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: : प्रकरण - 88 : : फि...
अयान घंटों उस अंधेरे कमरे में ज़मीन पर पत्थर बना बैठा था। सन्नाटा इतना गहरा था...
आचार्य गंधर्व ने करीब १९ साल के युवा राजकुमार के हाथ मे तलवार थमाते हुए अपने ऊपर...
यादों की जंगमल्हार ने देखा कि उसका अपना हाथ अब पूरी तरह पारदर्शी हो चुका था। वह...
उसकी आँखों से आँसू लगातार बहने लगते हैं। उधर आदित्य भी जानवी को देखकर कुछ पल के...
एक पल में सब कुछ बदल जाता है। यह बात मीरा ने आज तक सिद्धांत में जानी थी। अब व्यव...
तृषा अपने घर की छोटी बेटी है। शुरू से बहुत जिद्दी नक्चड़ी ,आलसी थी। लेकिन अब उसकी...
दोहा:९अमृत केरी मोटरी, सिर से धरी उतारि।जाको खोजत जग फिर्या, सो तो घट के माहिं॥क...
तपती दोपहरी बैसाख की तपती दोपहरी…आसमान से आग बरस रही थी।ऐसा समय, जब लोग घर से बा...
भाग - 9 पंद्रह दिन बीत चुके थे पिछला केस खत्म हो...
आज मेरी सुबह कुछ जल्दी हो गई कुछ देर बाहर लान में टहलती रही फिर चाय की तलब लग आई अख़बार अभी आया नहीं था, सोचा चाय बना लूँ तब तक आ ही जायेगा, अभी सब सो रहे थे एक कप चाय बना कर मै लान...
साक्षात्कार के बाद कोलकाता से खुशी खुशी मैं वापस लौट रहा था । राजधानी एक्सप्रेस के प्रथम श्रेणी के जिस केबिन में मैं चढा, उसमें पहले से एक और आदमी मौजूद था । जल्दी ही पता चला कि वह...
नॉमिनी मधु अरोड़ा (1) तुम्हारी हर बार की चुप्पी का क्या अर्थ समझूं? जब जब मैं तुमसे तुम्हारे परिवार के बारे में कोई सवाल करती हूं या जानना चाहती हूं तुम ख़ुद को ख़ोह में क्यों...
फैसला (1) शाम की ट्रेन थी बेटे की अभी सत्ररह साल का ही तो है राघव पहली बार अकेले सफर कर रहा है उसे अकेले भेजते हुए मेरा कलेजा कांपा तो बहुत फिर भी खुद को समझा के उसे ट्रेन में...
मैंने इस बार शायद गलत जगह पांव रख दिया था। पांव तले से थोड़ी सी मिट्टी नीचे को रिसकी थी, जिससे हल्की सी आवाज हुई। मुझे लगा, मेरी गलती से शोर पैदा हो रहा है। अभी हाल गालियां सुनने को...
औघड़ का दान प्रदीप श्रीवास्तव भाग-1 सीमा अफनाई हुई सी बहुत जल्दी में अपनी स्कूटी भगाए जा रही थी। अमूमन वह इतनी तेज़ नहीं चलती। मन उसका घर पर लगा हुआ था जहां दोनों बेटियां और पति कब क...
उन दिनों बहुत कम घरों में फोन होते थे। सुविधानुसार लैंडलाईन पर बात करने के लिए मोहल्ले वाले अपनी रिश्तेदारियों में पड़ौसियों का नम्बर दे देते थे। ताकि अड़ी–भीड़ में रिश्तेदारियों की ख...
मेरी राह्गिरी (1) शुरुआत मैंने वक़्त की धार में एक पैर छुआ कर देखा था और मेरा पैर दहक गया था बुरी तरह. ये नदी मेरी ख्वाहिशों ने गढ़ी थी. मैं नींद में डूबा बेखबर ख्वाबों से हार कर सोन...
फ़ोन पर दूर के रिश्ते के देवर की आवाज़ है, भाभीजी ! इस बार आपको हमारे शहर आना ही होगा. कब से टाल रही हैं. क्या करूँ कुछ ना कुछ व्यस्त्तायें चलती ही रह्ती हैं. आप मेरी बात सु...
Keshav & Sharma is a cartoon series originally started by Men's HUB & Daaman Welfare Society with the help of Volunteers. Mr. Diljeet & Mr. Anupam Dubey are main artists of the...
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