The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
You are welcome to the world of inspiring, thrilling and motivating stories written in your own language by the young and aspiring authors on Matrubharti. You will get a life time experience of falling in love with stories.
हरि ने कहा —जानता हु श्री तुम क्यूं रो रही हो क्योंकि तुम्हे लगता है कि तुम्हे s...
सम्राट अशोक का परिवर्तनभाग 3 – धम्म का संदेश और भारत से विश्व तक की यात्राकलिंग...
अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 13 : आखिरी किताबसुबह की पहली किरणें गंगा के पानी पर च...
एपिसोड 5 (दरिंदों की जंग)चट्टान की सीढ़ियों पर चढ़ते हुए उस ब्लैक जगुआर के पंजों क...
असली शिक्षक अंजली स्वभाव से थोडी चंचल थी मगर पढने में बेहद होशियार, कंम्प्युटर उ...
2020 से 2022 तक के उन दो सालों के इंतज़ार की घड़ियाँ, जब अंततः 2022 में उस '...
कृष्णा जैसे ही घर के अंदर पहुँचा…दरवाज़ा अपने आप पीछे से हल्के से बंद हो गया। घर...
वाजिद हुसैन सिद्दीक़ी की कहानीचौड़ी सड़क पर शाम उतर रही थी। दिन भर की तप...
अध्याय 19: अंतिम पंक्ति का भ्रम पन्ना पलटा जा रहा था। लेकिन इस बार आर्या को महसू...
धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभा (आगे)चित्रगुप्त की वाणी समाप...
नाम में क्या रखा है (1) “फलसफों को जरूरत नहीं किसी अफसाने की ये बात तो है बस दिल को जलाने की”.......कुछ ऐसा ही मेरा हाल है. ‘मैं कुछ नहीं से कुछ होने तक’ के सफ़र की अकेली कड़ी हूँ जो...
कौन दिलों की जाने! एक दीपावली के पश्चात् शादी—विवाह के लिये शुभ मुहूर्त आरम्भ हो जाता है। नवम्बर मास के अन्तिम दिनों में ‘महफिल' बैंक्वट, जो सम्भवतः ट्राईसिटी का सबसे बढ़िया व...
क्रान्तिकारी (1) समस्या ज्यों-की त्यों विद्यमान थी. सात महीने सोचते हुए बीत गये थे, लेकिन न तो शैलजा ही कोई उपाय सोच पायी और न ही शांतनु. ज्यों-ज्यों दिन निकट आते जा रहे थे शैलजा क...
आओ थेरियों प्रदीप श्रीवास्तव भाग 1 मनू मैं अक्सर खुद से पूछती हूं कि सारे तूफ़ान वाया पश्चिम से ही हमारे यहां क्यों आते हैं, कोई तूफ़ान यहीं से क्यों नहीं उठता। सोचने पर पाती हूं कि...
“ ये कैसे हो सकता है ? नहीं, ये संभव नहीं, वो भी इतने साल बाद ? अपना ही प्रतिरूप. क्या ईश्वर से कोई गलती हो गयी ? एक ही उम्र के तो फिर भी एक जैसे चेहरे देखे जा सकते हैं लेकिन वो भी...
दो अजनबी और वो आवाज़ जीवन में जब आपके किसी अपने की कोई परेशानी आपके सर चढ़कर बोलती है तो क्या होता है ? जाहीर सी बात है मन परेशान हो उठता है और दिलो दिमाग के बीच एक जंग सी छिडी होती...
बस एक कदम.... ज़किया ज़ुबैरी (1) “नहीं मैं नहीं आऊंगी।” शैली को अपनी आवाज़ में भरे आत्मविश्वास पर स्वयं ही यक़ीन नहीं हो पा रहा था।... और वह ख़ामोश हो गई। टेलिफ़ोन के दूसरे छोर से...
तीसरा मोर्चा सारा मोहल्ला साँय-साँय कर रहा था। रहमान को राहुल कहीं नज'र नहीं आया। वह कुछ देर परेशान-सा राहुल के घर के सामने खड़ा रहा, फि़र जाने कैसे उसे इस सन्नाटे से भय लगने लग...
कई बातें ऐसी थीं जो मीता के स्वभाव के प्रतिकूल थीं- उनमे से एक थी ब्राह्मवेला के पश्चात चारपाई तोड़ते रहना। अनुज से इस विषय में अनेक बार उससे बहस हुई थी और यदा कदा मानमनौव्वल से मिट...
जनाब सलीम लँगड़े और श्रीमती शीला देवी की जवानी (कहानी पंकज सुबीर) (1) यह कहानी सुने जाने से पहले कुछ जानकारियों से अवगत होने की माँग करती है। उन जानकारियों की रोशनी के अभाव में कहा...
लॉग इन करें
लॉगिन से आप मातृभारती के "उपयोग के नियम" और "गोपनीयता नीति" से अपनी सहमती प्रकट करते हैं.
वेरिफिकेशन
ऐप डाउनलोड करें
ऐप डाउनलोड करने के लिए लिंक प्राप्त करें
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved | Powered by Nichetech.
Please enable javascript on your browser