लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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वह बुद्धू लड़का By S Sinha

                                                             वह बुद्धू लड़का      हीरापुर  गाँव में ज्यादातर गरीब किसान रहते थे  .  गाँव न  ज्यादा छोटा न ज्यादा बड़ा था  . करीब 800 ल...

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स्वप्न बसेरा ... हुआ मेरा By उषा जरवाल

दो साल पहले की बात है, जब  हमने गुरुग्राम में अपना नया घर लिया था | हमारा बजट अधिकतम 80 – 90 लाख का ही था लेकिन जब घर खरीदने निकले तो गुरुग्राम जैसी जगह पर इतने बजट में घर तो खूब म...

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बृजलाल की ज़िद By Deepak sharma

छूत के डर से घर वालों ने मां को छत वाला कमरा दे रखा था । हम नीचे वालों को इस कड़े आदेश के साथ,ऊपर अब कोई नहीं जाएगा । मां के पास केवल बहन बनी रहती थीॅ । वह हम पांचों भाइयों से बड़ी...

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आदत By Aditya Kori

हम सभी को कभी न कभी किसी न किसी की आदत जरूर लगी होगी फिर वो चाहे आदत चीजों की हो या फिर इंसानों की पर हम ये भूल जाते है कि ये आदतें अंत में हमारे ही दुख का कारण बन जाती है तो ऐसी ह...

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You Are My Choice - 43 By Butterfly

"व्हॉट वोझ घाट?" काव्या को केबिन में आता देख जय ने पूछा।"नथिंग।" काव्या मुस्कुराते हुए कहने लगी। "उन्होंने जो सोचा था वही हुआ। तो बस वही दिखाने के लिए उन्होंने बुलाया था।""सीरियसली...

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रक्षण By Deepak sharma

मेरी नींद नए आए यात्रियों ने तोड़ी।  “देखो तो यह सवारी कैसे मुंह ढांप कर सो रही है।” “जब कि अभी शाम के आठ ही तो बजे हैं।” दोनों पुरुष स्वर थे। निष्ठुर...

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जंगल, पेड़ और बाज By DINESH KUMAR KEER

  मृत्यु से बड़ा भयजंगल में एक पेड़ पर दो बाज प्रेमपूर्वक रहते थे। दोनों शिकार की तलाश में निकलते और जो भी हाथ लगता शाम को उसे मिल बांटकर खाते। लंबे काल-खंड से यही क्रम चल रहा था। ए...

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डाकखाने में By Deepak sharma

 उन्नीस सौ बानवे के जिन दिनों कस्बापुर के एक पुराने डाकखाने में जब मैं सब पोस्ट मास्टर के पद पर नियुक्त हुआ था,तो मैं नहीं जानता था अस्सी वर्षीय मणिराम मेेरे डाकखाने पर रोज़ क...

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उसकी यादों की तस्वीर By R B Chavda

सर्द सुबह का मौसम था। कमरे में हल्की सी ठंडक थी, लेकिन दिल में एक गर्मी थी, जो उसे याद करने से पैदा हो रही थी। सूरज की हल्की किरणें खिड़की से छनकर कमरे में आ रही थीं, पर मेरे दिल क...

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उत्तराधिकारी By DINESH KUMAR KEER

 राजा का उत्तराधिकारी एक बार की बात है। एक राज्य में नंदाराम नाम का एक राजा हुआ करता था। वह बहुत ईमानदार और साहसी था। उसे अपनी प्रजा से बहुत प्यार था। उसके राज्य में सभी लोग उससे ख...

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प्रबोध By Deepak sharma

  सन उन्नीस सौ पचास का वह दशक साल दर साल नया पन लाता रहा था। हमारी कस्बापुर रोड पर यदि किसी साल बर्फ़ का नया कारखाना खुला तो दूसरे साल कपास से धागा बनाने का। और यदि तीसरे...

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पाठशाला By Kishore Sharma Saraswat

पाठशालाअंग्रेजों का जमाना था। अशिक्षा, गरीबी और मूढ़ता का बोलबाला था। गाँव में जब कभी बाहर से कोई चिट्ठी या पत्र आ जाता तो उसे बाँचने वाला कोई न था। ऐसे में फिर पुरोहित व पाधा के घर...

