सामाजिक कहानियां कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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Featured Books

कर्तव्य,, By Nirpendra Kumar Sharma

बाहर शहनाइयों का शोर, मेहमानों की चहलपहल और शादी की सजावटों के बीच सुरेखा सोच रहीं थी की अब जल्दी ही उनकी बेटी संजना विदा होकर ससुराल चली जायेगी ।बेटी का विवाह करके उनका बहुत बड़ा क...

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शहीद ए आज़म भगतसिंह के द्वारा कही गई बाते By ARYAN Suvada

1 . "राख का हर एक कण मेरी गर्मी से गतिमान है मैं एक ऐसा पागल हूँ जो जेल में भी आज़ाद है ।"2. "किसी को “क्रांति ” शब्द की व्याख्या शाब्दिक अर्थ में नहीं करनी चाहिए। जो लोग इस शब्द...

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अम्मा. By aateka Valiulla

हॉस्टल से घर जाने का मज़ा ही कुछ और होता है... पता है क्यों..?क्यों की घर पे माँ होती है... कितने दिनों बाद में आज घर जाउंगी...माँ के हाथ का खाना खाऊँगी, घर पे पोहचते  ही माँ क...

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लव ए मिसअन्डरस्टेन्डींग By Vishwaroop kumar

आप लोग सोच रहे होंगे कि मैंने कहानी का टाइटल love a violence story क्यो रखा है तो आपको इस सवाल का जबाब इस कहानी को पढ़ कर मिलेगा।। ये कहानी शुरू होती है आजमगढ़ से जहाँ  हमारी कह...

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मज़ार का दीया By Neetu Singh Renuka

ओमकार को अंदाज़ा हो गया था कि दिव्या ने कहीं कुछ रुपए छुपाए ज़रूर हैं वरना शेफाली को डॉक्टर के पास कैसे ले गई। डॉक्टर ने कुछ न कुछ फीस तो ज़रूर ली होगी।  ओमकार ने पहले तो नज़रों स...

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अनन्त यात्रा By Yogesh Kanava

दूर-दूर तक नीला समन्दर फैला हुआ । वातावरण एकदम शान्त और इस नीरवता को चीरती है एक -एक कर आती समन्दर की लहरें । नीलिमा आज कोस्टा बीच पर एकदम अकेली बैठी है । अपने ही ख.यालों में खोई स...

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झुकी हुई फूलों भरी डाल - 3 By Neelam Kulshreshtha

अक्सर हर उम्र की महिलायें अपने बच्चों को पुकारतीं हैं तो उनके मुंह से और बच्चों के नाम निकल पड़ते हैं ,जो सामने है उसका नहीं। ब्रजभाषा के शीर्षक की कहानी में आज के ज़माने की दादी जिम...

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खाली हाथ By Shaihla Ansari

"नहीं मां....मुझे राहुल से शादी नहीं करनी....आप उन लोगों को इनकार कर दो""तू पागल हुई है क्या.... इतना अच्छा लड़का तुझे फिर नहीं मिलेगा" हेमा ने रानो को समझाया!!"मां राहुल में ऐसा क...

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मिस्त्री By Kiran Rajpurohit Nitila

उदय अपने जूते और कपड़े इधर-उधर फैला कर कुर्सी पर बैठ चुका था। दीपा ने बैग ,कपड़े समेट कर घर के कपड़े टेबल पर लाकर रखे और इषारा किया कि ‘ कपड़े बदल लो‘ पर गेम खेलने की बेताबी ने स्क्रीन...

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द्वंद (अध्याय एक) By Krishna Chaturvedi

युद्ध के मैदान में मै खड़ा चारो तरफ कोलाहल से भरा माहौल था। धाय धाय गोलिया चल रही थी ,गोले बारूद चल रहे थे। दुश्मन की गोली चारो तरफ से आ रही दाए से बाए से आगे से ऊपर से।मेरा कप्तान...

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मुस्कान... दो पल की By Satyendra prajapati

शहर से चार - पांच मील दूर एक गांव सुबह का समय एक खूबसूरत छोटे से घर के किचन में चाय बनाती रिचा जी, अपने पति को आवाज लगाती। मास्टर जी जल्दी आना , मै चाय ला...अचानक से मास्टर जी पीछे...

