लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • खरपतवार

    उसकी यादों में कुछ दहशतें और कुछ वहशतें अब भी बाकी हैं. सप्ताह के बाकी दिन वह फा...

  • स्यामीज

    'अरे वाह, ये तो दो कठपुतलियां हैं, एक ही काठ के टुकडे पर आगे - पीछे बनाई गईं...

  • हाइड एण्ड सीक

    उस जन्नत की तरह खूबसूरत शहर तक पहुंचने में वे उत्सुकता और बेचैनी भरी प्रतीक्षा क...

खरपतवार By Manisha Kulshreshtha

उसकी यादों में कुछ दहशतें और कुछ वहशतें अब भी बाकी हैं. सप्ताह के बाकी दिन वह फाइलों, टेलीफोनों, लोगों से मुलाकातों के बीच वह खुद पर व्यस्तता के छिलके चढा लेता है. अवकाश के दिन ये...

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बाँझ By Saadat Hasan Manto

मेरी और उस की मुलाक़ात आज से ठीक दो बरस पहले अपोलो बंदर पर हुई शाम का वक़्त था, सूरज की आख़िरी किरणें समुंद्र की उन दराज़ लहरों के पीछे ग़ायब हो चुकी थी। जो साहिल के बंच पर बैठ कर देख...

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बीवी भाग गई By Swati Grover

पूरे ऑफिस को पता चल गया था कि निखिल की बीवी उसे छोड़कर चली गई पर लोगो के लिए यह बात कि बीवी भाग गई किसी सनसनी खबर से कम नहीं थी। कुछ दिन फिर हफ्ता और एक महीना कब तक छुपाता, आखिर सबक...

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ईनाम By Ajay Amitabh Suman

बात लगभग अस्सी के दशक की है . जितने में आजकल एक कप आइसक्रीम मिलता है , उतने में उनदिनों एक किलो चावल मिल जाया करता था. अंगिरस 6 ठी कक्षा का विद्यार्थी था. उसके पिताजी पोस्ट ऑफिस मे...

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स्यामीज By Manisha Kulshreshtha

'अरे वाह, ये तो दो कठपुतलियां हैं, एक ही काठ के टुकडे पर आगे - पीछे बनाई गईं. भारतीय कला का बडा अद्भुत नमूना हैं यह भी ! इधर से देखो तो मानसी, उधर से देखो तो रूपसी. यूं नचाओ तो...

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हमारी अंतरा By Asha Rautela

हमारी अंतराअंतरा के माता-पिता नहीं थे। वह अपने चाचा-चाची के साथ रहती थी। चाची में अंतरा अपनी माँ की छवि को ही देखती थी पर उसकी चाची उससे घर का सारा काम करवाती थी। साथ ही बोलती भी र...

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दिल के अमीर By S Sinha

कहानी - दिल के अमीर शेखर वर्षों बाद पटना अपने पैतृक घर आया था .इसके पहले वह जब भी आया दो तीन दिन से ज्यादा नहीं रहा था .इस बार अपनी पत्नी के साथ आया था और उन्हें दो सप्ताह से...

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हिना By Ved Prakash Tyagi

हिना खूबसूरत हिना को पत्नी रूप में पाकर सुहैल बहुत खुश था, दिल्ली में रंजीत नगर के तीन कमरों वाले फ्लैट में अपनी गृहस्थी की शुरुआत की। “”अब तो पूरा हफ्ता गुजर गया, कब तक छुट्टी क...

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हिप हिप हुर्रे By Ajay Amitabh Suman

पिछले एक घंटे से उसके हाथ मोबाइल पर जमे हुए थे। पबजी गेम में उसकी शिकारी निगाहें दुश्मनों को बड़ी मुश्तैदी से साफ कर रहीं थी। तकरीबन आधे घंटे की मशक्कत के बाद वो जोर जोर से चिल्लाने...

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हाइड एण्ड सीक By Manisha Kulshreshtha

उस जन्नत की तरह खूबसूरत शहर तक पहुंचने में वे उत्सुकता और बेचैनी भरी प्रतीक्षा को महसूस करना चाहते थे इसलिए घरवालों और परिचितों के बहुत मना करने के बावज़ूद उन्होंने अकेले और सड़क के...

