सामाजिक कहानियां कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • ज़हरीली शराब

    आज कमली काम पर वापस आ गई, कल शाम को ही फोन कर दिया था कि आँटी बर्तन मत धुलना,...

  • अर्द्ध सत्य

    दिसम्बर महीने के दूसरे पक्ष का प्रथम रविवार सुबह के ग्यारह बजे के लगभग का समय गु...

  • बच्चों की परवरिश

    कोरोना काल में बच्चों को संभालना भी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के समान है। बच्चों को...

माहौल          By amit kumar mall

बहुत दौड़ भाग करने और सिफारिश लगाने के बाद भी शहर के इकलौते विश्वविद्यालय में प्रवेश नही मिला।उस समय सांध्य कॉलेज , सेल्फ फाइनेंस के कोर्स नही थे। ले देकर केवल एक विश्वविद्यालय...

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सामाजिक अस्वीकृत का भय प्रेम का बड़ा शत्रु । By विवेक वर्मा

प्रेम एक ऐसा विषय है जिसपर बहुत कुछ कहा और लिखा जा चुका है।अगर आप देखें तो पाएंगे की हर वक्ता,समाजसुधारक आदि अगर नैतिकता शांति जैसे विषयों पर भाषण देता हो तो वह प्रेम पर बोलता...

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शादी का निमंत्रण By Anand M Mishra

कोरोना काल का समय। फोन की घंटी बजी। देखा तो बोकारो में कार्यरत भाई का फोन था। उत्सुकता से फोन उठाया। उधर से काफी प्रसन्नता से भाई ने अपने सुपुत्र के जो कि टाटा स्टील, जमशेदपुर मे...

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अमलतास के फूल - 11 By Neerja Hemendra

टूटते पंख      वह पूर्वी उत्तर प्रदेश का पच्चीस-तीस टूटी-फूटी झोंपड़ियों वाला छोटा-सा गाँव था। उस छोटे-से गाँव में पक्के मकान के नाम पर मुखिया जी का ही घर था, जो आधा...

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इन्तजार एक हद तक - 7 - (महामारी) By RACHNA ROY

हकीम पुर गांव की वो दास्तां को हुए दो साल हो गए पर मानो कल की बात हो।।अगले दिन सुबह रमेश आफिस के लिए तैयार हो गए और बच्चे भी तैयार हो कर लंच बॉक्स लेकर चले गए।रमेश बोला चन्दू बच्चो...

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ज़हरीली शराब By Rama Sharma Manavi

आज कमली काम पर वापस आ गई, कल शाम को ही फोन कर दिया था कि आँटी बर्तन मत धुलना, मैं कल सुबह से आना शुरू कर दूंगी।कल ही तेरहवीं थी उसके पति की।मैं थोड़ी हैरान तो थी,लेकिन उसकी सारी...

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सेफ्टी वाल्व By amit kumar mall

छोटी गोल, बड़ी गोल करते करते आठवीं पास होने तक , मैं गांव के प्राइमरी पाठशाला और जूनियर हाई स्कूल में पढ़ता रहा । प्राइमरी पाठशाला में पटिया , नरकट की कलम , दूधिया की दवात तथा किताब...

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अर्द्ध सत्य By Lajpat Rai Garg

दिसम्बर महीने के दूसरे पक्ष का प्रथम रविवार सुबह के ग्यारह बजे के लगभग का समय गुनगुनी मीठी-सी धूप ऐसी धूप का आनन्द लेने के लिए लॉन में बैठे सास-ससुर पार्वती और मनोज को नाश्ता करवान...

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फैसला By Rama Sharma Manavi

प्रमिला जी ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठकर गम्भीर मुद्रा में विचार मंथन में लगी हुई थीं।14 वर्षीय पोती अनु के कटु तीव्र वचनों ने उनके जख्मों को हरा कर दिया था,"दादी, आप यहां क...

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कुरूप रानी By Anand Tripathi

एक राज्य में एक राजा राज किया करता था। उसके पास अपार जनशक्ति,धनशक्ति,और वैभव,और कई रनिया थी।एक दिन की बात है। राजा ने एक युद्ध में एक रानी को जीत के अपने महल में ले आया था। लेकिन व...