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जड़ से कटा By Yogesh Kanava

रोजाना का यही क्रम था , पार्क के कोने वाली बैंच और उस पर एक लगभग सत्तर साल का वो बुजुर्ग । घण्टो वो उसी बैंच पर बैठा रहता था एकदम गुमसुम ,ना किसी से कोई बातचीत , ना ही किसी से कोई...

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खत्म हुआ इंतज़ार By Shaihla Ansari

गर्म रेत पर चलते चलते मेरे पैरों में छाले पड़ने लगे थे। लेकिन मैं रुक भी नहीं सकती थी क्योंकि मैंने अपने आप से वादा किया था। मुझे चलते रहना है तब तक, जब तक मैं अपनी मंजिल तक ना पहु...

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पहला ख़त By Ravi Sharma

पहला ख़त !! तेज़ भागने के बावजूद मेरी क़मीज़ थोड़ी भीग गयी थी । मेस से हॉस्टल का रास्ता खुले आसमान से गुज़रता था और अगस्त की बारिश कश्मीर में कोई नयी बात नहीं थी । मुझे हज़रतबल रीज...

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परदा By Shaihla Ansari

दिल्ली की सड़को पर घूमते घूमते मेरे पैर दुख गये थे और मुझे भूख का भी एहसास हो रहा था, ये ही सोचते हुए मैं एक मॉल की तरफ बढ़ गया कि चलो कुछ खा लिया जाए!! "मैं दिल्ली एक काम के सिलसिले...

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और वह मर गयी By Nirpendra Kumar Sharma

नदी किनारे गांव के एक छोर पर एक छोटे से घर में रहती थी गांव की बूढी दादी माँ। घर क्या था ,उसे बस एक झोंपडी कहना ही उचित होगा। गांव की दादी माँ, जी हां पूरा गांव ही यही संबोधन देता...

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चाहत. By p

             यू तो मंजिल के रस्ते हज़ार मिलेंगे              कलियो सैंग कांटे हज़ार मिलेंगे   &nb...

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मेरा आठवां प्यार ... By Ashish Garg Raisahab

वर्ष 2012 , बी.एड. उस वक्त एक वर्ष की होती थी ,ओर प्री एग्जाम में मेरे अच्छे नम्बरों की वजह से मुझे मेरे होम टाउन में ही प्रेस्टीजियस कॉलेज मिल गया था । नए जोश और उमंग के साथ...

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सिगरेट - राख - ज़िन्दगी By Rishi Sachdeva

मैं अपनी बॉल्कनी से तुम्हारी बॉल्कनी की और देखता हूँ, पर नहीं देख पाता तुम्हे, शायद इसलिये की तुम एक शहर दूर हो, शायद मुझसे भी दूर और तुम्हारा शहर बहुत दूर है शायद चाँद से भी दूर,...

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कहानी पुरानी याद हमारी By ARYAN Suvada

हेलो दोस्तो ! एक बार फिरसे आपके सामने हाजिर हूँ एक नई कहानी के साथ । हा दोस्तो आपने सही पढ़ा आज मैं आपके साथ एक कहानी शेयर करने वाला हु पर उससे पहले एक और सवाल आपसे करने वाला हु । आ...

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बिट्टो की मम्मी By Anjulika Chawla

बिट्टो की मम्मी©अंजुलिका चावलाकई वर्षों तक वो  पड़ोस में रहे, उन्हें चाचा जी कहते थे हम।उनके तीन बच्चे हैं। दो बेटे, एक बेटी। बेटी को ईश्वर ने नसीब में उम्र भर का बचपन लिख दिया...

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शाकिर उर्फ़... By Anwar Suhail

शाकिर उर्फ....एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाकर ही वह जनरल-बोगी के अंदर घुस पाया। थोड़ी भी कमी रहती तो बोगी से निकलते यात्री उसे वापस प्लेटफार्म पर ठेल देते। पूरी ईमानदारी से दम लगाने में वह...

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सलाह By Harsh Bhatt

हर्निल_हरि की पहली स्टोरी      कॉलेज से वापसी के वक्त हर दिन की तरह आज भी पूरा ग्रुप साथ था,हरि इस ग्रुप का एंटरटेनर ओर ज्ञानी बाबा बन गया थाज्ञानी इसी लिए क्यो...

