लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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स्वाभिमान - लघुकथा - 13 By Archana Rai

काॅफी हाउस में बैठी नव्या कॉफी का ऑर्डर कर किसी के आने का इंतजार कर रही थी। परेशान थी रह रह कर घर की समस्याएं ही जेहन में दस्तक दे रही थी। गिरवी पडा घर ..... बीमार पिता का अच्छे अस...

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स्वाभिमान - लघुकथा - 12 By Aparajita Anamika

शाम का धुंधलका गहराने लगा था । हिरणी सी लगभग कुलांचे मारती वो अपनी झुग्गी की तरफ भागी जा रही थी । बार बार आँखों मे भूखे बच्चों की तस्वीर कौंधती ।

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स्वाभिमान - लघुकथा - 11 By Anuradha Saini

अपने बलात्कारियों को पहचान कर उन्हें सजा दिलाने वाली दामिनी के इन्टरव्यू का आज कई टी.वी.चैनल्स पर सीधा प्रसारण होना था
वह भी टी.वी.चला गंभीर मुद्रा में सोफे पर बैठ गया
यही...

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बातें जरूरी है या आपकी जिंदगी .. By Antima Singh

रोहन , आज मिल रहे हो ना कॉफी शॉप में , मैं जल्दी से तैयार होकर आती हूँ .आज तो तुम्हारी बाइक पर एक लांग ड्राइव हो जाये आखिर ख़ुशी की बात जो है तुम आईएएस बन गए हो । अब हमारे प्यार को...

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स्वाभिमान - लघुकथा - 10 By अनूपा हरबोला

सुलझे विचारों वाली, तीन भाई बहनों में सबसे बड़ी गीता को ग्रेजुएशन करते ही बैंक में नौकरी मिल गई। बैंक में भी वो अपने काम और व्यवहार के कारण सबकी प्रिय बन गई। न जाने कब उसे अपने सहक...

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स्वाभिमान - लघुकथा - 9 By Anjali Cipher

रानो, आओ चाय पी लो । काम तो चलता रहेगा।
नहीं मीता दी, यहीं दे दो । खड़े खड़े ही पी लूँगी।
अरी, बाकी महरियाँ तो सारा काम धाम छोड़, ठाठ से बराबर बैठ कर चाय पीती हैं । एक तू ही अन...

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डायरेक्टर कृपलानी By Saadat Hasan Manto

डायरैक्टर कृपलानी अपनी बुलन्द किरदारी और ख़ुश अतवारी की वजह से बंबई की फ़िल्म इंडस्ट्री में बड़े एहतिराम की नज़र से देखा जाता था। बाअज़ लोग तो हैरत का इज़हार करते थे कि ऐसा नेक और पाक...

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स्वाभिमान - लघुकथा - 8 By Anagha Joglekar

पहले कुछ धुंधला-सा दिख रहा था लेकिन अब सब स्पष्ट दिख रहा है। एक औरत को बीच सड़क पर बाँधकर खड़ा किया गया है। वह मुँह झुकाए खड़ी है। उसका 'माथा' लहुलुहान है। उसके 'गले'...

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स्वाभिमान - लघुकथा - 7 By vinod kumar dave

सभी के लिए बात इतनी सी ही थी लेकिन सुशांत के लिए यह जीने मरने का सवाल था। ऊपर से सख्त आदेश था, भुगतान की फ़ाइल अटकनी नहीं चाहिए किसी हालत में, उसे उसका हिस्सा मिल जाएगा। लेकिन हिस्स...

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स्वाभिमान - लघुकथा - 6 By Tejveersingh

बहू, जुम्मे जुम्मे आठ दिन भी नहीं हुए शादी को और तुमने अपने रंग दिखाने शुरू कर दिये ।
माँ जी, यह आप क्या कह रहीं हैं? मैं कुछ समझी नहीं ?
अरे वाह, चोरी और सीना जोरी ।
माँ जी,...

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स्वाभिमान - लघुकथा - 5 By Shashi Bansal Goyal

रामलीला के मंचन की समाप्ति के पश्चात् राम का रूप धरा हुआ पात्र हाथों में धनुष बाण लिए मंच से उतरकर रावण के पुतला दहन के लिए धीरे धीरे आगे बढ़ रहा था । उसके पास आते ही लोग जय श्री...

