सामाजिक कहानियां कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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मीना कुमारी... दर्द भरी एक दास्तां - 3 By Sarvesh Saxena

बचपन के बाद जवानी में कदम रखने के बाद भी मीना कुमारी का बोझ कम नहीं हुआ, दिन-ब-दिन बोझ और बढ़ता गया मीना कुमारी सुबह से रात तक काम करके जब आप घर आती तो घर में सुकून की बजाए, अब आए...

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ग़लतफ़हमी - भाग ४ By Ratna Pandey

अभी तक आपने पढ़ा दीपा अजय से कुछ छुपा रही थी, आख़िर क्या छुपा रही थी वह? माया ने अंततः क्या फ़ैसला लिया होगा। वह होटल के अंदर गई या नहीं, पढ़िए आगे - उधर अजय के बार-बार पूछने पर भी दी...

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औघड़ किस्से और कविताएँ-सन्त हरिओम तीर्थ - 15 - अंतिम भाग By ramgopal bhavuk

औघड़ किस्से और कविताएँ-सन्त हरिओम तीर्थ 15 एक अजनबी जो अपना सा लगा परम पूज्य स्वामी हरिओम तीर्थ जी महाराज...

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स्वीकृति - 9 By GAYATRI THAKUR

स्वीकृति 9 श्रीकांत के कमरे से निकल कर विनीता किचन में रात के खाने की तैयारी में जुट जाती है परंतु उसका मन श्रीकांत की स्थिति को लेकर चिंतित था वह उसकी स्थिति के विषय में रमन से...

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अंत... एक नई शुरुआत - 3 By निशा शर्मा

समीर,मेरा पहला प्यार,मेरी दुनिया और मेरा जीवनसाथी।समीर को अपनी ज़िंदगी में पाकर मुझे लगा कि जैसे मेरी ज़िंदगी की हर एक परेशानी,हर एक दर्द का इलाज हो गया।मेरी माँ भी मुझे समीर के साथ...

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प्यार की जीत   By Ratna Pandey

एक अत्यंत ही मध्यम वर्गीय शिक्षक की बेटी अंजलि विवाह के बाद अपने साथ दहेज में कुछ ज़्यादा ना ला पाई, यदि कुछ लाई थी तो वह था उसका प्यारा सा मन और विनम्र स्वभाव। अंजलि और अजय का प्रे...

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मुझे तुमसे यह उम्मीद नहीं थी By Ratna Pandey

पुत्र का इंतज़ार करते-करते रुदाली ने चार बेटियों को जन्म दे दिया। हर बार बेटे की उम्मीद रहती, किंतु अभी तक उनकी यह इच्छा पूरी ना हो पाई थी। वह  बेटे की लालसा में हर बार 20-22 घंटे क...

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पुत्र दान By Ratna Pandey

सरोज और राकेश ख़ुशी और ग़म के सागर में गोते लगा रहे थे। उनकी आंखों में बेटी की शादी की अगर खुशी थी तो विदाई की बेला का दुःख भी नज़र आ रहा था। कन्या दान करते वक्त उनके हाथ कांप रहे थे...

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संपोले By Ranjana Jaiswal

माँ कहती थी संपोले साँप से कम खतरनाक नहीं होते |हालांकि उनमें विष साँप से थोड़ा कम होता है पर उनके काटने से भी लहर आती है |संपोले इस मायने में साँप से ज्यादा खतरनाक होते हैं कि छोटे...

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पलायन (पार्ट 1) By Kishanlal Sharma

उसका मन अजीब सा हो रहा था।दिल उदास था।मन मे एक के बाद  एक उटपटांग ख्याल आ रहे थे।दिन भर निठल्ला  इधर उधर घूमने के बाद वह घर लौटा था।कमरे में आते ही उसे सालू की याद आने लग...

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अपनी छत By Ratna Pandey

किराये के मकान में पूरा जीवन काट देने वाले दीनानाथ, वर्षों से अपने मन में ख़ुद की छत की इच्छा दबाये हुए थे। एक-एक करके जवाबदारी आती ही जा रही थीं, जिन्हें निपटाते हुए अब वह पचपन वर्...