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पिछली सदी की पोटली By Prabodh Kumar Govil

सल्तनत तेज़ी से कदम बढ़ाती हुई चल रही थी। उसे पांच बजकर नौ मिनट तक हर हालत में घर पहुंचना था, क्योंकि गजराज ठीक पांच दस पर उसे बधाई देने वाला था। बधाई दे, रोए, फातिहा पढ़े, अलबत्ता...

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मुखौटा By Ajay Amitabh Suman

मार्च २०१६: वैसे आज गाँधी जी के लिए समय इंगित करना कुछ उचित नहीं . पर सुना है मैंने , अभी मार्च २०१६ की घटना है . अपने ये जो गांधीजी जी है , लेटे हुए थे स्वर्ग में , नेहरु जी के...

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क्या तुम वापस आ गयी ? By zeba Praveen

क्या तुम वापस आ गयी ? मुख्य पात्र डॉ साहिल आलिया डॉ विवेक कहानी का आधार -ये कहानी एक डॉक्टर की हैं जिसका दो साल पहले तलाक हो चूका...

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वाह रे तारीफें By Singh Srishti

प्रिया आज भी कॉलेज में झगड़ा करके आयी और घर पर आते ही सारा सामान तोड़ फोड़ करने लगी, आँखों में तो आग बरस रही है और हाथ पैरों में झुलझुलाहट, मानो आज ही पूरी दुनिया तबाह कर देगी। पूरा द...

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तरक्की की कीमत By Ranju Bhatia

बचपन के दिन कैसे फुदक के उड़ जाते हैं , स्कूल की शिक्षा खत्म हुई और आँखो में बड़े बड़े सपने खिलने लगते हैं ,जैसे ही उमंगें जवान होती है कुछ करने का जोश और आगे ऊँचे बढ़ने का सपना आं...

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समय जाल (भाग 1) By Thoughtful Mind

वैसे तो मैं अभी बहुत छोटा हूँ विज्ञान के उन जटिल एवं गणित के सिर घुमाने वाले फार्मूलों को समझने के लिए, जिन्हें मशहूर गड़ितज्ञओं ने कई साल पहले ही लिख दिया था, परंतु इतना तो अवश्य ह...

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उम्र का पड़ाव By Ranju Bhatia

,  फिर से नया साल  आ गया ..कैसे जल्दी से वक़्त बीतता जाता है | साल दरसाल ..उम्र दर उम्र ...वक़्त कहाँ थमता है और उस में उम्र का एक पड़ाव ऐसा आ जाता...

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रंगमहल की खिड़कियां और मैली हवाएं By Prabodh Kumar Govil

जब हम सुबह-सुबह अख़बार के किसी कौने में दुष्कर्म की खबर पढ़ते हैं तब हमारी कुंद पड़ चुकी संवेदना इसे आसानी से सह जाने का हौसला दे देती है। हम सरसरी तौर पर केवल ये जान लेते हैं कि घट...

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नाईटमेयर - सपना या हकीकत - पारस जैन की कहानी By Author Pawan Singh

हेलो , मेरा नाम पारस जैन है और जो मै आपको बताने जा रहा हूं। यह एक सच्ची घटना है। कुछ लोगो को भविष्य की झलकियां उनके सपने में दिख जाती है लेकिन वह ज्यादतर बुरी ही होती है। जिसे...

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वो अजनबी By Bansari Rathod

आज फिर आफ़िस से घर जाने में देरी हो गई, ये कॉलसेन्टर की जोब भी न.पर न चाहते हुए भी उस लैम्पपोस्ट पे जाते जाते नज़र चली ही गई।आज भी वो वही खड़ा एकटक सामने देख कर मुश्कुरा रहा था ,बस र...

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रोचक विज्ञान बालकथाएँ By Omprakash Kshatriya

हम उन्हें उपदेश दे कर सिखाना चाहते हैं. वे उपदेश से नहीं कार्यव्यवहार देख कर सीखते हैं. इस बात को हम भूल जाते हैं. आप सिगरेट पीते हो और बच्चों को इस से बचने की सलाह दो तो वह कोरा उ...