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प्यार और विश्वास By DINESH KUMAR KEER

 गजराज और मूषकराज की दोस्तीएक बार की बात है, किसी नदी के किनारे एक शहर बसा हुआ था। एक बार वहां बहुत बारिश हुई, जिससे नदी ने अपना रास्ता बदल लिया। इससे शहर में पानी की कमी होने लगी,...

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Cinderella By R B Chavda

मुझे पता है कि आप सबको सिंड्रेला की कहानी पहले से ही मालूम होगी, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिंड्रेला की कहानी में एक गहरा संदेश भी छिपा हुआ है? आज मैं आपके साथ एक नई सिंड्रेला की...

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डिप्रेशन - भाग 2 By Neeta Batham

"में जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हु छोड़ के घर।                   ये क्या की घर की उदासी भी साथ हो गई "वो नन्हा सा बचपन जो खुद अपने मम्मी - पापा के झगड़ों में खोजता है वो एक अकेले कमरे...

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ईमानदारी By DINESH KUMAR KEER

ईमानदारी ही सर्वश्रेष्ठ नीति    एक व्यक्ति काम की खोज में इधर-उधर धक्के खाने के बाद निराश होकर जब घर वापस लौटने लगा तो पीछे से आवाज आयी, ऐ भाई! यहाँ कोई मजदूर मिलेगा क्या?उसने पीछे...

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झुमका गिरा रे By S Sinha

                                     झुमका गिरा रे    सुनील की नयी नयी शादी हुई थी  . अभी तीन दिन पहले ही वह अपनी बीवी नेहा को ससुराल से विदा कर के लाया था  . नेहा की मुंह दिखाई की...

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पारिजात - स्वर्ग से आय पेड़े पौधें By DINESH KUMAR KEER

बाल कहानी - अनमोल पेड़ पौधेराहुल अपने माता - पिता के साथ शहर में रहता था । गर्मी की छुट्टी बिताने अपने गाँव में दादा - दादी के पास आया था । बस स्टॉप से दादाजी का घर काफी दूरी पर था...

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मैं तुलसी तेरे आँगन की By उषा जरवाल

कुछ दिन पहले मुझे 10 – 15 दिनों के लिए मुझे अपने घर से कहीं बाहर जाना पड़ा | वापस आकर देखा तो गमले में लगी तुलसी पूरी तरह सूख गई थी | सोसाइटी के बगीचे में छोटे – छोटे तुलसी के पौधे...

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दीवारों के पार: सूरजपुर की नई सुबह By pinki

सूरजपुर गाँव, जहाँ जाति व्यवस्था ने लोगों की सोच और रिश्तों पर गहरी छाप छोड़ी थी। गाँव के अधिकांश लोग एससी समुदाय के थे, लेकिन समुदाय के भीतर भी कई जातियों का वर्गीकरण था। इस वर्गी...

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फैल गईं अफवाहें By Ashoke Ghosh

  फैल गईं अफवाहें   बहुत दिन पहले यह बंगाल कई छोटे-छोटे राज्यों में बंटा हुआ था। ऐसे ही एक राज्य को अजवनगर कहा जाता था और लघुकर्ण नाम का एक राजा वहां शासन करता था। राजा के पार्षदों...

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दो पत्थरों की कहानी By DINESH KUMAR KEER

दो पत्थरों की कहानीनदी पहाड़ों की कठिन व लम्बी यात्रा के बाद तराई में पहुंची। उसके दोनों ही किनारों पर गोलाकार, अण्डाकार व बिना किसी निश्चित आकार के असंख्य पत्थरों का ढेर सा लगा हुआ...

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मोहब्बत - पार्ट 1 By mohammad sadique

कैसी हो सनाया अब आपकी तबियत कैसी है " "  सनाया से गज़ाला पुछती है। जी पहले से बेहतर है अब फुफ्फू जान। सनाया अपने बिस्तर से पैरों को समेटते हुऐ बैठ जाती है। बैठो ना फुफ्फू आप खडी क्...

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हर सास की एक ही आस - सर्वगुण संपन्न बहू By उषा जरवाल

शहर के बाज़ार में एक बहुत बड़ी इमारत थी, उसमें एक भव्य समारोह का आयोजन किया था | जिस पर लिखा था - “यहाँ से आप अपनी पसंद के अनुसार ‘बहू’ चुन सकती हैं |” देखते ही देखते औरतों का एक हु...