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स्वाभिमान - लघुकथा - 4 By Kirti Gandhi

आज शीला की शादी का दिन था। पिछले सात महीनों से वैभव उसके प्रति जिस प्यार का इजहार करता आ रहा था, उससे शीला भी बहुत खुश थी। इतना बड़ा घर और पढ़ा- लिखा लड़का, उसे तो खुद से खुशनसीब को...

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स्वाभिमान - लघुकथा - 3 By Kavita Verma

तो भाइयों और बहनों आप बिलकुल बेफिकर हो जाइये। आपका प्रिय नेता आपकी सरकार है न जन्म से लेकर मृत्यु तक हर चीज का जिम्मा मेरा। कहते हुए तालियों की गड़गड़ाहट के बीच प्रदेश के सर्व प्रि...

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स्वाभिमान - लघुकथा - 2 By Kamal Kapoor

मुग्ध मन से गुलदान में फूल सज़ा रही थी सुमन कि ‘डोर-बेल’बजी।द्वार खोला तो दिल खिल उठा…माँ-पापा खड़े थे सामने।वह माँ से गले मिलने के लिये आगे बढ़ी परंतु उन्होंने उसे परे धकेल दिया औ...

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स्वाभिमान - लघुकथा - 1 By Chhavi Nigam

ऋचा के कमरे से बाहर आते ही नीरव दाँत पीसते हुए बुदबुदाया ये अंदर मैथ्स की ट्यूशन ले रही थीं, या इन हाईस्कूल के स्टूडेंट्स का दिमाग खराब कर रही थीं, हैं ?

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पनघट By Rajesh Maheshwari

पनघट मुझे पिछले माह ही राजस्थान के एक कस्बे में जाने का अवसर प्राप्त हुआ। मैं अपने एक रिस्तेदार की पुत्री के व...

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रिश्ते की डोर By Dr kavita Tyagi

वर्तमान समाज ऐसे विडंबना के दौर से गुजर रहा है, जब छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते टूट रहे हैं । रिश्तों की गिरती गरिमा का युवा मनः मस्तिष्क पर इतना नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है कि आज की...

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भूतवाले पतिपरमेश्वर By Author Pawan Singh

हेलो मेरा नाम प्रशांत दुबे है और मै एक भूत हु जी बिलकुल सही सुना आपने। वैसे तो हम काफी सीधे साधे भूत है लेकिन ज्यादा मिलनसार नहीं है इसलिए हम अपनी भूतिया मण्डली के साथ नहीं रहते। औ...

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देखे कुछ ख्वाब - देखा एक ख्वाब By Bhumika Bhonyare

(कहानी है एक लड़की की जो अपने सपने और समाज की मान्यताओं के बीच फस जाती है) (Office scene)वकील (क्लायंट से)-आपके डिवॉर्स लेने की वजह क्या है?लड़की-मेरे सपने,मेरी आज़ादी वकील- क्या.??...

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चोरी By Neetu Singh Renuka

वह इधर-उधर भटक रहा था। शायद बेमतलब या हो सकता है मतलब से भी। पिछले तीन दिन से वह कोई चोरी नहीं कर पाया था। मिनिस्टर साहब को भी अभी आना था। जाते किसी और बड़े शहर में, आराम से चुनावी...

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जय जवान जय किसान जय विज्ञान By Rajesh Maheshwari

जय जवान-जय किसान-जय विज्ञान मोहनियां गांव का रामसिंह, एक सम्पन्न किसान था। घर में पत्नी, एक नौजवान बेटा और एक बेटी थी। बेटे ने इसी साल कालेज जाना प्रारम्भ किया था। अच्छी खासी खेती...

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वक़्त का खेल By Pawnesh Dixit

कैसे क्रिकेट के खेल में एक कप्तान पर कप्तानी का नशा छा जाता है और मैदान पर गेंदबाजी और बल्लेबाजी में तड़का लगाने के चक्कर में गलत फैसले ले लेता है खामिआज़ा टीम को भुगतना पड़ता है पर...

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सुहाने सफर की ओर। By Vandna Sharma

मैं बहुत दिनों से पापा से ज़िद कर रही थी -" पापा कहीं घूमाने ले जाओ,कहीं लेकर नहीं जाते। सारी छुट्टियां ऐसे ही ख़त्म हो जाती हैं। " पापा ने कहा -"ठीक है इस रविवार को चलेंगे ". मेरी ख़...

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पाँचवाँ कप By Neetu Singh Renuka

गुलाबी फूल और हरी पत्तियों वाले इस बोन चाइना के कप को ख़रीदते वक़्त कभी नहीं सोचा था कि यह टूट भी सकता है। कोई नहीं सोचता। कौन सोचेगा भला कि खरीदा जा रहा नाज़ुक सा कप टूट सकता है और ल...