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रौशनी By Richa Modi

रौशनी का मतलब दिवाली ,दिवाली मे हर घर मे रौशनी होना जरुरी है। बेटी के लिए उसके पापा का प्रेम सबसे उपर होता है और वो इस कहानी मे है।

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सुखविंदर By Krunal jariwala

सुखविन्दरप्रतापसिंह एक वीर, ईमानदार योद्धा, बिलकुल उनके जैसा ही उनका पौत्र "सुखविन्दर", मानो अपने दद्दू की कार्बन कॉपी। देशभक्ति जैसे उसे दादाजी से विरासत में मिली हो। बचपन में दाद...

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भूत की पूजा (भाग एक) By Krishna Chaturvedi

कन्हैया रोज की तरह तेज चाल से चला जा रहा था।चारो तरफ गहरा अंधेरा छाया था और बारिश रुकने का नाम नहीं ले रहा था उस दिन,पर कन्हैया को इससे कहा मतलब ,वो तो मस्त अपनी ही दुनिया में और म...

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एक योगी की मौत By Ajay Amitabh Suman

मैं अपने गाँव गर्मी की छुट्टियों में गया हुआ था. अपने बड़े बाबूजी से उनके बारे में पूछा तो ज्ञात हुआ उनकी मोटर बाईक के दुर्घटना में मौत हो गई है. एक एक करके मेरे मानस पटल पे पुरानी...

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झुक गया आसमान By Ajay Amitabh Suman

मेरे पिताजी अति अनुशासन प्रिय व्यक्ति रहें है। पेशे से शिक्षक है। स्कूल में भी बहुत अनुशासन प्रिय और योग्य शिक्षक के रूप में उनकी प्रसिद्धि थी।अब सेवनिर्वित्त हो चुके है। उनकी अनुश...

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सोशल इंजीनियरिंग By Rajan Dwivedi

जातीय श्रेष्ठता के मिथ्याभिमान से जूझते एक युवा बेरोजगार की कहानी .

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फरार - 2 By Prashant Vyawhare

फरार वो १९८६ का दौर था जब अंडरवर्ल्ड का बड़ा भाई, उस पावरफुल नेताजी सरकार के कहने पर दुबई भाग गया उसके बाद मुंबई के अंडरवर्ल्ड में खलबली मच गयी. हर छोटा गैंगस्टर भाई की जगह लेना च...

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असली वजह By ओमप्रकाश प्रकाश

लघुकथा. मलाल 'गांव वाले लड़ने आ सकते हैं. लड़की को क्यों मारा ? क्या, तुम्हें मारने का अधिकार है. पिताजी पुलिस में रिपोर्ट कर सकते हैं. शर्म नहीं आती. एक छोटी लड़की का मारते हुए.'...

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प्रकृति का बदला By Monika Verma

सदियो से हम प्रकृति की गोद में जी रहे है। प्रकृति के हम पर इतने अहसान है की हम किसी भी कीमत पर उसे नहीं चूका सकते। लेकिन क्या हमने कभी इसकी क़द्र भी की है? इंसान के मोज शोख वाली जीव...

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फांस - AN EMBARRASSMENT By VIRENDER VEER MEHTA

‘फांस’ - AN EMBARRASSMENT अब्बाजान की दिल से ये आरजू थी कि ख़ुदा का बुलावा आने से पहले एक बार वे अपने पुरखों की सरजमीं हिन्दुस्तान पर सिर टिकाकर वहां की मिट्टी अपने...

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मुक्ति और अन्य लघुकथाएं - मुक्ति By Krishna manu

लघुकथा   ।।मुक्ति।।तलाक की पीटीशन फैमिली कोर्ट में दाखिल कर लौटते हुए वह इस उहापोह से मुक्त हो चुका था कि कहीं शक के बिना पर लिया गया उसका निर्णय जीवन भर के लिए पश्चाताप...

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सहोदर की कहानियां By Anand Gurjar

कहानियां मनोरंजन के साथ साथ हमारा ज्ञानवर्धन भी करती है । इन कहानियों सामाजिक रूढ़ियों के प्रति विद्रोह के साथ मानवीय संवेदना को व्यक्त किया गया ।...

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अपने पराये By Ravi

हम कभी खुदपर दृष्टि नहीं डालते कि हमने बीते दिनों में कोई पाप किया है या मुँह छुपाने जैसा कोई काम। हम केवल सामने की ओर उंगली उठाते हैं। जब कि सच तो ये हैं धूल चेहरे पे है, आईने पे...

