कविता कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Poems in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultures. Th...Read More


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  • अतरंगी ज़िन्दगी...

    1). राहें......है चाह राहगीर को राह खत्म हो जाने कीहै चाह राहगीर को मन्ज़िल पाने...

  • बेटियों के दरिंदे

    एक कविता बेटियों के नाम करना चाहूंगा,आजकल की जो घटनाएं हो रहीं हैं हमें उसके खिल...

  • कवितायें

    मेरा गाँव कहीं खो गया सुंदर ताल, तलैया, बाग,सरोवर, बीच बसा था गाँव मनोहर। हर ज...

अतरंगी ज़िन्दगी... By Karishma Varlani

1). राहें......है चाह राहगीर को राह खत्म हो जाने कीहै चाह राहगीर को मन्ज़िल पाने कीराह में थका वो राहगीर देखता है बस एक बूंद उस पानी को ,जिससे आस है उसे अपनी प्यास बुझ जाने की ,होगी...

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बेटियों के दरिंदे By Tarkeshwer Kumar

एक कविता बेटियों के नाम करना चाहूंगा,आजकल की जो घटनाएं हो रहीं हैं हमें उसके खिलाफ आवाज उठाना ही होगा,हमें बेटियों की रक्षा इन्न दरिंदो से करनी ही होगी वरना बेटियां एक डर की जिंदगी...

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कवितायें By Ved Prakash Tyagi

मेरा गाँव कहीं खो गया सुंदर ताल, तलैया, बाग,सरोवर, बीच बसा था गाँव मनोहर। हर जाति के लोग बसे थे, बंटे हुए थे सबके काम। सब दिन भर मेहनत करते, रात में करते थे आराम, खेती करता था कि...

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मेरी कविताएं By Rajesh Kumar

1.लिखता हूँ, डरता हूँ, डर डर कर लिखता हूँ।लिखने से पहले, हर बात समझता हूँ।इस अमोघ शस्त्र लेखनी से, हर बात सही तो लिखता हूँ।फिर मैं क्यों डरता हूँ?लिखता हूँ, डरता हूँ,डर डर के लिखता...

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जीवन पर 8 कविताएँ By ALOK SHARMA

दुनिया इतनी सरल नही दुनिया इतनी सरल नही जो नज़र आये अक्सर नए राही को दूर के ही डोल सुहाए बड़ो की बातों का अब वो सम्मान रहा कहाँउल्टी ज़ुबाँ कैंची जैसी, माँ-बाप को सिखाएदर्द तो होगा ही...

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शायरी - 4 By Pandit Pradeep Kumar Tripathi

कोई इश्क की खातिर मेरे दिल को झिझोड़ रखा हैदिल से पूंछा तो पता चला वो रिश्ता हीं हमसे तोड़ रखा हैतुम कहो तो ज़िन्दगी को गला देता हूंउससे तुम्हारे लिए एक रुमाल बना देता हूंमैं जीते...

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कभी सोचा न था - १ By महेश रौतेला

कभी सोचा न था१.अकेला हूँअकेला हूँशव में,श्मशान मेंशिव मेंतीर्थ में,तीर्थाटन मेंतथागत की भाँति,आँधी में,अँधियारे मेंधूप में,धूल मेंराह में,राह से आगे।अकेलाधुँध की भाँतिकोहरे की तरह,...

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कचहरी - शांति की पुकार By Ajay Amitabh Suman

(1)शांति की पुकारये कविता गौतम बुद्ध द्वारा अपने शिष्य महाकाश्यप को बुद्धत्व की प्राप्ति की घटना पर आधारित है। ये घटना अपने आपमें इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि गौतम बुद्ध ने बिना क...

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जब रक्षक भक्षक बन जाएं By Ajay Amitabh Suman

(१) जब रक्षक भक्षक बन जाए तुम्हें चाहिए क्या आजादी , सबपे रोब जमाने की , यदि कोई तुझपे तन जाए , तो क्या बन्दुक चलाने की ? ये शोर शराबा कैसा है ,क्या प्रस्तुति अभिव्यक्ति की ?...

