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Featured Books

हीर की प्रेम कहानी By bhatt khyati

हीर की प्रेम कहानी १

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स्वाभिमानी By Ivan Turgenev

बुढ़ापा आ गया है, बीमार भी हूं और अब मेरे विचार अक्‍सर मृत्‍यु की ओर ही जाया करते हैं जो दिन-ब-दिन मेरे पास आ रही है। कदाचित् ही मैं भूतकाल के संबंध में सोचता हूं और शायद ही कभी मै...

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सियाह हाशिए By BALRAM AGARWAL

‘सियाह हाशिये’ पाकिस्तान में बस जाने के बाद मंटो की तीसरी किताब थी जो ‘मकतबा-ए-जदीद’ से प्रकाशित हुई। सन् 1951 तक यह उनकी सातवीं किताब थी। वीभत्सता, उलझन, बेज़ारी, नफ़रत, दुख और क्...

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गोदान By Munshi Premchand

गोदान हिंदी के उपन्यास-साहित्य के विकास का उज्वलतम प्रकाशस्तंभ है। गोदान के नायक और नायिका होरी और धनिया के परिवार के रूप में हम भारत की एक विशेष संस्कृति को सजीव और साकार पाते हैं...

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समय का पहिया By Madhudeep

समय का पहिया

बीसवीं सदी मै लिखी गई कहानियाँ

-हिस्से का दूध
-तनी हुई मुठ्ठियाँ
-शासन
-अस्तित्वहीन नहीं
-अपनी अपनी मौत
-नियति

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परीक्षा-गुरु By Lala Shrinivas Das

लाला मदनमोहन एक अंग्रेजी सौदागर की दुकानमैं नई, नई फाशन का अंग्रेजी अस्‍बाब देख रहे हैं. लाला ब्रजकिशोर, मुन्शी चुन्‍नीलाल और मास्‍टर शिंभूदयाल उन्‍के साथ हैं.
मिस्‍टर ब्राइट ! य...

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श्रीकांत By Sarat Chandra Chattopadhyay

मेरी सारी जिन्दगी घूमने में ही बीती है। इस घुमक्कड़ जीवन के तीसरे पहर में खड़े होकर, उसके एक अध्याापक को सुनाते हुए, आज मुझे न जाने कितनी बातें याद आ रही हैं। यों घूमते-फिरते ही तो म...

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दुर्गादास By Munshi Premchand

दुर्गादास एक उपन्यास है जो एक वीर व्यक्ति दुर्गादास राठौड़ के जीवन पर मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित है। इसे एक वीर गाथा भी कह सकते हैं जिससे हमें कई सीख मिलती है। यह बाल साहित्य के अ...

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बहादुर बेटी By Anand Vishvas

जिसने पुस्तक अौर पैन को घर-घर पहुँचाकर, घाटी के विकास की नई गाथा लिख दी...

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सत्य हरिश्चन्द्र By Bhartendu Harishchandra

अथ सत्यहरिश्चन्द्र
(मंगलाचरण)
सत्यासक्त दयाल द्विज प्रिय अघ हर सुख कन्द।
जनहित कमला तजन जय शिव नृप कवि हरिचन्द1 ।। 1 ।।
(नान्दी के पीछे सूत्राधार2 आता है)

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हीर की प्रेम कहानी By bhatt khyati

हीर की प्रेम कहानी १

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स्वाभिमानी By Ivan Turgenev

बुढ़ापा आ गया है, बीमार भी हूं और अब मेरे विचार अक्‍सर मृत्‍यु की ओर ही जाया करते हैं जो दिन-ब-दिन मेरे पास आ रही है। कदाचित् ही मैं भूतकाल के संबंध में सोचता हूं और शायद ही कभी मै...

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सियाह हाशिए By BALRAM AGARWAL

‘सियाह हाशिये’ पाकिस्तान में बस जाने के बाद मंटो की तीसरी किताब थी जो ‘मकतबा-ए-जदीद’ से प्रकाशित हुई। सन् 1951 तक यह उनकी सातवीं किताब थी। वीभत्सता, उलझन, बेज़ारी, नफ़रत, दुख और क्...

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गोदान By Munshi Premchand

गोदान हिंदी के उपन्यास-साहित्य के विकास का उज्वलतम प्रकाशस्तंभ है। गोदान के नायक और नायिका होरी और धनिया के परिवार के रूप में हम भारत की एक विशेष संस्कृति को सजीव और साकार पाते हैं...

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समय का पहिया By Madhudeep

समय का पहिया

बीसवीं सदी मै लिखी गई कहानियाँ

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-अस्तित्वहीन नहीं
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-नियति

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परीक्षा-गुरु By Lala Shrinivas Das

लाला मदनमोहन एक अंग्रेजी सौदागर की दुकानमैं नई, नई फाशन का अंग्रेजी अस्‍बाब देख रहे हैं. लाला ब्रजकिशोर, मुन्शी चुन्‍नीलाल और मास्‍टर शिंभूदयाल उन्‍के साथ हैं.
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श्रीकांत By Sarat Chandra Chattopadhyay

मेरी सारी जिन्दगी घूमने में ही बीती है। इस घुमक्कड़ जीवन के तीसरे पहर में खड़े होकर, उसके एक अध्याापक को सुनाते हुए, आज मुझे न जाने कितनी बातें याद आ रही हैं। यों घूमते-फिरते ही तो म...

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दुर्गादास By Munshi Premchand

दुर्गादास एक उपन्यास है जो एक वीर व्यक्ति दुर्गादास राठौड़ के जीवन पर मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित है। इसे एक वीर गाथा भी कह सकते हैं जिससे हमें कई सीख मिलती है। यह बाल साहित्य के अ...

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सत्य हरिश्चन्द्र By Bhartendu Harishchandra

अथ सत्यहरिश्चन्द्र
(मंगलाचरण)
सत्यासक्त दयाल द्विज प्रिय अघ हर सुख कन्द।
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(नान्दी के पीछे सूत्राधार2 आता है)

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