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हार्ट ट्राँस्प्लांट By Bhupendra Kumar Dave

The story is about a heart surgeon who determines to save a child with damaged heart. A donor was required followed by difficult heart transplantstion. The story here unfolds the c...

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कर्तव्य,, By Nirpendra Kumar Sharma

बाहर शहनाइयों का शोर, मेहमानों की चहलपहल और शादी की सजावटों के बीच सुरेखा सोच रहीं थी की अब जल्दी ही उनकी बेटी संजना विदा होकर ससुराल चली जायेगी ।बेटी का विवाह करके उनका बहुत बड़ा क...

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शहीद ए आज़म भगतसिंह के द्वारा कही गई बाते By ARYAN Suvada

1 . "राख का हर एक कण मेरी गर्मी से गतिमान है मैं एक ऐसा पागल हूँ जो जेल में भी आज़ाद है ।"2. "किसी को “क्रांति ” शब्द की व्याख्या शाब्दिक अर्थ में नहीं करनी चाहिए। जो लोग इस शब्द...

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अम्मा. By aateka Valiulla

हॉस्टल से घर जाने का मज़ा ही कुछ और होता है... पता है क्यों..?क्यों की घर पे माँ होती है... कितने दिनों बाद में आज घर जाउंगी...माँ के हाथ का खाना खाऊँगी, घर पे पोहचते  ही माँ क...

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लव ए मिसअन्डरस्टेन्डींग By Vishwaroop kumar

आप लोग सोच रहे होंगे कि मैंने कहानी का टाइटल love a violence story क्यो रखा है तो आपको इस सवाल का जबाब इस कहानी को पढ़ कर मिलेगा।। ये कहानी शुरू होती है आजमगढ़ से जहाँ  हमारी कह...

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मज़ार का दीया By Neetu Singh Renuka

ओमकार को अंदाज़ा हो गया था कि दिव्या ने कहीं कुछ रुपए छुपाए ज़रूर हैं वरना शेफाली को डॉक्टर के पास कैसे ले गई। डॉक्टर ने कुछ न कुछ फीस तो ज़रूर ली होगी।  ओमकार ने पहले तो नज़रों स...

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अनन्त यात्रा By Yogesh Kanava

दूर-दूर तक नीला समन्दर फैला हुआ । वातावरण एकदम शान्त और इस नीरवता को चीरती है एक -एक कर आती समन्दर की लहरें । नीलिमा आज कोस्टा बीच पर एकदम अकेली बैठी है । अपने ही ख.यालों में खोई स...

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झुकी हुई फूलों भरी डाल - 3 By Neelam Kulshreshtha

अक्सर हर उम्र की महिलायें अपने बच्चों को पुकारतीं हैं तो उनके मुंह से और बच्चों के नाम निकल पड़ते हैं ,जो सामने है उसका नहीं। ब्रजभाषा के शीर्षक की कहानी में आज के ज़माने की दादी जिम...

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खाली हाथ By Shaihla Ansari

"नहीं मां....मुझे राहुल से शादी नहीं करनी....आप उन लोगों को इनकार कर दो""तू पागल हुई है क्या.... इतना अच्छा लड़का तुझे फिर नहीं मिलेगा" हेमा ने रानो को समझाया!!"मां राहुल में ऐसा क...

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मिस्त्री By Kiran Rajpurohit Nitila

उदय अपने जूते और कपड़े इधर-उधर फैला कर कुर्सी पर बैठ चुका था। दीपा ने बैग ,कपड़े समेट कर घर के कपड़े टेबल पर लाकर रखे और इषारा किया कि ‘ कपड़े बदल लो‘ पर गेम खेलने की बेताबी ने स्क्रीन...

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द्वंद (अध्याय एक) By Krishna Chaturvedi

युद्ध के मैदान में मै खड़ा चारो तरफ कोलाहल से भरा माहौल था। धाय धाय गोलिया चल रही थी ,गोले बारूद चल रहे थे। दुश्मन की गोली चारो तरफ से आ रही दाए से बाए से आगे से ऊपर से।मेरा कप्तान...

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मुस्कान... दो पल की By Satyendra prajapati

शहर से चार - पांच मील दूर एक गांव सुबह का समय एक खूबसूरत छोटे से घर के किचन में चाय बनाती रिचा जी, अपने पति को आवाज लगाती। मास्टर जी जल्दी आना , मै चाय ला...अचानक से मास्टर जी पीछे...

