहराबों के नीचे बने अपने गन्दे...कीचड़ – काग़ज़ के बने बदबूदार घोंसलों में नहीं लौट रही थीं...सूरज ठण्डा पड़ गया था...

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शहीदे आजम भगतसिंह By Asha Rautela

शहीदे आजम भगतसिंह भारत को स्वतंत्र कराने में न जाने कितने वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। वे सीने में गोली खाते, दर्द सहते चुपचात मौत की आगोश में सो गए, ताकि हम लोग जाग सकें।...

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पुराना दफ़्तर By Kali Raja

पुराना दफ़्तर शहेर के बीचो-बीच का एक सरकारी दफ़्तर हु मै, जो अब पुराना हो चुका हु.... शायद एक अरसा हो गया हे मुजे बंद कीये गए, मेरा हर कमरा, कमरे का हर सामान अब पुराना हो चुका ह...

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परजीवी By Manisha Kulshreshtha

मैं हमेशा से परजीवी नहीं था, मेरे पास नौकरी थी. तुमने शादी की ज़िद की और नौकरी भी छुड़वा दी. मैं तुम्हारे साथ बिना शादी के रहना चाहता था. यूँ शादी करने की तुम्हारी उम्र भी निकल चुकी...

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रक्षा बंधन By Swati Grover

सात साल की नन्ही सुबह से ही जिद कर रही है कि इस बार राखी कान्हा की मूर्ति को नहीं कान्हा को ही बाँधेगी, तभी कुछ खाएगी। उसकी माँ सरला पहले तो हँसने लगती हैं फिर नन्ही को समझाती हैं...

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ओ मरियम ! By Manisha Kulshreshtha

मां जा रहीं थीं, जिन बहुत सारी चीज़ों को विरासत में छोड़ कर, उनमें से एक गैरदुनियादार व्यक्ति होने के नाते, मेरे हाथ लगी थी केवल उनकी डायरी और लकड़ी के गोल मनकों की माला। मेरे पास...

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पिंकी By Asha Rautela

पिंकी पिंकी टीवी पर कार्टून देख रही थी। टाॅमन एन्ड जेरी उसका फेबरेट प्रोगाम था। तभी उसकी मम्मी आई बोली,‘‘ पिंकी बेटा होमवर्क कर लो’’ मम्मी की बात सुनकर पिंकी होमवर्क करने लगी पर पि...

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बाई बाई By Saadat Hasan Manto

नाम उस का फ़ातिमा था पर सब उसे फातो कहते थे बानिहाल के दुर्रे के उस तरफ़ उस के बाप की पन-चक्की थी जो बड़ा सादा लौह मुअम्मर आदमी था।

दिन भर वो इस पन चक्की के पास बैठी रहती। पहाड़ के...

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एंजल नेहा By Rahul Joshi

“आज तुम्हरी भाभी ना सिर्फ हमको देखी. बल्कि लजाते हुए अंदर दौड़ पड़ी.”... गगन ने संतोष से कहा। दोनों जिगरी यार थे। हर छोटी-बड़ी बात आपस में साझा किया करते थे। “का बात कर...

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भूख से लड़ाई By r k lal

भूख से लड़ाई आर0 के0 लाल पिछली छुट्टी में हम अपने पापा के साथ उनके गांव गए, जहां उनके बड़े ताऊजी रहते हैं। उनका अच्...

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मम्मद भाई By Saadat Hasan Manto

फ़ारस रोड से आप उस तरफ़ गली में चले जाइए जो सफ़ेद गली कहलाती है तो उस के आख़िरी सिरे पर आप को चंद होटल मिलेंगे। यूँ तो बंबई में क़दम क़दम पर होटल और रेस्तोराँ होते हैं मगर ये रेस्तोराँ...

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रंगों के पैकेट By Sarvesh Saxena

मार्च का महीना शुरु हो चुका है, चारों ओर होली की तैयारियां हो रही हैं, पेड़ पौधों में आई नन्ही कोपले अब हल्के हरे पत्तों में बदल गई हैं, घर के बाहर लगे पौधों में पानी डालते डालते...

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उज्वला की कहानी By Vrishali Gotkhindikar

रक्षाबंधन का दिन था .. सुबह का काम जल्दी निपटाकर उज्वला राखी लेकर अपने मायके निकल पडी | भैय्या कही बाहरगाव जा रहे थे इसलिये उन्होने जल्दी बुलाया था उसको | जैसे ही वो वहां पहुची भाभ...

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सातवां होल By Manisha Kulshreshtha

शाम चार बजते ही रिटायर्ड लेफ्टिनेन्ट कर्नल केशव शर्मा पांच किलोमीटर सायकिल चला कर गोल्फकोर्स पर आ डटते हैं। हालांकि अब खेलते कम हैं, शरीर में पुराना दम – खम बाकी रहा न नज़र में वो प...

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मोती का पेड - 2 By Anita salunkhe Dalvi

 तय मुताबिक सारे बच्चे सुबह सुबह घर के आंगन में जमा हो गए .अपनी सारे सामान के साथ हर एक  के पास एक बँग एक वॉटर बॅग और कुछ सामान था.रात को ही सब ने अपनी मां को बता दिया था...

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बड़ी मां By Krishan Kumar Ashu

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पतझड़ By Ved Prakash Tyagi

पतझड़ पंडित नारायण राव अक्सर सोहन के पास आकार बैठ जाया करते, अपनी कोयले वाली प्रैस से सोहन लोगों के कपड़े प्रैस करता रहता और पंडितजी उसको देश दुनिया की तमाम बातें बताते रहते। पूरे गा...