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चूल्हा ठंडा नहीं होता By Sunita Bishnolia

चूल्हा ठंडा नहीं होता-कहानी "रामनारायण बाजा बजाए… रामनारायण बाजा बजाए सब लोगों का दिल बहलाए" गाते हुए रामनारायण सोचता है "अच्छा है अपने परिवार से कोसों दूर रहने वाले मेरे सा...

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बच्चों की परवरिश By Anand M Mishra

कोरोना काल में बच्चों को संभालना भी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के समान है। बच्चों को क्या चाहिए? प्यार-दुलार और खेलने की सुविधा। रोटी, कपड़ा और मकान तो सभी मनुष्यों को चाहिए। बाद वाली ब...

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त्याग By amit kumar mall

बात कुछ दशक पुरानी है। जब नौकरी की तलाश में इलाहाबाद जाने वाला हर छात्र , यह मानता था कि वह कलेक्टर जरूर बनेगा और धर्मवीर भारती के गुनाहों के देवता की कर्म भूमि पर, उसे भी कोई लड़की...

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ज़िन्दगी सतरंग.. - 4 By Sarita Sharma

अम्मा जी और फ़ौजी अंकल अब बूढ़े हो चुके थे..ईर्ष्या,काम, क्रोध, लोभ, मोह.. इन सबसे कोसो दूर..हां क्रोध और मोह अभी बाकी था और बाकी था ढेर सारा बचपना भी...बच्चे जैसे दिमाग से नही सोचते...

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बुजुर्गों की परेशानी By Anand M Mishra

चंद्रमा पर राष्ट्र्भूमि केंद्र विद्यालय नामक संस्था चलती है। इस विद्यालय का चंद्रमा पर ‘जाल’ बिछा हुआ है। विद्यालय का जाल इतने सुदृढ़ तरीके से बिछा है कि सभी अध्यापकों में एक परिवार...

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सपने (अंतिम भाग) By Kishanlal Sharma

नागेश के वीजा की अवधि समाप्त होते ही कम्पनी ने उसे कम से हटा दिया।वह कुछ ऐसे लोगो के सम्पर्क में आया जो वीजा खत्म हो जाने पर भी चोरी छिपे वहां काम कर रहे थे।नागेश भी काम की तलाध कर...

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अक्षम्य अपराध - 1 By Rama Sharma Manavi

प्रस्तर मूर्ति के समान स्थिर बैठी दिव्या निर्निमेष,सूनी अश्रुविहीन नेत्रों से सामने की दीवार देखे जा रही थी।सफेद चेहरे पर ठहरी हुई पुतलियां इंगित कर रही थीं कि वह जीवित तो है, प...

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सधी आंच By kavita jayant Srivastava

"कितनी बार कहा है कि, सुबह उठते ही मत बताया करो कि क्या दर्द है क्या तकलीफ है , सुबह सुबह ही शुरू हो गया तुम्हारा राग..'' वो गुस्से से भरा हुआ था "मैंने कहां बताया आपने खुद...

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पश्चाताप By Archana Singh

पुरुस्कृत कहानी "पश्चाताप" जिंदगी जो हमें सिखाती है शायद वह किसी पाठशाला में हमें सीखने को नहीं मिलती। वक्त जैसे बेलगाम घोड़े की रफ्तार की तरह भागत...

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टूटते रिश्ते By Jyoti Prajapati

"चलो....तुम कहती हो तो मैं तैयार हूँ तुम्हारी बात मानने के लिए !! तुम महिलाएं नही जी पाती हो अपनी ज़िंदगी अपने तरीके से ! मायके में हमेशा घरवालो की मर्ज़ी से रहना पड़ता और शादी के बाद...

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अच्छी बेटी By नवीन एकाकी

बड़े ही मन से उसकी सहेलियों ने उसे दुल्हन के लाल जोड़े में सजाया था। बला की खूबसूरत नजर आ रही थी आज वो। अगर चाँद भी देख लेता तो शरम के मारे बादलो में अपना मुंह छुपा लेता। उसके गोरे ग...