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गरीब किसान By DINESH KUMAR KEER

1. बाल कहानी - सोच में बदलावरामू गरीब किसान था। उसके तीन बच्चे थे। दो लड़के एक लड़की। रामू के माता-पिता भी उसके साथ रहते थे। रामू को अपना परिवार चलाने में बड़ी तंगी का सामना करना प...

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साइकिल और हुनरमन्द By DINESH KUMAR KEER

1. बाल कहानी - साइकिलतीन मित्र थे, राजू, सोनू और पप्पू। तीनों में बड़ी गहरी मित्रता थी। छुट्टी का दिन था। तीनों ने एक योजना बनायी कि, "चलो, क्यों न हम लोग आज साइकिल की दौड़ करते है...

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राजा और दो पुत्रियाँ By DINESH KUMAR KEER

1. बाल कहानी - अनोखा सिक्काएक राजा के दो पुत्रियाँ थीं । दोनों ही बहुत ही समझदार और होशियार तथा उतनी ही सुन्दर थीं । छोटी वाली पुत्री को अपनी सुन्दरता पर बहुत घमण्ड था । वह कहती थी...

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सही या गलत... By Diya Jethwani

कहते हैं इंसान वही जिसमें इंसानियत जिंदा हो.... लेकिन कभी कभी ये इंसानियत हमें सोचने पर मजबूर कर देतीं हैं की क्या हमने सही किया....!! कल किसी काम से बेटी के साथ आरटीओ कार्यालय गयी...

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खुशी का सिर्फ अहसास By DINESH KUMAR KEER

1. लालची कुत्ताएक गाँव में एक कुत्ता था । वह बहुत लालची था । वह भोजन की खोज में इधर - उधर भटकता रहा लेकिन कही भी उसे भोजन नहीं मिला । अंत में उसे एक होटल के बाहर से मांस का एक टुकड...

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छोटा सा अहंकार By Virajgiri Gosai

आज काजल बहुत गुस्से में ऑफिस से निकली थी। गुस्से का कारण कुछ ऐसा था कि जिससे उसे अपने आत्मसम्मान को ठेस पहुंचने का भ्रम हो रहा था। मुंबई की लोकल ट्रेन के लेडीज कोच में खड़ी-खड़ी वह...

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वो यादगार लम्हे, वो सच्ची दोस्ती By R B Chavda

यह कहानी है बचपन की एक ऐसी दोस्ती की, जो मासूमियत और सच्चे विश्वास के धागों से बंधी हुई थी। एक ऐसी दोस्ती, जो आज भी यादों के रूप में दिल में धड़कती है, भले ही वक्त ने उनके रास्ते ज...

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दादीमा की कहानियाँ - 2 By Ashish

दादीना की कहानियाँ, पढ़ने जे बाद मुझे comments अवसता चाहिए... आशिष, concept.shah@gmail.com * प्रेरक प्रसंग ️**!! एक रुपये का सिक्का !!**एक ब्राह्मण व्यक्ति सुबह उठकर मंदिर की ओर जा...

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आडंबर By Deepak sharma

’मां कैसी लगीं? रेवती मेरे परिवार से आज पहली बार मिली है । “असुरक्षित और किसी अस्फुट दबाव से ग्रस्त,” किसी को भी पहली बार मिलने के बाद उस का विश्लेषण और व्याख्या...

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लिव! लिव! लिव! By Deepak sharma

(1)         "विभागाध्यक्षा की ऊंची एड़ी की सैंडिल अपनी धमक के साथ विभाग की ओर तेजी से बढ़ रही थी जहां सुधा अपने अगले पीरियड में पढ़ाए जाने वाले 'ज्वालामुखी&#3...

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My Devil Hubby Rebirth Love - 49 By Naaz Zehra

अब आगे मेरी डॉल जिससे भी प्यार करती है उसका साथ कभी नहीं छोड़ती और वह आपसे भी इतना प्यार करती है वह आपको छोड़कर कभी नहीं जाएगी जैसे वह मुझे छोड़कर नहीं गई रुद्र तुमसे किसने कहा कि...