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तांगेवाला-दास्ताने दर्द By Kishanlal Sharma

"बाबूजी आओ बेठो"।मुझे देखते ही अधेड़ तांगेवाले ने जोर से आवाज लगायी थी।मैं रोज स्टेशन तांगे से आता जाता था इसलिए सभी तांगेवाले मुझे जानते थे।उस ताँगेवाले का नाम मुझे नही मालूम ल...

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कर्तव्य - 9 By Asha Saraswat

कर्तव्य (9) मॉं ने पूछा-“क्या तुम बड़े लल्ला को बताकर आये हो?” भैया ने कोई उत्तर नहीं दिया और बाहर चले गये । भैया हमारे पास ही रहने लगे, सुबह जाते और शाम को आ...

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आशियाना By Kishanlal Sharma

"यमुना किनारे सुरम्य वातावरण में आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण गेट बंद कालोनी--वह गांव में जनमा पला पढा था लेकिन नौौकरी लगी तो शहर आना पड़ा था।वह पड़ता था तभी उसकी शादी हो गयी थी।...

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तोहफ़ा By Jagruti Joshi

मुंबई सिटी भागदौड़ वाली सब अपने अपने काम में लगे हुए हे,,,,,!! किसी को किसी के लिए थोड़ा भी वक्त निकाल ना भारी पड़ जाता है,,, आम दिनो मे ! पर आज संडे था तो फॅमिली टाईम,,,,, सब ल...

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सोशल मीडिया से लाभ-हानि By Anand M Mishra

बहुत पहले ही हमारे ऋषि-मुनियों ने कह दिया था कि– अति सर्वदा वर्जयेत! बात सोलह आने सही है। कोई भी कार्य यदि ‘अति’ को ध्यान में रखकर किया जाता है तो उसका दुष्परिणाम निकलना स्वाभावि...

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जब निकली दिल से दुआ... By anshu Singh

मौली...उठो बेटा। सुबह के नौ बजने को आए, आज क्लास है न तुम्हारी? मां द्वारा नींद से जगाने की कई कोशिशों के बाद बेटी ने जवाब दिया, नहीं। और उसने करवट ले ली..। आधा-पौन घंटा और बीता......

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कहो पुस्तकालय! कैसे हो : एक निजी संवाद By Anand M Mishra

"कहो पुस्तकालय! कैसे हो : एक निजी संवाद" सोच रहा था कि पुस्तकालय जाऊं तथा वहां की स्थिति को देखूं। लेकिन कार्य की व्यस्तता के कारण जाने का अवसर प्राप्त नहीं हो रहा था। आज अचानक...

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मिडिल क्लास लड़के By hemant Ydv

मुझ जैसे मिडिल क्लास लड़के अक्सर जिम्मेदारियां जल्दी निभाना सीख जाते हैं। रिश्तेदारों के तमाम अड़ंगों के बावजूद मां-बाप का विश्वास कैसे बनाये रखना है इन्हें बखूबी आता है।पापा से खूब...

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बचपन की यादें By Anand M Mishra

दशहरे और दीपावली से से मुझे लगाव है। इस पर्व से मेरे बचपन की यादें जुडी हैं। मन को ताजा रखने के लिए हमेशा याद करता हूँ। इन यादों में मुझे सबसे ज्यादा याद मुझे फूल तोड़ने का आता है...

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ऐसे थे मेरे बाऊजी - (अन्तिम भाग) By Saroj Verma

इधर ब्याह की तैयारियाँ हो रही थीं और उधर दुर्गेश की आत्मा प्रयागी के लिए तड़प रही थी,ज्यों ज्यों ब्याह की तिथि नजदीक आती जा रही थी दुर्गेशप्रताप का दिल डूबता जा रहा था,आखिरकार ब्याह...

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Real Incidents - Incident 4: अखरोट By Anil Patel_Bunny

Incident 4: अखरोटआज से करीबन 2 साल पहले,रोहन अपने दोस्तों के साथ मॉर्निंग शो में फ़िल्म देखने गया था। फ़िल्म खत्म होने के बाद उसने अपने दोस्तों के साथ रेस्टोरेंट में लंच किया। घर वाप...