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तमन्ना है By Er.Bhargav Joshi અડિયલ

नमस्कार मित्रो, हिंदी में कविता लिखने का ये मेरा पहला प्रयास है, हो सकता है कि इसमें कुछ कमिया भी हो,कुछ शब्द की गलतियां भी हो ।आप इसे पढ़कर आपके प्रतिभाव और सुचन दे जिसस...

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मौलिक शेर - 2 By Deepak Bundela Arymoulik

मौलिक 'शेर' पार्ट -241. इस चेहरे की नज़ाकत को यूं ना रखो हिज़ाब में.. ! ये बिजली हैं जो रुक ना सकेगी नकाब में... !!42. हमें वेबफ़ाई की बाजीगरी नहीं आती... ! और तुम...

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खबर By Ajay Amitabh Suman

इस प्रस्तुति में मैंने अपनी तीन कविताओं को सम्मिलित किया है . ये तीनों कवितायेँ मुख्यतः व्ययंग धारा की हैं . पहली कविता इस बात को दृष्टि गोचित करती है कि अख़बार जिस तरह के व्यक्तियो...

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नार, तू उठा हथियार By Namita Gupta

॥। नारी अब तू उठा हथियार ॥नारी ! अब तू उठा हथियार , अब जो करे तुझ पर अत्याचार। यहां नहीं है कोई तेरा, जो तुझे बचा पाएगा, वासना की आग में तप कर, सहज निवाला बनाएगा ।उसकी हवस के आगे अ...

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माँ : एक गाथा - भाग - 3 By Ajay Amitabh Suman

ये माँ एक गाथा का तीसरा भाग है . इस भाग में माँ और शिशु के बीच छोटी छोटी घटनाओं को दर्शाया गया है . यदा कदा भूखी रह जाती,पर बच्चे की क्षुधा बुझाती ,पीड़ा हो पर है मुस्काती ,नहीं क...

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कविताएँ ज़िन्दगी की, ज़िन्दगी से By Shubham Maheshwari

The poem for every day life...official language is Hindi...

I shubham maheshwari well known as shubham36 on wattpad...i am here with my most precious poems for you.

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प्रभु तू मेरे बस की बात नहीं है By Ajay Amitabh Suman

मैं यहाँ पे तीन कविताओं को प्रस्तुत कर रहा हूँ (1) प्रभु तू मेरे बस की बात नहीं हैं (2) जग में डग का डगमग होना ,जग से है अवकाश नहीं और (3) मैंने भी देखा एक कुत्ता. (1) प्रभु तू म...

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गज़ल By Pandit Pradeep Kumar Tripathi

देखें हैं मैंने कल एक चिराग की ताकत।रोशनी ने इसके कई अफ़सर बना दिया।।मन्दिर है दिल इसमें रोशनी खुदा है।कर्मो ने किसी को राम तो किसीको रावण बना दिया।।मेरी जिंदगी मुझसे डरती जा रही ह...

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ना मौजूदगी By HeemaShree “Radhe"

ना - मौजूदगीखाली नहीं है नामौजूदगी तेरी, ये भरी हुई है तेरी याद से, तुझसे की थी मैंने हर उस बात से... जाना भरी हुई है ना मौजूदगी तेरी, किनारों तक तेरे एहसास से... इस कमरे का जो ये...

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'श्वेत' का प्यार By Dhaval Jansari

प्यार कमजोर दिल से किया नहीं जा सकता, ज़हर दुश्मन से लिया नहीं जा सकता, दिल में बसी है उल्फत जिस प्यार की उस के बिना जिया नहीं जा सकता. तू नहीं और भी है मैखाने इस ज़माने मै, तेरी...

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ऐ हवा सुन जरा.. By Pandit Pradeep Kumar Tripathi

1. ऐ हवा सुन जरा....ऐ हवा सुन जरा आ इधर से चलें।रास्ते में खड़ा एक शक्स है जरा आ इधर से चलें।।ऐ हवा सुन जरा....हांथ में है लिये वो प्रेम का दिया आ इधर से चलें।बुझ न जाए प्रेम के उस...

