सामाजिक कहानियां कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • किन्ने

    डॉ. सूर्यपाल सिंह की कहानी ‘किन्ने’ समाज की विसंगतियों पर एक तीखी टिप्पणी है। सब...

  • ईमानदारी और शराफत पर ठहाके

    ईमानदारी और शराफत पर ठहाके एक ही शहर में रहने वाले आदर्श और अशोक ने साथ-साथ पढ़ा...

  • मुजाहिदा - ह़क की जंग - भाग 2

    भाग 2उसने नजर उठा कर पूरे घर का चप्पा-चप्पा निहारा था। दीवारों को हाथ से छुआ था।...

नटिनी By नंदलाल मणि त्रिपाठी

जान्हवी को ना जाने क्या हो गया था अनिरुद्ध से मिलने के बाद वह माँ जंगिया को समाज मे नारी के साथ विकसित एव पढ़े लिखे सभ्य समाज द्वारा किये जा रहे भेद भाव को विशेषकर आदिवासी नारी के प...

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किन्ने By Dr. Suryapal Singh

डॉ. सूर्यपाल सिंह की कहानी ‘किन्ने’ समाज की विसंगतियों पर एक तीखी टिप्पणी है। सबसे कमजोर व्यक्ति भी अपना धर्म बदल कर कुछ पाने की इच्छा नहीं रखता है। ईमान ही उसका धर्म है। कैसे उसे...

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ईमानदारी और शराफत पर ठहाके By Vijay Tiwari Kislay

ईमानदारी और शराफत पर ठहाके एक ही शहर में रहने वाले आदर्श और अशोक ने साथ-साथ पढ़ाई की थी। संयोगवश अशोक अपने दबंग पिताजी की धन-संपत्ति और राजनीतिक रौब के चलते एक चर्चित नेता बन गया।...

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युगांतर - भाग 19 By Dr Dilbagh Virk

रश्मि के घर आने के बाद रमन को तो जैसे नया जीवन मिल गया। यशवंत का स्कूल में दाखिला करवा दिया गया। यशवंत के स्कूल जाने के बाद वह रश्मि को संभालने में व्यस्त रहती। यशवंत के आने के बाद...

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मुजाहिदा - ह़क की जंग - भाग 2 By Chaya Agarwal

भाग 2उसने नजर उठा कर पूरे घर का चप्पा-चप्पा निहारा था। दीवारों को हाथ से छुआ था। आइने को देख कर आँखें छलछला पड़ी थीं, ये वही आइना था जिसमें सुबह-शाम वह दौड़ी-छूटी खुद को निहारा करती...

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बासी खाना By Aman Kumar

अमन कुमार त्यागी चारों ओर हाहाकार मचा था। शहर का एक भी अस्पताल ऐसा नहीं था जिसमें संक्रमित मरीजों को भर्ती न कराया गया हो। पत्रकारों के लिए यह अच्छी ख़बर थी और चिकित्सकों के लिए अच्...

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यह बंधन नही है - 4 By Kishanlal Sharma

औरत का अकेले रहना पहले भी आसान नही था और आज भी नही है।अकेली औरत को अनेक समस्यों का साम्बा करना पड़ता है।अनेक परेशानी आती है अकेली औरत के सामने।मुझे भी अनेक छोटी बड़ी मुसीबतों परेशानि...

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संस्कार By Aman Kumar

अमन कुमार त्यागी संदीप को क्रोध आ गया था। वह सीधा बाबू जी के पास पहँुचा और बिना किसी भूमिका के बरसना शुरू हो गया- ‘हद हो गई बाबू जी! अलका भी आख़िर इंसान ही तो है.... मुन्ना.... मैं...

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वैशाली By Aman Kumar

अमन कुमार त्यागी भारतीय संविधान ने वैशाली को इतना अधिकार तो दिला ही दिया था कि वह चुनाव जीत गई और मंत्री बन गई थी। शपथ समारोह के बाद अपने नगर का उसका यह पहला दौरा था। जब वह डाक बंग...

