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[63]संध्या आरती सम्पन्न हो गई। वत्सर ने ढलते सूर्य की साक्षी में कृष्ण के लिए बा...
सुबह Aashi अपनी डायरी खोले बैठी थी। रात को लिखी गई कहानी का आखिरी पन्ना अभी भी अ...
युवराज को गाड़ी से उतरता देख ऋषभ अपने हाथों को फोल्ड करके गेट पर खड़ा हुआ उसे ही...
अध्याय:01खजाना: 'मानसिक पूंजी' की अनकही कथा आर्यन शहर का एक उभ...
अगला दृश्य...एक खूबसूरत रेस्टोरेंट...बाहर से देखने पर वह जगह किसी सपने जैसी लग र...
लघुकथा 1सच्चा धर्म"जच्चा और बच्चा दोनों की स्थिति बहुत ही नाजुक है। यदि तुरंत ए....
भाग 1 — माँ की लाडली मुस्कानमुस्कान… नाम जितना प्यारा था, उसकी जिंदगी भी उतनी ही...
भाग 10 — पहले प्रेम का एहसासजब विभा ने एकार्थ्य के सामने अपने मन की सारी बातें औ...
कुछ खूबसूरत दिन पहाड़ों में बिताने के बाद रितांश और सिद्धिदात्री आखिरकार घर लौट...
अनकही कहानियाँ(लगभग 2000 शब्द)लेखक: विजय शर्मा एरीप्रस्तावनाज़िंदगी में कुछ कहान...
(काव्य संकलन) समर्पण - जिन्होंने अपने जीवन को, समय के आईने के समक्ष, खड़ाकर,उससे कुछ सीखने - समझने की कोशिश की, उन्हीं के कर कमलों में-सादर। वेदराम प्रजापति मनमस्त मो.9981284867...
कभी सोचा न था१.अकेला हूँअकेला हूँशव में,श्मशान मेंशिव मेंतीर्थ में,तीर्थाटन मेंतथागत की भाँति,आँधी में,अँधियारे मेंधूप में,धूल मेंराह में,राह से आगे।अकेलाधुँध की भाँतिकोहरे की तरह,...
दो शब्द- प्यारी मातृभूमि के दर्दों से आहत होकर, यह जनमानस पुन: शान्ति, सुयश और गौरव के उस युग-युगीन आनन्द के सौन्दर्य की अनुभूति की चाह में अपने खोए हुए अतीत को, पुन: याद कर...
१.बेटी से संवादतुम्हारा हँसना, तुम्हारा खिलखिलाना,तुम्हारा चलना,तुम्हारा मुड़ना , तुम्हारा नाचना ,बहुत दूर तक गुदगुदायेगा।मीठी-मीठी बातें ,समुद्र की तरह उछलना,आकाश को पकड़ना ,हवा की...
ओ वसन्त भाग-११.ओ वसन्त ओ वसन्तमैं फूल बन जाऊँसुगन्ध के लिए,ओ आसमानमैं नक्षत्र बन जाऊँटिमटिमाने के लिए।ओ शिशिरमैं बर्फ बन जाऊँदिन-रात चमकने के लिए,ओ समुद्रमैं लहर बन जाऊँथपेड़ों में...
’’करवट बदलता भारत’’ 1 काव्य संकलन- वेदराम प्रजापति ‘’मनमस्त’’ समर्पण— श्री सिद्ध गुरूदेव महाराज, जिनके आशीर्वाद से ही कमजोर करों को ताकत मिली, उन्हीं के श्री चरणों मे...
*वीर पंजाब की धरती* महाकाव्य के दशम कृपाण (सर्ग): *"माच्छीवाडा़ से तलवंडी यात्रा चित्रण"* से चुनिंदा पद -?*जब गुरु गोविंद सिंह महाराज चमकोर युद्ध के बाद मछीवाड़ा जंगल में...
‘दो शब्दों की अपनी राहें’’ मां के आँचल की छाँव में पलता, बढ़ता एक अनजाना बचपन(भ्रूण), जो कल का पौधा बनने की अपनी अनूठी लालसा लिए, एक नवीन काव्य संकलन-‘‘बेटी’’ के रूप में, अपन...
स नावेल मे आप सब को अलग अलग तरह की कविताएं पढ़ने को मिली गई l इस नावेल को लिख कर जितनी मुझे ख़ुशी हो रही है , उम्मीद है आप सब wonderful readers को भी जे नावेल पढ़ कर उतनी ही ख़ुशी हो...
नि.र.स. --------------------------------------------------- क्या तुम्हे पता है कि - गर तुम कुछ ना कहो, ना लिखो, ना ही मेरी हकीकत में हो, तो मै नि.र.स. हो जाता हूँ। -------...
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