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पद्मावती By Swati Grover

पूरे भारत में पद्मावती फिल्म को लेकर बवाल मचा हुआ था ! टी.वी पर वही खबरे बार-बार आ रही थी! और अपने घर में बैठी पदमा सोच रही थी , कौन थी यह रानी? मेरी तरह...

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पगडंडी By Mukteshwar Prasad Singh

पगडंडी​​​​​​​​​ ​​आज मंजू का सब कुछ उजड़ गया। इस कारण नहीं कि भूकंप आया था या सुनामी लहर आयी थी या फिर तूफानी वर्षा या बाढ़। आज सिर्फ उसकी ही दुनियां उजड़ी थी।...

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थकी जिन्दगी By Bhupendra kumar Dave

थकी जिन्दगी बुढ़ापा आने पर एक बात की खुशी होती है कि हम मृत्यु के नजदीक पहुँच गये होते हैं। दाँत गिरना, बाल झरना, आँख में मोतियाबिन्दी होना, शरीर के जोड़ों में दर्द होना, रह रह...

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मन क्या है? By Asha Rautela

मन क्या है? मन क्या है? इस विषय में हम इतना ही समझ पाते है कि यह केवल दुख, दर्द, संताप के सिवा कुछ नहीं। इसका प...

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दयावान चोर By paresh barai

एक समय की बात है| एक छोटे से गाँव में रघु नाम का व्यक्ति रहता था| उसे कोई ढंग का काम-काज मिल नहीं रहा था| मज़बूरी के चलते वह चोरी-चकारी के रस्ते पर चल पड़ा| पहले तो इस काम से उसे बहु...

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निश्छल प्रेम By Ved Prakash Tyagi

निश्छल प्रेम “बेटा तू खुश तो है ना अपनी नौकरी से?” माँ मेरठ के एक छोटे से गाँव से पुणे में बात कर रही थी, कुछ ही दिन पूर्व बेटी ने आइ आर एस की परीक्षा प्रथम स्थान पाकर सफल की थी, त...

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सेटल By Swati Grover

सौम्या मेट्रो मे बैठी अपने स्टेशन का इंतज़ार कर रही थी ! वह रोज़ रिठाला एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने जाती है फिर वापिस अपने घर जाने के लिए इंदरलोक मेट्रो स्टेशन पर उतरती है! वहा...

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मन की ख़ुशी By Vandna Sharma

ख़ुशी की तलाश में हम दूर तक गए इधर न मिली ,उधर ना मिली यहाँ ना मिली ,वहां ना मिली मिली तो मेरे मन में मिली बैठी थी एक कोने में लगी थी रोने -धोने में मैंने पूछा -ये क्या बात हुई ?नाम...

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आओ बहनों चुगली करें By Asha Rautela

आओ बहनों चुगली करें पहला दृश्यएक मध्यमवर्गीय परिवार का दृश्य(बहू, सास आपस में बातें कर रहें तभी गौरव आता है। गौरव सर...

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जब घर में चूहा आ गया By Ved Prakash Tyagi

जब घर में चूहा घुस गया “लगता है हमारे घर चूहा आ गया है और देखो घर में चूहा आना अशुभ माना जाता है।” सुबह सुबह शर्मा जी अखबार में नजर गड़ाए बैठे चाय की प्रतीक्षा कर रहे थे तभी पत्नी न...

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मर्सिडीज बेंज वाला गरीब By Ajay Amitabh Suman

राजेश दिल्ली में एक वकील के पास ड्राईवर की नौकरी करता था। रोज सुबह समय से साहब के पास पहुंचकर उनकी मर्सिडीज बेंज की सफाई करता और साहब जहाँ कहते ,उनको ले जाता। अपने काम में पूरी त...

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बदलने की जरूरत By r k lal

बदलने की जरूरतआर 0 के0 लाल घंटी की आवाज सुनकर दरवाजा खोलने पर मैंने देखा कि मेरे एक सहकर्मी खड़े है। उन्होंने कहा “आज रविवार है, सोचा आप घर पर ही होंगे, चलकर आपका हाल-चाल पूंछ आए।”...

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हेप्पी न्यु यर By Deepak Saxena

ये उस दौर की बात है जब न लोगो के पास फोन हुआ करते थे और जिन इक्का दुक्का लोगो के पास फोन होते भी थे तो उनमे ये फेसबुक और watsapp जैसी चीजे नहीं हुआ करती थी इन सब चीज़ो की ही देन है...

