लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • हवन एक परिवर्तन

    शाम से ही कल्याणी देवी की कोठी में हवन की तैयारी चल रही थी। कोठी में केवल शोर उन...

  • बेटे घर कब आओगे

    आज - कल खुश कम और परेशान इंसान ज्यादा दिखते हैं, जबकि आज के समय में हर कोई कामया...

  • विदाउट यू (WITHOUT YOU))

    विदाउट यू (WITHOUT YOU))

    "यार ! मयंक यह हमारे देश में क्या हो रहा है ? दे...

अख़बार By Ajay Kumar Awasthi

आज सुबह अखबार देर से आया ...... आज सुबह झुंझलाहट हो रही थी. तेज बारिश हो रही थी,लाईट गोल और 8 बज रहे थे अखबार नहीं आया था. बहुत गुस्सा आ रहा था,हाकर से लेकर एजेंसी वाले से लेकर...

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लतीका रानी By Saadat Hasan Manto

वो ख़ूबसूरत नहीं थी। कोई ऐसी चीज़ उस की शक्ल-ओ-सूरत में नहीं थी जिसे पुर-कशिश कहा जा सके, लेकिन इस के बावजूद जब वो पहली बार फ़िल्म के पर्दे पर आई तो उस ने लोगों के दिल मोह लिए और ये...

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हिटलर की प्रेमकथा - 2 By Kusum Bhatt

भौं -- भौं -- भौं -- अभी एक सीढ़ी चढ़नी बाकी रही। मेरी फ्राॅक का कोना झपटने को आतुर झबरे बालांे वाला वह चीनी कुत्ता जिसकी आँखें कह रही थीं ‘‘नीचे उतर लड़की वरना चबा डालूँगा हड्डियाँ!’...

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माफ़ी By Saroj Prajapati

रमेश बाबू की पत्नी को लास्ट स्टेज का कैंसर बता डॉक्टरों ने दिल्ली एम्स रेफर कर दिया। वैसे रमेश बाबू ने अपने जीवन में कभी पत्नी को उतना महत्व नहीं दिया। उनके लिए तो मां और बड़ी बहिन...

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हवन एक परिवर्तन By Swati Grover

शाम से ही कल्याणी देवी की कोठी में हवन की तैयारी चल रही थी। कोठी में केवल शोर उन्हीं का शोर सुनाई दे रहा था। सभी मुलाजिम बड़ी ही तत्परता से घर के सारे काम निपटा रहे थे। कल्याणी देव...

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गधे का दर्द By Ajay Amitabh Suman

अपना गधा संपन्न था , पर सुखी नहीं। दर्द तो था , पर इसका कारण पता नहीं चल रहा था। मल्टी नेशनल कंपनी में कार्यरत होते हुए भी , अजीब सी बैचैनी थी। सर झुकाते झुकाते उसकी गर्दन तो टेड़ी...

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यह आषाढ़ का आकाश नहीं है By Sushma Munindra

रोज एक घर खाली हो रहा है।
गॉंव जवार में एक ही खबर सुनाई पड़ती है। चौपाल से ले कर सीवान तक। आज फला अपने परिवार को लेकर अपने लड़के के पास शहर चला गया। आज फला अपने भाई के पास, आज फला अ...

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सुरजू छोरा - 4 By Kusum Bhatt

दो साल पहले का दृश्य धुंध के बीच से उगने लगा... पुजारी के चेहरे पर एक और चेहरा लगा है जो बाहर वाले को अपना कुरूप दिखने नहीं देता, उस समय एक पूरी रात उन्हें नींद नहीं आई बार-बार करव...

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बेटे घर कब आओगे By RAM NIVAS VERMA

आज - कल खुश कम और परेशान इंसान ज्यादा दिखते हैं, जबकि आज के समय में हर कोई कामयाब है और अच्छा पैसा कमा रहा है। फिर ऐसा क्या है ? कि इंसान के पास सब कुछ होते हुए भी वह दुखी रहता है...

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विदाउट यू (WITHOUT YOU)) By Swati Grover

विदाउट यू (WITHOUT YOU))

"यार ! मयंक यह हमारे देश में क्या हो रहा है ? देश में छोटी-छोटी बच्चियों के साथ कैसी दरिंदिगी हो रही हैं । मेरा तो मन कर रहा है जान से मार दूँ।...