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BOYS school WASHROOM - 19 By Akash Saxena "Ansh"

जैसे ही अवि और प्रज्ञा,विहान को गले लगाते हैँ…..तभी आसमान मे बिजली की तेज़ गड़गड़ाहट के साथ उनके घर की लाइट चली जाती है। तीनों बिजली की आवाज़ से डर जाते हैँ और प्रज्ञा घबराकर जल्दी से...

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स्वतन्त्र सक्सैना की कहानिया - 10 - पति देवता By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

पति देवता डॉ0 स्‍वतंत्र कुमार सक्‍सेना -‘पति तो देवता होता है,पति की ही बेज्‍जती स्‍वागत सत्‍कार तो गया चूल्‍ह...

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एक दूजे के लिए By Sunita Bishnolia

एक-दूजे के लिए "ओफ्फो! रश्मि तुम फिर सब्जी लेने नीचे चली गई कितनी बार मना किया है तुम्हें, पर तुम हो कि मानती ही नहीं।" "अरे! बाबा मैं मास्क लगाकर गई थी और मैं कौनसा द...

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हद है पिताजी By Rama Sharma Manavi

पवन जी एक 66 वर्षीय व्यक्ति हैं।वे शुरू से खाने-पीने के बेहद शौकीन हैं।दो तरह के लोग होते हैं, एक जो भोजन शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के लिए ग्रहण करते हैं।दूसरे वे होते हैं जो सि...

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बच्चों का मेला By sudha bhargava

कहानी बच्चों का मेला /सुधा भार्गव मुकद्दर –चुकद्दर एक बार बड़े शौक से मेला देखने गए । मेला कोई ज्यादा बड़ा नहीं था । एक तरफ छोटी –छोटी दुकाने लगी हुई थीं दूसर...

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नाजायज़ रिश्ता By Ranjana Jaiswal

अपनी बाल.सखी सीमा के दमकते चेहरे को अनामा देखती रह गयी। इतना अपूर्व रूप! सीमा पहले भी सुंदर दिखती थी, पर इस समय उसके चेहरे पर नवयौवन की ताजगी मधुरिमा व कमनीयता एक साथ उतर आई थी। अन...

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Dear comrade - 2 By Heena_Pathan

समर अपने सपनो की कुर्बानी दे देता है और रिक्शा चला कर घर की आथिक समस्या को सुधारने की कोशिश करता है ! समर अपनी जिंदगी से खुश नहीं है बस जी रहा है अपने परिवार की समस्या को बदलना और...

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जिम्मेदार कौन? By Rama Sharma Manavi

विभावरी के निर्जीव देह को उसका पांच वर्षीय बेटा हिलाते हुए कह रहा था कि मम्मी उठो न,मुझे भूख लगी है, दूध-ब्रेड दे दो।देखो,कितने सारे लोग आए हैं और आप सो रही हो।फिर पिता का कंधा...

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अम्मा By Ranjana Jaiswal

कभी- कभी विश्वास ही नहीं होता कि रिश्ते इतने भी कच्चे हो सकते हैं।पड़ोस की अम्मा आख़िरकार जीने की इच्छा मन में लिए चली ही गईं।महीनों से वे यमराज से लड़ रही थीं।अपने जीवन की सावित्री व...

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ममता की तुलना By vidya,s world

सुबह सुबह ब्रिजेश अपनी मां से झगड़ रहा था। मां चुप चाप अपना सिर झुकाए उसकी बाते सुन रही थी।ब्रिजेश अपने छोटे भाई जयेश की तरफ गुस्सैल नजरों से देखते हुए फिर से मां पर बरस पड़ा।" मां...

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माहौल          By amit kumar mall

बहुत दौड़ भाग करने और सिफारिश लगाने के बाद भी शहर के इकलौते विश्वविद्यालय में प्रवेश नही मिला।उस समय सांध्य कॉलेज , सेल्फ फाइनेंस के कोर्स नही थे। ले देकर केवल एक विश्वविद्यालय...

