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जीवन वीणा By Anangpal Singh Bhadoria

वीणा घर में रखी पुरानी , लेकिन नहीं बजाना आया । सारा घर उस पर चिल्लाया,जिस बच्चे ने हाथ लगाया।। जीवन वीणा के तारों की रीति -नीति नहिं हमने जानी । वीणा घर में रखी पुरानी, कदर न उसकी...

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ज़िन्दगी की धूप-छाँव By Harish Kumar Amit

ख़ुशियों का एहसास

शनिवार होने के कारण दफ़्तर में छुट्टी थी. घर में था, पर तनाव बेहद ज़्यादा था. कुछ परेशानियाँ दफ़्तर की थीं, कुछ घर की. ज़िन्दगी जैसे एक बहुत बड़ी मुसीबत लगने लगी थी...

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कन्‍हर पद माल -शास्त्रीय रागों पर आधारित पद By ramgopal bhavuk

हमारे राम चार वर्ष की अवस्‍था से चार वर्ष पिछोर में रहे वहीं विद्या का आरम्‍भ हुआ। दो बार श्री कालिन्‍द्री पर यज्ञ में जनता जनार्दन की सेवा का सौभाग्‍य प्राप्‍त हुआ। पहली बार रघुरा...

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रत्नावली-संस्कृतानुवादकः पं.गुलामदस्तगीरः By रामगोपाल तिवारी

ऐतिहासिकग्रन्थानां नायकनायिकानां चरित्रचित्रणविषये लेखनस्य परम्परा भारतीयसाहित्यक्षेत्रे समादृता अस्ति। आदिकाव्यस्य रामायणस्य उपजीविकाव्यमस्ति गोस्वामितुलसीदासेन रचितम् ‘रामचरितमान...

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मन के मोती By Ashish Kumar Trivedi

यह मेरी कहानियों का संग्रह है यह सभी कहानियां जीवन के विभिन्न मनोभावों को दिखाती हैं. जीवन के उतार चढ़ाव में डटे रहने वा उम्मीद न छोड़ने की प्रेरणा देती हैं।

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बेपनाह By Seema Saxena

“शुभी सुनो, कहाँ हो तुम ? आओ यहाँ मेरे पास आकर बैठो ।” मम्मी की हल्की सी आवाज उसके कानों में पड़ी।

हुंह ! बुलाने दो मम्मी को, मैं नहीं जा रही । शुभी मन ही मन बड़बड़ाई ।

“शुभी आओ...

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प्रेमम पिंजरम By Srishtichouhan

मौसम की आवारगी में खोई हू और आज भी मै डायरी में तुम्हारे आने की उम्मीद में लिख रही हूं , यह डायरी जिसमें तुमसे जुड़ी हर बात लिखते ही जा रही , मुझे यकीन है कि तुम आओगे जरूर , 1946 क...

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कौन है ख़लनायक By Ratna Pandey

कभी कभी हम जीवन में ऐसे दो राहे पर आकर रुक जाते हैं कि समझ ही नहीं आता कि अब किधर जायें। ऐसे ही दो राहे पर खड़ी थी रुपाली जिसके एक तरफ़ प्रियांशु था और दूसरी तरफ़ अजय। उनमें से कौन उस...

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बारिश की बूंदें और वो By ANOKHI JHA

यह कहानी है अनायास हुई मुलाकात की, जिसमें दो जीवन एक दूसरे से जुड़ जाते हैं। बारिश की बूँदें जब धरती पर गिरती हैं, तो कई यादें, एहसास और सपने भी संग लाती हैं। इस कहानी में, हम मिले...

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मेरा भारत लौटा दो By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

दो शब्‍द-

प्‍यारी मातृभूमि के दर्दों से आहत होकर, यह जनमानस पुन: शान्ति, सुयश और गौरव के उस युग-युगीन आनन्‍द के सौन्‍दर्य की अनुभूति की चाह में अपने खोए हुए अतीत को, पुन: याद कर...

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वो अनकही बातें - सेंकेड सीज़न मिसालें इश्क By RACHNA ROY

दोस्तों आपने मेरी कहानी वो अनकही बातें को आप लोगों ने बहुत ही सराहा था।आप सबके लिए मैं एक बार फिर से लेकर आ गई हुं इसका सेकेंड सीजन पर कहानी का नाम कुछ हट कर है।।।
मिसाले इश्क ।।।...

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प्यार के इन्द्रधुनष By Lajpat Rai Garg

आज मनमोहन को मन मारकर कार्यालय आना पड़ा था। उसके बॉस का सख़्त आदेश न होता तो इस समय वह आने वाली मीटिंग की फाइल तैयार करने की बजाय अपनी पत्नी रेनु के पास अस्पताल में होता। आज सुबह ज...

