लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • सोच और संघर्ष

    अरे आज भी तुम ये छोटी छोटी मछलियां पकड़ लाये , कितनी बार समझाया की समुद्र में थोड़...

  • धनिया

    धनिया फुट पाथ पर पडी धनिया भंयकर प्रसव पीडा से तडप रही थी, बेचारा सुखिया इस...

  • पल जो यूँ गुज़रे - 16

    जाह्नवी के इन्टरव्यू की तिथि से चार दिन पूर्व की बात है। मुँह—अँधेरे निर्मल की न...

सजदा By Saadat Hasan Manto

गिलास पर बोतल झुकी तो एक दम हमीद की तबीयत पर बोझ सा पड़ गया। मलिक जो उसके सामने तीसरा पैग पी रहा था फ़ौरन ताड़ गया कि हमीद के अंदर रुहानी कश्मकश पैदा होगई है। वो हमीद को सात बरस से जा...

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सोच और संघर्ष By Dr Vatsala J Pande

अरे आज भी तुम ये छोटी छोटी मछलियां पकड़ लाये , कितनी बार समझाया की समुद्र में थोड़ी दूर तक जाओ , थोड़ी बड़ी मोटी मछली लाओ ,कुछ आमदनी बढे और कुछ हमारा रहन सहन ऊंचा हो, कब तक इस झोपड़ नुम...

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धनिया By Ved Prakash Tyagi

धनिया फुट पाथ पर पडी धनिया भंयकर प्रसव पीडा से तडप रही थी, बेचारा सुखिया इस शहर मे किसी को जानता भी नही जो उसकी सहायता के लिये आता। कुछ दिन पहले ही सुखिया अपनी धर्मपत्नी धनिया...

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शान्ति By Dr Vatsala J Pande

ओफ्फो शान्ति तुम कितनी दुष्ट हो ,मैं कितने वर्षो से सिर्फ ये चाह रहा हूँ की तुम कुछ पल, दिन मेरे साथ गुजारो, पर नहीं तुम तो मुझसे कोसो दूर भागती हो जैसे मैं कोई जिन हु और तुम...

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पल जो यूँ गुज़रे - 16 By Lajpat Rai Garg

जाह्नवी के इन्टरव्यू की तिथि से चार दिन पूर्व की बात है। मुँह—अँधेरे निर्मल की नींद खुल गयी। कारण जाह्नवी को लगातार तीन—चार बहुत जोर की छींकें आर्इं। निर्मल ने गद्दे से उठते हुए बे...

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AWAGYAA By Dr Vatsala J Pande

हां कैकेयी तो तुम्हे तुम्हारे दो वचन मुझे आज पूरे करने है। बोलो प्रिय ,मांगो जो मांगना है, आज मैं राम को राजा घोषित कर बहुत ही प्रसन्न और निश्चिंत हु। मुझे ईश्वर ने इतना कुछ दिय...

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शुरू से शुरू करते हैं By Rita Gupta

शुरू से शुरू करतें हैं द्वारा रीता गुप्ता "अनु तुमने उससे बात की?"आज मम्मी ने फिर अनुश्री से पूछा। पिछले कुछ दिनों से ये नया सिलसिला शुरू हुआ था। मम्मी उसे याद दिलाती...

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शाह दूले का चूहा By Saadat Hasan Manto

सलीमा की जब शादी हुई तो वो इक्कीस बरस की थी। पाँच बरस होगए मगर उस के औलाद न हुई। उस की माँ और सास को बहुत फ़िक्र थी। माँ को ज़्यादा थी कि कहीं उस का नजीब दूसरी शादी ना करले। चुनांचे...

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तीज का सिंधारा By Saroj Prajapati

"मम्मी बुआ मुझे देख कर इतनी खुश हुई ना कि मैं आपको बता नहीं सकता। बुआ को समझ ही नहीं आ रहा था ,मुझे क्या खिलाए ,कहां बिठाए । उन्होंने मेरे खाने पीने के लिए इतनी चीजें बना दी कि मैं...

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दो कॉलगर्ल की कहानी By Ranjeev Kumar Jha

---------------------------------- शहर की दो टॉप - क्लास कॉलगर्ल में , टॉप - क्लास की दोस्ती थी । एक दिन जब दोनो साथ बैठकर पी रही थी और उनपर सुरूर छाने लगा था । तब एक ने जाम तैयार...

