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मच्छरसमीरा ने नफरत से विहान की ओर देखा जो सोया हुआ था. शक्ल पर मत जा रॉकी. इसने...
एपिसोड 7 — "शापित भविष्यवाणी और छलावा ग्रह"युद्ध के मैदान में 'कार्य' की...
: : प्रकरण - 36 : : फिल्मों में अधिकाधिक अभ...
रात का कमरा, हल्की नीली लाइटShreya हीटिंग पैड लगाए लेटी है।चेहरा थका हुआ… आँखें...
महाभारत की कहानी - भाग-१८७ भीष्म द्वारा वर्णित वर्णाश्रमधर्म, चर नियोग और शुल्क...
[33]गहन सांस लेकर वह बोली, “यह गांधी का देश है। मेरी बात सुनकर तुम्हें बूरा लग स...
भूल-122 डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रति दुर्व्यवहार स्वतंत्रता सेनानियों के बीच डॉ....
कमरे में अंधेरा धीरे-धीरे फैल रहा था। शानवी खाना बनाकर टीवी के सामने बैठ गई। उसक...
खूनी हसीना और वोआनंद और अनिल दो करीबी दोस्त थे. वो एक कंपनी में जॉब करते थे.ऑफिस...
पागलपन – भाग 1: आरव की दुनियाआरव की सुबह हमेशा एक जैसी होती थी। हल्की धूप उसके क...
अंतिम फ़्रांसीसी उपनिवेश के अंतिम अवशेषों पर, पूरे चाँद की रात का पहला पहर था जब यह द्घटना द्घटी। समुद्र की काली और खुरदरी चट्टानों पर चिपके केकड़े किनारे की ओर सरकना शुरू कर चुके थे...
एनिमल फार्म (Animal Farm) अंग्रेज उपन्यासकार जॉर्ज ऑरवेल की कालजयी रचना है। बीसवीं सदी के महान अंग्रेज उपन्यासकार जॉर्ज ऑरवेल ने अपनी इस कालजयी कृति में सुअरों को केन्द्रीय चरित...
एक भोर होते ही चिड़ियों ने चहकना शुरू कर दिया। उनमें एक संवाद छिड़ गया था। कुछों का कहना था-‘इस गाँव का किसान बड़ा खराब है, हमारे पहुँच ने से प...
पूर्ण-विराम से पहले....!!! 1 "सुभोर प्रखर! कल रात तुमने मेरे व्हाट्सप्प मैसेज को देखा.. पर तुमने कोई जवाब लिखकर नहीं भेजा| तुम मेरे किसी भी मैसेज को बगैर पढ़े-लिखे सो जाओगे यह म...
नश्तर खामोशियों के शैलेंद्र शर्मा 1. बार-बार उमड़ आते उफान से मेरी आँखें गीली हो जाती थीं. और सच, मैं इतने दिनों बाद महसूस कर रही थी कि मैं अभी भी पत्थर नहीं हुई हूँ...मगर कैसी अजीब...
यारबाज़ विक्रम सिंह (1) उन तमाम बेरोजगार वह कलाकार साथियों को जो अपनी मंजिल ना पा सके जिसके वे हकदार थे युवा कथाकार विक्रम सिंह ने हाल के वर्षों में हिंदी कहानी लेखन में अपनी एक स...
उस साल ऋतुएं थोड़ा पहले आ गयीं थीं। इतना पहले कि वसंत अभी कोहरे में ही था। इसकी सफेदी और ठंडी नमी ने पेड़ों के पीले पत्तों को गिरने से रोक रखा था। बुलबुलों के गलों के रंग भी अभी सुर्...
घटना सिर्फ एक बार घटती है जब अपनी प्रामाणिकता में वस्तुतः घट रही होती है। वही घटना स्मृति में बार-बार घटती है। विचारों में भिन्न तरह से घटती है। विचारों के अनुसार घटना को महसूस करन...
कुछ गाँव गाँव कुछ शहर शहर तेजेंद्र शर्मा को समर्पित प्रेरणा "नीना आज कल क्या लिख रही हैं।" "एक उपन्यास लिखने का मन है। दो तीन विषय दिमाग में घूम भी रहे हैं किंतु कुछ सम...
यह काल की असीम निरन्तरता से दुत्कारे और तोड़ कर फेंके गए समय का एक निरर्थक टुकड़ा था। समय के कुछ टुकड़े अक्सर निरर्थक होते हैं। यह इस लिए निरर्थक था कि इसमें फिर से कुछ नए देवता जन...
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