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भीगे पंख By Mahesh Dewedy

यह कहानी विभिन्न मन-स्थितियों मं जी रहे तीन ऐसे पात्रों की कहानी है जो असामान्य जीवन जीने को अभिशप्त हैं।
थामस ए. हैरिस नामक अमेरिका के प्रसिद्ध मनोचिकित्सक ने अपनी विश्वविख्यात प...

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पके फलों का बाग़ By Prabodh Kumar Govil

बाग़ के फल अब पकने लगे थे। लेकिन माली भी बूढ़ा होने लगा। माली तो अब भी मज़े में था, क्योंकि बूढ़ा होने की घटना कोई एक अकेले उसी के साथ नहीं घटी थी। जो उसके सामने पैदा हुए वो भी बूढ...

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हर्जाना By Ratna Pandey

आज की यह रात अमावस की काली अंधियारी रात थी। इस रात के बीच में बिजली की चमक अँधेरे का सीना चीरती हुई धरती पर आ गिरती कभी मद्धम कभी भीषण। बादल नाराज़ लग रहे थे, ऐसा लग रहा था इस भयानक...

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टोरंटो (कनाडा) यात्रा संस्मरण By Manoj kumar shukla

हमने अपने जीवन काल में भारत के अनेक शहरों एवं पर्यटन स्थलों का भ्रमण ट्रेन व बस माध्यम से किया। पर विदेश यात्रा जाने का यह पहला अवसर था वह भी हवाई जहाज से। हमारी यह उड़ान हवाई जहाज...

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एक नया रास्ता By Kishanlal Sharma

"यह कौन है?"राजन के साथ आयी युवती को देखकर कल्पना बोली थी।
"यह सुनीता है,"राजन अपने साथ आयी युवती का परिचय कल्पना से कराते हुए बोला,"और सुनीता मेरी पत्नी है &#...

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बजरंग बत्तीसी – समीक्षा व छंद By Ram Bharose Mishra

बजरंग बत्तीसी के रचनाकार हैं महंत जानकी दास जी । “वह काव्य शक्ति में भी सिद्ध थे। उनकी अन्य काव्य कृतियां हैं जैसे राम रसायन, काव्य सुधाकर,ऋतु तरंग,विरह दिवाकर, रस कौमुदी, सुमति पच...

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My Passionate Hubby By Asha Sahu

एक बड़ा सा बंग्लो जिसके entrance gate पर एक बड़ा सा बोर्ड लगा हुआ था, जिसके ऊपर बड़े बड़े अक्षरों में "Oberoi Villa" लिखा हुआ था। उस Bungalow के entrance gate से लेकर main...

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मुझे न्याय चाहिए By Pallavi Saxena

शारीरिक विकलांगता किसी का मुंह नहीं देखती ना ही किसी में कोई लिंग भेद ही करती है. यहाँ मैं विकलांगता शब्द का प्रयोग कर रही हूँ जो देखने, पढ़ने, सुनने, आदि में कठोर शब्द है बहुत से ल...

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प्रतिशोध- By Saroj Verma

दूर पहाड़ों के बीच बसा एक राज्य जिसका नाम पुलस्थ है, धन-धान्य से परिपूर्ण, जहां की प्रजा के मुंख पर सदैव प्रसन्नता वास करती है,उस राज्य के राजा है हर्षवर्धन,जो आज पड़ोसी राज्य के र...

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चोलबे ना By Rajeev Upadhyay

चच्चा खीस से एकमुस्त लाल-पीला हो भुनभुनाए जा रहे थे मगर बोल कुछ भी नहीं रहे थे। मतलब एकदम चुप्प! बहुत देर तक उनका भ्रमर गान सुनने के बाद जब मेरे अन्दर का कीड़ा कुलबुलाने लगा। अन्त म...

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दिल से दिल तक By Sonali Rawat

‘‘हर्ष,अब क्या होगा?’’ आभा ने कराहते हुए पूछा. उस की आंखों में भय साफसाफ देखा जा सकता था. उसे अपनी चोट से ज्यादा आने वाली परिस्थिति को ले कर घबराहट हो रही थी.

‘‘कुछ नहीं होगा… म...

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मोतीबाई - (एक तवायफ़ माँ की कहानी) By Saroj Verma

"माँ" मेरे हिसाब से ये एक ही ऐसा शब्द है,जिस पर दुनिया टिकी हुई है,मानव इतिहास के जन्म के समय से ही स्त्री माँ बनती आई है और मातृत्व को जीती आई है,ये अलग बात है कि स्त्री...