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समझौता... By Rajesh Maheshwari

समझौता राम सिंह एक गरीब व्यक्ति था जो कि शहर के पिछडे इलाके में अपने एक पुत्र महेश और पुत्री प्रियंका...

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संवेदना By Surendra Tandon

मध्यमवर्गीय परिवार के रितुराज संगीत सीखने के दिवाने थे , आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण विधिवत संगीत सीखने से वंचित रह गए । आवाज उनकी खुली-साफ थी क्योंकि उनके पिता अच्छे गवैय्या...

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दोपहर की रात - हर्निल By Harsh Bhatt

आज फिर में उसके घर के सामने की छत पर खड़ा हूँ पर वो वहां नही है। दिल में एक अजब सी परेशानी दौड़ गई कि जैसे मेने फिर से कुछ खो दिया हो... बात उन दिनों की है जब वो...

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एक विलक्षण चित्रकार By Bhupendra kumar Dave

एक विलक्षण चित्रकार मैं एक हाथ में लाठी लिये जमीन को टटोलता और दूसरे हाथ को फेंसिंग दीवार पर सरकाता जा रहा था। मुझे फेंसिंग दीवार का अंत ही नजर नहीं आ रहा था। शायद इस ओर फाटक...

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नमक बेईमानी का By Ajay Amitabh Suman

अरोड़ा साहब का कपड़ों के इंपोर्ट और एक्सपोर्ट का दिल्ली में बहुत बड़ा कारोबार था। अक्सर वो चीन के व्यापारियों से संपर्क करके उनसे कपड़ों के एक्सपोर्ट का आर्डर लेते, फिर अपनी फैक्ट्र...

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पहला प्यार. By Asha Rautela

पहला प्यार नैना से मेरी मुलाकात उन दिनों हुई जब मैं नवभारत टाइम्स में नौकरी करता था। मैं रोज बहादुर गढ़ से शिवाजी पार्क ट्रेन से जाया करता था उसी ट्रेन में नैना भी जाया करती थी। व...

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तबस्सुम रहमान - सब एडिटर By SURENDRA ARORA

तबस्सुम रहमान - सब एडिटर " विजय साहब , मुझे मेरा हक़ चाहिए । " " तबस्सुम मेम , जिसकी तुम्हें तमन्ना थी , वो सब कुछ तो तुम्हें दे दिया गया था ।इतने सालों बाद , अब बाकी क्या रह ग...

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चिड़िया By Kazi Taufique

मै शहर के खराब  वातावरण से काफी त्रस्त था। जिस के कारण मैने अपना निवास स्थान शहर से दूर बनाया था। वहां की हवा बहुत साफ़ थी। वहां की हवा वहां का जल सबकुछ बहोत अच्छा था।उस स्थान...

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बिछिया By Ajay Amitabh Suman

अनिमेश आठवीं कक्षा का विद्यार्थी था । बचपन से हीं अनिमेश के पिताजी ने ये उसे ये शिक्षा प्रदान कर रखी थी कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए एक आदमी का योग्य होना बहुत जरुरी है। अनिमेश अपने...

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बुधिया By Asha Rautela

बुधिया आज स्कूल में जब टीचर ने पेड़-पौधों का महत्त्व समझाया तो पूर्वी को अपनी गलती का अहसास हुआ कि एक सप्ताह पहले अपने जन्मदिन पर जब उसके माली की बेटी बुधिया ने उसे आम का पौधा उपहार...

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Kavita By Chanda fulara

चंदा फुलारा जन्मतिथिः 31 मार्च शिक्षाः एम.ए.;हिंदी संप्रतिः स्वतंत्र लेखन हिंदी की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मे कविताएँ प्रकाशित।संपर्कः ई-90 सैक्टर-72 नोएडा 110077मो.- 9711221294 मेर...

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स्वर्ग के राक्षस By Ved Prakash Tyagi

स्वर्ग के राक्षस “भैया मेरी बात मानो और अब धीरे धीरे अपना कारोबार श्रीनगर से समेट कर जम्मू में जमाना शुरू कर दो, जिस तरह यहाँ पर कट्टरवाद और आतंकवाद बढ़ रहा है कुछ दिन बाद हम पंडितो...

