ज़िन्दगी कविता या कविता ज़िन्दगी यही सोचते हुए उम्र के पल गुजार दिए ,जो दिल देखता सुनता है लिख देती हूं .ज़िंदगीनामा वेबसाइट है मेरी और कुछ मेरी कलम से ब्लॉग काव्यसंग्रह 2 अपने और 15 सांझे पब्लिश हो चुके हैं . पर कलम अभी भी कहती है कि बहुत कुछ लिखना बाकी है .

शोर है सब तरफ वादो का अभी
चले आओ कुछ इकरार हम भी कर लें

चुनाव बयार के झोंके इश्क़ से मौसमी होते हैं !!............@ ranju bhatia

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तय हुई ,साँसों की गिनती
प्रदूषण के ,इस काल में
कौन भरे ,इसका खमियाजा
जनता,नेता सब ही फंसे
तेरे -मेरे जंजाल में .....😢😢
#दिल्लीपल्यूशन

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साँसे सिमटी ,मास्क में
राजनीति लिपटी, बकवास में
#दिल्लीप्ल्यूशन

आँखे जल जल, लाल भई
फेफड़े भये राख
रूकती साँसे,बोल रही
मुझे साफ़ हवा की आस
#दिल्लीप्ल्यूशन

हाय, मातृभारती पर इस कहानी 'घुमक्कड़ी बंजारा मन की - 9' पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19872162/ghumakkadi-banzara-mann-ki-9

हाय, मातृभारती पर इस कहानी 'घुमक्कड़ी बंजारा मन की - 8' पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19872161/ghumakkadi-banzara-mann-ki-8

हाय, मातृभारती पर इस कहानी 'घुमक्कड़ी बंजारा मन की - 6' पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19871975/ghumakkadi-banzara-mann-ki-6

हाय, मातृभारती पर इस कहानी 'घुमक्कड़ी बंजारा मन की - 4' पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19871748/ghumakkadi-banzara-mann-ki-4

आइए गुजरात घूमे मेरी कलम की।नज़र से मातृभारती पर इस कहानी 'घुमक्कड़ी बंजारा मन की - 3' पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19871547/ghumakkadi-banzara-mann-ki-3

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जिंदगी की भागम भाग और रोजी रोटी की चिंता में न जाने कितने पल यूँ ही बीत जाते हैं ...अपनों का साथ जब कम मिल पाता है तो दिल में उदासी का आलम छा जाता है ..और तब याद आ जाता है वह गाना दिल ढू ढ ता है फ़िर वही फुर्सत के रात दिन बैठे रहें तस्वुर -ऐ -जानां किए हुए ...पर कहाँ मिल पाते हैं वह फुर्सत के पल .. गुलजार जी ने इन्ही पलों को जिंदगी की खर्ची से जब जोड़ दिया तो इतने सुंदर लफ्ज़ बिखरे कागज पर कि लगा कि एक एक शब्द सच है इसका ...

खर्ची .

मुझे खर्ची में पूरा एक दिन हर रोज़ मिलता है
मगर हर रोज़ कोई छीन लेता है ,झपट लेता है ,अंटी से

कभी खीसे से गिर पड़ता है तो गिरने कि आहट भी नही होती
खरे दिल को भी मैं खोटा समझ कर भूल जाता हूँ !

गिरेबां से पकड़ कर माँगने वाले भी मिलते हैं !
तेरी गुजरी हुई पुश्तों का कर्जा है ,
तुझे किश्तें चुकानी है -"

जबरदस्ती कोई गिरवी रख लेता है ये कह कर
अभी दो चार लम्हे खर्च करने के लिए रख ले
बकाया उम्र के खाते में लिख देते हैं ,
जब होगा हिसाब होगा

बड़ी हसरत है पूरा एक दिन इक बार मैं अपने लिए रख लूँ
तुम्हारे साथ पूरा एक दिन बस खर्च करने की तमन्ना है !


जन्मदिन मुबारक गुलजार जी आपको ...
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प्यार के एक पल ने जन्नत को दिखा दिया
प्यार के उसी पल ने मुझे ता -उमर रुला दिया
एक नूर की बूँद की तरह पिया हमने उस पल को
एक उसी पल ने हमे खुदा के क़रीब ला दिया !!
..........रंजू ..........

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