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रहमत-ए-खुदा-वंदी के फूल By Saadat Hasan Manto

ज़मींदार, अख़बार में जब डाक्टर राथर पर रहमत-ए-ख़ुदा-वंदी के फूल बरसते थे तो यार दोस्तों ने ग़ुलाम रसूल का नाम डाक्टर राथर रख दिया। मालूम नहीं क्यूँ, इस लिए कि ग़ुलाम रसूल को डाक्टर...

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वर्दी वाली बीवी - 3 By Arpan Kumar

तीन बजकर पचास मिनट पर ‘सिरपूर कागज नगर’ आया। अब आंध्रप्रदेश आ चुका है। स्टेशनों के नाम तेलगू में लिखे जाने दिखने लगे। ‘सिरपूर कागज नगर’ आंध्रप्रदेश के अदीलाबाद जिले में है।
नेवी म...

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उसके हिस्से की जिंदगी By Sushma Munindra

सरलता नहीं सोचती थी उस चुके हुये आदमी में साहस और दृढ़ता बाकी थी। वह फैसले लेना साथ ही सुनियोजित योजनाओं पर विचार करना छोड़ चुका था। थोड़ी दूर तक टहल—डोल कर हजारी कालोनी के अपने आवास...

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सुन्नू By RAM NIVAS VERMA

लेखक - राम निवास 22 जून 2019 रोज की तरह मैं अपने ऑफिस से घर आया तो मैंने किसी पंछी के बच्चे की आवाज़ सुनी, वह आवाज़ एक छोटे कार्टून बॉक्स से आ रही थी जब मैंने उसमे झाँक कर देखा तो...

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गलती किसकी By Anju Gupta

जून की चिलचिलाती धूप में सुधा अभी घर के बाहर पहुँची ही थी कि उसे घर के अंदर से कुछ आवाजें सुनाई दीं । उसकी जेठानी और पड़ौसन बैठी उसी की बातें कर रही थीं । उसकी जेठानी कह रही थी – “...

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पागल By Sarvesh Saxena

अभी कुछ ही देर हुई थी मुझे दुकान खोले कि बच्चों का शोर, सीटी और तालियां सुनाई देने लगी, दुकान से बाहर आकर देखा तो फिर वही रोज की कहानी, ये आजकल के बच्चे भी ना जरा भी भावनाये नहीं ह...

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शुभ सात कदम By Sushma Munindra

जैसे ही हम पहला फेरा लेते हैं, तुम मेरी आत्मा, साथी, गृहस्वामिनी और पथ प्रदर्शक बन जाती हो।
प्रजापति विवाह के ये कौल करार दिल बहलाने के लिये उम्दा हैं वरना पति, पत्नी को अपनी आत्म...

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वह भूखी और गन्दी लड़की By Kusum Bhatt

पहली नजर में मैंने उसे पहचाना ही नहीं, पहचानती भी कैसे उसकी तब्दीली की तो सपने मंे भी कल्पना नहीं कर सकती थी मैं, वैसे भी कल्पना करने की जरूरत ही नहीं थी। उसे तो तभी मैं अपनी स्मृत...

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तब राहुल सांकृत्यायन को नहीं पढ़ा था - 4 By Arpan Kumar

उसके पिता उस समय गाँव में नहीं थे। अपने बैंक की ओर से ऑडिट करने वे बक्सर तरफ़ के गाँवों में थे। रात भर में ही लाली देवी की हालत ऐसी हो गई जैसे उसका दस किलो वज़न घट गया हो। लोग उसको स...

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आकांक्षा By Mukteshwar Prasad Singh

आकांक्षाचार वर्षीया आकांक्षा अपने पड़ोस में होने वाली श्यामा की शादी में माँ शान्ति के साथ गयी थी। बारात के साथ वीरपुर (नेपाल) का विराट बैण्ड आया था। इस कोसी इल...

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एहसास By Anju Gupta

किशोरावस्था शायद होती ही ऐसी है कि दिल नित नए सपने देखने लगता है ! बचपन से किताबों से दिल लगाने वाली सुमि भी इस नए एहसास से अछूती ना रही ! बाहरवीं के पेपर हो चुके थे और रिजल्ट आने...

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पत्तियाँ By ALOK SHARMA

आकाश अपने माता पिता का इकलौता पुत्र था। उसके माता पिता उसे दुनिया में बहुत ही प्रिय थे । यही कुछ 6- 7 वर्ष उम्र होगी उसकी, परंतु उसने अपनी माँ को फोटो में ही देखा था। क्योंकि उसकी...

