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कशिशबालों को समेटती हुई l पल्लू से पसीना पहुंचती हुईl मंद मंद मुस्कुराहट के साथ...
भाग-3 : दादी माँ का आशीर्वाद और झूठा दिखावासूरज की पहली किरणें पर्दों से होते हु...
⭐ एपिसोड 65 — “किस्मत का दर्पण और मरता हुआ सत्य”कहानी — अधूरी किताबकमरा धुएँ और...
: : प्रकरण - 27 : : उस का नाम संगीता था. वह ब...
ब्लैक फॉर्मल ड्रेस में सजी हुई, आँखों पर ब्लैक गॉगल्स लगाए, अर्शित रॉय—शहर का जा...
कुंवारी माँलेखक: विजय शर्मा एर्रीगाँव के बाहर पीपल के नीचे बैठी वह अक्सर दूर तक...
दिसंबर की वह सुबह कड़ाके की ठंड लेकर आई थी। शिमला की पहाड़ियों पर बर्फ की सफेद च...
भूल-105 अक्षम लोगों और चापलूसों को आगे बढ़ाना “दासता व्यक्ति को इतना नीचे गिरा दे...
कानून और न्याय एक प्रोफेसर अपनी कक्षा शुरू करने से पहले एक छात्रा से उसका नाम पू...
कहानी का नाम: मायाजाल (The Professional Brides) "मीठी बातों का ज़हर और लालच का फं...
ओ वसन्त भाग-११.ओ वसन्त ओ वसन्तमैं फूल बन जाऊँसुगन्ध के लिए,ओ आसमानमैं नक्षत्र बन जाऊँटिमटिमाने के लिए।ओ शिशिरमैं बर्फ बन जाऊँदिन-रात चमकने के लिए,ओ समुद्रमैं लहर बन जाऊँथपेड़ों में...
’’करवट बदलता भारत’’ 1 काव्य संकलन- वेदराम प्रजापति ‘’मनमस्त’’ समर्पण— श्री सिद्ध गुरूदेव महाराज, जिनके आशीर्वाद से ही कमजोर करों को ताकत मिली, उन्हीं के श्री चरणों मे...
*वीर पंजाब की धरती* महाकाव्य के दशम कृपाण (सर्ग): *"माच्छीवाडा़ से तलवंडी यात्रा चित्रण"* से चुनिंदा पद -?*जब गुरु गोविंद सिंह महाराज चमकोर युद्ध के बाद मछीवाड़ा जंगल में...
‘दो शब्दों की अपनी राहें’’ मां के आँचल की छाँव में पलता, बढ़ता एक अनजाना बचपन(भ्रूण), जो कल का पौधा बनने की अपनी अनूठी लालसा लिए, एक नवीन काव्य संकलन-‘‘बेटी’’ के रूप में, अपन...
स नावेल मे आप सब को अलग अलग तरह की कविताएं पढ़ने को मिली गई l इस नावेल को लिख कर जितनी मुझे ख़ुशी हो रही है , उम्मीद है आप सब wonderful readers को भी जे नावेल पढ़ कर उतनी ही ख़ुशी हो...
नि.र.स. --------------------------------------------------- क्या तुम्हे पता है कि - गर तुम कुछ ना कहो, ना लिखो, ना ही मेरी हकीकत में हो, तो मै नि.र.स. हो जाता हूँ। -------...
आज की इस भयावह चकाचौंध में भारत की पावन धरती से मानवी के बहुत सारे सच्चे चेहरे गायब और अनदिखे से हो रहे हैं, उन्हीं की खोज में यह काव्य संकलन ‘मेरा भारत दिखा तुम्हें क्या ?’...
1.तड़पतेरे इश्क ने ये हालत कैसी कर दी मेरी ये जालिम।दरबदर भटकते रहेते हम तुम्हें भूलने को रात दिन।हम तो मयखाने में भी जाते है तुम्हे भुलाने के लिए।कमबख्त शराब की हर एक बूंद में भी...
जीवन को स्वस्थ्य और समृद्ध बनाने वाली पावन ग्राम-स्थली जहां जीवन की सभी मूलभूत सुविधाऐं प्राप्त होती हैं, उस अंचल में आने का आग्रह इस कविता संगह ‘गांव की तलाश ’में किया गया है...
(काव्य संकलन) वेदराम प्रजापति‘ मनमस्त’ 1. सरस्वती बंदना (मॉं शारदे) मॉं शारदे! मृदु सार दे!!, सबके मनोरथ सार दै!!! झंकृत हो, मृदु वीणा मधुर, मॉं शारदे, वह प्यार दे।। अज्ञान त...
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