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बेटी बेटा By Dr Vatsala J Pande

अमेरिका के फ्लोरिडा में पढ़ रही आठ साल की फ्लोरेंस को अपने कक्षा में सब से अच्छी गरिमा लगती है। रोज़ दो चोटी कर के आती है तो फ्लोरिडा को अपने कटे बालो पर गुस्सा आता , हाउ डू यू टे...

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वेडिंग कार्ड By Swati Grover

नैना को किसी ने मार दिया था। उसकी खून से लथपथ लाश लोगों को कहने पर मजबूर कर रही थी कि 'क्या अन्याय है! दस दिन बाद इसकी शादी थी और यह कुदरत का कहर। आखिर नैना को मार...

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अपना अंश By Amita Joshi

"छाया,तुम्हारा पेट कुछ भारी भारी सा लग रहा है,कहीं कोई गुड़ न्यूज़ तो नहीं सुनाने वाली हो"।"अरे,ऐसा कुछ नहीं है दीदी ,बस पिछले दिनों घूमने नही गए तो वजन बढ़ गया ", छाया ने...

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बारीश By Raje.

अभी 5:45 शाम के बज रहे थे।मैने नाश्ता खतम किया। और पुछा कितने रुपे हुए। वह कुछ दैर गीन कर बोला। शाब, 20 रुपे।
मैने जट से पोकेट नीकाला और 50 रुपेकी नोट नीकाली। मैने जैसे ही असकी और...

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मेरी किस्मत By Rahul Sagar Advocate

मेरा नाम राहुल सागर है और मैं मेरठ का रहने वाला हूं मेरी उम्र करीब 21 वर्ष होगी जब मेरी मुलाकात निधि यादव से हुई मैंने एमकॉम कंप्लीट किया था , और लॉ में एडमिशन लिया था और उसने 12th...

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छल By Ajay Amitabh Suman

सुबह का वक्त था। राजा महेंद्र सिंह राठौड़ अपने रथ में बैठकर रानी अरुणिमा सिंह के साथ नौका विहार हेतु अपने महल से बाहर जा रहे थे। अपनी रानी के साथ वो अकेले समय व्यतीत करना चाह रहे...

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बंद गले का ब्लाउज By Dipak Raval

‘बंद गले का ब्लाउज’ -दीपक रावल (मूल गुजराती से अनुवाद – मदनमोहन शर्मा) बालूभाई कब से बेचैन थे. आज लीला ने क्यों देरी की होगी ?रोजाना तो समय से आ जाती है. शंका – कुशंकावश बेचैनी बढ़...

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पूत कपूत तो ? By Shobha Sharma

"ऐ बाई ! कहां का टिकिट काटें ? " -बस कंडक्टर चौथी बार चिल्लाया तो पीछे की सीट पर बैठा मैं अपनी जगह पर खड़ा हो गया ....

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रिटायरमेंट By Tara Gupta

रिटायरमेंट के बाद से सतीश घर पर ही ज्यादा से ज्यादा समय व्यतीत कर रहे थे। खाना,सोना, पेपर पढ़ना ,टीवी देखना और बिस्तर पर पड़े रहना यही उनकी दिनचर्या हो गई थी। सना उनकी इस दिनचर्या...

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कंधा By Amita Joshi

"कितनी डरपोक हो तुम ,तुम्हें छोड़ कर मैं कहीं नहीं जा सकता ।अच्छे भले बन्द घर में भी डर लगता है तुम्हे ,ऐसा कब तक चलेगा ",सोमेश की आवाज़ में एक खीज थी ।"क्या करूं ये मेेेरा ख...

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फोन की घंटी - 1 By Saroj Prajapati

फोन की घंटीसंडे का दिन यानी कि सप्ताह का सबसे व्यस्त दिन और अगर आप वर्किंग वूमेन है तो समझ लीजिए ! मैं भी उनमें से एक ही हूं। दोपहर के 3:00 बज गए । मैंने जल्दी जल्दी हाथ चलाना शुरू...

