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कहते हैं कुछ कहानियाँ सिर्फ लिखी नहीं जातीं. वो महसूस की जाती हैं.ये कहानी है सन...
रितांश के हाथ काँप रहे थे। डायरी के पन्ने एक-एक करके खुल रहे थे। हर पन्ने के साथ...
रोशनी का हाथ जैसे ही अपनी पीठ की ओर गया, उसका दिल एक पल के लिए धड़कना भूल गया। उ...
COLLEGE EXAM HALL – DAYExam hall में चुप्पी थी। Students अपने-अपने seats पर बैठे...
### **पॉकेट में जितना ज्यादा माल, घरवाली के उतने ज्यादा गुलाबी गाल** संडे की अलस...
लेखिका: शालिनी गौतमआज की नारी किसी परिचय की मोहताज नहीं है। वह शिक्षा, विज्ञान,...
एक छोटी-सी विनती अगर मेरी इस कहानी में कोई गलती रह जाए, तो कृपया मुझे माफ़ कर दी...
भाग 1: दुनिया का सबसे दर्दनाक आरम्भअमन — हर घर का बच्चाघर एक मामूली-सा घर था — द...
बात सन 1869 की है जब द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हो चुका था शीत युद्ध का दूर था ए...
मृत्यु पर विजयएक आध्यात्मिक कथा— विजय शर्मा 'एरी' —सीमा पर बर्फ गिर रही...
उलरिख वॉन जेटजीखोवन के वृत्तान्तों से ली गयी यह कहानी 13वीं सदी की है। बोधकथाओं या प्रकृत कथाओं से अलग यह प्रतीक-कथा अपने समय में एक नया आयाम उद्घाटित करती है। जब लांसलॉट लड़का ही...
पब्लिक हाउस के एक सलून बार में, जो चाइनाटाउन की आधिकारिक सीमा से कुछ ही दूरी पर स्थित था, एक कोने में एक छोटे से टेबल पर दो लोग बैठे थे और गंभीर चर्चा में व्यस्त थे। दोनों में कड़ा...
इत्तफाक की बात कि दक्ष के एक और पुत्री थी - विजया। वह सुन्दर नहीं थी। बुद्धिमान तो थी, पर काफी बुद्धिमान नहीं। किसी पुरुष ने उसकी कामना नहीं की, इसलिए वह बिन ब्याही रह गयी। वह प्रौ...
अनुक्रमणिका 1 - एक थी माया ....!!! - विजय कुमार 2 - एक रात - सोनु कसाना 3 - छोटी लड़की की सीख - Abhishek Hada 4 - जाने वाले ज़रा होशियार - डा. मुसाफिर बैठा
बहुत पुरानी बात है। धारा नगरी मे ने उसे मार डाला और स्वयं राजा बन बैठा। उसका राज्य दिनोंदिन बढ़ता गया और वह सारे जम्बूद्वीप का राजा बन बैठा। एक दिन उसके मन में आया कि उसे घूमकर सैर...
लघुकथाएँ "तुमसे सलाह लेना ही मुर्खता है. पगला कहीं के...."कहते हुए रवि पुन: रोने लगा. मिलने का समय समाप्त हो गया था. प्रहरी उसे अंदर ले गया. भोला लौट गया,उसे अपने मित्र की...
एक समय दक्षिण दिशा में एक वृद्ध बाघ स्नान करके कुशों को हाथ में लिए हुए कह रहा था-- हे हो मार्ग के चलने वाले पथिकों ! मेरे हाथ में रखे हुए इस सुवर्ण के कड्कण (कड़ा) को ले लो, इसे सु...
यह मेरी कहानियों का संग्रह है यह सभी कहानियां जीवन के विभिन्न मनोभावों को दिखाती हैं. जीवन के उतार चढ़ाव में डटे रहने वा उम्मीद न छोड़ने की प्रेरणा देती हैं।
रात अपने आगोश में बारिश की बूंदो की ठंडक सी समेटे हुए थी । कभी कभी बादलों की परतों को खोलता हुआ चाँद ऐसे निकलता मानो अपनी चांदनी की छटा बिखेरने की अदा से सबको रूबरू करवाना चाहता ह...
मेरे द्वारा लिखी गयी कहानी फेसबुक मेरे कथा-संग्रह एक देह एक आत्मा से ली गयी है । फेसबुक की वर्चुअल दुनिया वास्तविक में किस तरह से मार्मिक हो जाती है यह इस कहानी में बताया गया है...
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