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                                                   :  :  प्रकरण -  88  :  :       फि...

  • अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 20

    अयान घंटों  उस अंधेरे कमरे में ज़मीन पर पत्थर बना बैठा था। सन्नाटा इतना गहरा था...

  • Rajkumar - 1

    आचार्य गंधर्व ने करीब १९ साल के युवा राजकुमार के हाथ मे तलवार थमाते हुए अपने ऊपर...

  • उसकी साया !! - 3

    यादों की जंगमल्हार ने देखा कि उसका अपना हाथ अब पूरी तरह पारदर्शी हो चुका था। वह...

  • तेरे मेरे दरमियान - 107

    उसकी आँखों से आँसू लगातार बहने लगते हैं। उधर आदित्य भी जानवी को देखकर कुछ पल के...

  • विक्री - 6

    एक पल में सब कुछ बदल जाता है। यह बात मीरा ने आज तक सिद्धांत में जानी थी। अब व्यव...

  • छोटी बेटी

    तृषा अपने घर की छोटी बेटी है। शुरू से बहुत जिद्दी नक्चड़ी ,आलसी थी। लेकिन अब उसकी...

  • अहंकार का पोस्टमार्टम - भाग 5

    दोहा:९अमृत केरी मोटरी, सिर से धरी उतारि।जाको खोजत जग फिर्या, सो तो घट के माहिं॥क...

  • तपती दोपहरी

    तपती दोपहरी बैसाख की तपती दोपहरी…आसमान से आग बरस रही थी।ऐसा समय, जब लोग घर से बा...

  • Ghost hunters - 9

                                    भाग - 9 पंद्रह दिन बीत चुके थे पिछला केस खत्म हो...

हूक By Divya Shukla

आज मेरी सुबह कुछ जल्दी हो गई कुछ देर बाहर लान में टहलती रही फिर चाय की तलब लग आई अख़बार अभी आया नहीं था, सोचा चाय बना लूँ तब तक आ ही जायेगा, अभी सब सो रहे थे एक कप चाय बना कर मै लान...

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महत्वाकांक्षा By Shashi Ranjan

साक्षात्कार के बाद कोलकाता से खुशी खुशी मैं वापस लौट रहा था । राजधानी एक्सप्रेस के प्रथम श्रेणी के जिस केबिन में मैं चढा, उसमें पहले से एक और आदमी मौजूद था । जल्दी ही पता चला कि वह...

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नॉमिनी By Madhu Arora

नॉमिनी मधु अरोड़ा (1) तुम्‍हारी हर बार की चुप्‍पी का क्‍या अर्थ समझूं? जब जब मैं तुमसे तुम्‍हारे परिवार के बारे में कोई सवाल करती हूं या जानना चाहती हूं तुम ख़ुद को ख़ोह में क्‍यों...

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फैसला By Divya Shukla

फैसला (1) शाम की ट्रेन थी बेटे की अभी सत्ररह साल का ही तो है राघव पहली बार अकेले सफर कर रहा है उसे अकेले भेजते हुए मेरा कलेजा कांपा तो बहुत फिर भी खुद को समझा के उसे ट्रेन में...

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मुख़बिर By राज बोहरे

मैंने इस बार शायद गलत जगह पांव रख दिया था। पांव तले से थोड़ी सी मिट्टी नीचे को रिसकी थी, जिससे हल्की सी आवाज हुई। मुझे लगा, मेरी गलती से शोर पैदा हो रहा है। अभी हाल गालियां सुनने को...

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औघड़ का दान By Pradeep Shrivastava

औघड़ का दान प्रदीप श्रीवास्तव भाग-1 सीमा अफनाई हुई सी बहुत जल्दी में अपनी स्कूटी भगाए जा रही थी। अमूमन वह इतनी तेज़ नहीं चलती। मन उसका घर पर लगा हुआ था जहां दोनों बेटियां और पति कब क...

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नाख़ून By Vijay Vibhor

उन दिनों बहुत कम घरों में फोन होते थे। सुविधानुसार लैंडलाईन पर बात करने के लिए मोहल्ले वाले अपनी रिश्तेदारियों में पड़ौसियों का नम्बर दे देते थे। ताकि अड़ी–भीड़ में रिश्तेदारियों की ख...

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राहबाज By Pritpal Kaur

मेरी राह्गिरी (1) शुरुआत मैंने वक़्त की धार में एक पैर छुआ कर देखा था और मेरा पैर दहक गया था बुरी तरह. ये नदी मेरी ख्वाहिशों ने गढ़ी थी. मैं नींद में डूबा बेखबर ख्वाबों से हार कर सोन...

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जर्नलिज़्म By Neelam Kulshreshtha

फ़ोन पर दूर के रिश्ते के देवर की आवाज़ है, भाभीजी ! इस बार आपको हमारे शहर आना ही होगा. कब से टाल रही हैं.
क्या करूँ कुछ ना कुछ व्यस्त्तायें चलती ही रह्ती हैं.
आप मेरी बात सु...

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केशव एंड शर्मा By The Real Ghost

Keshav & Sharma is a cartoon series originally started by Men's HUB & Daaman Welfare Society with the help of Volunteers. Mr. Diljeet & Mr. Anupam Dubey are main artists of the...

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