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तेरे नाम ज़िन्दगी की थी By अर्चना यादव

मैंने की थी मोहब्बत तूने दिल्लगी की थी तूने खेल खेला था मेरे साथ औ मैंने तेरे नाम ज़िन्दगी की थी।। लोग प्यार करते है औ एक दूजे के साथ रहते हैं प्रियतम को छूकर उसके होने का अहसास कर...

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रात और दिन की संधि By Seema Saxena

If there are images in this attachment, they will not be displayed. Download the original attachmentसीमा असीम की कवितायें ०९५५७९२९३६५ संग्रह की कवितायेँ अँधेरी रात में सोचती हू...

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क्षणभर By महेश रौतेला

१.बेटी से संवादतुम्हारा हँसना, तुम्हारा खिलखिलाना,तुम्हारा चलना,तुम्हारा मुड़ना , तुम्हारा नाचना ,बहुत दूर तक गुदगुदायेगा।मीठी-मीठी बातें ,समुद्र की तरह उछलना,आकाश को पकड़ना ,हवा की...

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कविताएं By Shailendra Chauhan

- शैलेन्द्र चौहान दया : दलित संदर्भ में सोचता रहा हूँ सारी रात औरों के द्वारा की गई दया के बारे में किस किस पिजन होल में रखी है कितनी और किस तरह की दया न जाने कितने दयालु देखे...

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मेरी तूटी फूटी ग़ज़लें..! By Parmar Bhavesh

1. प्यार कब था..!आप के लिए प्यारके अलावा ही! सब था !हमारे लिए प्यारके अलावा कुछ कब था ?खुदा भी तुम और भगवान भी तुम ही थे !तुमको ही माना, ऊपर वाला कहाँ रब था ?क्या बताऊँ तुमको तुम क...

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इक उधार सी ज़िन्दगी... By Haider Ali Khan

#इक उधार सी ज़िन्दगी... तुझको खो कर बचा ही किया था, ज़िन्दगी में..! खोने के लिए..बस इक उधार सी ज़िन्दगी जी रहा था..तेरी यादों का कर्ज़ लिए..माफ़ करना तेरी यादों को हम यूँ ही बुला लेते ह...

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बेटियाँ - शर्म नहीं सम्मान है..... By Satender_tiwari_brokenwordS

1. वो दौर-----------न जाने वो कैसा दौर रहा होगा जब बेटियों के पैदा होने पर घर गाँव मे सन्नाटा छा जाता थाकहीं मातम भारी शाम होती थीकहीँ पर बेटियों को दफना दिया जाता थान जाने वो कैसा...

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हे मधुकर... By Pandit Pradeep Kumar Tripathi

1. हे मधुकर हे मधुकर थारो चरण पकड़ी के झुलहुँ।या चरनन के भगति बहुत हैं जो वा चरनन को छूलौ।।हे मधुकर थारो चरन पकड़ी के झुलहुँ...हे मधुकर थारो रंग म्हारे दिल को ले हैं छुलहुँ।या रंग के...

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ज्ञान और मोह By Ajay Amitabh Suman

(1) ज्ञान और मोह दो राही चुप चाप चल रहे,ना नर दोनों एक समान,एक मोह था लोभ पिपासु ,औ ज्ञान को निज पे मान। कल्प गंग के तट पे दोनों,राही धीरे चले पड़े ,एक साथ थे दोनों किंतु, मन...

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दिल मेरा By अmit Singh

देखा तुमको जब प्रथम बार, चांदनी में चमकता रूप तेरा। फिर जब देखूं मैं तेरा ख्वाब, जोरों से धड़कत...

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चलोगे क्या फरीदाबाद? By Ajay Amitabh Suman

(१) चलोगे क्या फरीदाबाद? रिक्शेवाले से लाला पूछा, चलोगे क्या फरीदाबाद ?उसने कहा झट से उठकर, हाँ तैयार हूँ भाई साब. हाँ तैयार हूँ भाई साब कि,लाए क्या अपने साथ हैं?तोंद उठाकर लाल...

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मेरी चार कविताए By Dr Narendra Shukl

घोटालेवाला सर्दी की एक सुबह जब मैं धूप में बैठा ‘क्लासीफाइड‘ में नौकरी तलाश कर रहा था - अचानक , गली से आती हुई , एक आवाज़ कानों से टकराई । रातों -रात अमीर बनाने वाला स्वर्ग की...