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चक्का जाम By ARUN SINGH

                                   (1) दिपेश अपनी मोबाइल में कुछ देखने के बाद पत्नी स...

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खरपतवार By Manisha Kulshreshtha

उसकी यादों में कुछ दहशतें और कुछ वहशतें अब भी बाकी हैं. सप्ताह के बाकी दिन वह फाइलों, टेलीफोनों, लोगों से मुलाकातों के बीच वह खुद पर व्यस्तता के छिलके चढा लेता है. अवकाश के दिन ये...

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बाँझ By Saadat Hasan Manto

मेरी और उस की मुलाक़ात आज से ठीक दो बरस पहले अपोलो बंदर पर हुई शाम का वक़्त था, सूरज की आख़िरी किरणें समुंद्र की उन दराज़ लहरों के पीछे ग़ायब हो चुकी थी। जो साहिल के बंच पर बैठ कर देख...

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बीवी भाग गई By Swati Grover

पूरे ऑफिस को पता चल गया था कि निखिल की बीवी उसे छोड़कर चली गई पर लोगो के लिए यह बात कि बीवी भाग गई किसी सनसनी खबर से कम नहीं थी। कुछ दिन फिर हफ्ता और एक महीना कब तक छुपाता, आखिर सबक...

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ईनाम By Ajay Amitabh Suman

बात लगभग अस्सी के दशक की है . जितने में आजकल एक कप आइसक्रीम मिलता है , उतने में उनदिनों एक किलो चावल मिल जाया करता था. अंगिरस 6 ठी कक्षा का विद्यार्थी था. उसके पिताजी पोस्ट ऑफिस मे...

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स्यामीज By Manisha Kulshreshtha

'अरे वाह, ये तो दो कठपुतलियां हैं, एक ही काठ के टुकडे पर आगे - पीछे बनाई गईं. भारतीय कला का बडा अद्भुत नमूना हैं यह भी ! इधर से देखो तो मानसी, उधर से देखो तो रूपसी. यूं नचाओ तो...

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हमारी अंतरा By Asha Rautela

हमारी अंतराअंतरा के माता-पिता नहीं थे। वह अपने चाचा-चाची के साथ रहती थी। चाची में अंतरा अपनी माँ की छवि को ही देखती थी पर उसकी चाची उससे घर का सारा काम करवाती थी। साथ ही बोलती भी र...

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दिल के अमीर By S Sinha

कहानी - दिल के अमीर शेखर वर्षों बाद पटना अपने पैतृक घर आया था .इसके पहले वह जब भी आया दो तीन दिन से ज्यादा नहीं रहा था .इस बार अपनी पत्नी के साथ आया था और उन्हें दो सप्ताह से...

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हिना By Ved Prakash Tyagi

हिना खूबसूरत हिना को पत्नी रूप में पाकर सुहैल बहुत खुश था, दिल्ली में रंजीत नगर के तीन कमरों वाले फ्लैट में अपनी गृहस्थी की शुरुआत की। “”अब तो पूरा हफ्ता गुजर गया, कब तक छुट्टी क...

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हिप हिप हुर्रे By Ajay Amitabh Suman

पिछले एक घंटे से उसके हाथ मोबाइल पर जमे हुए थे। पबजी गेम में उसकी शिकारी निगाहें दुश्मनों को बड़ी मुश्तैदी से साफ कर रहीं थी। तकरीबन आधे घंटे की मशक्कत के बाद वो जोर जोर से चिल्लाने...

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हाइड एण्ड सीक By Manisha Kulshreshtha

उस जन्नत की तरह खूबसूरत शहर तक पहुंचने में वे उत्सुकता और बेचैनी भरी प्रतीक्षा को महसूस करना चाहते थे इसलिए घरवालों और परिचितों के बहुत मना करने के बावज़ूद उन्होंने अकेले और सड़क के...

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पद्मावती By Swati Grover

पूरे भारत में पद्मावती फिल्म को लेकर बवाल मचा हुआ था ! टी.वी पर वही खबरे बार-बार आ रही थी! और अपने घर में बैठी पदमा सोच रही थी , कौन थी यह रानी? मेरी तरह...