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पक्षीराज By Pooja Singh

इंसानी दुनिया से अलग है एक दूसरी दुनिया" पक्षीलोक "यहाँ के लोग दिखते तो आम लोग जैसे ही है पर आम इंसान जैसे है भी नही इनका आधा चेहरा पक्षी जैसा है और बड़े बड़े पंख है ।ये लो...

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परम पूज्य स्वामी हरिओम तीर्थ जी महाराज By रामगोपाल तिवारी

परम पूज्य स्वामी हरिओम तीर्थ जी महाराज 1 एक अजनबी जो अपना सा लगा परम पूज्य स्वामी हरिओम तीर्थ जी महाराज ....

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जहाँ चाह हो राह मिल ही जाती है By Ratna Pandey

सेठ हीरा लाल अपनी पत्नी गायत्री के साथ रोज़ की ही तरह आज भी प्रातः काल सैर पर निकले थे। बारिश के दिन थे, बहुत ही खूबसूरत मौसम, ठंडी पवन, शरीर और मन को लुभा रही थी। प्रातः के लगभग पा...

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किसी ने नहीं सुना By Pradeep Shrivastava

किसी ने नहीं सुना -प्रदीप श्रीवास्तव भाग 1 रक्षा-बंधन का वह दिन मेरे जीवन का सबसे बड़ा अभिशप्त दिन है। जो मुझे तिल-तिल कर मार रहा है। आठ साल हो गए जेल की इस कोठरी में घुट-घुटकर मरते...

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इस दश्‍त में एक शहर था By Amitabh Mishra

इस दश्‍त में एक शहर था अमिताभ मिश्र स्‍वतंत्र भारत की सबसे बड़ी परिघटना संयुक्‍त परिवारों का टूटना और एकल परिवार का बनना है गजानन माधव मुक्तिबोध प्रस्तावना या भूमिका (इतिहास और भूगो...

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प्यार ऐसा भी By सीमा बी.

मेरी कहानी का शीर्षक पढ़ कर आप सब सोच रहे होगें की लो एक और प्रेम कहानी!!
मैं आप सब से सिर्फ इतना ही कहना चाहूँगा कि ये है तो प्रेम पर कैसा?? वो आप पर छोड़ता हूँ।

मैं प्रकाश ह...

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कर्तव्य By Asha Saraswat

व्यक्ति को अपने जीवन में माता-पिता,भाई -बहन का ध्यान रखना चाहिए; जब शादी हो जाये तो जीवन पर्यंत जीवन साथी का पूरा ध्यान और भरणपोषण करना चाहिए।जब बच्चे हों तो उनकी पूरी ज़िम्मेदारी...

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चौपड़े की चुड़ैलें By PANKAJ SUBEER

चौपड़े की चुड़ैलें (कहानी : पंकज सुबीर) (1) हवेली वैसी ही थी जैसी हवेलियाँ होती हैं और घर वैसे ही थे, जैसे कि क़स्बे के घर होते हैं। कुछ कच्चे, कुछ पक्के। इस क़स्बे से ही हमारी कहानी...

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हुक्म और हसरत By Diksha mis kahani

हुक्म था — बचाओ, हसरत थी — छीन लो... और मोहब्बत कभी इजाज़त नहीं मांगती।"
"प्यारे Parahearts परिवार, अध्याय 7 में मुझसे अनजाने में प्रातिलिपि पर रेटिंग लिख दी गई, जबकि मेरा...

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भीतर का जादू By Mak Bhavimesh

उम्ब्रालूना के एकांत द्वीप पर, जहाँ आपस में जुड़ी परछाइयाँ अनकहे रहस्य समेटे हुए थीं, एक मनोरम कहानी सामने आती हैं। इसके किनारे, कोमल उतार-चढ़ाव और एक रहस्यमय समुद्र के प्रवाह से द...

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स्पर्श By Saroj Verma

क्या कहा तुमने ? तुम सेठ रघुवरदयाल की बेटी के संग ब्याह नहीं करोगें,अगर तुम ऐसा नहीं कर सकते तो मेरे घर में तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं है,रामनारायण जी अपने बेटे मधुसुदन से बोले।। बा...

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Silent Hearts By InkImagination

पहली मुलाक़ातसियोल की एक ठंडी शाम थी। आसमान पर हल्के बादल छाए थे, और हवा में कॉफ़ी की खुशबू तैर रही थी। शहर की चमकती रोशनी और हल्की ठंडक के बीच यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी एक शांत आश्...

