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चलो दूर कहीं.. 18 गहराते रात के साथ उस बीहड़ जंगल की भयावहता भी गहराती जा रही थी...
सिंघनी माता का रहस्य — अध्याय 3राजेश की बात सुनते ही चारों ओर सन्नाटा छा गया। कु...
"त्रिशा.........." "जल्दी कर लो ना यार!!!!!!! आधे दिन की ही छुट्टी मेरी!!!!!!! ज...
Don't repeat the same mistakes & Same shit Priya.k....... ( Accept...
छाया झील के पश्चिमी तट पर बने अग्रज हवेली के प्रशिक्षण मैदान में, निधी अपने तीरं...
" टाम जिंदा है ------ 18 वा धारावाहिक --------------"मतलब की आग से जल जाना, हर...
भाग - 11 निशा का हाथ कुंडी पर ही रुक गया उसकी नजर दरव...
भाग 4: रूपा: एक रहस्यमयी पहेलीभार्गव के लिए रूपा एक ऐसी किताब थी जिसे वह बार-बार...
दोहा:१३अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप...
अनय :- अरे शमिका ये तुमसे झुट बोला है , ये मेरे कंपनी का मामुली सा एम्पलाई है ,...
इतनी कृपा दिखना राघव, कभी न हो अभिमान, मस्तक ऊँचा रहे मान से, ऐसे हों सब काम। रहें समर्पित, करें लोक हित, देना यह आशीष, विनत भाव से प्रभु चरणों में, झुका रहे यह शीष। कर...
सिर्फ तुम... यकीन नहीं होता कभी हम मिले थे कुछ तुम दर्द में थे, कुछ हमें भी गिले थे.. ये अधूरा इश्क़ कब पूरा सा हुआ, कब अधूरी सी ज़िन्दगी पूरी सी हुई.. ये बेदर्द सी खुशियां, इतनी हसी...
?????????????? अब हम भी इश्क दोबारा करेंगे उजड़े हुए दिल फिर से बसेंगेहम कभी तो फिर से मोहब्बत करेंगेमाना दिल में जख्म अभी ताजा हैकभी तो ये जख्म भी भरेंगेअब हम भी इश्क...
काव्य संकलन - समय का दौर वेदराम प्रजापति मनमस्त सम्पर्क सूत्र. गायत्री शक्ति...
1. हमारे प्रेम के अमरत्व का पल तुम्हारा स्वर सदा की तरह, आत्मीयता के चरम बिंदु सा कोमल था. आगे महाभारत है, अब वापस आना नहीं होगा. तुम मेरी शक्ति हो, तुम्हारे नयन सजल हुए, तो मैं...
गाथा पुरानी है बहुत, सब लोग इसको जानते वाल्मीकि ऋषि की लेखनी के तेज को सब मानते है विदित सबको राम सिय का चरित-रामायण कथा वर्णित हुआ मद, मोह, ईर्ष्या, त्याग, तप, दारुण व्यथ...
वीणापाणि नमन है तुमको, मेरे कंठ में कर लो वास।देकर ज्ञान पुंज हे माता, निमिष में संशय कर दो नाश।।हे गौरी-शिव शंकर के सुत, मुझ अज्ञानी का ध्यान करो।कर दो विवेक की वर्षा अब, और प्रभु...
कुछ अल्फ़ाज़ जो आपको अपने से लगेंगे ,नज़्म जो आपकी कहानी कहती हुई सी है
ये कविता संसार की सारी माताओं की चरणों में कवि की सादर भेंट है. इस कविता में एक माँ के आत्मा की यात्रा स्वर्गलोक से ईह्लोक तक विभिन्न चरणों में दिखाई गई है . माँ के आत्मा की यात्र...
मासूम गंगा के सवाल (लघुकविता-संग्रह) शील कौशिक (1) समर्पण उन सभी प्रकृति प्रेमियों, पर्यावरण विद्वानों को जो प्रकृति को महसूसते हैं... जानते-समझते हैं और उसके प्रति कृतज्ञ हैं...
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