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जड़ से कटा By Yogesh Kanava

रोजाना का यही क्रम था , पार्क के कोने वाली बैंच और उस पर एक लगभग सत्तर साल का वो बुजुर्ग । घण्टो वो उसी बैंच पर बैठा रहता था एकदम गुमसुम ,ना किसी से कोई बातचीत , ना ही किसी से कोई...

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खत्म हुआ इंतज़ार By Shaihla Ansari

गर्म रेत पर चलते चलते मेरे पैरों में छाले पड़ने लगे थे। लेकिन मैं रुक भी नहीं सकती थी क्योंकि मैंने अपने आप से वादा किया था। मुझे चलते रहना है तब तक, जब तक मैं अपनी मंजिल तक ना पहु...

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पहला ख़त By Ravi Sharma

पहला ख़त !! तेज़ भागने के बावजूद मेरी क़मीज़ थोड़ी भीग गयी थी । मेस से हॉस्टल का रास्ता खुले आसमान से गुज़रता था और अगस्त की बारिश कश्मीर में कोई नयी बात नहीं थी । मुझे हज़रतबल रीज...

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परदा By Shaihla Ansari

दिल्ली की सड़को पर घूमते घूमते मेरे पैर दुख गये थे और मुझे भूख का भी एहसास हो रहा था, ये ही सोचते हुए मैं एक मॉल की तरफ बढ़ गया कि चलो कुछ खा लिया जाए!! "मैं दिल्ली एक काम के सिलसिले...

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और वह मर गयी By Nirpendra Kumar Sharma

नदी किनारे गांव के एक छोर पर एक छोटे से घर में रहती थी गांव की बूढी दादी माँ। घर क्या था ,उसे बस एक झोंपडी कहना ही उचित होगा। गांव की दादी माँ, जी हां पूरा गांव ही यही संबोधन देता...

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चाहत. By p

             यू तो मंजिल के रस्ते हज़ार मिलेंगे              कलियो सैंग कांटे हज़ार मिलेंगे   &nb...

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मेरा आठवां प्यार ... By Ashish Garg Raisahab

वर्ष 2012 , बी.एड. उस वक्त एक वर्ष की होती थी ,ओर प्री एग्जाम में मेरे अच्छे नम्बरों की वजह से मुझे मेरे होम टाउन में ही प्रेस्टीजियस कॉलेज मिल गया था । नए जोश और उमंग के साथ...

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सिगरेट - राख - ज़िन्दगी By Rishi Sachdeva

मैं अपनी बॉल्कनी से तुम्हारी बॉल्कनी की और देखता हूँ, पर नहीं देख पाता तुम्हे, शायद इसलिये की तुम एक शहर दूर हो, शायद मुझसे भी दूर और तुम्हारा शहर बहुत दूर है शायद चाँद से भी दूर,...

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हेलो दोस्तो ! एक बार फिरसे आपके सामने हाजिर हूँ एक नई कहानी के साथ । हा दोस्तो आपने सही पढ़ा आज मैं आपके साथ एक कहानी शेयर करने वाला हु पर उससे पहले एक और सवाल आपसे करने वाला हु । आ...

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बिट्टो की मम्मी By Anjulika Chawla

बिट्टो की मम्मी©अंजुलिका चावलाकई वर्षों तक वो  पड़ोस में रहे, उन्हें चाचा जी कहते थे हम।उनके तीन बच्चे हैं। दो बेटे, एक बेटी। बेटी को ईश्वर ने नसीब में उम्र भर का बचपन लिख दिया...

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शाकिर उर्फ़... By Anwar Suhail

शाकिर उर्फ....एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाकर ही वह जनरल-बोगी के अंदर घुस पाया। थोड़ी भी कमी रहती तो बोगी से निकलते यात्री उसे वापस प्लेटफार्म पर ठेल देते। पूरी ईमानदारी से दम लगाने में वह...

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सलाह By Harsh Bhatt

हर्निल_हरि की पहली स्टोरी      कॉलेज से वापसी के वक्त हर दिन की तरह आज भी पूरा ग्रुप साथ था,हरि इस ग्रुप का एंटरटेनर ओर ज्ञानी बाबा बन गया थाज्ञानी इसी लिए क्यो...

