सामाजिक कहानियां कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • आवारा हूँ - भाग(१)

    आज बारहवीं का रिजल्ट निकला है और दीपक अपने स्कूल में अव्वल आया है, ये खुशखबरी वो...

  • हम उन्हें जाते हुए देखते रह गए

    सुबोध इनकम टैक्स में कमिश्नर के पद पर कार्यरत थे। उनकी पत्नी सुप्रिया हाउस वाइफ...

  • मज़बूर (भाग 5)

    आँखों पे ब्लू लाइट इफेक्ट का चश्मा लगाए हुए मेहरोत्रा चेयर पे बैठा हुआ कुछ फाइल...

आवारा हूँ - भाग(१) By Saroj Verma

आज बारहवीं का रिजल्ट निकला है और दीपक अपने स्कूल में अव्वल आया है, ये खुशखबरी वो अपनी विधवा माँ और विधवा दादी को बताने घर की ओर दौड़ा चला आया लेकिन तभी उसने दरवाजों के बाहर से सुना...

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हम उन्हें जाते हुए देखते रह गए By Ratna Pandey

सुबोध इनकम टैक्स में कमिश्नर के पद पर कार्यरत थे। उनकी पत्नी सुप्रिया हाउस वाइफ थी। उनका एक ही बेटा था वरुण, जिसे पति पत्नी ने पढ़ा लिखा कर अपने पैरों पर खड़ा कर दिया था। सुबोध और...

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मज़बूर (भाग 5) By Shrikar Dixit

आँखों पे ब्लू लाइट इफेक्ट का चश्मा लगाए हुए मेहरोत्रा चेयर पे बैठा हुआ कुछ फाइल देख रहा होता है,राहुल द्वारा अंदर आने के लिए पूछने पर...मेहरोत्रा: - कम इन,राहुल अंदर आके खड़ा हो ज...

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ऐसा तो सोचा ना था  By Ratna Pandey

साठ वर्ष की आयु पार कर चुकी सुनीता सुंदर होने के साथ ही आकर्षक व्यक्तित्व की भी धनी थी। सुंदर छवि के कारण नारी को कठिनाइयों का सामना करना ही पड़ता है। जवानी की दहलीज़ पर क़दम रखने...

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अंत... एक नई शुरुआत - 7 By निशा शर्मा

अगले दिन सुबह पोस्टमार्टम के बाद मेरी ज़िंदगी सफ़ेद कफ़न में लिपटी हुई मेरी आँखों के सामने ज़मीन पर लेटी हुई थी और मैं बदहवास सी उसके करीब अपनी मौत की आस लगाए बैठी हुई थी।ठहरना जैसा को...

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अकेले ही आना - अंतिम भाग By Ratna Pandey

अकेले ही आना, एक ऐसी कहानी है जिसमें गांव के लोग आस्था और अंध विश्वास के कारण किस तरह पाखंडी स्वामी के चक्रव्यूह में फंस जाते हैं. आशीर्वाद के नाम पर वह किस तरह गांव की बेटियों का...

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काश  By Ratna Pandey

प्यार था, ख़्याल था, चिंता भी थी किंतु यदि कुछ नहीं था तो समय नहीं था, जो कभी किसी के लिए नहीं रुकता। साहिल के पिता आकाश अपनी पत्नी को खो चुके थे इसलिए वह अपने पिता को अकेला छोड़कर...

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कैसी है ये मजबूरी   By Ratna Pandey

पूरी जिंदगी हमारा साथ देने वाले हमारे बुजुर्ग माता पिता अपने अंतिम वक्त में बिलकुल तन्हा रह जाते हैं और हम आंसू बहाते हुए यह सोचते रह जाते हैं कि काश अपनी व्यस्ततम जिंदगी से थोड़ा...