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बेसहारा By Aman Kumar

अमन कुमार त्यागी जनवरी की कँपकँपा देने वाली सर्दी थी। मैंने स्वेटर और जैकेट पहने होने के बावजूद सर्दी से ठिठुरन का अहसास किया। चाय पीने का मन हुआ और एक मित्र के साथ छोटे से होटल मे...

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नीड़ By Dr. Suryapal Singh

डॉ. सूर्यपाल सिंह की संवेदनशील कहानी ‘नीड़।’ ‘नीड़’ कहानी बड़े पेड़ों के कटते जाने के कारण पक्षियों के सामने उत्पन्न संकट को रेखांकित करती है। कपोत-कपोती के माध्यम से केवल पक्षियों...

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बंजर By Aman Kumar

  अमन कुमार त्यागी जिस्म को झुलसा देने वाली तेज़ धूप थी। मेरे कदम तेज़ी से आगे बढ़ते चले जा रहे थे। दिमाग़ में एक साथ अनगिनत सवाल थे। क्या पति परमेश्वर ही होता है, भले ही वो पत्नी को ज...

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अकेला‌ चिड़ा By Yogesh Kanava

डाली सातवीं कक्षा की छात्रा, इस बार ही एक नया विषय सिलेबस में जुड़ा है आज उसी की कक्षा है। मैडम भी थोड़ी सी सोचती सी लड़कियों को इस विषय को बताने के लिए शुरू कहां से करूं। कुछ सोचते स...

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कजरी By Vishram Goswami

कजरी               दीपावली के बाद दिसंबर के प्रथम सप्ताह में ठीक ठंड पड़ने लगी थी। राते थोड़ी बड़ी हो गई थी। जल्दी सुबह जब भ्रमण के लिए निकला तो कस्बे के मुख्य बाजार वाली सड़क पर अ...

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हादसा - भाग 8 - अंतिम भाग By Ratna Pandey

उस हादसे को हुए जब लगभग एक हफ़्ता बीत गया तो गोताखोरों ने भी जवाब दे दिया। वे ना तो प्रकाश को ढूँढ पाए ना उसके पार्थिव शरीर को। पूरा परिवार अंतिम बार प्रकाश की एक झलक देखना चाहता था...

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अरुण- डूबता सूरज!! By Munish Sharma

अरुण- डूबता सूरज!! --------------------------- ----भाग एक- गांव छोड़ना----अरूणः मां मैं कल सुबह खोड़ा जीजी जीजाजी के पास जाऊंगा। कुछ भिजवा हो तो झोले में रख दियो। पापा से कुछ पैसे भ...

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उसके हिस्से का दुःख By Aman Kumar

अमन कुमार त्यागी सरिता सौम्य एवं सुशील लड़की थी। वह अपने बहन-भाइयों में सबसे बड़ी होने के कारण सबसे अधिक समझदार भी थी। जब भी पिताजी कुछ खाने की चीजें़ लाते वह अपनी बहन व भाइयों को ही...

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मन न भये दस बीस By sudha jugran

“मन न भये दस बीस”आरुषि ने ट्रैक सूट पहना कटे बालों को पोनी बना कर हेयर बैंड के हवाले किया। स्पोर्टस शूज के तस्मे कसे। एक झलक खुद को शीशे में देखा और फ्लैट से बाहर हो ली। सामने वाले...

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जानकारी ही बचाव By Aman Kumar

अमन कुमार त्यागी नीता को मायके आए पूरे पाँच महीने बीत चुके थे। इतने दिन मायके में बिताना समाज मेें अच्छा नहीं माना जाता है। मुहल्ले की औरतों में कानाफूसी शुरू हो गई थी। कोई कहती- ‘...

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दिव्या By Aman Kumar

अमन कुमार त्यागी -‘डाॅक्टर! मुझे मरने में और कितना समय लगेगा?’ -‘तुम जल्दी ही अच्छी हो जाओगी।’ -‘नहीं डाॅक्टर, मैं अब कभी भी अच्छी नहीं हो सकती। मुझे रोज़ मरना पड़े, उससे बेहतर है......