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कचहरी By Ved Prakash Tyagi

कचहरी अपने परिवार के साथ सोहन एक फ्लैट में रह रहा था, छोटा भाई भी साथ में ही रहता था। दो कमरो वाले फ्लैट में एक कमरा तो अपना निजी और दूसरा कमरा आने जाने वालों के लिए रखा हुआ था। कु...

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वालिद साहब By Saadat Hasan Manto

तौफ़ीक़ जब शाम को कलब में आया तो परेशान सा था।

दोबार हारने के बाद उस ने जमील से कहा। “लो भई मैं चला।”

जमील ने तौफ़ीक़ के गोरे चिट्टे चेहरे की तरफ़ ग़ौर से देखा और कहा। “इतनी...

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कुछ खट्टी कुछ मीठी By Pushp Saini

लघुकथा ( कुछ खट्टी कुछ मीठी✍?)------------------------------------------"मम्मी जी !मम्मी जी जल्दी चलिये "। कृति ने अपनी सास से कहा " क्या हुआ, क्या आफ़त आ गई "। सरोज ने कहा " मम्मी...

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दोस्ती By Shweta Misra

कुमुद तीन भाइयों की एकलौती बहन और मैथिली एकलौती संतान अपने माँ बाप की l दोनों ही के कुछ निश्चित दायरे थे जिसे दोनों के माता पिता ने तय कर रखे थे l कुमुद के पिता का स्थानान्तरण उस श...

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अफ़सोस By Pranav Vishvas

बात उस रीयूनियन पार्टी की है जहाँ मुझे और साहिल को अपने स्कूल के दोस्तों से दोबारा मिलने का मौका मिला हम पार्टी में पहुँचे और जैसे सभी दोस्त हमारा ही इंतज़ार कर रहे थे, हम सब बहुत ख...

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दिवाली के बाद By Swati Grover

सुमित आज बड़ा खुश था उसका ऑफिस में प्रमोशन हो गया था अब वह एक टेलिकॉम कंपनी का सीनियर मैनेजर बन चुका था । सब उसे ऑफिस में बधाईयाँ देते हुए उसके द्वारा दी गई पार्टी का आनंद ले रहे थे...

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जिम्मेदारी By Monika kakodia

अपनी किताब हाथ में लिए मैं बहुत देर से बस पन्ने ही पलटे जा रही थी। दो महीने बाद मेरी एम.बी.ए प्रवेश की परीक्षा होने वाली थी।कई दिनों की मशक्कत के बाद आज मैंने ये दृढ़ निश्चय किया कि...

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हिटलर की प्रेमकथा - 3 By Kusum Bhatt

गौरी, राधा, सीना परी और माँ का गला रूँध गया था... असूज (अश्विन) का महीना काल बनकर उतरा... खा गई अपनी नानी... हाँ... तू खा गई’’, मेरी माँ ने मुझे कोसा था।
मैं सिसकते हुए बोली, ‘‘ना...

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पुत्रमोह By Madhudeep

1 - पुत्रमोह
2 - बिना सिर का धड़
3 - निदान

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सजदा By Saadat Hasan Manto

गिलास पर बोतल झुकी तो एक दम हमीद की तबीयत पर बोझ सा पड़ गया। मलिक जो उसके सामने तीसरा पैग पी रहा था फ़ौरन ताड़ गया कि हमीद के अंदर रुहानी कश्मकश पैदा होगई है। वो हमीद को सात बरस से जा...

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सोच और संघर्ष By Dr Vatsala J Pande

अरे आज भी तुम ये छोटी छोटी मछलियां पकड़ लाये , कितनी बार समझाया की समुद्र में थोड़ी दूर तक जाओ , थोड़ी बड़ी मोटी मछली लाओ ,कुछ आमदनी बढे और कुछ हमारा रहन सहन ऊंचा हो, कब तक इस झोपड़ नुम...

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धनिया By Ved Prakash Tyagi

धनिया फुट पाथ पर पडी धनिया भंयकर प्रसव पीडा से तडप रही थी, बेचारा सुखिया इस शहर मे किसी को जानता भी नही जो उसकी सहायता के लिये आता। कुछ दिन पहले ही सुखिया अपनी धर्मपत्नी धनिया...