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ब्रेनफीवर By Manisha Kulshreshtha

वह रसोई से बाहर निकली, आखिरी काम समेट, पल्लू से चेहरे का पसीना पोंछती। घर से लगे उसके पति के दफ्तरनुमा कमरे में आ गई। उसकी दुर्बल, छोटी देह संकोच उत्सर्जित कर रही थी। बड़ी-बड़ी आँख...

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मांस By Neelam Samnani

भरी गर्मी के दिन थे सूरज आग लेकर सर पर खड़ा था पसीना बूंदों की जगह पानी की धार बनकर बह रहा था कहने को आस- पास पानी  बहुत था पर बदन के नमक वाला पानी ही सूरज को चाहिए था जैसे उस...

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क्लासमेट By Krishan Kumar Ashu

'मकान का नक्शा न हुआ। ताजमहल का टेंडर हो गया। आखिर कब तक चक्कर लगवाएंगे ये लोग? बड़बड़ाते हुए विपिन नगर परिषद परिसर में ही बनी कैंटीन में आकर बैठ गया।

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आज सुबह से ही बारिश हो रही हैं! जनवरी के महीने में इतनी बारिश होना थोड़ा अजीब लगता है पर शायद नीमा खुद आँसू नहीं बहा सकती इसीलिए यह काम आसमान कर रहा हैं! खिड़की के पास खड़े कब से नीमा...

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दाग दिल के.... By Rachna Bhola

दाग दिल के.... 'नहीं-नहीं’, छोड़ दो, मुझे और परेशान मत करो।’ मीरा ने झटके से पैर हिलाया और गोंगियाने लगी। नींद गहरी थी इसलिए सपना टूटने में भी समय लगा। जागी तो पता चला कि वह किसी...

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समुद्री घोड़ा By Manisha Kulshreshtha

वह दोनों तरफ से अंधेरे अधर में लटके किसी रस्सों से बने पुल पर भाग रहा था। डगमग झूलता हुआ। जिसके एक ओर से कुत्तों का झुंड उस पर भौंक रहा था, दूसरी तरफ कुछ अजब आकृतियाँ फुसफुसा रहीं...

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मजदूर बाजार By Rajesh Kumar Dubey

भीड़ में हलचल मच गई। सोनेलाल जब भी आता है, सब उसे जिज्ञासा से देखने लगते हैं। मंजरी चहक गई। सुरती ने चुटकी लेते हुए कहा, “देख तेरा यार आ गया” मंजरी ने झिडकते हुए कहा-...

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किरदार By Manisha Kulshreshtha

बहुत कुछ ...छोड़ गई थी वह हमारे कमरे में. कंघे में फँसे बाल. नीली, उतारी हुई नाईटी को अपनी आदत के उलट, उल्टा ही कम्प्यूटर टेबल की कुर्सी के हत्थे में टाँग कर वह स्ट्डीरूम में चली ग...

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ब्लैकहोल By Manisha Kulshreshtha

आखिरकार मैं पिता हूँ. मेरी हथेलियों को ग्लानि नम कर गई है, जिसे मैं बार – बार पौंछ रहा हूं, अपनी पतलून से। वह लाल पोल्का डॉट वाली स्कर्ट में जो खड़ी है, अपने कॉलेज के गेट पर मुड़ क...

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चप्पल वाला दुध By Ajay Amitabh Suman

रमेश को बहुत आश्चर्य हुआ।मोन उसके हाथ में चप्पल पकड़ा रहा था। रमेश ने लेने से मना किया तो मोनू रोने लगा। रमेश के मामा ने समझाया, भाई हाथ में पकड़ लो, वरना मोनू दुध नहीं पियेगा। रमेश...

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बुजुर्गों के फायदे आर0 के0 लाल मुझे निर्मल के साथ कहीं जाना था। जब उसके घर पहुंचा तो अंदर से तेज तेज लड़ने की आवाजें आ रहीं थी और निर्मल के माता पिता बाहर बैठक में मुंह लटकाए ब...

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मरूस्थल के आठ गांवों में वह इकलौता ताल था, थे तो जेठ के गरम दिन, लेकिन रात ठंडी थी और चांदनी रात थी। ताल चांदी के तारों की कढ़ी हरी नीली चूनरी सा चमक रहा था। बगल से जाती आठ कोस की क...

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मधुमक्खियाँ By Manisha Kulshreshtha

बहुत अलग थी वह शाम, अबाबीलें सर पर गोल चक्कर काट रहीं थीं. बावड़ी की मेहराबों के नीचे बने अपने गन्दे...कीचड़ – काग़ज़ के बने बदबूदार घोंसलों में नहीं लौट रही थीं...सूरज ठण्डा पड़ गया था...

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शहीदे आजम भगतसिंह By Asha Rautela

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परजीवी By Manisha Kulshreshtha

मैं हमेशा से परजीवी नहीं था, मेरे पास नौकरी थी. तुमने शादी की ज़िद की और नौकरी भी छुड़वा दी. मैं तुम्हारे साथ बिना शादी के रहना चाहता था. यूँ शादी करने की तुम्हारी उम्र भी निकल चुकी...

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पिंकी By Asha Rautela

पिंकी पिंकी टीवी पर कार्टून देख रही थी। टाॅमन एन्ड जेरी उसका फेबरेट प्रोगाम था। तभी उसकी मम्मी आई बोली,‘‘ पिंकी बेटा होमवर्क कर लो’’ मम्मी की बात सुनकर पिंकी होमवर्क करने लगी पर पि...

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भूख से लड़ाई By r k lal

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