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बहू मैं चटोरापन करती तो आज तुम्हारी ये हैसियत ना होती By Saroj Prajapati

सरला तू तो बड़ी बातों को मन में रखती है। बता रोज हमारे पास बैठती है लेकिन एक बार भी नहीं बताया कि इतवार को तुम कीर्तन करा रहे हो!! अपनी पड़ोसन के मुंह से कीर्तन की बात सुन सरला जी...

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ऑनर किलिंग By Aman Kumar

अमन कुमार त्यागी रात किसी को बुरी नहीं लगती क्योंकि सभी जानते हैं कि सुबह होनी ही है। सुबह का इंतज़ार रात्रि को मजे़दार बना देता है। लेकिन जिसे पता हो कि अब सुबह कभी नहीं होगी, उसके...

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दहेज़ के बदले By Aman Kumar

अमन कुमार त्यागी समीर मेहनती युवक था। एमए करने के बाद उसने नौकरी तलाशने में समय बर्बाद नहीं किया। बिना किसी शर्म और दिखावे के उसे जो भी काम मिला, करता गया। वह निम्न मध्यम वर्गीय मा...

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वनवासी By नंदलाल मणि त्रिपाठी

आशीष सनातन दीक्षित जी से महाकाल लौटने की अनुमति लेने के लिए गया सनातन जी बहुत भारी मन से कहते है बाल गोपाल आप आये कितने सुखद अनुभूतियों को लेकर जिसे ओंकारेश्वरवासी कभी विस्मृत नही...

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प्रकृति के साथ विज्ञान By Dhruv Prajapati

-- कई वर्ष पूर्व हमारा देश और समाज को विज्ञान की छाया मिलना असंभव था । लेकिन इस देश की हरियाली और स्वच्छता इस देश की कारण बनी हुई है । तो आज स्वच्छ और हरित समाज के लिए विज्ञान ही ज...

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भाग्यरेखा By Vishram Goswami

भाग्यरेखा अपने घर की बालकनी में बैठा मनोहर, बाहर आंगन में लगे नीम के पेड़ की डाल पर बने घोसले से बाहर , छोटी सी टहनी पर बैठे चिड़ा की ओर एकटक देखे जा रहा था । उस चिड़े को देखते हुए...

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आंसु पश्चाताप के - भाग 15 - अंतिम भाग By Deepak Singh

जब वक्त बेरहम होता है तो जो भी उसकी चपेट में आता है , वह उसे नहीं छोड़ता , ठीक वैसे ही प्रकाश के साथ हुआ । प्रकाश अपनी बाइक से अपने पुत्र राहुल से मिलने जा रहा था , रास्ते में सामन...

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दोनों आधे-अधूरे By Yogesh Kanava

हमेशा की तरह मैं खड़की में बैठा दूर आसमान से उभरते चाँद को देख रहा था। चाँद आधा-सा, अधूरा-सा, फिर अपने ग़म की परछाई को छुपाता-सा। शायद उसे भी यह मालूम था कि मैं रोज़ाना की तरह ही उसका...

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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय By Guri baba

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय देश का एक बड़ा विश्वविद्यालय है। पंजाब के तत्कालीन राज्यपाल चंद्रेश्वर प्रसाद नारायण सिंह ने भारतीय संस्कृति और परंपरा को पोषित करने के लिए 11 जनवरी 1957...

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बेड नम्बर ग्यारह By Yogesh Kanava

आज फिर से दोनों माँ बेटियों में तकरार को रही थी, सुबह से ही बेटी ने माँ से कहा था कि नाश्ता कर लो लेकिन मां ने कहा था नहीं बेटा आज तो करवा चौथ है। चाॅंद देखकर ही कुछ खाऊंगी, इस इसी...

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नैनावती By Aman Kumar

अमन कुमार एक दिन मैं कनाॅट प्लेस के मंडी हाऊस बस स्टैंड पर खड़ा था। मुझे लक्ष्मीनगर जाना था मगर एक भी बस ऐसी नहीं आ रही थी जिसमें किसी और सवारी के चढ़ने की गुंजाइश हो मगर फिर भी सवार...