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ऐ जिंदगी........... By Pandit Pradeep Kumar Tripathi

1.ऐ जिंदगी आ तुझे कुछ इस तरह से, आजमाया जाए।।मैं जिन्दा भी रहूँ और, मर कर के दिखाया जाए।।वो मुझसे नाराज है, मालूम है मुझको।चल उसकी नाराजगी को, थोड़ा और बढ़ाया जाए।।वो नाराज...

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दरिया - एक ग़ज़ल संग्रह By रामानुज दरिया

नाम - राम अनुज तिवारी , s/o- श्याम सगुन तिवारी, ग्राम- दरियापुर माफी,पोस्ट - देवरिया अलावल, जिला- गोण्डा,अवध उत्तर प्रदेश. "दरिया" यह एक ग़ज़ल संग्रह है.

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शब्दों की कहानी By Satender_tiwari_brokenwordS

1.जय जवान तू वीर है, तू चट्टान है, तू मेरा अभिमान हैतू ही पहचान मेरी है, तू मेरा स्वाभिमान है।।कुछ लिखकर गर अदा कर सकूँ तेरा कर्ज़मेरा सुकूने ज़िन्दगी पर जो तेरा एहसान है।।इस बार जश्...

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एक दिन... By Sarvesh Saxena

एक दिन मैं उदास कहीं जा रहा था,उदासी में ही कोई उदास गीत गा रहा था,थक कर एक पेड़ की छांव में बैठ गया, सोचने लगा कि ये क्या हो गया... अचानक किसी की हंसी सुनाई पड़ी, मुड़कर देखा तो ह...

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दिलकी बाते - २ By Vrishali Gotkhindikar

..दिलके राज ..! दिलके हसीन राज किसीको बताये कैसे ,...

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दिया की कलम से इश्किया By Divya Modh

तुझे भूलाकर अब...तेरी यादों से निकलकर अब, में खुदमे खोना चाहती हूं तुझे भूलाकर अब ,में खुद को पाना चाहती हूं। चल जब गिनवा ही दी है तूने मुझ को कमिया मेरी तो बि...

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भोजपुरी माटी By Radheshyam Kesari

आइल गरमी ------------- सूरज खड़ा कपारे आइल, गर्मी में मनवा अकुलाइल। दुपहरिया में छाता तनले, बबूर खड़े सीवान। टहनी,टहनी बया चिरईया, डल्ले रहे मचान। उ बबूर के तरवां मनई, बैईठ ,बैईठ सुस...

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अल्हड़ By Mukteshwar Prasad Singh

तेज छिटकती बिजलीबादलों की गडगडाहटहवा के झूले पर डोलतीवारिस की बूंदें आ बैठती हैचेहरे पर।जलकणों से भीगता रोम रोम और सांसेंउतावली।बार बार तेज चमक से चौंकचुंधियाती आंखें मूंद जाती हैं...

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शायराना कलाम By Dr Gayathri Rao

शायराना कलम - कुछ भावनाये,कुछ एहसास,...मेरी शायरी के कुछ नगीने जो आप सबको पेश करती हु.

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ज्यादा बदलाव चाहोगे तो पीट दिये जाओगे (जुलाई २०१९) By महेश रौतेला

जुलाई २०१९१.ज्यादा बदलाव चाहोगे तोपीट दिये जाओगे,अधिक परिवर्तन चाहोगे तोमार दिये जाओगे,बहुत सुधार चाहोगे तोजेल भेज दिये जाओगे!मांगने पर कौरवों नेपाँच गांव भी नहीं दिये थे,और तुम जन...

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थोड़े से तो थोड़े से, हम बदले तो है..! By Akshay Mulchandani

शायद, हम थोड़े से, अब बड़े हो गए है..। उसके ऑनलाइन आने की राह, हम आज भी देखते है, जैसे कुछ साल पहले देखा करते थे..! पर थोड़ा सा तो थोड़ा सा, हम बदले तो है ।---------------------------...