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पलायन (अंतिम किश्त) By Kishanlal Sharma

"क्या करोगे नाम जानकर""जिसके साथ सोना हो उसका नाम तो पता होना चाहिए""शबनम,"हल्की सी मुस्कराहट उसके होठो पर छलकी थी।"बुरा न मानो तो एक बात---"क्या?'"कब से यह पेशा कर रही हो?""खा...

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अंतिम इच्छा (अंतिम किश्त) By Kishanlal Sharma

राजेश ने सब बाते सुन ली थी लेकिन उसने अपनी पत्नी कविता को यह नही बताया था।असलियत का पता चलने पर वह अपने आपको कविता का गुनहगार समझने लगा।वह कविता को चाहता था।प्यार करता था।लेकिन उ...

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जिजीविषा By amit kumar mall

बेडरूम से निकलते समय बीरेन्द्र ने कहा , - जाकर नहाकर , अपने कपड़े पहन कर चली जाओ । बाथरूम में जाकर , उसने साबुन से अपने शरीर को रगड़कर साफ करने लगी ताकि उसके शरीर और मन का मैल साफ ह...

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जन कवि मुकुट विहारी सरोज By ramgopal bhavuk

चर्चित कवि मुकुट विहारी सरोज जी के सानिध्य में रामगोपाल भावुक मुझे डॉ. भगवान स्वरूप चैतन्य जी चर्चित कवि मुकुट विहारी सरोज जी के निवा...

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मीना कुमारी...एक दर्द भरी दास्तां - 8 - अंतिम भाग By Sarvesh Saxena

पाक़ीज़ा फिल्म में एक गाना है जिसकी शूटिंग के दौरान मीना कुमारी की हालत इतनी खराब हो गई कि वह खड़ी भी नहीं हो सकती थी, इसलिए उनकी बॉडी डबल का इस्तेमाल किया गया, फिल्म को इस बखूबी स...

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लौट आईं ख़ुशियाँ By Ratna Pandey

सरिता अपने दोनों बेटे करण और वरुण तथा दोनों बहुओं आशा और प्रीति से हमेशा नाराज़ रहती थी, कारण था ज़रूरत से अधिक अपेक्षा रखना। सरिता को ख़ुश रखने की वे चारों चाहे जितनी भी कोशिश करें...

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सामुदायिक रसोई योजना By Anand M Mishra

अपने देश में प्राचीन काल से ही देश में मंदिरों के माध्यम से सामुदायिक रसोई की भावना रही है। कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं रह जाए, इसके लिए समाज में ‘भंडारे’ की योजना काम करती थी। दुनि...

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बधाई हो.... By Saroj Verma

अभी पिछले रविवार की बात है,मैं अपने दोस्त के घर गया था,मेरे दोस्त बैंक में मैनेजर हैं और उनकी पत्नी भी घरेलू महिला हैं,उनका बड़ा बेटा मेडिकल का स्टूडेंट हैं और छोटा इन्जीनियरिंग कर...

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पाणिग्रहण संस्कार-बदलता स्वरुप By Anand M Mishra

पाणिग्रहण संस्कार के बाद पुरुष तथा स्त्री समाज के समक्ष युगल रूप में रह सकते हैं। यह सामाजिक स्वीकृति के साथ जीवन-यापन करने की व्यवस्था है। यह व्यवस्था सभ्यता के विकास के साथ अस्...

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माँ का प्रसाद By Shwet Kumar Sinha

एक महीने की छुट्टी पर अर्जुन अपने गृह शहर पटना आया था। भारतीय सेना का वह एक जांबाज सिपाही था और उसकी पोस्टिंग लेह लद्दाख में थी। संयुक्त परिवार वाला उसका घर, जिसमें पत्‍‌नी, दो बेट...

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फ़ेसबुकिया लव - (अंतिम भाग) By Kishanlal Sharma

"ऐसा करने की क्या जरूरत है"" जरूरत है।लड़का यहां होता तो भी छानबीन करनी पड़ती।वह ऑस्ट्रेलिया में है तो और भी ज्यादा जरूरत है।जो वो बता रहा है वो सही भी है या नही?"बेटी की वात सुनकर...