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इज्जत का बंटवारा By Kishanlal Sharma

"मेहनत करके पैसा कमाते हो।सारी कमाई बड़े भाई के हवाले कर देते हो।जरूरत पड़ने पर भाई के आगे भिखारी की तरह हाथ पसारना पड़ता है।इससे बढ़िया अलग क्यो नही हो जाते?"मोहन की बात का समर्थन रमे...

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भगवान की लाठी By Aman Kumar

अमन कुमार एक मौहल्ले में दो महिलाएं रहती थीं। एक का नाम था सावित्री और दूसरी का नाम था कांति। दोनों का स्वभाव एक दूसरे के विपरीत था। सावित्री सीधी-सच्ची एवं सि(ांतवादी महिला थी जबक...

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तीन बीघा जमीन By Vishram Goswami

तीन बीघा जमीन सायं ढलने लगी थी, खेतीहर किसान अपने खेतों से लौटने लगे थे, चरवाहे भेड़ - बकरियों, गाय- भैंसों के झुंड लिए जंगल से वापसी कर रहे थे, कच्चे दगडों में उनके खुरों से बालू...

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नटिनी By नंदलाल मणि त्रिपाठी

जान्हवी को ना जाने क्या हो गया था अनिरुद्ध से मिलने के बाद वह माँ जंगिया को समाज मे नारी के साथ विकसित एव पढ़े लिखे सभ्य समाज द्वारा किये जा रहे भेद भाव को विशेषकर आदिवासी नारी के प...

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किन्ने By Dr. Suryapal Singh

डॉ. सूर्यपाल सिंह की कहानी ‘किन्ने’ समाज की विसंगतियों पर एक तीखी टिप्पणी है। सबसे कमजोर व्यक्ति भी अपना धर्म बदल कर कुछ पाने की इच्छा नहीं रखता है। ईमान ही उसका धर्म है। कैसे उसे...

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ईमानदारी और शराफत पर ठहाके By Vijay Tiwari Kislay

ईमानदारी और शराफत पर ठहाके एक ही शहर में रहने वाले आदर्श और अशोक ने साथ-साथ पढ़ाई की थी। संयोगवश अशोक अपने दबंग पिताजी की धन-संपत्ति और राजनीतिक रौब के चलते एक चर्चित नेता बन गया।...

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युगांतर - भाग 19 By Dr Dilbagh Virk

रश्मि के घर आने के बाद रमन को तो जैसे नया जीवन मिल गया। यशवंत का स्कूल में दाखिला करवा दिया गया। यशवंत के स्कूल जाने के बाद वह रश्मि को संभालने में व्यस्त रहती। यशवंत के आने के बाद...

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मुजाहिदा - ह़क की जंग - भाग 2 By Chaya Agarwal

भाग 2उसने नजर उठा कर पूरे घर का चप्पा-चप्पा निहारा था। दीवारों को हाथ से छुआ था। आइने को देख कर आँखें छलछला पड़ी थीं, ये वही आइना था जिसमें सुबह-शाम वह दौड़ी-छूटी खुद को निहारा करती...

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बासी खाना By Aman Kumar

अमन कुमार त्यागी चारों ओर हाहाकार मचा था। शहर का एक भी अस्पताल ऐसा नहीं था जिसमें संक्रमित मरीजों को भर्ती न कराया गया हो। पत्रकारों के लिए यह अच्छी ख़बर थी और चिकित्सकों के लिए अच्...

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यह बंधन नही है - 4 By Kishanlal Sharma

औरत का अकेले रहना पहले भी आसान नही था और आज भी नही है।अकेली औरत को अनेक समस्यों का साम्बा करना पड़ता है।अनेक परेशानी आती है अकेली औरत के सामने।मुझे भी अनेक छोटी बड़ी मुसीबतों परेशानि...

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अमन कुमार त्यागी संदीप को क्रोध आ गया था। वह सीधा बाबू जी के पास पहँुचा और बिना किसी भूमिका के बरसना शुरू हो गया- ‘हद हो गई बाबू जी! अलका भी आख़िर इंसान ही तो है.... मुन्ना.... मैं...

