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अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 25: वह झूठ जिसने सदियों को कैद कर दियाअनंत...
भाग 1: एक अजीब मुलाक़ात**रात के करीब बारह बज रहे थे। आसमान में काले घने बादल छाए...
मैं नहीं, अस्तित्वइच्छा, प्रश्न और समर्पण के मध्य पूर्णता की खोज भूमिका↓१. प्र...
अध्याय 11 अस्सी शिकार और एक रहस्यमगध साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र में हो रही...
(दूर जलते हुए हॉस्पिटल के मलबे से आती हुई लपटों की कड़कड़ाहट। आर्यन की कार के टा...
Part 12डायरी का अगला पन्ना...डायरी बंद करने का मन ही नहीं कर रहा था। हर पन्ने के...
अंतिम सलाम भारतीय सेना के वीर जवानों को समर्पित एक मार्मिक और प्रेरणादायक कहानीर...
[50]अपनी निर्दोषता सिद्ध होने पर वत्सर मन ही मन श्री कृष्ण का धन्यवाद करते हुए स...
करन का कमराकमरे में अँधेरा है, बस एक स्टडी लैम्प की हल्की-सी रोशनी। टेबल पर बिखर...
जैसे ही वे दिल्ली के पॉश इलाके में दिग्विजय सिंह के सरकारी बंगले के पास पहुंचे,...
ढीठ मुस्कुराहटें... ज़किया ज़ुबैरी (1) “अरे भई रानी मेरी एड़ी को गुदगुदा क्यों रही हो... क्या करती हो भई... ये क्या हो रहा है... यह गीला गीला क्या है... अरे अब तो जलन भी हो रही है....
राय साहब की चौथी बेटी प्रबोध कुमार गोविल 1 कॉलेज की पूरी इमारत जगमगा रही थी। ईंटों से बनी बाउंड्री वॉल को रंगीन अबरियों और पन्नियों से सजाया गया था। आज इस पर पांव लटका कर लड़के बैठ...
आदमखोर (1) भूरे - काले बादलों का समूह अचानक पश्चिमी क्षितिज में उभरने लगा. सरजुआ के हाथ रुक गये. हंसिया नीचे रखकर वह ऊपर की ओर देखने लगा. हवा का बहाव तेज होता जा रहा था. भूरे बादलो...
कीमती जीन्स, टी शर्ट, एक हाथ में खालिस लेदर की बैग और दूसरे में अपना कीमती मोबाईल फोन लेकर जब अविनाश रेलवे के ए. सी. वेटिंग रूम के सामने पहुँचा तो कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता था...
कच्चा गोश्त ज़किया ज़ुबैरी (1) बित्ते भर का क़द और दस गिरह लम्बी ज़बान!... और जब यह ज़बान कतरनी की भांति चलती तो बृज बिहारी बहादुर भी बगलें झांकते दिखाई देते। भिड़ के छत्ते को छेड़...
कहा न कहा (1) अब तक तो उसे आ जाना चाहिए था। दोपहर के बारह बजने वाले थे। घड़ी की सुई अपनी रफ्तार से बढ़ती जा रही थी। उसका तो नामोनिशान नहीं है। ऐसा तो पहले कभी नहीं हुआ। वह तो सदा य...
इस दश्त में एक शहर था अमिताभ मिश्र स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी परिघटना संयुक्त परिवारों का टूटना और एकल परिवार का बनना है गजानन माधव मुक्तिबोध प्रस्तावना या भूमिका (इतिहास और भूगो...
टिंग-टिड़िंग टिड़िंग-टिड़िंग, टिंग-टिड़िंग टिड़िंग-टिड़िंग, ये मोबाइल का अलार्म है । जो रोज़ सुबह खंडहर हो चुके सरकारी आवासों वाली तीन मंज़िला बिल्डिंग के दूसरे माले में बजता है । क़तार म...
रिमोट से चलने वाला गुड्डा मज्कूर आलम (1) चेतावनी : विवाहित पुरुष अपनी पत्नियों को यह कहानी न पढऩे दें। वर्ना परिणाम के जिम्मेदार खुद होंगें। शादी के 6 साल बाद वे अपनी पहली यात्रा प...
ततइया (1) शन्नो बारिन कमर के नीचे चाँदी की चौड़ी करधनी कसे अलता लगे पैरों में पड़ी पायल की मधुर लय के संग जब बाल्टी उठाए गुजरिया बनी म्यूनिस्पैलिटी के नल पर पहुँचती तो घूँघट में छिपे...
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