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पक्षीलोक की सुबह आज कुछ अलग थी।आकाश सामान्य से अधिक उजला था, हवाओं में हल्की सी...
सच का पहला दरवाज़ाउस आदमी की आवाज़ में अजीब सी ठंडक थी।शक्ति उसकी तरफ देखता रहा,...
Chapter 4 : जिसे ढूँढा नहीं जातामैंने नाम लिया—Sarika।उसने दो सेकंड सोचा, फिर बो...
एपिसोड 6 — "महायुद्ध की शुरुआत और एक चौंकाने वाला सच"K-452b ग्रह की धरती धमाकों...
अद्भुत थीं चुनमुन की सौगा़तेंमंटू ,जिसके बारे में मैंने पिछली पोस्ट में लिखा,के...
पुस्तक समीक्षा: सफलता के दिग्गजों से सीखयह पुस्तक रतन टाटा और बिल गेट्स जैसे विश...
रात के ठीक 2:17 बजे अद्भुत की नींद अचानक टूट गई। पंखा चल रहा था, लेकिन कमरे में...
वन के घने अंधकार में, जहां सूरज की किरणें भी मुश्किल से छनकर आती थीं, पांडवों का...
गांव में सुबहें अक्सर शोर से नहीं, खबरों से शुरू होती हैं।उस दिन भी कुछ ऐसा ही ह...
किराए का पति: समझौते से सुकून तकअध्याय 1: पटना की शाम और माँ की ज़िदपटना की गलिय...
क्षितीज पर सिन्दूरी सांझ उतर रही थी और अंतस में जमा हुआ बहुत कुछ जैसे पिघलता जा रहा था. मन में जाग रही नयी-नयी ऊष्मा से दिलों दिमाग पर जमी बर्फ अब पिघल रही थी. एक ठंडापन जो पसरा हु...
नंदलाल यादव दिल्ली में नौकरी करते हैं और साहिबाबाद में किराए के एक फ्लैट में रहते हैं। लोकल ट्रेन से आना-जाना करते हैं। आई.टी.ओ. पर उतर कर बस से आर.के.पुरम जाते हैं।सुबह शाम सप्ताह...
‘‘मुझे हवा के घूँट पीने हैं....’’ आवाज झमक कर चेतना में गिरती है... सफेद पिलपिले हाथों से चेहरा घुमाने लगा है बेताल - सीधे..... ‘‘लिजलिजे स्पृश के बोझ तले दबी मेरी गर्दन टीसने लगी...
सब अपने-अपने हिसाब से नौकरी करने आए थे। सब अपने-अपने हिसाब से नौकरी किए जा रहे थे। अगर देखा जाए तो आख़िरकार कोई ऑफिस भला क्या होता है! राजनीति और कार्यनीति का अखाड़ा ही तो। एन.आई.सी....
....आज सांवली शाम का जादू गायब था! वह टहलुई सी चलती रही..., मन का बेड़ा अभी अचानक उठे तूफान के बीच फंसा था...! एक पल को उसके जेहन में खौफनाक विचार उठा - समाप्त कर दे काया माँ... निर...
घर से निकलते समय उसने एक बार भी नहीं सोचा। तूफान का मुकाबला करने की ताकत नहीं थी उसमें। पति ने मारपीट की- बच्चों के सामने! ग्लानि हुई! रोज़-रोज़ गाली-गलौज़, मारपीट... तंग आ गयी थी। वह...
पात्र -चार लडके एक लडकी उम्र -7-8-9नाम- प्रेम ,समीर ,ईशान ,राज राज की बहन रानी सारे बच्चे अपने मामा की गाव छ...
प्रतिज्ञा उपन्यास विषम परिस्थितियों में घुट घुट कर जी रही भारतीय नारी की विवशताओं और नियति का सजीव चित्रण है। प्रतिज्ञा का नायक विधुर अमृतराय किसी विधवा से शादी करना चाहता है ताकि...
सुहानी। एक प्यारी सी लड़की। जो अपने ख्यालो से इस दुनिया को देखती है, समझती है। जिसे संभव असंभव, मुमकिन नामुमकिन, मुश्किल आसान का फर्क समझ नही आता। जो करना चाहती है वो कर के ही रहती...
उलरिख वॉन जेटजीखोवन के वृत्तान्तों से ली गयी यह कहानी 13वीं सदी की है। बोधकथाओं या प्रकृत कथाओं से अलग यह प्रतीक-कथा अपने समय में एक नया आयाम उद्घाटित करती है। जब लांसलॉट लड़का ही...
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