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वैशाली By Aman Kumar

अमन कुमार त्यागी भारतीय संविधान ने वैशाली को इतना अधिकार तो दिला ही दिया था कि वह चुनाव जीत गई और मंत्री बन गई थी। शपथ समारोह के बाद अपने नगर का उसका यह पहला दौरा था। जब वह डाक बंग...

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बेसहारा By Aman Kumar

अमन कुमार त्यागी जनवरी की कँपकँपा देने वाली सर्दी थी। मैंने स्वेटर और जैकेट पहने होने के बावजूद सर्दी से ठिठुरन का अहसास किया। चाय पीने का मन हुआ और एक मित्र के साथ छोटे से होटल मे...

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अकेला‌ चिड़ा By Yogesh Kanava

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कजरी By Vishram Goswami

कजरी               दीपावली के बाद दिसंबर के प्रथम सप्ताह में ठीक ठंड पड़ने लगी थी। राते थोड़ी बड़ी हो गई थी। जल्दी सुबह जब भ्रमण के लिए निकला तो कस्बे के मुख्य बाजार वाली सड़क पर अ...

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हादसा - भाग 8 - अंतिम भाग By Ratna Pandey

उस हादसे को हुए जब लगभग एक हफ़्ता बीत गया तो गोताखोरों ने भी जवाब दे दिया। वे ना तो प्रकाश को ढूँढ पाए ना उसके पार्थिव शरीर को। पूरा परिवार अंतिम बार प्रकाश की एक झलक देखना चाहता था...

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मन न भये दस बीस By sudha jugran

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अमन कुमार त्यागी समीर मेहनती युवक था। एमए करने के बाद उसने नौकरी तलाशने में समय बर्बाद नहीं किया। बिना किसी शर्म और दिखावे के उसे जो भी काम मिला, करता गया। वह निम्न मध्यम वर्गीय मा...

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वनवासी By नंदलाल मणि त्रिपाठी

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भाग्यरेखा By Vishram Goswami

भाग्यरेखा अपने घर की बालकनी में बैठा मनोहर, बाहर आंगन में लगे नीम के पेड़ की डाल पर बने घोसले से बाहर , छोटी सी टहनी पर बैठे चिड़ा की ओर एकटक देखे जा रहा था । उस चिड़े को देखते हुए...

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आंसु पश्चाताप के - भाग 15 - अंतिम भाग By Deepak Singh

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दोनों आधे-अधूरे By Yogesh Kanava

हमेशा की तरह मैं खड़की में बैठा दूर आसमान से उभरते चाँद को देख रहा था। चाँद आधा-सा, अधूरा-सा, फिर अपने ग़म की परछाई को छुपाता-सा। शायद उसे भी यह मालूम था कि मैं रोज़ाना की तरह ही उसका...

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इज्जत का बंटवारा By Kishanlal Sharma

"मेहनत करके पैसा कमाते हो।सारी कमाई बड़े भाई के हवाले कर देते हो।जरूरत पड़ने पर भाई के आगे भिखारी की तरह हाथ पसारना पड़ता है।इससे बढ़िया अलग क्यो नही हो जाते?"मोहन की बात का समर्थन रमे...

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भगवान की लाठी By Aman Kumar

अमन कुमार एक मौहल्ले में दो महिलाएं रहती थीं। एक का नाम था सावित्री और दूसरी का नाम था कांति। दोनों का स्वभाव एक दूसरे के विपरीत था। सावित्री सीधी-सच्ची एवं सि(ांतवादी महिला थी जबक...

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तीन बीघा जमीन By Vishram Goswami

तीन बीघा जमीन सायं ढलने लगी थी, खेतीहर किसान अपने खेतों से लौटने लगे थे, चरवाहे भेड़ - बकरियों, गाय- भैंसों के झुंड लिए जंगल से वापसी कर रहे थे, कच्चे दगडों में उनके खुरों से बालू...

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