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अध्याय 1: रणविजय शेखावतउसका नाम रणविजय शेखावत है। पूरी दुनिया उसे एक बेरहम, पत्थ...
------------------------------ अध्याय 4: रिश्ते और अपेक्षाएँ (संबंधों का भ्रम:...
किस्त 5: जिम्मेदारी की पुकारकैफे की उस मेज पर रखी कॉफी अभी भी गर्म थी। एली अपनी...
मंदिर के मेन एरिया में एक बड़ा सा शिवलिंग रखा था।सभी उससे कुछ दूरी पर बैठे थे। ज...
संत तुलसीदास जी की यह अमर चौपाई जीवन में सबसे बड़ा पुण्य और सबसे बड़ा पाप क्या ह...
प्रदर्शन, आधुनिकता और चेतना: गहराई में छिपा रहस्य— Vedanta 2.0आधुनिकता का वास्त...
-----------------नैना सांसे थामे खडी थी। अमोघ गहरी नजरो से उसे देख रहा था। " अमो...
दिन अर्जुन और विक्रम एक पुराने गोदाम में गए। वहाँ वे कुछ सामान और उपकरण देखने पह...
एपिसोड 27: अंधेरे का असली युद्ध---शहर की बेचैनीयुद्धभूमि से लौटने के बाद रोहन को...
Part 13डायरी का अगला पन्ना खोलते ही मेरे हाथ कुछ पल के लिए रुक गए। न जाने क्यों,...
1.तड़पतेरे इश्क ने ये हालत कैसी कर दी मेरी ये जालिम।दरबदर भटकते रहेते हम तुम्हें भूलने को रात दिन।हम तो मयखाने में भी जाते है तुम्हे भुलाने के लिए।कमबख्त शराब की हर एक बूंद में भी...
जीवन को स्वस्थ्य और समृद्ध बनाने वाली पावन ग्राम-स्थली जहां जीवन की सभी मूलभूत सुविधाऐं प्राप्त होती हैं, उस अंचल में आने का आग्रह इस कविता संगह ‘गांव की तलाश ’में किया गया है...
(काव्य संकलन) वेदराम प्रजापति‘ मनमस्त’ 1. सरस्वती बंदना (मॉं शारदे) मॉं शारदे! मृदु सार दे!!, सबके मनोरथ सार दै!!! झंकृत हो, मृदु वीणा मधुर, मॉं शारदे, वह प्यार दे।। अज्ञान त...
व्यंग्य की तेजधर उच्छंखल समाज की शल्य-क्रिया करने में समर्थ होती है। आज के दूषित वातावरण में यहाँ संवेदना मृत प्रायः हो रही है। केवल व्यंग्य पर ही मेरा विश्वास टिक पा रहा है कि कही...
दिल के दरवाज़े पे साँकल जो लगा रखी थी उसकी झिर्री से कभी ताक़ लिया करती थी वो जो परिंदों की गुटरगूं सुनाई देती थी उसकी आवाजों को ही माप लिया करती थी न जाने गुम सी हो गईं हैं ये...
श्री सुरेश पाण्डे सरस की कृति है। इस संग्रह की अधिकतर रचनायें (कवितायें) जिस धरती पर अंकुरित हुई हैं। उसे हम प्रेम की धरती कह सकते हैं यों भी कविता का विशेष कर ‘गीत’ का जन्म प्रे...
आज मानव संवेदनाओं का यह दौर बड़ा ही भयावह है। इस समय मानव त्राशदी चरम सीमा पर चल रही है। मानवता की गमगीनता चारों तरफ बोल रहीं है जहां मानव चिंतन उस विगत परिवेश को तलासता दिख रहा है,...
नरेन्द्र उत्सुक एक ऐसे व्यक्तित्व का नाम है जिसे जीवन भर अदृश्य सत्ता से साक्षात्कार होता रहा। परमहंस सन्तों की जिन पर अपार कृपा रही। सोमवती 7 सितम्बर 1994 को मैं...
स्वतंत्र सक्सेना की कविता काव्य संग्रह सरल नहीं था यह काम स्वतंत्र कुमार सक्सेना सवित्री सेवा आश्...
कुछ रचनाऐं भाव के प्रवाह मेंं .... सोचने को मजबूर करेंगी । संवाद तब पूर्ण होगा जब पाठक पढ़ेगा और चिंतन करेगा।
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