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व्यवधान By Ajay Amitabh Suman

एक फूल का मिट जाना हीं उपवन का अवसान नहीं,एक रोध का टिक जाना हीं विच्छेदित अवधान नहीं । जिन्हें चाह है इस जीवन में स्वर्णिम भोर उजाले की,उन राहों पे स्वागत करते घटाटोप अन्धियारे भी...

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तेरा घमंड By Manjeet Singh Gauhar

मत कर इतना घमंड , ऐ तू ना-समझ इंसानतेरा घमंड ही एक दिन तुझे हरायेगा ।मेरा बारे में तू सोचना छोड़ देमैं क्या हूँ , ये तुझे वक़्त बतायेगा ।।. .तू कितना भी कमाले , धन-दौलत ये सब...

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अतरंगी ज़िन्दगी... By Karishma Varlani

1). राहें......है चाह राहगीर को राह खत्म हो जाने कीहै चाह राहगीर को मन्ज़िल पाने कीराह में थका वो राहगीर देखता है बस एक बूंद उस पानी को ,जिससे आस है उसे अपनी प्यास बुझ जाने की ,होगी...

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बेटियों के दरिंदे By Tarkeshwer Kumar

एक कविता बेटियों के नाम करना चाहूंगा,आजकल की जो घटनाएं हो रहीं हैं हमें उसके खिलाफ आवाज उठाना ही होगा,हमें बेटियों की रक्षा इन्न दरिंदो से करनी ही होगी वरना बेटियां एक डर की जिंदगी...

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कवितायें By Ved Prakash Tyagi

मेरा गाँव कहीं खो गया सुंदर ताल, तलैया, बाग,सरोवर, बीच बसा था गाँव मनोहर। हर जाति के लोग बसे थे, बंटे हुए थे सबके काम। सब दिन भर मेहनत करते, रात में करते थे आराम, खेती करता था कि...

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मेरी कविताएं By Rajesh Kumar

1.लिखता हूँ, डरता हूँ, डर डर कर लिखता हूँ।लिखने से पहले, हर बात समझता हूँ।इस अमोघ शस्त्र लेखनी से, हर बात सही तो लिखता हूँ।फिर मैं क्यों डरता हूँ?लिखता हूँ, डरता हूँ,डर डर के लिखता...

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जीवन पर 8 कविताएँ By ALOK SHARMA

दुनिया इतनी सरल नही दुनिया इतनी सरल नही जो नज़र आये अक्सर नए राही को दूर के ही डोल सुहाए बड़ो की बातों का अब वो सम्मान रहा कहाँउल्टी ज़ुबाँ कैंची जैसी, माँ-बाप को सिखाएदर्द तो होगा ही...

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शायरी - 4 By Pandit Pradeep Kumar Tripathi

कोई इश्क की खातिर मेरे दिल को झिझोड़ रखा हैदिल से पूंछा तो पता चला वो रिश्ता हीं हमसे तोड़ रखा हैतुम कहो तो ज़िन्दगी को गला देता हूंउससे तुम्हारे लिए एक रुमाल बना देता हूंमैं जीते...

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कभी सोचा न था - १ By महेश रौतेला

कभी सोचा न था१.अकेला हूँअकेला हूँशव में,श्मशान मेंशिव मेंतीर्थ में,तीर्थाटन मेंतथागत की भाँति,आँधी में,अँधियारे मेंधूप में,धूल मेंराह में,राह से आगे।अकेलाधुँध की भाँतिकोहरे की तरह,...

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कचहरी - शांति की पुकार By Ajay Amitabh Suman

(1)शांति की पुकारये कविता गौतम बुद्ध द्वारा अपने शिष्य महाकाश्यप को बुद्धत्व की प्राप्ति की घटना पर आधारित है। ये घटना अपने आपमें इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि गौतम बुद्ध ने बिना क...

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जब रक्षक भक्षक बन जाएं By Ajay Amitabh Suman

(१) जब रक्षक भक्षक बन जाए तुम्हें चाहिए क्या आजादी , सबपे रोब जमाने की , यदि कोई तुझपे तन जाए , तो क्या बन्दुक चलाने की ? ये शोर शराबा कैसा है ,क्या प्रस्तुति अभिव्यक्ति की ?...