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शान्ति By Dr Vatsala J Pande

ओफ्फो शान्ति तुम कितनी दुष्ट हो ,मैं कितने वर्षो से सिर्फ ये चाह रहा हूँ की तुम कुछ पल, दिन मेरे साथ गुजारो, पर नहीं तुम तो मुझसे कोसो दूर भागती हो जैसे मैं कोई जिन हु और तुम...

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पल जो यूँ गुज़रे - 16 By Lajpat Rai Garg

जाह्नवी के इन्टरव्यू की तिथि से चार दिन पूर्व की बात है। मुँह—अँधेरे निर्मल की नींद खुल गयी। कारण जाह्नवी को लगातार तीन—चार बहुत जोर की छींकें आर्इं। निर्मल ने गद्दे से उठते हुए बे...

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AWAGYAA By Dr Vatsala J Pande

हां कैकेयी तो तुम्हे तुम्हारे दो वचन मुझे आज पूरे करने है। बोलो प्रिय ,मांगो जो मांगना है, आज मैं राम को राजा घोषित कर बहुत ही प्रसन्न और निश्चिंत हु। मुझे ईश्वर ने इतना कुछ दिय...

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शुरू से शुरू करते हैं By Rita Gupta

शुरू से शुरू करतें हैं द्वारा रीता गुप्ता "अनु तुमने उससे बात की?"आज मम्मी ने फिर अनुश्री से पूछा। पिछले कुछ दिनों से ये नया सिलसिला शुरू हुआ था। मम्मी उसे याद दिलाती...

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शाह दूले का चूहा By Saadat Hasan Manto

सलीमा की जब शादी हुई तो वो इक्कीस बरस की थी। पाँच बरस होगए मगर उस के औलाद न हुई। उस की माँ और सास को बहुत फ़िक्र थी। माँ को ज़्यादा थी कि कहीं उस का नजीब दूसरी शादी ना करले। चुनांचे...

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तीज का सिंधारा By Saroj Prajapati

"मम्मी बुआ मुझे देख कर इतनी खुश हुई ना कि मैं आपको बता नहीं सकता। बुआ को समझ ही नहीं आ रहा था ,मुझे क्या खिलाए ,कहां बिठाए । उन्होंने मेरे खाने पीने के लिए इतनी चीजें बना दी कि मैं...

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दो कॉलगर्ल की कहानी By Ranjeev Kumar Jha

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बेटी बेटा By Dr Vatsala J Pande

अमेरिका के फ्लोरिडा में पढ़ रही आठ साल की फ्लोरेंस को अपने कक्षा में सब से अच्छी गरिमा लगती है। रोज़ दो चोटी कर के आती है तो फ्लोरिडा को अपने कटे बालो पर गुस्सा आता , हाउ डू यू टे...

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नैना को किसी ने मार दिया था। उसकी खून से लथपथ लाश लोगों को कहने पर मजबूर कर रही थी कि 'क्या अन्याय है! दस दिन बाद इसकी शादी थी और यह कुदरत का कहर। आखिर नैना को मार...

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"छाया,तुम्हारा पेट कुछ भारी भारी सा लग रहा है,कहीं कोई गुड़ न्यूज़ तो नहीं सुनाने वाली हो"।"अरे,ऐसा कुछ नहीं है दीदी ,बस पिछले दिनों घूमने नही गए तो वजन बढ़ गया ", छाया ने...

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बारीश By Raje.

अभी 5:45 शाम के बज रहे थे।मैने नाश्ता खतम किया। और पुछा कितने रुपे हुए। वह कुछ दैर गीन कर बोला। शाब, 20 रुपे।
मैने जट से पोकेट नीकाला और 50 रुपेकी नोट नीकाली। मैने जैसे ही असकी और...

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मेरी किस्मत By Rahul Sagar Advocate

मेरा नाम राहुल सागर है और मैं मेरठ का रहने वाला हूं मेरी उम्र करीब 21 वर्ष होगी जब मेरी मुलाकात निधि यादव से हुई मैंने एमकॉम कंप्लीट किया था , और लॉ में एडमिशन लिया था और उसने 12th...

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छल By Ajay Amitabh Suman

सुबह का वक्त था। राजा महेंद्र सिंह राठौड़ अपने रथ में बैठकर रानी अरुणिमा सिंह के साथ नौका विहार हेतु अपने महल से बाहर जा रहे थे। अपनी रानी के साथ वो अकेले समय व्यतीत करना चाह रहे...