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पिछली सदी की पोटली By Prabodh Kumar Govil

सल्तनत तेज़ी से कदम बढ़ाती हुई चल रही थी। उसे पांच बजकर नौ मिनट तक हर हालत में घर पहुंचना था, क्योंकि गजराज ठीक पांच दस पर उसे बधाई देने वाला था। बधाई दे, रोए, फातिहा पढ़े, अलबत्ता...

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मुखौटा By Ajay Amitabh Suman

मार्च २०१६: वैसे आज गाँधी जी के लिए समय इंगित करना कुछ उचित नहीं . पर सुना है मैंने , अभी मार्च २०१६ की घटना है . अपने ये जो गांधीजी जी है , लेटे हुए थे स्वर्ग में , नेहरु जी के...

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क्या तुम वापस आ गयी ? By zeba Praveen

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वाह रे तारीफें By Singh Srishti

प्रिया आज भी कॉलेज में झगड़ा करके आयी और घर पर आते ही सारा सामान तोड़ फोड़ करने लगी, आँखों में तो आग बरस रही है और हाथ पैरों में झुलझुलाहट, मानो आज ही पूरी दुनिया तबाह कर देगी। पूरा द...

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तरक्की की कीमत By Ranju Bhatia

बचपन के दिन कैसे फुदक के उड़ जाते हैं , स्कूल की शिक्षा खत्म हुई और आँखो में बड़े बड़े सपने खिलने लगते हैं ,जैसे ही उमंगें जवान होती है कुछ करने का जोश और आगे ऊँचे बढ़ने का सपना आं...

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समय जाल (भाग 1) By Thoughtful Mind

वैसे तो मैं अभी बहुत छोटा हूँ विज्ञान के उन जटिल एवं गणित के सिर घुमाने वाले फार्मूलों को समझने के लिए, जिन्हें मशहूर गड़ितज्ञओं ने कई साल पहले ही लिख दिया था, परंतु इतना तो अवश्य ह...

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उम्र का पड़ाव By Ranju Bhatia

,  फिर से नया साल  आ गया ..कैसे जल्दी से वक़्त बीतता जाता है | साल दरसाल ..उम्र दर उम्र ...वक़्त कहाँ थमता है और उस में उम्र का एक पड़ाव ऐसा आ जाता...

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रंगमहल की खिड़कियां और मैली हवाएं By Prabodh Kumar Govil

जब हम सुबह-सुबह अख़बार के किसी कौने में दुष्कर्म की खबर पढ़ते हैं तब हमारी कुंद पड़ चुकी संवेदना इसे आसानी से सह जाने का हौसला दे देती है। हम सरसरी तौर पर केवल ये जान लेते हैं कि घट...

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नाईटमेयर - सपना या हकीकत - पारस जैन की कहानी By Author Pawan Singh

हेलो , मेरा नाम पारस जैन है और जो मै आपको बताने जा रहा हूं। यह एक सच्ची घटना है। कुछ लोगो को भविष्य की झलकियां उनके सपने में दिख जाती है लेकिन वह ज्यादतर बुरी ही होती है। जिसे...

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वो अजनबी By Bansari Rathod

आज फिर आफ़िस से घर जाने में देरी हो गई, ये कॉलसेन्टर की जोब भी न.पर न चाहते हुए भी उस लैम्पपोस्ट पे जाते जाते नज़र चली ही गई।आज भी वो वही खड़ा एकटक सामने देख कर मुश्कुरा रहा था ,बस र...

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रोचक विज्ञान बालकथाएँ By Omprakash Kshatriya

हम उन्हें उपदेश दे कर सिखाना चाहते हैं. वे उपदेश से नहीं कार्यव्यवहार देख कर सीखते हैं. इस बात को हम भूल जाते हैं. आप सिगरेट पीते हो और बच्चों को इस से बचने की सलाह दो तो वह कोरा उ...

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रौशनी By Richa Modi

रौशनी का मतलब दिवाली ,दिवाली मे हर घर मे रौशनी होना जरुरी है। बेटी के लिए उसके पापा का प्रेम सबसे उपर होता है और वो इस कहानी मे है।

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सुखविंदर By Krunal jariwala

सुखविन्दरप्रतापसिंह एक वीर, ईमानदार योद्धा, बिलकुल उनके जैसा ही उनका पौत्र "सुखविन्दर", मानो अपने दद्दू की कार्बन कॉपी। देशभक्ति जैसे उसे दादाजी से विरासत में मिली हो। बचपन में दाद...

