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एपिसोड 6 अधूरी कहानी का अंतिम मोड़हवेली अब पूरी तरह जीवित लग रही थी। दीवारें सां...
Kabir पूरी रास्ते गाड़ी ड्राइव करता है,पास बैठी वाणी खिड़की के बाहर देखती रहती ह...
कानपुर की कड़कड़ाती ठंड में जब सूरज की पहली किरण गंगा के घाटों को छूती है, तब शह...
जब बच्चे गलतियाँ करते हैं या कुछ गलत करते हैं, तब सच्चा रास्ता यह है की आप उनसे...
ऑफिस में आज फिर सन्नाटा था…सिर्फ दो लोग थे कृष्णा… और सिद्धिका।सिद्धिका टेबल के...
--------------चारू सांसे रोके खडी थी। उसे समझ नही आ रहा था कि नव्या ने उसे सच बत...
पेड़ की दरार एक झटके में पूरी तरह फट गई और उसके भीतर कैद वह विकृत आकृति भारी आवा...
अध्याय 6: अधूरेपन की पूर्णतारूपा का डिजिटल दुनिया से अचानक गायब हो जाना भार्गव क...
एपिसोड 5: एक सच्चा मददगार और वफ़ादारी का साया"दुश्मन जब चारों तरफ मौत का जाल बिछ...
एपिसोड 16: अंधेरे की जड़शहर का डरकब्रगाह से लौटने के बाद रोहन को लगा कि सब शांत...
गोदान हिंदी के उपन्यास-साहित्य के विकास का उज्वलतम प्रकाशस्तंभ है। गोदान के नायक और नायिका होरी और धनिया के परिवार के रूप में हम भारत की एक विशेष संस्कृति को सजीव और साकार पाते हैं...
समय का पहिया बीसवीं सदी मै लिखी गई कहानियाँ -हिस्से का दूध -तनी हुई मुठ्ठियाँ -शासन -अस्तित्वहीन नहीं -अपनी अपनी मौत -नियति
लाला मदनमोहन एक अंग्रेजी सौदागर की दुकानमैं नई, नई फाशन का अंग्रेजी अस्बाब देख रहे हैं. लाला ब्रजकिशोर, मुन्शी चुन्नीलाल और मास्टर शिंभूदयाल उन्के साथ हैं. मिस्टर ब्राइट ! य...
मेरी सारी जिन्दगी घूमने में ही बीती है। इस घुमक्कड़ जीवन के तीसरे पहर में खड़े होकर, उसके एक अध्याापक को सुनाते हुए, आज मुझे न जाने कितनी बातें याद आ रही हैं। यों घूमते-फिरते ही तो म...
दुर्गादास एक उपन्यास है जो एक वीर व्यक्ति दुर्गादास राठौड़ के जीवन पर मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित है। इसे एक वीर गाथा भी कह सकते हैं जिससे हमें कई सीख मिलती है। यह बाल साहित्य के अ...
जिसने पुस्तक अौर पैन को घर-घर पहुँचाकर, घाटी के विकास की नई गाथा लिख दी...
अथ सत्यहरिश्चन्द्र (मंगलाचरण) सत्यासक्त दयाल द्विज प्रिय अघ हर सुख कन्द। जनहित कमला तजन जय शिव नृप कवि हरिचन्द1 ।। 1 ।। (नान्दी के पीछे सूत्राधार2 आता है)
Part 1 - Chandramauli - Shuba Ka Chandramauli ‘‘शुभा एक बात तो बता।’’ मैंने प्रश्न भरी दृष्टि से उन्हें देखा। वह बोलीं, ‘‘तेरे ससुराल वालों ने तुझे क्यों छोड़ दिया?’’ इतना सुनत...
नाना नानी की कहानियाँ (भाग - १) - वर्षा जयरथ
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