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सामाजिक अस्वीकृत का भय प्रेम का बड़ा शत्रु । By विवेक वर्मा

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शादी का निमंत्रण By Anand M Mishra

कोरोना काल का समय। फोन की घंटी बजी। देखा तो बोकारो में कार्यरत भाई का फोन था। उत्सुकता से फोन उठाया। उधर से काफी प्रसन्नता से भाई ने अपने सुपुत्र के जो कि टाटा स्टील, जमशेदपुर मे...

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अमलतास के फूल - 11 By Neerja Hemendra

टूटते पंख      वह पूर्वी उत्तर प्रदेश का पच्चीस-तीस टूटी-फूटी झोंपड़ियों वाला छोटा-सा गाँव था। उस छोटे-से गाँव में पक्के मकान के नाम पर मुखिया जी का ही घर था, जो आधा...

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इन्तजार एक हद तक - 7 - (महामारी) By RACHNA ROY

हकीम पुर गांव की वो दास्तां को हुए दो साल हो गए पर मानो कल की बात हो।।अगले दिन सुबह रमेश आफिस के लिए तैयार हो गए और बच्चे भी तैयार हो कर लंच बॉक्स लेकर चले गए।रमेश बोला चन्दू बच्चो...

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ज़हरीली शराब By Rama Sharma Manavi

आज कमली काम पर वापस आ गई, कल शाम को ही फोन कर दिया था कि आँटी बर्तन मत धुलना, मैं कल सुबह से आना शुरू कर दूंगी।कल ही तेरहवीं थी उसके पति की।मैं थोड़ी हैरान तो थी,लेकिन उसकी सारी...

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छोटी गोल, बड़ी गोल करते करते आठवीं पास होने तक , मैं गांव के प्राइमरी पाठशाला और जूनियर हाई स्कूल में पढ़ता रहा । प्राइमरी पाठशाला में पटिया , नरकट की कलम , दूधिया की दवात तथा किताब...

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प्रमिला जी ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठकर गम्भीर मुद्रा में विचार मंथन में लगी हुई थीं।14 वर्षीय पोती अनु के कटु तीव्र वचनों ने उनके जख्मों को हरा कर दिया था,"दादी, आप यहां क...

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कुरूप रानी By Anand Tripathi

एक राज्य में एक राजा राज किया करता था। उसके पास अपार जनशक्ति,धनशक्ति,और वैभव,और कई रनिया थी।एक दिन की बात है। राजा ने एक युद्ध में एक रानी को जीत के अपने महल में ले आया था। लेकिन व...

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चूल्हा ठंडा नहीं होता By Sunita Bishnolia

चूल्हा ठंडा नहीं होता-कहानी "रामनारायण बाजा बजाए… रामनारायण बाजा बजाए सब लोगों का दिल बहलाए" गाते हुए रामनारायण सोचता है "अच्छा है अपने परिवार से कोसों दूर रहने वाले मेरे सा...

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कोरोना काल में बच्चों को संभालना भी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के समान है। बच्चों को क्या चाहिए? प्यार-दुलार और खेलने की सुविधा। रोटी, कपड़ा और मकान तो सभी मनुष्यों को चाहिए। बाद वाली ब...

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ज़िन्दगी सतरंग.. - 4 By Sarita Sharma

अम्मा जी और फ़ौजी अंकल अब बूढ़े हो चुके थे..ईर्ष्या,काम, क्रोध, लोभ, मोह.. इन सबसे कोसो दूर..हां क्रोध और मोह अभी बाकी था और बाकी था ढेर सारा बचपना भी...बच्चे जैसे दिमाग से नही सोचते...

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बुजुर्गों की परेशानी By Anand M Mishra

चंद्रमा पर राष्ट्र्भूमि केंद्र विद्यालय नामक संस्था चलती है। इस विद्यालय का चंद्रमा पर ‘जाल’ बिछा हुआ है। विद्यालय का जाल इतने सुदृढ़ तरीके से बिछा है कि सभी अध्यापकों में एक परिवार...