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ईमानदार बेईमानी By Rajesh Maheshwari

ईमानदार बेईमानी एक दिन प्रातः काल स्वर्गलोक में प्रभु के साथ नारद जी भी भ्रमण कर रहे थे। नारद जी से अचानक प्रभु ने कहा- आज मुझे तुम कोई ऐस...

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मित्रता By Rajesh Maheshwari

मित्रता कुसनेर और मोहनियां एक-दूसरे से लगे हुए जबलपुर के पास के दो गांव हैं। कुसनेर के अभयसिंह और मोहनियां के मकसूद के बीच बचपन से ही घनिष्ठ मित्रता थी। वे बचपन से साथ-साथ खेले...

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मास्टर ब्लास्टर – सचिन तेंदुलकर की कहानी By Sonia Gupta

#Great Indian story *******************मास्टर ब्लास्टर – सचिन तेंदुलकर की कहानी ******** &&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&& भारत के महान रत्न सपूतों में जाने जाना वाला एक सुप्रसिद्...

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भारत का कोहिनूर (राकेश शर्मा ) By Jahnavi Suman

भारत का कोहनूर (राकेश शर्मा ) १३ जनवरी १९४९ पंजाब के पटियाला शहर में एक नन्हें बालक की किलकारी से देवेन्द्रनाथ शर्मा और तृप्ता शर्मा का आँगन गूँज उठा था ,वे बस इन किलकारियों पर ह...

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फातिहा By Rajesh Maheshwari

फातिहा हिमाच्छादित पर्वतों के बीच, कल-कल बहते हुए झरनों का संगीत, प्रकृति के सौन्दर्य को चार चाँद लगा रहा था। कश्मीर की इन वादियों में पहुँचना बहुत कठिन है। चारों ओर ऊँचे...

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कफ़न By Vikash Raj

जब मैंने उसे देखा था तब वो महज 13 साल का था खाली पेट सो जाया करता था, पर कभी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया, कपडे फटे थे उसके पर कभी भी अपनी टांग किसी दुसरे की चादर से ढकने की कोश...

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ईदी अब्बा By Surendra Tandon

सेठ ग्यान चंद्र चिकन के कारोबार के बड़े व्यापारी थे, व्यापार की अच्छी समझ थी, बाजार भाव से कम रेट पर माल बेच लेना और मुनाफा भी कमा लेना उन्हें अच्छी तरह आता था। भगवान के भक्त भी थे...

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टुकड़े टुकड़े इज्जत By Ved Prakash Tyagi

हिम्मत करके सुनीता गली में घुस गयी तभी गली के बीच में एक दरवाजा खुला, आम तौर पर गली के दरवाजे उस समय बंद ही रहते थे लेकिन उस दिन उस दरवाजे के खुलने से सुनीता को थोड़ी हिम्मत आई, लेक...

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संन्यास By Neetu Singh Renuka

वह पगडंडियों के सहारे चला जा रहा था। गुस्से से काँपता उसका शरीर कभी इधर कदम रखता था तो कभी उधर। उसे खुद होश नहीं था कि आखिर वो जा कहाँ रहा है। इतना तो पता था कि कहीं दूर जा रहा है,...

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नियत By Sonu Kasana

कई बार हमारे सामने ऐसी घटनाएें घटती हैं कि हमे अपनी आँखों पर यकीन नही होता। ऐसी ही एक घटना का वर्णन ।
जो सोचने पर मजबूर करती है। . . . . . ,. . . . .

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हौसलों की उड़ान By Harish Kumar Amit

हौसलों की उड़ान : हरीश कुमार ‘अमित’ कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझ जैसी अनपढ़ स्त्री को भी देश के राष्ट्रपति महोदय के हाथों पुरस्कार पाने का गौरव मिल सकता है, लेकिन ऐस...

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सूखा पेड़ By Ved Prakash Tyagi

घर पर दोनों अकेले रहते थे, कोई पूछने वाला भी नहीं था और यह भी चिंता नहीं होती थी कि कोई घर पर प्रतीक्षा कर रहा है अतः दोनों ज्यादा से ज्यादा समय एक साथ बिताने लगे, कभी आइस क्रीम प...

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ढाई बजे की बस By Neetu Singh Renuka

ढाई बजे की बस इतनी रात का सफर किसे अच्छा लगता है भला? मगर क्या किया जाए? वहाँ के लिए बस ही रात को दो बजे के बाद मिलती है। वह भी इस शहर से नहीं बल्कि दूसरे शहर जाकर। यह तो वैसे...