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आलमारी By Ajay Kumar Awasthi

*वो पुरानी लकड़ी की आलमारी* वो पुरानी लकड़ी की आलमारी ,,,आज भी उस पुराने कमरे मे जो वैसा का वैसा ही है, उसके एक कोने में धरी की धरी है । नए कमरे बन गए । सब लोग नई जगह में, नए रंगरोगन...

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खुशी By Bhupendra kumar Dave

खुशी -- भूपेन्द्र कुमार दवे वह बच्ची जिसे हम खुशी नाम से जानेंगे जन्म लेते समय अपनी माँ की पीड़ा देख द्रवित हो उठी। उसने ईश्वर से कहा, ‘हे ईश्वर! मुझसे अपनी माँ की पीड़ा देखी नहीं...

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बेटे की मा By Kusum Bhatt

माँ के चेहरे पर धूप की चिड़िया फुदक रही है, मन नही मन ढेरों मन्सूबे बनाती माँ बेटियों के बीच उदारमता हो रही है। इतनी कोमल और मीठी आवाज में माँ को ये पहली बार सुन रही है। पूर्वी माँ...

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सपने और नियति By Sushma Munindra

एक मुकम्मल परिभाषा देकर सपनों को डिफाइन नहीं किया जा सकता। केाई नहीं जानता सपने क्या हैं ? कैसे बनते हैं ? क्यों बनते हैं ? सपनों की एक वास्तविकता होती है या एकदम अवास्तविक होते है...

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कल्लू-बल्लू By Ajay Kori

 "कल्लू - बल्लू"ठंड का वो मौसम था... सुबह के 7:00 am बज चुके थे...। आज का मौसम भी बहुत अजीब था .. वैसे रोज़ मैं सुबह उठता नहीं था... लेकिन चिड़ियों की चेहकती आवाज़ से मैं उठ ज...

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नदी बहती रही.... - 2 By Kusum Bhatt

सलोनी-शेखर को एक साथ जाते देखती तो प्रश्नों के तीर मारती, उनके चेहरे की भाव भंगिमा देखकर रचना धीरे से कहती दोनों बचपन से दोस्त हैं... इसीलिए शेखर सलोनी को लेने आता है...
उसको आत्म...

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ओ पी डी By Ved Prakash Tyagi

ओ पी डी प्रदीप भाई ये लो गरमा गरम कॉफी और पीकर बताओ मैंने भाभी से अच्छी बनाई या नहीं........ हाँ राजेश तूने कॉफी बहुत अच्छी बनाई है लेकिन तेरी भाभी के हाथों में भी जादू है....... अ...

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अख़बार By Ajay Kumar Awasthi

आज सुबह अखबार देर से आया ...... आज सुबह झुंझलाहट हो रही थी. तेज बारिश हो रही थी,लाईट गोल और 8 बज रहे थे अखबार नहीं आया था. बहुत गुस्सा आ रहा था,हाकर से लेकर एजेंसी वाले से लेकर...

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लतीका रानी By Saadat Hasan Manto

वो ख़ूबसूरत नहीं थी। कोई ऐसी चीज़ उस की शक्ल-ओ-सूरत में नहीं थी जिसे पुर-कशिश कहा जा सके, लेकिन इस के बावजूद जब वो पहली बार फ़िल्म के पर्दे पर आई तो उस ने लोगों के दिल मोह लिए और ये...

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हिटलर की प्रेमकथा - 2 By Kusum Bhatt

भौं -- भौं -- भौं -- अभी एक सीढ़ी चढ़नी बाकी रही। मेरी फ्राॅक का कोना झपटने को आतुर झबरे बालांे वाला वह चीनी कुत्ता जिसकी आँखें कह रही थीं ‘‘नीचे उतर लड़की वरना चबा डालूँगा हड्डियाँ!’...

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माफ़ी By Saroj Prajapati

रमेश बाबू की पत्नी को लास्ट स्टेज का कैंसर बता डॉक्टरों ने दिल्ली एम्स रेफर कर दिया। वैसे रमेश बाबू ने अपने जीवन में कभी पत्नी को उतना महत्व नहीं दिया। उनके लिए तो मां और बड़ी बहिन...

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हवन एक परिवर्तन By Swati Grover

शाम से ही कल्याणी देवी की कोठी में हवन की तैयारी चल रही थी। कोठी में केवल शोर उन्हीं का शोर सुनाई दे रहा था। सभी मुलाजिम बड़ी ही तत्परता से घर के सारे काम निपटा रहे थे। कल्याणी देव...