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कहानियाँ By DINESH KUMAR KEER

1. शेर और चूहाएक जंगल था। जंगल का राजा शेर था। वह पेड़ की छाया में सो रहा था। वहाँ एक चूहा आया। चूहा शेर के ऊपर चढ़ गया। वह शेर के ऊपर उछलने-कूदने लगा। शेर जाग गया। चूहा भागा। शेर...

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शिकंजी - सी ज़िंदगी By उषा जरवाल

एक बार एक आचार्य  जी कक्षा में पढ़ा रहे थे | कक्षा के सभी छात्र रुचिपूर्वक उन्हें सुन रहे थे और उनके द्वारा पूछे गए प्रश्नों के जवाब दे रहे थे | पर उन छात्रों के बीच एक छात्र ऐसा भी...

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जीते जी श्राद्ध ? By उषा जरवाल

कई दिनों से घर में जोर – शोर से तैयारियाँ चल रही थी | माँ – पिताजी की 50वीं वैवाहिक वर्षगाँठ का समारोह जो था | सभी ने इस अवसर पर बोलने के लिए अपनी – अपनी तैयारी पहले से ही कर ली थी...

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वह बुद्धू लड़का By S Sinha

                                                             वह बुद्धू लड़का      हीरापुर  गाँव में ज्यादातर गरीब किसान रहते थे  .  गाँव न  ज्यादा छोटा न ज्यादा बड़ा था  . करीब 800 ल...

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स्वप्न बसेरा ... हुआ मेरा By उषा जरवाल

दो साल पहले की बात है, जब  हमने गुरुग्राम में अपना नया घर लिया था | हमारा बजट अधिकतम 80 – 90 लाख का ही था लेकिन जब घर खरीदने निकले तो गुरुग्राम जैसी जगह पर इतने बजट में घर तो खूब म...

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बृजलाल की ज़िद By Deepak sharma

छूत के डर से घर वालों ने मां को छत वाला कमरा दे रखा था । हम नीचे वालों को इस कड़े आदेश के साथ,ऊपर अब कोई नहीं जाएगा । मां के पास केवल बहन बनी रहती थीॅ । वह हम पांचों भाइयों से बड़ी...

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आदत By Aditya Kori

हम सभी को कभी न कभी किसी न किसी की आदत जरूर लगी होगी फिर वो चाहे आदत चीजों की हो या फिर इंसानों की पर हम ये भूल जाते है कि ये आदतें अंत में हमारे ही दुख का कारण बन जाती है तो ऐसी ह...

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मेरी नींद नए आए यात्रियों ने तोड़ी।  “देखो तो यह सवारी कैसे मुंह ढांप कर सो रही है।” “जब कि अभी शाम के आठ ही तो बजे हैं।” दोनों पुरुष स्वर थे। निष्ठुर...

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जंगल, पेड़ और बाज By DINESH KUMAR KEER

  मृत्यु से बड़ा भयजंगल में एक पेड़ पर दो बाज प्रेमपूर्वक रहते थे। दोनों शिकार की तलाश में निकलते और जो भी हाथ लगता शाम को उसे मिल बांटकर खाते। लंबे काल-खंड से यही क्रम चल रहा था। ए...

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डाकखाने में By Deepak sharma

 उन्नीस सौ बानवे के जिन दिनों कस्बापुर के एक पुराने डाकखाने में जब मैं सब पोस्ट मास्टर के पद पर नियुक्त हुआ था,तो मैं नहीं जानता था अस्सी वर्षीय मणिराम मेेरे डाकखाने पर रोज़ क...

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उसकी यादों की तस्वीर By R B Chavda

सर्द सुबह का मौसम था। कमरे में हल्की सी ठंडक थी, लेकिन दिल में एक गर्मी थी, जो उसे याद करने से पैदा हो रही थी। सूरज की हल्की किरणें खिड़की से छनकर कमरे में आ रही थीं, पर मेरे दिल क...

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उत्तराधिकारी By DINESH KUMAR KEER

 राजा का उत्तराधिकारी एक बार की बात है। एक राज्य में नंदाराम नाम का एक राजा हुआ करता था। वह बहुत ईमानदार और साहसी था। उसे अपनी प्रजा से बहुत प्यार था। उसके राज्य में सभी लोग उससे ख...