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बंद गले का ब्लाउज By Dipak Raval

‘बंद गले का ब्लाउज’ -दीपक रावल (मूल गुजराती से अनुवाद – मदनमोहन शर्मा) बालूभाई कब से बेचैन थे. आज लीला ने क्यों देरी की होगी ?रोजाना तो समय से आ जाती है. शंका – कुशंकावश बेचैनी बढ़...

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पूत कपूत तो ? By Shobha Sharma

"ऐ बाई ! कहां का टिकिट काटें ? " -बस कंडक्टर चौथी बार चिल्लाया तो पीछे की सीट पर बैठा मैं अपनी जगह पर खड़ा हो गया ....

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रिटायरमेंट By Tara Gupta

रिटायरमेंट के बाद से सतीश घर पर ही ज्यादा से ज्यादा समय व्यतीत कर रहे थे। खाना,सोना, पेपर पढ़ना ,टीवी देखना और बिस्तर पर पड़े रहना यही उनकी दिनचर्या हो गई थी। सना उनकी इस दिनचर्या...

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कंधा By Amita Joshi

"कितनी डरपोक हो तुम ,तुम्हें छोड़ कर मैं कहीं नहीं जा सकता ।अच्छे भले बन्द घर में भी डर लगता है तुम्हे ,ऐसा कब तक चलेगा ",सोमेश की आवाज़ में एक खीज थी ।"क्या करूं ये मेेेरा ख...

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फोन की घंटीसंडे का दिन यानी कि सप्ताह का सबसे व्यस्त दिन और अगर आप वर्किंग वूमेन है तो समझ लीजिए ! मैं भी उनमें से एक ही हूं। दोपहर के 3:00 बज गए । मैंने जल्दी जल्दी हाथ चलाना शुरू...

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कचहरी By Ved Prakash Tyagi

कचहरी अपने परिवार के साथ सोहन एक फ्लैट में रह रहा था, छोटा भाई भी साथ में ही रहता था। दो कमरो वाले फ्लैट में एक कमरा तो अपना निजी और दूसरा कमरा आने जाने वालों के लिए रखा हुआ था। कु...

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वालिद साहब By Saadat Hasan Manto

तौफ़ीक़ जब शाम को कलब में आया तो परेशान सा था।

दोबार हारने के बाद उस ने जमील से कहा। “लो भई मैं चला।”

जमील ने तौफ़ीक़ के गोरे चिट्टे चेहरे की तरफ़ ग़ौर से देखा और कहा। “इतनी...

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कुछ खट्टी कुछ मीठी By Pushp Saini

लघुकथा ( कुछ खट्टी कुछ मीठी✍?)------------------------------------------"मम्मी जी !मम्मी जी जल्दी चलिये "। कृति ने अपनी सास से कहा " क्या हुआ, क्या आफ़त आ गई "। सरोज ने कहा " मम्मी...

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दोस्ती By Shweta Misra

कुमुद तीन भाइयों की एकलौती बहन और मैथिली एकलौती संतान अपने माँ बाप की l दोनों ही के कुछ निश्चित दायरे थे जिसे दोनों के माता पिता ने तय कर रखे थे l कुमुद के पिता का स्थानान्तरण उस श...

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अफ़सोस By Pranav Vishvas

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दिवाली के बाद By Swati Grover

सुमित आज बड़ा खुश था उसका ऑफिस में प्रमोशन हो गया था अब वह एक टेलिकॉम कंपनी का सीनियर मैनेजर बन चुका था । सब उसे ऑफिस में बधाईयाँ देते हुए उसके द्वारा दी गई पार्टी का आनंद ले रहे थे...

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हिटलर की प्रेमकथा - 3 By Kusum Bhatt

गौरी, राधा, सीना परी और माँ का गला रूँध गया था... असूज (अश्विन) का महीना काल बनकर उतरा... खा गई अपनी नानी... हाँ... तू खा गई’’, मेरी माँ ने मुझे कोसा था।
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पुत्रमोह By Madhudeep

1 - पुत्रमोह
2 - बिना सिर का धड़
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