ज़िन्दगी कविता या कविता ज़िन्दगी यही सोचते हुए उम्र के पल गुजार दिए ,जो दिल देखता सुनता है लिख देती हूं .ज़िंदगीनामा वेबसाइट है मेरी और कुछ मेरी कलम से ब्लॉग काव्यसंग्रह 2 अपने और 15 सांझे पब्लिश हो चुके हैं . पर कलम अभी भी कहती है कि बहुत कुछ लिखना बाकी है .

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