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भूत की पूजा (भाग एक) By Krishna Chaturvedi

कन्हैया रोज की तरह तेज चाल से चला जा रहा था।चारो तरफ गहरा अंधेरा छाया था और बारिश रुकने का नाम नहीं ले रहा था उस दिन,पर कन्हैया को इससे कहा मतलब ,वो तो मस्त अपनी ही दुनिया में और म...

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एक योगी की मौत By Ajay Amitabh Suman

मैं अपने गाँव गर्मी की छुट्टियों में गया हुआ था. अपने बड़े बाबूजी से उनके बारे में पूछा तो ज्ञात हुआ उनकी मोटर बाईक के दुर्घटना में मौत हो गई है. एक एक करके मेरे मानस पटल पे पुरानी...

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झुक गया आसमान By Ajay Amitabh Suman

मेरे पिताजी अति अनुशासन प्रिय व्यक्ति रहें है। पेशे से शिक्षक है। स्कूल में भी बहुत अनुशासन प्रिय और योग्य शिक्षक के रूप में उनकी प्रसिद्धि थी।अब सेवनिर्वित्त हो चुके है। उनकी अनुश...

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सोशल इंजीनियरिंग By Rajan Dwivedi

जातीय श्रेष्ठता के मिथ्याभिमान से जूझते एक युवा बेरोजगार की कहानी .

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फरार - 2 By Prashant Vyawhare

फरार वो १९८६ का दौर था जब अंडरवर्ल्ड का बड़ा भाई, उस पावरफुल नेताजी सरकार के कहने पर दुबई भाग गया उसके बाद मुंबई के अंडरवर्ल्ड में खलबली मच गयी. हर छोटा गैंगस्टर भाई की जगह लेना च...

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असली वजह By ओमप्रकाश प्रकाश

लघुकथा. मलाल 'गांव वाले लड़ने आ सकते हैं. लड़की को क्यों मारा ? क्या, तुम्हें मारने का अधिकार है. पिताजी पुलिस में रिपोर्ट कर सकते हैं. शर्म नहीं आती. एक छोटी लड़की का मारते हुए.'...

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प्रकृति का बदला By Monika Verma

सदियो से हम प्रकृति की गोद में जी रहे है। प्रकृति के हम पर इतने अहसान है की हम किसी भी कीमत पर उसे नहीं चूका सकते। लेकिन क्या हमने कभी इसकी क़द्र भी की है? इंसान के मोज शोख वाली जीव...

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फांस - AN EMBARRASSMENT By VIRENDER VEER MEHTA

‘फांस’ - AN EMBARRASSMENT अब्बाजान की दिल से ये आरजू थी कि ख़ुदा का बुलावा आने से पहले एक बार वे अपने पुरखों की सरजमीं हिन्दुस्तान पर सिर टिकाकर वहां की मिट्टी अपने...

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मुक्ति और अन्य लघुकथाएं - मुक्ति By Krishna manu

लघुकथा   ।।मुक्ति।।तलाक की पीटीशन फैमिली कोर्ट में दाखिल कर लौटते हुए वह इस उहापोह से मुक्त हो चुका था कि कहीं शक के बिना पर लिया गया उसका निर्णय जीवन भर के लिए पश्चाताप...

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सहोदर की कहानियां By Anand Gurjar

कहानियां मनोरंजन के साथ साथ हमारा ज्ञानवर्धन भी करती है । इन कहानियों सामाजिक रूढ़ियों के प्रति विद्रोह के साथ मानवीय संवेदना को व्यक्त किया गया ।...

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अपने पराये By Ravi

हम कभी खुदपर दृष्टि नहीं डालते कि हमने बीते दिनों में कोई पाप किया है या मुँह छुपाने जैसा कोई काम। हम केवल सामने की ओर उंगली उठाते हैं। जब कि सच तो ये हैं धूल चेहरे पे है, आईने पे...

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हार्ट ट्राँस्प्लांट By Bhupendra Kumar Dave

The story is about a heart surgeon who determines to save a child with damaged heart. A donor was required followed by difficult heart transplantstion. The story here unfolds the c...

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