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उलझने (43) ज़िन्दगी मतलब की कुंजी है, लोगो का यही मानना होता है म...
कमरे का माहौल अभी गंभीर ही था कि तभी दरवाज़े पर फिर से चहल-पहल हुई। मुन्ना मामा...
पता नहीं क्यों... कभी-कभी सच्चा प्यार भी हर किसी के नसीब में नहीं होता। सच्चा प्...
: शून्य पुस्तकालय का रहस्यअनन्या के हाथों में "पूर्ण कथा" थी।उसके सुनहरे आवरण स...
रात का तीसरा पहर था। बरगद के विशाल पेड़ के नीचे...सिद्धिदात्री गहरी नींद में थी।...
निधी घबराते हूए गाड़ी का ब्रेक लगाता है । गाड़ी रुक जाती है । निधी का धड़कन ते...
बर्बाद इश्कएपिसोड 13 — जब पुराना ज़ख्म हरा हुआमुंबई में कुछ सच ऐसे होते हैं जो द...
नया घरकई दिनों से अंकित के घर की सजावट हो रही थी। सुन्दरभवन को रंग बिरंगी लाइट क...
घर में मेहमानों का ताँता लगा हुआ था और रसोई की पूरी कमान पड़ोस की ताईजी के हाथों...
कोटड़ा गाँव की सुबह हमेशा से ही अलग रही थी। यहाँ सूरज उगने से पहले ही महिलाएँ चू...
नाज़िम जब बांद्रा में मुंतक़िल हुआ तो उसे ख़ुशक़िसमती से किराए वाली बिल्डिंग में तीन कमरे मिल गए। इस बिल्डिंग में जो बंबई की ज़बान में चाली कहलाती है, निचले दर्जे के लोग रहते थे। छोटी...
दिन भर की थकी माँदी वो अभी अभी अपने बिस्तर पर लेटी थी और लेटते ही सो गई। म्युनिसिपल कमेटी का दारोगा सफ़ाई, जिसे वो सेठ जी के नाम से पुकारा करती थी। अभी अभी उस की हड्डियां पसलियां झ...
ये 1919-ई- की बात है भाई जान जब रौलट ऐक्ट के ख़िलाफ़ सारे पंजाब में एजीटेशन होरही थी। मैं अमृतसर की बात कररहा हूँ। सर माईकल ओडवायर ने डीफ़ैंस आफ़ इंडिया रूल्ज़ के मातहत गांधी जी का दाख़...
“मेरी तो आप ने ज़िंदगी हराम कर रखी है…. ख़ुदा करे मैं मर जाऊं।” “अपने मरने की दुआएं क्यों मांगती हो। मैं मर जाऊं तो सारा क़िस्सा पाक हो जाएगा...... कहो तो मैं अभी ख़ुदकुशी करने के लि...
अहमदाबाद हाइवे, फोर लेन, speed के दीवानोकी भाषामें बोले तो इकदम मखखन रोड. और उसी ऱोड पर इक जगह बहुत भयानक turn आता हैं.accident होने का खतरा :इक धंटे में एक तो होता ही है. मानो अैस...
बचपन के दिन थे- चिंता से मुक्त और कौतूहल से भरे पाँवों के नीचे आसमान बिछ जाता। पंख उग आए..., पंखों को फैलाए हम नाना के आसमान में जाने को बेताब..., हम यानि मैं, माँ और छोटी, वैसे हम...
..... तो एक ठहरी जिद के तहत सुरजू ने निर्णय लिया और गांव में मुनादी पिटा दी.... भूकंप आ गया गांव में.....! गोया सुरजू ने पृथ्वी तल पर घुस कर धीरे से खिसका दी हो प्लेट...., गांव के...
तेलंगाना एक्सप्रेस लेट हो गई है। पौने दस बजे की जगह अब पौने बारह में चलेगी। मैं वेटिंग रूम में बैठा हुआ था। सहसा, एक चिर-परिचित चेहरे पर मेरी नज़र गई। क्षणांश में मैं जान पाया कि ये...
यह कहानी अनुरंजन की कैशोर्य कल्पनाशीलता की है। उसकी अनगढ़ता और दुःसाहस की है। एक ग्रामीण किशोर की अदम्य जिजीविषा भी है यहाँ। जाने क्या है इस कहानी में और जाने क्या नहीं है! कुछ भी ह...
‘‘सलोनी!’’ किवाड़ तो बन्द थे..., अन्दर कैसे घुस गई...! मैंने ही किये थे इन्हीं हथेलियों से .... तुम रोई थी... छटपटाई थी.... तड़फ कर कितना कुछ कह रही थी... आकुल तुम्हारी हिरनी आँखों...
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