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आहिस्ता आहिस्ता By Renu Gupta

"राज, सॉरी, मैं तुम्हारी वो स्पेशल वाली फ्रेंड नहीं बन सकती, मुझे जिंदगी में बहुत कुछ हासिल करना है, अभी फिलहाल मेरी जिंदगी में अफेयर, रोमांस के लिए कोई गुंजाइश नहीं है। अभी XII के...

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स्वाभिमान - लघुकथा - 13 By Archana Rai

काॅफी हाउस में बैठी नव्या कॉफी का ऑर्डर कर किसी के आने का इंतजार कर रही थी। परेशान थी रह रह कर घर की समस्याएं ही जेहन में दस्तक दे रही थी। गिरवी पडा घर ..... बीमार पिता का अच्छे अस...

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स्वाभिमान - लघुकथा - 12 By Aparajita Anamika

शाम का धुंधलका गहराने लगा था । हिरणी सी लगभग कुलांचे मारती वो अपनी झुग्गी की तरफ भागी जा रही थी । बार बार आँखों मे भूखे बच्चों की तस्वीर कौंधती ।

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स्वाभिमान - लघुकथा - 11 By Anuradha Saini

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स्वाभिमान - लघुकथा - 10 By अनूपा हरबोला

सुलझे विचारों वाली, तीन भाई बहनों में सबसे बड़ी गीता को ग्रेजुएशन करते ही बैंक में नौकरी मिल गई। बैंक में भी वो अपने काम और व्यवहार के कारण सबकी प्रिय बन गई। न जाने कब उसे अपने सहक...

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डायरेक्टर कृपलानी By Saadat Hasan Manto

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स्वाभिमान - लघुकथा - 8 By Anagha Joglekar

पहले कुछ धुंधला-सा दिख रहा था लेकिन अब सब स्पष्ट दिख रहा है। एक औरत को बीच सड़क पर बाँधकर खड़ा किया गया है। वह मुँह झुकाए खड़ी है। उसका 'माथा' लहुलुहान है। उसके 'गले'...

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स्वाभिमान - लघुकथा - 7 By vinod kumar dave

सभी के लिए बात इतनी सी ही थी लेकिन सुशांत के लिए यह जीने मरने का सवाल था। ऊपर से सख्त आदेश था, भुगतान की फ़ाइल अटकनी नहीं चाहिए किसी हालत में, उसे उसका हिस्सा मिल जाएगा। लेकिन हिस्स...

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स्वाभिमान - लघुकथा - 6 By Tejveersingh

बहू, जुम्मे जुम्मे आठ दिन भी नहीं हुए शादी को और तुमने अपने रंग दिखाने शुरू कर दिये ।
माँ जी, यह आप क्या कह रहीं हैं? मैं कुछ समझी नहीं ?
अरे वाह, चोरी और सीना जोरी ।
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रामलीला के मंचन की समाप्ति के पश्चात् राम का रूप धरा हुआ पात्र हाथों में धनुष बाण लिए मंच से उतरकर रावण के पुतला दहन के लिए धीरे धीरे आगे बढ़ रहा था । उसके पास आते ही लोग जय श्री...

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आज शीला की शादी का दिन था। पिछले सात महीनों से वैभव उसके प्रति जिस प्यार का इजहार करता आ रहा था, उससे शीला भी बहुत खुश थी। इतना बड़ा घर और पढ़ा- लिखा लड़का, उसे तो खुद से खुशनसीब को...

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स्वाभिमान - लघुकथा - 3 By Kavita Verma

तो भाइयों और बहनों आप बिलकुल बेफिकर हो जाइये। आपका प्रिय नेता आपकी सरकार है न जन्म से लेकर मृत्यु तक हर चीज का जिम्मा मेरा। कहते हुए तालियों की गड़गड़ाहट के बीच प्रदेश के सर्व प्रि...

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स्वाभिमान - लघुकथा - 2 By Kamal Kapoor

मुग्ध मन से गुलदान में फूल सज़ा रही थी सुमन कि ‘डोर-बेल’बजी।द्वार खोला तो दिल खिल उठा…माँ-पापा खड़े थे सामने।वह माँ से गले मिलने के लिये आगे बढ़ी परंतु उन्होंने उसे परे धकेल दिया औ...