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पगडंडी By Mukteshwar Prasad Singh

पगडंडी​​​​​​​​​ ​​आज मंजू का सब कुछ उजड़ गया। इस कारण नहीं कि भूकंप आया था या सुनामी लहर आयी थी या फिर तूफानी वर्षा या बाढ़। आज सिर्फ उसकी ही दुनियां उजड़ी थी।...

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थकी जिन्दगी By Bhupendra kumar Dave

थकी जिन्दगी बुढ़ापा आने पर एक बात की खुशी होती है कि हम मृत्यु के नजदीक पहुँच गये होते हैं। दाँत गिरना, बाल झरना, आँख में मोतियाबिन्दी होना, शरीर के जोड़ों में दर्द होना, रह रह...

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मन क्या है? By Asha Rautela

मन क्या है? मन क्या है? इस विषय में हम इतना ही समझ पाते है कि यह केवल दुख, दर्द, संताप के सिवा कुछ नहीं। इसका प...

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दयावान चोर By paresh barai

एक समय की बात है| एक छोटे से गाँव में रघु नाम का व्यक्ति रहता था| उसे कोई ढंग का काम-काज मिल नहीं रहा था| मज़बूरी के चलते वह चोरी-चकारी के रस्ते पर चल पड़ा| पहले तो इस काम से उसे बहु...

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निश्छल प्रेम By Ved Prakash Tyagi

निश्छल प्रेम “बेटा तू खुश तो है ना अपनी नौकरी से?” माँ मेरठ के एक छोटे से गाँव से पुणे में बात कर रही थी, कुछ ही दिन पूर्व बेटी ने आइ आर एस की परीक्षा प्रथम स्थान पाकर सफल की थी, त...

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सेटल By Swati Grover

सौम्या मेट्रो मे बैठी अपने स्टेशन का इंतज़ार कर रही थी ! वह रोज़ रिठाला एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने जाती है फिर वापिस अपने घर जाने के लिए इंदरलोक मेट्रो स्टेशन पर उतरती है! वहा...

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मन की ख़ुशी By Vandna Sharma

ख़ुशी की तलाश में हम दूर तक गए इधर न मिली ,उधर ना मिली यहाँ ना मिली ,वहां ना मिली मिली तो मेरे मन में मिली बैठी थी एक कोने में लगी थी रोने -धोने में मैंने पूछा -ये क्या बात हुई ?नाम...

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आओ बहनों चुगली करें By Asha Rautela

आओ बहनों चुगली करें पहला दृश्यएक मध्यमवर्गीय परिवार का दृश्य(बहू, सास आपस में बातें कर रहें तभी गौरव आता है। गौरव सर...

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जब घर में चूहा आ गया By Ved Prakash Tyagi

जब घर में चूहा घुस गया “लगता है हमारे घर चूहा आ गया है और देखो घर में चूहा आना अशुभ माना जाता है।” सुबह सुबह शर्मा जी अखबार में नजर गड़ाए बैठे चाय की प्रतीक्षा कर रहे थे तभी पत्नी न...

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मर्सिडीज बेंज वाला गरीब By Ajay Amitabh Suman

राजेश दिल्ली में एक वकील के पास ड्राईवर की नौकरी करता था। रोज सुबह समय से साहब के पास पहुंचकर उनकी मर्सिडीज बेंज की सफाई करता और साहब जहाँ कहते ,उनको ले जाता। अपने काम में पूरी त...

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बदलने की जरूरत By r k lal

बदलने की जरूरतआर 0 के0 लाल घंटी की आवाज सुनकर दरवाजा खोलने पर मैंने देखा कि मेरे एक सहकर्मी खड़े है। उन्होंने कहा “आज रविवार है, सोचा आप घर पर ही होंगे, चलकर आपका हाल-चाल पूंछ आए।”...

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हेप्पी न्यु यर By Deepak Saxena

ये उस दौर की बात है जब न लोगो के पास फोन हुआ करते थे और जिन इक्का दुक्का लोगो के पास फोन होते भी थे तो उनमे ये फेसबुक और watsapp जैसी चीजे नहीं हुआ करती थी इन सब चीज़ो की ही देन है...