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गधे का दर्द By Ajay Amitabh Suman

अपना गधा संपन्न था , पर सुखी नहीं। दर्द तो था , पर इसका कारण पता नहीं चल रहा था। मल्टी नेशनल कंपनी में कार्यरत होते हुए भी , अजीब सी बैचैनी थी। सर झुकाते झुकाते उसकी गर्दन तो टेड़ी...

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यह आषाढ़ का आकाश नहीं है By Sushma Munindra

रोज एक घर खाली हो रहा है।
गॉंव जवार में एक ही खबर सुनाई पड़ती है। चौपाल से ले कर सीवान तक। आज फला अपने परिवार को लेकर अपने लड़के के पास शहर चला गया। आज फला अपने भाई के पास, आज फला अ...

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सुरजू छोरा - 4 By Kusum Bhatt

दो साल पहले का दृश्य धुंध के बीच से उगने लगा... पुजारी के चेहरे पर एक और चेहरा लगा है जो बाहर वाले को अपना कुरूप दिखने नहीं देता, उस समय एक पूरी रात उन्हें नींद नहीं आई बार-बार करव...

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बेटे घर कब आओगे By RAM NIVAS VERMA

आज - कल खुश कम और परेशान इंसान ज्यादा दिखते हैं, जबकि आज के समय में हर कोई कामयाब है और अच्छा पैसा कमा रहा है। फिर ऐसा क्या है ? कि इंसान के पास सब कुछ होते हुए भी वह दुखी रहता है...

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विदाउट यू (WITHOUT YOU)) By Swati Grover

विदाउट यू (WITHOUT YOU))

"यार ! मयंक यह हमारे देश में क्या हो रहा है ? देश में छोटी-छोटी बच्चियों के साथ कैसी दरिंदिगी हो रही हैं । मेरा तो मन कर रहा है जान से मार दूँ।...

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रहमत-ए-खुदा-वंदी के फूल By Saadat Hasan Manto

ज़मींदार, अख़बार में जब डाक्टर राथर पर रहमत-ए-ख़ुदा-वंदी के फूल बरसते थे तो यार दोस्तों ने ग़ुलाम रसूल का नाम डाक्टर राथर रख दिया। मालूम नहीं क्यूँ, इस लिए कि ग़ुलाम रसूल को डाक्टर...

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वर्दी वाली बीवी - 3 By Arpan Kumar

तीन बजकर पचास मिनट पर ‘सिरपूर कागज नगर’ आया। अब आंध्रप्रदेश आ चुका है। स्टेशनों के नाम तेलगू में लिखे जाने दिखने लगे। ‘सिरपूर कागज नगर’ आंध्रप्रदेश के अदीलाबाद जिले में है।
नेवी म...

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उसके हिस्से की जिंदगी By Sushma Munindra

सरलता नहीं सोचती थी उस चुके हुये आदमी में साहस और दृढ़ता बाकी थी। वह फैसले लेना साथ ही सुनियोजित योजनाओं पर विचार करना छोड़ चुका था। थोड़ी दूर तक टहल—डोल कर हजारी कालोनी के अपने आवास...

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सुन्नू By RAM NIVAS VERMA

लेखक - राम निवास 22 जून 2019 रोज की तरह मैं अपने ऑफिस से घर आया तो मैंने किसी पंछी के बच्चे की आवाज़ सुनी, वह आवाज़ एक छोटे कार्टून बॉक्स से आ रही थी जब मैंने उसमे झाँक कर देखा तो...

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गलती किसकी By Anju Gupta

जून की चिलचिलाती धूप में सुधा अभी घर के बाहर पहुँची ही थी कि उसे घर के अंदर से कुछ आवाजें सुनाई दीं । उसकी जेठानी और पड़ौसन बैठी उसी की बातें कर रही थीं । उसकी जेठानी कह रही थी – “...

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पागल By Sarvesh Saxena

अभी कुछ ही देर हुई थी मुझे दुकान खोले कि बच्चों का शोर, सीटी और तालियां सुनाई देने लगी, दुकान से बाहर आकर देखा तो फिर वही रोज की कहानी, ये आजकल के बच्चे भी ना जरा भी भावनाये नहीं ह...

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शुभ सात कदम By Sushma Munindra

जैसे ही हम पहला फेरा लेते हैं, तुम मेरी आत्मा, साथी, गृहस्वामिनी और पथ प्रदर्शक बन जाती हो।
प्रजापति विवाह के ये कौल करार दिल बहलाने के लिये उम्दा हैं वरना पति, पत्नी को अपनी आत्म...