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सिने संसार और युवा पीढ़ी By Anand M Mishra

पहले तो कोरोना के कारण लंबी बंदिशें लगी। फिर जब सब कुछ सामान्य होने लगा तो एक के बाद एक घटना ऐसी घटनी लगी कि मन खिन्न हो गया। लखीमपुर खीरी की घटना के साथ-साथ हमारी युवा पीढ़ी नशे...

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इन्तजार एक हद तक (महामारी) - 18 By RACHNA ROY

फिर बच्चे इधर उधर बैठे थे उर्मी ने देखते ही कहा चलो सब पढ़ने बैठ जाओ। पढ़ाई बहुत जरूरी है। रवि ने कहा हां चाची जरूर।आप पहले भी हमें ऐसा कहती थी। फिर सभी बच्चे पढ़ने बैठ गए। रमेश ने...

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महामारी के कारण मानसिकता में बदलाव By Anand M Mishra

कोरोना काल में काम करने वालों के मानसिकता में काफी परिवर्तन हुआ है। बिटिया के प्रवेश परीक्षा के सिलसिले में पूर्वोत्तर के एक बड़े शहर में जाना पड़ा। आने-जाने, रहने-खाने-पीने आदि सभ...

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रिश्ते तिज़ारत नहीं होते - 3 - अंतिम भाग By Ranjana Jaiswal

(3) अपने कस्बे की दो घटनाएं आज भी मेरे चित्त पर अंकित हैं। सुचिता मासी ....मेरी माँ की पड़ोसन!अपने समय की बेहद खूबसूरत महिला! धर्म- कर्म, दान- पुण्य, पूजा -पाठ में आस्था और विश...

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दयालु By amit kumar mall

रामेश्वर जी की दयालुता के चर्चे सारी तरफ थे । मैं भी नौकरी में हूँ , लेकिन रिश्तेदारों की नजर में देखे - तो कहाँ रामेश्वर दयाल जी और कहाँ मैं। अब तो मुझे भी लगता है कि कहाँ रामेश्व...

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अम्मा By Saroj Prajapati

"आओ आओ अम्मा! इस बार बहुत दिनों बाद दर्शन दिए तुमने। कहीं चली गई थी क्या!" "अरे, मैं कहां जाऊंगी बहुरिया! वो बहु बीमार थी। बस इसलिए निकलना ना हुआ और सुना बाल बच्चे सब सही!" "हां अम...

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मीना कुमारी... दर्द भरी एक दास्तां - 3 By Sarvesh Saxena

बचपन के बाद जवानी में कदम रखने के बाद भी मीना कुमारी का बोझ कम नहीं हुआ, दिन-ब-दिन बोझ और बढ़ता गया मीना कुमारी सुबह से रात तक काम करके जब आप घर आती तो घर में सुकून की बजाए, अब आए...

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ग़लतफ़हमी - भाग ४ By Ratna Pandey

अभी तक आपने पढ़ा दीपा अजय से कुछ छुपा रही थी, आख़िर क्या छुपा रही थी वह? माया ने अंततः क्या फ़ैसला लिया होगा। वह होटल के अंदर गई या नहीं, पढ़िए आगे - उधर अजय के बार-बार पूछने पर भी दी...

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औघड़ किस्से और कविताएँ-सन्त हरिओम तीर्थ - 15 - अंतिम भाग By ramgopal bhavuk

औघड़ किस्से और कविताएँ-सन्त हरिओम तीर्थ 15 एक अजनबी जो अपना सा लगा परम पूज्य स्वामी हरिओम तीर्थ जी महाराज...

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स्वीकृति - 9 By GAYATRI THAKUR

स्वीकृति 9 श्रीकांत के कमरे से निकल कर विनीता किचन में रात के खाने की तैयारी में जुट जाती है परंतु उसका मन श्रीकांत की स्थिति को लेकर चिंतित था वह उसकी स्थिति के विषय में रमन से...

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अंत... एक नई शुरुआत - 3 By निशा शर्मा

समीर,मेरा पहला प्यार,मेरी दुनिया और मेरा जीवनसाथी।समीर को अपनी ज़िंदगी में पाकर मुझे लगा कि जैसे मेरी ज़िंदगी की हर एक परेशानी,हर एक दर्द का इलाज हो गया।मेरी माँ भी मुझे समीर के साथ...