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नागेश के वीजा की अवधि समाप्त होते ही कम्पनी ने उसे कम से हटा दिया।वह कुछ ऐसे लोगो के सम्पर्क में आया जो वीजा खत्म हो जाने पर भी चोरी छिपे वहां काम कर रहे थे।नागेश भी काम की तलाध कर...

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प्रस्तर मूर्ति के समान स्थिर बैठी दिव्या निर्निमेष,सूनी अश्रुविहीन नेत्रों से सामने की दीवार देखे जा रही थी।सफेद चेहरे पर ठहरी हुई पुतलियां इंगित कर रही थीं कि वह जीवित तो है, प...

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सधी आंच By kavita jayant Srivastava

"कितनी बार कहा है कि, सुबह उठते ही मत बताया करो कि क्या दर्द है क्या तकलीफ है , सुबह सुबह ही शुरू हो गया तुम्हारा राग..'' वो गुस्से से भरा हुआ था "मैंने कहां बताया आपने खुद...

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पश्चाताप By Archana Singh

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टूटते रिश्ते By Jyoti Prajapati

"चलो....तुम कहती हो तो मैं तैयार हूँ तुम्हारी बात मानने के लिए !! तुम महिलाएं नही जी पाती हो अपनी ज़िंदगी अपने तरीके से ! मायके में हमेशा घरवालो की मर्ज़ी से रहना पड़ता और शादी के बाद...

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अच्छी बेटी By नवीन एकाकी

बड़े ही मन से उसकी सहेलियों ने उसे दुल्हन के लाल जोड़े में सजाया था। बला की खूबसूरत नजर आ रही थी आज वो। अगर चाँद भी देख लेता तो शरम के मारे बादलो में अपना मुंह छुपा लेता। उसके गोरे ग...

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BOYS school WASHROOM - 19 By Akash Saxena "Ansh"

जैसे ही अवि और प्रज्ञा,विहान को गले लगाते हैँ…..तभी आसमान मे बिजली की तेज़ गड़गड़ाहट के साथ उनके घर की लाइट चली जाती है। तीनों बिजली की आवाज़ से डर जाते हैँ और प्रज्ञा घबराकर जल्दी से...

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स्वतन्त्र सक्सैना की कहानिया - 10 - पति देवता By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

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एक दूजे के लिए By Sunita Bishnolia

एक-दूजे के लिए "ओफ्फो! रश्मि तुम फिर सब्जी लेने नीचे चली गई कितनी बार मना किया है तुम्हें, पर तुम हो कि मानती ही नहीं।" "अरे! बाबा मैं मास्क लगाकर गई थी और मैं कौनसा द...

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हद है पिताजी By Rama Sharma Manavi

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बच्चों का मेला By sudha bhargava

कहानी बच्चों का मेला /सुधा भार्गव मुकद्दर –चुकद्दर एक बार बड़े शौक से मेला देखने गए । मेला कोई ज्यादा बड़ा नहीं था । एक तरफ छोटी –छोटी दुकाने लगी हुई थीं दूसर...

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नाजायज़ रिश्ता By Ranjana Jaiswal

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विभावरी के निर्जीव देह को उसका पांच वर्षीय बेटा हिलाते हुए कह रहा था कि मम्मी उठो न,मुझे भूख लगी है, दूध-ब्रेड दे दो।देखो,कितने सारे लोग आए हैं और आप सो रही हो।फिर पिता का कंधा...

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अम्मा By Ranjana Jaiswal

कभी- कभी विश्वास ही नहीं होता कि रिश्ते इतने भी कच्चे हो सकते हैं।पड़ोस की अम्मा आख़िरकार जीने की इच्छा मन में लिए चली ही गईं।महीनों से वे यमराज से लड़ रही थीं।अपने जीवन की सावित्री व...

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ममता की तुलना By vidya,s world

सुबह सुबह ब्रिजेश अपनी मां से झगड़ रहा था। मां चुप चाप अपना सिर झुकाए उसकी बाते सुन रही थी।ब्रिजेश अपने छोटे भाई जयेश की तरफ गुस्सैल नजरों से देखते हुए फिर से मां पर बरस पड़ा।" मां...

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