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ग़लतफ़हमी - अंतिम भाग By Ratna Pandey

अभी तक आपने पढ़ा माया को दीपा और राहुल के बारे में सब कुछ पता चल गया। अब माया बहुत ख़ुश थी। क्या होगा राहुल और दीपा का पढ़िए इस अंतिम भाग में: - दीपा के कमरे में आते ही उसने प्यार से...

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पश्चाताप  By Ratna Pandey

यह एक ऐसे भाई के पश्चाताप की कहानी है जो अपनी बहन की रक्षा नहीं कर पाया, उसके बाद क्या हुआ ? कैसा हो गया उसका जीवन ? उसने किस तरह से अपने मन में उठे तूफ़ान के साथ संघर्ष किया और किस...

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रक्षाबंधन By Shwet Kumar Sinha

बात इसी रक्षाबंधन की है। एक तो रविवार का दिन और ऊपर से रक्षाबंधन का त्योहार। मन मसोस कर सुबह सुबह उठा और "हमनशी" का अगला भाग अपलोड करके करीब सत्तर किलोमीटर दूर रहने वाली छोटी बहन स...

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वही होगा मेरा पति  By Ratna Pandey

कड़कड़ाती धूप में मेहनत करती यमुना पसीने से तरबतर हो रही थी। तभी खाना खाने की छुट्टी हुई। इतने शरीर तोड़ परिश्रम के बाद उसे जोरों की भूख लगी थी। आज माँई ने क्या साग भेजा होगा, सोचत...

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बसेरा By Deepak sharma

दीपक शर्मा शाम सात बजे बाबू जी अपने दफ्तर से लौटे तो उन्होंने मीना और मनोज को रोते हुए पाया- 'माँ अभी तक घर नहीं पहुँची हैं।राकेश जरूर बाबू जी की स्कूटी की आवाज सुनते ही घर के...

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औघड़ किस्से और कविताएँ-सन्त हरिओम तीर्थ - 15 - अंतिम भाग By ramgopal bhavuk

औघड़ किस्से और कविताएँ-सन्त हरिओम तीर्थ 15 एक अजनबी जो अपना सा लगा परम पूज्य स्वामी हरिओम तीर्थ जी महाराज...

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आवारा हूँ - भाग(१) By Saroj Verma

आज बारहवीं का रिजल्ट निकला है और दीपक अपने स्कूल में अव्वल आया है, ये खुशखबरी वो अपनी विधवा माँ और विधवा दादी को बताने घर की ओर दौड़ा चला आया लेकिन तभी उसने दरवाजों के बाहर से सुना...

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हम उन्हें जाते हुए देखते रह गए By Ratna Pandey

सुबोध इनकम टैक्स में कमिश्नर के पद पर कार्यरत थे। उनकी पत्नी सुप्रिया हाउस वाइफ थी। उनका एक ही बेटा था वरुण, जिसे पति पत्नी ने पढ़ा लिखा कर अपने पैरों पर खड़ा कर दिया था। सुबोध और...

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मज़बूर (भाग 5) By Shrikar Dixit

आँखों पे ब्लू लाइट इफेक्ट का चश्मा लगाए हुए मेहरोत्रा चेयर पे बैठा हुआ कुछ फाइल देख रहा होता है,राहुल द्वारा अंदर आने के लिए पूछने पर...मेहरोत्रा: - कम इन,राहुल अंदर आके खड़ा हो ज...

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ऐसा तो सोचा ना था  By Ratna Pandey

साठ वर्ष की आयु पार कर चुकी सुनीता सुंदर होने के साथ ही आकर्षक व्यक्तित्व की भी धनी थी। सुंदर छवि के कारण नारी को कठिनाइयों का सामना करना ही पड़ता है। जवानी की दहलीज़ पर क़दम रखने...