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समझौता... By Rajesh Maheshwari

समझौता राम सिंह एक गरीब व्यक्ति था जो कि शहर के पिछडे इलाके में अपने एक पुत्र महेश और पुत्री प्रियंका...

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संवेदना By Surendra Tandon

मध्यमवर्गीय परिवार के रितुराज संगीत सीखने के दिवाने थे , आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण विधिवत संगीत सीखने से वंचित रह गए । आवाज उनकी खुली-साफ थी क्योंकि उनके पिता अच्छे गवैय्या...

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दोपहर की रात - हर्निल By Harsh Bhatt

आज फिर में उसके घर के सामने की छत पर खड़ा हूँ पर वो वहां नही है। दिल में एक अजब सी परेशानी दौड़ गई कि जैसे मेने फिर से कुछ खो दिया हो... बात उन दिनों की है जब वो...

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एक विलक्षण चित्रकार By Bhupendra kumar Dave

एक विलक्षण चित्रकार मैं एक हाथ में लाठी लिये जमीन को टटोलता और दूसरे हाथ को फेंसिंग दीवार पर सरकाता जा रहा था। मुझे फेंसिंग दीवार का अंत ही नजर नहीं आ रहा था। शायद इस ओर फाटक...

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नमक बेईमानी का By Ajay Amitabh Suman

अरोड़ा साहब का कपड़ों के इंपोर्ट और एक्सपोर्ट का दिल्ली में बहुत बड़ा कारोबार था। अक्सर वो चीन के व्यापारियों से संपर्क करके उनसे कपड़ों के एक्सपोर्ट का आर्डर लेते, फिर अपनी फैक्ट्र...

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पहला प्यार. By Asha Rautela

पहला प्यार नैना से मेरी मुलाकात उन दिनों हुई जब मैं नवभारत टाइम्स में नौकरी करता था। मैं रोज बहादुर गढ़ से शिवाजी पार्क ट्रेन से जाया करता था उसी ट्रेन में नैना भी जाया करती थी। व...

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तबस्सुम रहमान - सब एडिटर By SURENDRA ARORA

तबस्सुम रहमान - सब एडिटर " विजय साहब , मुझे मेरा हक़ चाहिए । " " तबस्सुम मेम , जिसकी तुम्हें तमन्ना थी , वो सब कुछ तो तुम्हें दे दिया गया था ।इतने सालों बाद , अब बाकी क्या रह ग...

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चिड़िया By Kazi Taufique

मै शहर के खराब  वातावरण से काफी त्रस्त था। जिस के कारण मैने अपना निवास स्थान शहर से दूर बनाया था। वहां की हवा बहुत साफ़ थी। वहां की हवा वहां का जल सबकुछ बहोत अच्छा था।उस स्थान...

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बिछिया By Ajay Amitabh Suman

अनिमेश आठवीं कक्षा का विद्यार्थी था । बचपन से हीं अनिमेश के पिताजी ने ये उसे ये शिक्षा प्रदान कर रखी थी कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए एक आदमी का योग्य होना बहुत जरुरी है। अनिमेश अपने...

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बुधिया By Asha Rautela

बुधिया आज स्कूल में जब टीचर ने पेड़-पौधों का महत्त्व समझाया तो पूर्वी को अपनी गलती का अहसास हुआ कि एक सप्ताह पहले अपने जन्मदिन पर जब उसके माली की बेटी बुधिया ने उसे आम का पौधा उपहार...

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Kavita By Chanda fulara

चंदा फुलारा जन्मतिथिः 31 मार्च शिक्षाः एम.ए.;हिंदी संप्रतिः स्वतंत्र लेखन हिंदी की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मे कविताएँ प्रकाशित।संपर्कः ई-90 सैक्टर-72 नोएडा 110077मो.- 9711221294 मेर...

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स्वर्ग के राक्षस By Ved Prakash Tyagi

स्वर्ग के राक्षस “भैया मेरी बात मानो और अब धीरे धीरे अपना कारोबार श्रीनगर से समेट कर जम्मू में जमाना शुरू कर दो, जिस तरह यहाँ पर कट्टरवाद और आतंकवाद बढ़ रहा है कुछ दिन बाद हम पंडितो...

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चक्का जाम By ARUN SINGH

                                   (1) दिपेश अपनी मोबाइल में कुछ देखने के बाद पत्नी स...

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