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तमन्ना है By Er.Bhargav Joshi અડિયલ

नमस्कार मित्रो, हिंदी में कविता लिखने का ये मेरा पहला प्रयास है, हो सकता है कि इसमें कुछ कमिया भी हो,कुछ शब्द की गलतियां भी हो ।आप इसे पढ़कर आपके प्रतिभाव और सुचन दे जिसस...

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मौलिक शेर - 2 By Deepak Bundela Arymoulik

मौलिक 'शेर' पार्ट -241. इस चेहरे की नज़ाकत को यूं ना रखो हिज़ाब में.. ! ये बिजली हैं जो रुक ना सकेगी नकाब में... !!42. हमें वेबफ़ाई की बाजीगरी नहीं आती... ! और तुम...

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खबर By Ajay Amitabh Suman

इस प्रस्तुति में मैंने अपनी तीन कविताओं को सम्मिलित किया है . ये तीनों कवितायेँ मुख्यतः व्ययंग धारा की हैं . पहली कविता इस बात को दृष्टि गोचित करती है कि अख़बार जिस तरह के व्यक्तियो...

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नार, तू उठा हथियार By Namita Gupta

॥। नारी अब तू उठा हथियार ॥नारी ! अब तू उठा हथियार , अब जो करे तुझ पर अत्याचार। यहां नहीं है कोई तेरा, जो तुझे बचा पाएगा, वासना की आग में तप कर, सहज निवाला बनाएगा ।उसकी हवस के आगे अ...

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माँ : एक गाथा - भाग - 3 By Ajay Amitabh Suman

ये माँ एक गाथा का तीसरा भाग है . इस भाग में माँ और शिशु के बीच छोटी छोटी घटनाओं को दर्शाया गया है . यदा कदा भूखी रह जाती,पर बच्चे की क्षुधा बुझाती ,पीड़ा हो पर है मुस्काती ,नहीं क...

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कविताएँ ज़िन्दगी की, ज़िन्दगी से By Shubham Maheshwari

The poem for every day life...official language is Hindi...

I shubham maheshwari well known as shubham36 on wattpad...i am here with my most precious poems for you.

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प्रभु तू मेरे बस की बात नहीं है By Ajay Amitabh Suman

मैं यहाँ पे तीन कविताओं को प्रस्तुत कर रहा हूँ (1) प्रभु तू मेरे बस की बात नहीं हैं (2) जग में डग का डगमग होना ,जग से है अवकाश नहीं और (3) मैंने भी देखा एक कुत्ता. (1) प्रभु तू म...

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गज़ल By Pandit Pradeep Kumar Tripathi

देखें हैं मैंने कल एक चिराग की ताकत।रोशनी ने इसके कई अफ़सर बना दिया।।मन्दिर है दिल इसमें रोशनी खुदा है।कर्मो ने किसी को राम तो किसीको रावण बना दिया।।मेरी जिंदगी मुझसे डरती जा रही ह...

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ना मौजूदगी By HeemaShree “Radhe"

ना - मौजूदगीखाली नहीं है नामौजूदगी तेरी, ये भरी हुई है तेरी याद से, तुझसे की थी मैंने हर उस बात से... जाना भरी हुई है ना मौजूदगी तेरी, किनारों तक तेरे एहसास से... इस कमरे का जो ये...

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'श्वेत' का प्यार By Dhaval Jansari

प्यार कमजोर दिल से किया नहीं जा सकता, ज़हर दुश्मन से लिया नहीं जा सकता, दिल में बसी है उल्फत जिस प्यार की उस के बिना जिया नहीं जा सकता. तू नहीं और भी है मैखाने इस ज़माने मै, तेरी...

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ऐ हवा सुन जरा.. By Pandit Pradeep Kumar Tripathi

1. ऐ हवा सुन जरा....ऐ हवा सुन जरा आ इधर से चलें।रास्ते में खड़ा एक शक्स है जरा आ इधर से चलें।।ऐ हवा सुन जरा....हांथ में है लिये वो प्रेम का दिया आ इधर से चलें।बुझ न जाए प्रेम के उस...