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स्वाभिमान - लघुकथा - 1 By Chhavi Nigam

ऋचा के कमरे से बाहर आते ही नीरव दाँत पीसते हुए बुदबुदाया ये अंदर मैथ्स की ट्यूशन ले रही थीं, या इन हाईस्कूल के स्टूडेंट्स का दिमाग खराब कर रही थीं, हैं ?

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पनघट By Rajesh Maheshwari

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भूतवाले पतिपरमेश्वर By Author Pawan Singh

हेलो मेरा नाम प्रशांत दुबे है और मै एक भूत हु जी बिलकुल सही सुना आपने। वैसे तो हम काफी सीधे साधे भूत है लेकिन ज्यादा मिलनसार नहीं है इसलिए हम अपनी भूतिया मण्डली के साथ नहीं रहते। औ...

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देखे कुछ ख्वाब - देखा एक ख्वाब By Bhumika Bhonyare

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चोरी By Neetu Singh Renuka

वह इधर-उधर भटक रहा था। शायद बेमतलब या हो सकता है मतलब से भी। पिछले तीन दिन से वह कोई चोरी नहीं कर पाया था। मिनिस्टर साहब को भी अभी आना था। जाते किसी और बड़े शहर में, आराम से चुनावी...

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जय जवान जय किसान जय विज्ञान By Rajesh Maheshwari

जय जवान-जय किसान-जय विज्ञान मोहनियां गांव का रामसिंह, एक सम्पन्न किसान था। घर में पत्नी, एक नौजवान बेटा और एक बेटी थी। बेटे ने इसी साल कालेज जाना प्रारम्भ किया था। अच्छी खासी खेती...

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वक़्त का खेल By Pawnesh Dixit

कैसे क्रिकेट के खेल में एक कप्तान पर कप्तानी का नशा छा जाता है और मैदान पर गेंदबाजी और बल्लेबाजी में तड़का लगाने के चक्कर में गलत फैसले ले लेता है खामिआज़ा टीम को भुगतना पड़ता है पर...

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सुहाने सफर की ओर। By Vandna Sharma

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पाँचवाँ कप By Neetu Singh Renuka

गुलाबी फूल और हरी पत्तियों वाले इस बोन चाइना के कप को ख़रीदते वक़्त कभी नहीं सोचा था कि यह टूट भी सकता है। कोई नहीं सोचता। कौन सोचेगा भला कि खरीदा जा रहा नाज़ुक सा कप टूट सकता है और ल...

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ईमानदार बेईमानी By Rajesh Maheshwari

ईमानदार बेईमानी एक दिन प्रातः काल स्वर्गलोक में प्रभु के साथ नारद जी भी भ्रमण कर रहे थे। नारद जी से अचानक प्रभु ने कहा- आज मुझे तुम कोई ऐस...

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मित्रता By Rajesh Maheshwari

मित्रता कुसनेर और मोहनियां एक-दूसरे से लगे हुए जबलपुर के पास के दो गांव हैं। कुसनेर के अभयसिंह और मोहनियां के मकसूद के बीच बचपन से ही घनिष्ठ मित्रता थी। वे बचपन से साथ-साथ खेले...

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फातिहा By Rajesh Maheshwari

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ईदी अब्बा By Surendra Tandon

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संन्यास By Neetu Singh Renuka

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नियत By Sonu Kasana

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जो सोचने पर मजबूर करती है। . . . . . ,. . . . .

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हौसलों की उड़ान By Harish Kumar Amit

हौसलों की उड़ान : हरीश कुमार ‘अमित’ कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझ जैसी अनपढ़ स्त्री को भी देश के राष्ट्रपति महोदय के हाथों पुरस्कार पाने का गौरव मिल सकता है, लेकिन ऐस...

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सूखा पेड़ By Ved Prakash Tyagi

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ढाई बजे की बस By Neetu Singh Renuka

ढाई बजे की बस इतनी रात का सफर किसे अच्छा लगता है भला? मगर क्या किया जाए? वहाँ के लिए बस ही रात को दो बजे के बाद मिलती है। वह भी इस शहर से नहीं बल्कि दूसरे शहर जाकर। यह तो वैसे...

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आहिस्ता आहिस्ता By Renu Gupta

"राज, सॉरी, मैं तुम्हारी वो स्पेशल वाली फ्रेंड नहीं बन सकती, मुझे जिंदगी में बहुत कुछ हासिल करना है, अभी फिलहाल मेरी जिंदगी में अफेयर, रोमांस के लिए कोई गुंजाइश नहीं है। अभी XII के...

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