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प्यार की जीत   By Ratna Pandey

एक अत्यंत ही मध्यम वर्गीय शिक्षक की बेटी अंजलि विवाह के बाद अपने साथ दहेज में कुछ ज़्यादा ना ला पाई, यदि कुछ लाई थी तो वह था उसका प्यारा सा मन और विनम्र स्वभाव। अंजलि और अजय का प्रे...

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मुझे तुमसे यह उम्मीद नहीं थी By Ratna Pandey

पुत्र का इंतज़ार करते-करते रुदाली ने चार बेटियों को जन्म दे दिया। हर बार बेटे की उम्मीद रहती, किंतु अभी तक उनकी यह इच्छा पूरी ना हो पाई थी। वह  बेटे की लालसा में हर बार 20-22 घंटे क...

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पुत्र दान By Ratna Pandey

सरोज और राकेश ख़ुशी और ग़म के सागर में गोते लगा रहे थे। उनकी आंखों में बेटी की शादी की अगर खुशी थी तो विदाई की बेला का दुःख भी नज़र आ रहा था। कन्या दान करते वक्त उनके हाथ कांप रहे थे...

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माँ कहती थी संपोले साँप से कम खतरनाक नहीं होते |हालांकि उनमें विष साँप से थोड़ा कम होता है पर उनके काटने से भी लहर आती है |संपोले इस मायने में साँप से ज्यादा खतरनाक होते हैं कि छोटे...

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अपनी छत By Ratna Pandey

किराये के मकान में पूरा जीवन काट देने वाले दीनानाथ, वर्षों से अपने मन में ख़ुद की छत की इच्छा दबाये हुए थे। एक-एक करके जवाबदारी आती ही जा रही थीं, जिन्हें निपटाते हुए अब वह पचपन वर्...

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"बाबूजी आओ बेठो"।मुझे देखते ही अधेड़ तांगेवाले ने जोर से आवाज लगायी थी।मैं रोज स्टेशन तांगे से आता जाता था इसलिए सभी तांगेवाले मुझे जानते थे।उस ताँगेवाले का नाम मुझे नही मालूम ल...

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कर्तव्य - 9 By Asha Saraswat

कर्तव्य (9) मॉं ने पूछा-“क्या तुम बड़े लल्ला को बताकर आये हो?” भैया ने कोई उत्तर नहीं दिया और बाहर चले गये । भैया हमारे पास ही रहने लगे, सुबह जाते और शाम को आ...

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जब निकली दिल से दुआ... By anshu Singh

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"कहो पुस्तकालय! कैसे हो : एक निजी संवाद" सोच रहा था कि पुस्तकालय जाऊं तथा वहां की स्थिति को देखूं। लेकिन कार्य की व्यस्तता के कारण जाने का अवसर प्राप्त नहीं हो रहा था। आज अचानक...

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मिडिल क्लास लड़के By hemant Ydv

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बचपन की यादें By Anand M Mishra

दशहरे और दीपावली से से मुझे लगाव है। इस पर्व से मेरे बचपन की यादें जुडी हैं। मन को ताजा रखने के लिए हमेशा याद करता हूँ। इन यादों में मुझे सबसे ज्यादा याद मुझे फूल तोड़ने का आता है...

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इधर ब्याह की तैयारियाँ हो रही थीं और उधर दुर्गेश की आत्मा प्रयागी के लिए तड़प रही थी,ज्यों ज्यों ब्याह की तिथि नजदीक आती जा रही थी दुर्गेशप्रताप का दिल डूबता जा रहा था,आखिरकार ब्याह...

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दयालु By amit kumar mall

रामेश्वर जी की दयालुता के चर्चे सारी तरफ थे । मैं भी नौकरी में हूँ , लेकिन रिश्तेदारों की नजर में देखे - तो कहाँ रामेश्वर दयाल जी और कहाँ मैं। अब तो मुझे भी लगता है कि कहाँ रामेश्व...

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अम्मा By Saroj Prajapati

"आओ आओ अम्मा! इस बार बहुत दिनों बाद दर्शन दिए तुमने। कहीं चली गई थी क्या!" "अरे, मैं कहां जाऊंगी बहुरिया! वो बहु बीमार थी। बस इसलिए निकलना ना हुआ और सुना बाल बच्चे सब सही!" "हां अम...

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