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अंत... एक नई शुरुआत - 7 By निशा शर्मा

अगले दिन सुबह पोस्टमार्टम के बाद मेरी ज़िंदगी सफ़ेद कफ़न में लिपटी हुई मेरी आँखों के सामने ज़मीन पर लेटी हुई थी और मैं बदहवास सी उसके करीब अपनी मौत की आस लगाए बैठी हुई थी।ठहरना जैसा को...

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अकेले ही आना - अंतिम भाग By Ratna Pandey

अकेले ही आना, एक ऐसी कहानी है जिसमें गांव के लोग आस्था और अंध विश्वास के कारण किस तरह पाखंडी स्वामी के चक्रव्यूह में फंस जाते हैं. आशीर्वाद के नाम पर वह किस तरह गांव की बेटियों का...

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काश  By Ratna Pandey

प्यार था, ख़्याल था, चिंता भी थी किंतु यदि कुछ नहीं था तो समय नहीं था, जो कभी किसी के लिए नहीं रुकता। साहिल के पिता आकाश अपनी पत्नी को खो चुके थे इसलिए वह अपने पिता को अकेला छोड़कर...

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कैसी है ये मजबूरी   By Ratna Pandey

पूरी जिंदगी हमारा साथ देने वाले हमारे बुजुर्ग माता पिता अपने अंतिम वक्त में बिलकुल तन्हा रह जाते हैं और हम आंसू बहाते हुए यह सोचते रह जाते हैं कि काश अपनी व्यस्ततम जिंदगी से थोड़ा...

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पलायन (अंतिम किश्त) By Kishanlal Sharma

"क्या करोगे नाम जानकर""जिसके साथ सोना हो उसका नाम तो पता होना चाहिए""शबनम,"हल्की सी मुस्कराहट उसके होठो पर छलकी थी।"बुरा न मानो तो एक बात---"क्या?'"कब से यह पेशा कर रही हो?""खा...

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अंतिम इच्छा (अंतिम किश्त) By Kishanlal Sharma

राजेश ने सब बाते सुन ली थी लेकिन उसने अपनी पत्नी कविता को यह नही बताया था।असलियत का पता चलने पर वह अपने आपको कविता का गुनहगार समझने लगा।वह कविता को चाहता था।प्यार करता था।लेकिन उ...

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जिजीविषा By amit kumar mall

बेडरूम से निकलते समय बीरेन्द्र ने कहा , - जाकर नहाकर , अपने कपड़े पहन कर चली जाओ । बाथरूम में जाकर , उसने साबुन से अपने शरीर को रगड़कर साफ करने लगी ताकि उसके शरीर और मन का मैल साफ ह...

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जन कवि मुकुट विहारी सरोज By ramgopal bhavuk

चर्चित कवि मुकुट विहारी सरोज जी के सानिध्य में रामगोपाल भावुक मुझे डॉ. भगवान स्वरूप चैतन्य जी चर्चित कवि मुकुट विहारी सरोज जी के निवा...

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मीना कुमारी...एक दर्द भरी दास्तां - 8 - अंतिम भाग By Sarvesh Saxena

पाक़ीज़ा फिल्म में एक गाना है जिसकी शूटिंग के दौरान मीना कुमारी की हालत इतनी खराब हो गई कि वह खड़ी भी नहीं हो सकती थी, इसलिए उनकी बॉडी डबल का इस्तेमाल किया गया, फिल्म को इस बखूबी स...

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लौट आईं ख़ुशियाँ By Ratna Pandey

सरिता अपने दोनों बेटे करण और वरुण तथा दोनों बहुओं आशा और प्रीति से हमेशा नाराज़ रहती थी, कारण था ज़रूरत से अधिक अपेक्षा रखना। सरिता को ख़ुश रखने की वे चारों चाहे जितनी भी कोशिश करें...

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सामुदायिक रसोई योजना By Anand M Mishra

अपने देश में प्राचीन काल से ही देश में मंदिरों के माध्यम से सामुदायिक रसोई की भावना रही है। कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं रह जाए, इसके लिए समाज में ‘भंडारे’ की योजना काम करती थी। दुनि...