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तेरे नाम ज़िन्दगी की थी By अर्चना यादव

मैंने की थी मोहब्बत तूने दिल्लगी की थी तूने खेल खेला था मेरे साथ औ मैंने तेरे नाम ज़िन्दगी की थी।। लोग प्यार करते है औ एक दूजे के साथ रहते हैं प्रियतम को छूकर उसके होने का अहसास कर...

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रात और दिन की संधि By Seema Saxena

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क्षणभर By महेश रौतेला

१.बेटी से संवादतुम्हारा हँसना, तुम्हारा खिलखिलाना,तुम्हारा चलना,तुम्हारा मुड़ना , तुम्हारा नाचना ,बहुत दूर तक गुदगुदायेगा।मीठी-मीठी बातें ,समुद्र की तरह उछलना,आकाश को पकड़ना ,हवा की...

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कविताएं By Shailendra Chauhan

- शैलेन्द्र चौहान दया : दलित संदर्भ में सोचता रहा हूँ सारी रात औरों के द्वारा की गई दया के बारे में किस किस पिजन होल में रखी है कितनी और किस तरह की दया न जाने कितने दयालु देखे...

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मेरी तूटी फूटी ग़ज़लें..! By Parmar Bhavesh

1. प्यार कब था..!आप के लिए प्यारके अलावा ही! सब था !हमारे लिए प्यारके अलावा कुछ कब था ?खुदा भी तुम और भगवान भी तुम ही थे !तुमको ही माना, ऊपर वाला कहाँ रब था ?क्या बताऊँ तुमको तुम क...

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इक उधार सी ज़िन्दगी... By Haider Ali Khan

#इक उधार सी ज़िन्दगी... तुझको खो कर बचा ही किया था, ज़िन्दगी में..! खोने के लिए..बस इक उधार सी ज़िन्दगी जी रहा था..तेरी यादों का कर्ज़ लिए..माफ़ करना तेरी यादों को हम यूँ ही बुला लेते ह...

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बेटियाँ - शर्म नहीं सम्मान है..... By Satender_tiwari_brokenwordS

1. वो दौर-----------न जाने वो कैसा दौर रहा होगा जब बेटियों के पैदा होने पर घर गाँव मे सन्नाटा छा जाता थाकहीं मातम भारी शाम होती थीकहीँ पर बेटियों को दफना दिया जाता थान जाने वो कैसा...

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हे मधुकर... By Pandit Pradeep Kumar Tripathi

1. हे मधुकर हे मधुकर थारो चरण पकड़ी के झुलहुँ।या चरनन के भगति बहुत हैं जो वा चरनन को छूलौ।।हे मधुकर थारो चरन पकड़ी के झुलहुँ...हे मधुकर थारो रंग म्हारे दिल को ले हैं छुलहुँ।या रंग के...

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ज्ञान और मोह By Ajay Amitabh Suman

(1) ज्ञान और मोह दो राही चुप चाप चल रहे,ना नर दोनों एक समान,एक मोह था लोभ पिपासु ,औ ज्ञान को निज पे मान। कल्प गंग के तट पे दोनों,राही धीरे चले पड़े ,एक साथ थे दोनों किंतु, मन...

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दिल मेरा By अmit Singh

देखा तुमको जब प्रथम बार, चांदनी में चमकता रूप तेरा। फिर जब देखूं मैं तेरा ख्वाब, जोरों से धड़कत...

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चलोगे क्या फरीदाबाद? By Ajay Amitabh Suman

(१) चलोगे क्या फरीदाबाद? रिक्शेवाले से लाला पूछा, चलोगे क्या फरीदाबाद ?उसने कहा झट से उठकर, हाँ तैयार हूँ भाई साब. हाँ तैयार हूँ भाई साब कि,लाए क्या अपने साथ हैं?तोंद उठाकर लाल...

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मेरी चार कविताए By Dr Narendra Shukl

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ऐ जिंदगी........... By Pandit Pradeep Kumar Tripathi

1.ऐ जिंदगी आ तुझे कुछ इस तरह से, आजमाया जाए।।मैं जिन्दा भी रहूँ और, मर कर के दिखाया जाए।।वो मुझसे नाराज है, मालूम है मुझको।चल उसकी नाराजगी को, थोड़ा और बढ़ाया जाए।।वो नाराज...