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पाठशाला By Kishore Sharma Saraswat

पाठशालाअंग्रेजों का जमाना था। अशिक्षा, गरीबी और मूढ़ता का बोलबाला था। गाँव में जब कभी बाहर से कोई चिट्ठी या पत्र आ जाता तो उसे बाँचने वाला कोई न था। ऐसे में फिर पुरोहित व पाधा के घर...

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प्यार और विश्वास By DINESH KUMAR KEER

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"में जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हु छोड़ के घर।                   ये क्या की घर की उदासी भी साथ हो गई "वो नन्हा सा बचपन जो खुद अपने मम्मी - पापा के झगड़ों में खोजता है वो एक अकेले कमरे...

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ईमानदारी By DINESH KUMAR KEER

ईमानदारी ही सर्वश्रेष्ठ नीति    एक व्यक्ति काम की खोज में इधर-उधर धक्के खाने के बाद निराश होकर जब घर वापस लौटने लगा तो पीछे से आवाज आयी, ऐ भाई! यहाँ कोई मजदूर मिलेगा क्या?उसने पीछे...

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बाल कहानी - अनमोल पेड़ पौधेराहुल अपने माता - पिता के साथ शहर में रहता था । गर्मी की छुट्टी बिताने अपने गाँव में दादा - दादी के पास आया था । बस स्टॉप से दादाजी का घर काफी दूरी पर था...

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कुछ दिन पहले मुझे 10 – 15 दिनों के लिए मुझे अपने घर से कहीं बाहर जाना पड़ा | वापस आकर देखा तो गमले में लगी तुलसी पूरी तरह सूख गई थी | सोसाइटी के बगीचे में छोटे – छोटे तुलसी के पौधे...

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दीवारों के पार: सूरजपुर की नई सुबह By pinki

सूरजपुर गाँव, जहाँ जाति व्यवस्था ने लोगों की सोच और रिश्तों पर गहरी छाप छोड़ी थी। गाँव के अधिकांश लोग एससी समुदाय के थे, लेकिन समुदाय के भीतर भी कई जातियों का वर्गीकरण था। इस वर्गी...

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दो पत्थरों की कहानी By DINESH KUMAR KEER

दो पत्थरों की कहानीनदी पहाड़ों की कठिन व लम्बी यात्रा के बाद तराई में पहुंची। उसके दोनों ही किनारों पर गोलाकार, अण्डाकार व बिना किसी निश्चित आकार के असंख्य पत्थरों का ढेर सा लगा हुआ...

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मोहब्बत - पार्ट 1 By mohammad sadique

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गरीब किसान By DINESH KUMAR KEER

1. बाल कहानी - सोच में बदलावरामू गरीब किसान था। उसके तीन बच्चे थे। दो लड़के एक लड़की। रामू के माता-पिता भी उसके साथ रहते थे। रामू को अपना परिवार चलाने में बड़ी तंगी का सामना करना प...

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राजा और दो पुत्रियाँ By DINESH KUMAR KEER

1. बाल कहानी - अनोखा सिक्काएक राजा के दो पुत्रियाँ थीं । दोनों ही बहुत ही समझदार और होशियार तथा उतनी ही सुन्दर थीं । छोटी वाली पुत्री को अपनी सुन्दरता पर बहुत घमण्ड था । वह कहती थी...

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सही या गलत... By Diya Jethwani

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1. लालची कुत्ताएक गाँव में एक कुत्ता था । वह बहुत लालची था । वह भोजन की खोज में इधर - उधर भटकता रहा लेकिन कही भी उसे भोजन नहीं मिला । अंत में उसे एक होटल के बाहर से मांस का एक टुकड...

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छोटा सा अहंकार By Virajgiri Gosai

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यह कहानी है बचपन की एक ऐसी दोस्ती की, जो मासूमियत और सच्चे विश्वास के धागों से बंधी हुई थी। एक ऐसी दोस्ती, जो आज भी यादों के रूप में दिल में धड़कती है, भले ही वक्त ने उनके रास्ते ज...

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शिकंजी - सी ज़िंदगी By उषा जरवाल

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जीते जी श्राद्ध ? By उषा जरवाल

कई दिनों से घर में जोर – शोर से तैयारियाँ चल रही थी | माँ – पिताजी की 50वीं वैवाहिक वर्षगाँठ का समारोह जो था | सभी ने इस अवसर पर बोलने के लिए अपनी – अपनी तैयारी पहले से ही कर ली थी...

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