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बधाई हो.... By Saroj Verma

अभी पिछले रविवार की बात है,मैं अपने दोस्त के घर गया था,मेरे दोस्त बैंक में मैनेजर हैं और उनकी पत्नी भी घरेलू महिला हैं,उनका बड़ा बेटा मेडिकल का स्टूडेंट हैं और छोटा इन्जीनियरिंग कर...

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पाणिग्रहण संस्कार-बदलता स्वरुप By Anand M Mishra

पाणिग्रहण संस्कार के बाद पुरुष तथा स्त्री समाज के समक्ष युगल रूप में रह सकते हैं। यह सामाजिक स्वीकृति के साथ जीवन-यापन करने की व्यवस्था है। यह व्यवस्था सभ्यता के विकास के साथ अस्...

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माँ का प्रसाद By Shwet Kumar Sinha

एक महीने की छुट्टी पर अर्जुन अपने गृह शहर पटना आया था। भारतीय सेना का वह एक जांबाज सिपाही था और उसकी पोस्टिंग लेह लद्दाख में थी। संयुक्त परिवार वाला उसका घर, जिसमें पत्‍‌नी, दो बेट...

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फ़ेसबुकिया लव - (अंतिम भाग) By Kishanlal Sharma

"ऐसा करने की क्या जरूरत है"" जरूरत है।लड़का यहां होता तो भी छानबीन करनी पड़ती।वह ऑस्ट्रेलिया में है तो और भी ज्यादा जरूरत है।जो वो बता रहा है वो सही भी है या नही?"बेटी की वात सुनकर...

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ग़लतफ़हमी - अंतिम भाग By Ratna Pandey

अभी तक आपने पढ़ा माया को दीपा और राहुल के बारे में सब कुछ पता चल गया। अब माया बहुत ख़ुश थी। क्या होगा राहुल और दीपा का पढ़िए इस अंतिम भाग में: - दीपा के कमरे में आते ही उसने प्यार से...

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पश्चाताप  By Ratna Pandey

यह एक ऐसे भाई के पश्चाताप की कहानी है जो अपनी बहन की रक्षा नहीं कर पाया, उसके बाद क्या हुआ ? कैसा हो गया उसका जीवन ? उसने किस तरह से अपने मन में उठे तूफ़ान के साथ संघर्ष किया और किस...

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रक्षाबंधन By Shwet Kumar Sinha

बात इसी रक्षाबंधन की है। एक तो रविवार का दिन और ऊपर से रक्षाबंधन का त्योहार। मन मसोस कर सुबह सुबह उठा और "हमनशी" का अगला भाग अपलोड करके करीब सत्तर किलोमीटर दूर रहने वाली छोटी बहन स...

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वही होगा मेरा पति  By Ratna Pandey

कड़कड़ाती धूप में मेहनत करती यमुना पसीने से तरबतर हो रही थी। तभी खाना खाने की छुट्टी हुई। इतने शरीर तोड़ परिश्रम के बाद उसे जोरों की भूख लगी थी। आज माँई ने क्या साग भेजा होगा, सोचत...

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बसेरा By Deepak sharma

दीपक शर्मा शाम सात बजे बाबू जी अपने दफ्तर से लौटे तो उन्होंने मीना और मनोज को रोते हुए पाया- 'माँ अभी तक घर नहीं पहुँची हैं।राकेश जरूर बाबू जी की स्कूटी की आवाज सुनते ही घर के...

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औघड़ किस्से और कविताएँ-सन्त हरिओम तीर्थ - 15 - अंतिम भाग By ramgopal bhavuk

औघड़ किस्से और कविताएँ-सन्त हरिओम तीर्थ 15 एक अजनबी जो अपना सा लगा परम पूज्य स्वामी हरिओम तीर्थ जी महाराज...

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