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दरिया - एक ग़ज़ल संग्रह By रामानुज दरिया

नाम - राम अनुज तिवारी , s/o- श्याम सगुन तिवारी, ग्राम- दरियापुर माफी,पोस्ट - देवरिया अलावल, जिला- गोण्डा,अवध उत्तर प्रदेश. "दरिया" यह एक ग़ज़ल संग्रह है.

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शब्दों की कहानी By Satender_tiwari_brokenwordS

1.जय जवान तू वीर है, तू चट्टान है, तू मेरा अभिमान हैतू ही पहचान मेरी है, तू मेरा स्वाभिमान है।।कुछ लिखकर गर अदा कर सकूँ तेरा कर्ज़मेरा सुकूने ज़िन्दगी पर जो तेरा एहसान है।।इस बार जश्...

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एक दिन... By Sarvesh Saxena

एक दिन मैं उदास कहीं जा रहा था,उदासी में ही कोई उदास गीत गा रहा था,थक कर एक पेड़ की छांव में बैठ गया, सोचने लगा कि ये क्या हो गया... अचानक किसी की हंसी सुनाई पड़ी, मुड़कर देखा तो ह...

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दिलकी बाते - २ By Vrishali Gotkhindikar

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दिया की कलम से इश्किया By Divya Modh

तुझे भूलाकर अब...तेरी यादों से निकलकर अब, में खुदमे खोना चाहती हूं तुझे भूलाकर अब ,में खुद को पाना चाहती हूं। चल जब गिनवा ही दी है तूने मुझ को कमिया मेरी तो बि...

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भोजपुरी माटी By Radheshyam Kesari

आइल गरमी ------------- सूरज खड़ा कपारे आइल, गर्मी में मनवा अकुलाइल। दुपहरिया में छाता तनले, बबूर खड़े सीवान। टहनी,टहनी बया चिरईया, डल्ले रहे मचान। उ बबूर के तरवां मनई, बैईठ ,बैईठ सुस...

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अल्हड़ By Mukteshwar Prasad Singh

तेज छिटकती बिजलीबादलों की गडगडाहटहवा के झूले पर डोलतीवारिस की बूंदें आ बैठती हैचेहरे पर।जलकणों से भीगता रोम रोम और सांसेंउतावली।बार बार तेज चमक से चौंकचुंधियाती आंखें मूंद जाती हैं...

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शायराना कलाम By Dr Gayathri Rao

शायराना कलम - कुछ भावनाये,कुछ एहसास,...मेरी शायरी के कुछ नगीने जो आप सबको पेश करती हु.

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ज्यादा बदलाव चाहोगे तो पीट दिये जाओगे (जुलाई २०१९) By महेश रौतेला

जुलाई २०१९१.ज्यादा बदलाव चाहोगे तोपीट दिये जाओगे,अधिक परिवर्तन चाहोगे तोमार दिये जाओगे,बहुत सुधार चाहोगे तोजेल भेज दिये जाओगे!मांगने पर कौरवों नेपाँच गांव भी नहीं दिये थे,और तुम जन...

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थोड़े से तो थोड़े से, हम बदले तो है..! By Akshay Mulchandani

शायद, हम थोड़े से, अब बड़े हो गए है..। उसके ऑनलाइन आने की राह, हम आज भी देखते है, जैसे कुछ साल पहले देखा करते थे..! पर थोड़ा सा तो थोड़ा सा, हम बदले तो है ।---------------------------...

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व्यवधान By Ajay Amitabh Suman

एक फूल का मिट जाना हीं उपवन का अवसान नहीं,एक रोध का टिक जाना हीं विच्छेदित अवधान नहीं । जिन्हें चाह है इस जीवन में स्वर्णिम भोर उजाले की,उन राहों पे स्वागत करते घटाटोप अन्धियारे भी...

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तेरा घमंड By Manjeet Singh Gauhar

मत कर इतना घमंड , ऐ तू ना-समझ इंसानतेरा घमंड ही एक दिन तुझे हरायेगा ।मेरा बारे में तू सोचना छोड़ देमैं क्या हूँ , ये तुझे वक़्त बतायेगा ।।. .तू कितना भी कमाले , धन-दौलत ये सब...

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