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वह भूखी और गन्दी लड़की By Kusum Bhatt

पहली नजर में मैंने उसे पहचाना ही नहीं, पहचानती भी कैसे उसकी तब्दीली की तो सपने मंे भी कल्पना नहीं कर सकती थी मैं, वैसे भी कल्पना करने की जरूरत ही नहीं थी। उसे तो तभी मैं अपनी स्मृत...

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तब राहुल सांकृत्यायन को नहीं पढ़ा था - 4 By Arpan Kumar

उसके पिता उस समय गाँव में नहीं थे। अपने बैंक की ओर से ऑडिट करने वे बक्सर तरफ़ के गाँवों में थे। रात भर में ही लाली देवी की हालत ऐसी हो गई जैसे उसका दस किलो वज़न घट गया हो। लोग उसको स...

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आकांक्षा By Mukteshwar Prasad Singh

आकांक्षाचार वर्षीया आकांक्षा अपने पड़ोस में होने वाली श्यामा की शादी में माँ शान्ति के साथ गयी थी। बारात के साथ वीरपुर (नेपाल) का विराट बैण्ड आया था। इस कोसी इल...

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एहसास By Anju Gupta

किशोरावस्था शायद होती ही ऐसी है कि दिल नित नए सपने देखने लगता है ! बचपन से किताबों से दिल लगाने वाली सुमि भी इस नए एहसास से अछूती ना रही ! बाहरवीं के पेपर हो चुके थे और रिजल्ट आने...

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पत्तियाँ By ALOK SHARMA

आकाश अपने माता पिता का इकलौता पुत्र था। उसके माता पिता उसे दुनिया में बहुत ही प्रिय थे । यही कुछ 6- 7 वर्ष उम्र होगी उसकी, परंतु उसने अपनी माँ को फोटो में ही देखा था। क्योंकि उसकी...

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आलमारी By Ajay Kumar Awasthi

*वो पुरानी लकड़ी की आलमारी* वो पुरानी लकड़ी की आलमारी ,,,आज भी उस पुराने कमरे मे जो वैसा का वैसा ही है, उसके एक कोने में धरी की धरी है । नए कमरे बन गए । सब लोग नई जगह में, नए रंगरोगन...

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खुशी By Bhupendra kumar Dave

खुशी -- भूपेन्द्र कुमार दवे वह बच्ची जिसे हम खुशी नाम से जानेंगे जन्म लेते समय अपनी माँ की पीड़ा देख द्रवित हो उठी। उसने ईश्वर से कहा, ‘हे ईश्वर! मुझसे अपनी माँ की पीड़ा देखी नहीं...

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बेटे की मा By Kusum Bhatt

माँ के चेहरे पर धूप की चिड़िया फुदक रही है, मन नही मन ढेरों मन्सूबे बनाती माँ बेटियों के बीच उदारमता हो रही है। इतनी कोमल और मीठी आवाज में माँ को ये पहली बार सुन रही है। पूर्वी माँ...

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सपने और नियति By Sushma Munindra

एक मुकम्मल परिभाषा देकर सपनों को डिफाइन नहीं किया जा सकता। केाई नहीं जानता सपने क्या हैं ? कैसे बनते हैं ? क्यों बनते हैं ? सपनों की एक वास्तविकता होती है या एकदम अवास्तविक होते है...

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कल्लू-बल्लू By Ajay Kori

 "कल्लू - बल्लू"ठंड का वो मौसम था... सुबह के 7:00 am बज चुके थे...। आज का मौसम भी बहुत अजीब था .. वैसे रोज़ मैं सुबह उठता नहीं था... लेकिन चिड़ियों की चेहकती आवाज़ से मैं उठ ज...

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नदी बहती रही.... - 2 By Kusum Bhatt

सलोनी-शेखर को एक साथ जाते देखती तो प्रश्नों के तीर मारती, उनके चेहरे की भाव भंगिमा देखकर रचना धीरे से कहती दोनों बचपन से दोस्त हैं... इसीलिए शेखर सलोनी को लेने आता है...
उसको आत्म...

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ओ पी डी By Ved Prakash Tyagi

ओ पी डी प्रदीप भाई ये लो गरमा गरम कॉफी और पीकर बताओ मैंने भाभी से अच्छी बनाई या नहीं........ हाँ राजेश तूने कॉफी बहुत अच्छी बनाई है लेकिन तेरी भाभी के हाथों में भी जादू है....... अ...

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