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बेटी की अदालत By Ratna Pandey

18 साल की स्वीटी के सामने एक बहुत ही विकट समस्या थी। वह समस्या थी मम्मी या पापा किसके साथ उसे अपना आगे का जीवन बिताना है। उसकी मम्मी अलका और पापा गौरव के बीच रोज़ होते झगड़ों के कार...

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प्रेम दीवानी आत्मा By Rakesh Rakesh

आयु में अपने से दो वर्ष बड़ी पड़ोस में रहने वाली अंकिता को जब उसके कॉलेज में साथ पढ़ने वाला विक्रम बोलता है "आप गुलाबी साड़ी में बहुत खूबसूरत लग रही हो" तो उसकी यह बात सुनक...

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घर की मुर्गी By AKANKSHA SRIVASTAVA

अक्सर ससुराल में नई बहू के आते ही उसे जिम्मेदारी के नाम पर अकेले ही हजारों कामो के लिए सौप दिया जाता हैं। बिना यह सोचें कि वह अभी इस घर मे नयी है। हर लड़की को मायके की आजादी से निकल...

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मार्क्स - Season-1 By ARUANDHATEE GARG मीठी

मैथ्स टीचर एक स्टूडेंट को पूरी क्लास के सामने बुरी तरह से डांटते हुए ।

सोहन सर ( मैथ्स टीचर ) - ये क्या है नादिर.....???? तुम्हें समझ नहीं आता, कि ये क्लास 12th है । अभी तक तुमन...

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रामचर्चा By Munshi Premchand

राम चर्चा प्रेमचंद द्वारा लिखी गयी बच्चो की पुस्तक है ये पुस्तक लिखने में उनका मुख्य उदेश्य था कि भगवान राम के गुणों को बच्चों तक पहुचाएँ इसी लिए एक वार्तालाप के रूप में इस पुस्त...

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छुटकी दीदी By Madhukant

पात्र परिचय -

सलोनी - छुटकी दीदी

भाग्या - बड़ी बहन

ज्योत्सना - माँ

अमर - भाग्या का पति

देवी सहाय - नाना

शारदा देवी - नानी

सीताराम - माँ का चचेरा भाई

सुकांत...

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तेरे शहर के मेरे लोग By Prabodh Kumar Govil

( एक )जबलपुर आते समय मन में ठंडक और बेचैनियों का एक मिला- जुला झुरमुट सा उमड़ रहा था जो मुंबई से ट्रेन में बैठते ही मंद- मंद हवा के झौंकों की तरह सहला भी रहा था और कसक भी रहा था।ईम...

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ये तुम्हारी मेरी बातें By Preeti

"सुनो, कहां हो तुम"?

"सुबह घर से निकलते वक्त बता कर आया था , भूल गई "?

"सीधे सीधे जवाब देने में दिक्कत है क्या कोई "?

"आज अचानक से मेरी जासूसी...

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पश्चाताप. By Ruchi Dixit

"पश्चाताप " यह रचना मैने प्रतिलिपि पर वेवसीरीज के तौर पर लिखी थी जिसे अब बिना परिवर्तित करे मै उपन्यास की रूप मातृभारती पर देने जा रही हूँ | प्रतिलिपि पर मैने इसे दस भागो...

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मैं पापन ऐसी जली! By Saroj Verma

सात सुरों के मेल को सरगम कहा जाता है,ये एक ऐसी ही लड़की की कहनी है जिसका नाम सरगम है,जिसका जीवन उसके नाम की तरह संगीतमय था जो स्वरबद्ध और तालबद्ध था लेकिन फिर उसके जीवन के सुरो का त...

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एक-रात एक-राज़ By silent Shivani

खिड़की से ठंडी हवा और बारिश की बूंदें,, आरोही के मुंह छू कर जा रही थी,, गुमसुम खडी आरोही,,, मन में क ई सवाल लिए चुपचाप बारिश को देखे जा रही थी,,

आरोही तुम्हें सर्दी लग जायेगी,,...

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Dream Love By Hanika

हाय! कितना हैंडसम लड़का है। हे भगवान! बस एक बार मिलादो प्लीज।
हनिका जो की मिडिल क्लास फैमिली से है। जो खुद से ही बातें कर रही होती है। वो जिस लड़के की बात कर रही होती है, वो कोई...

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नादान मोहब्बत By Lakshmi Narayan Panna

नादान मोहब्बत( प्रस्तावना-प्यार की परिभाषा )क्या प्यार समझदारों का खेल है या शारीरिक रसायनों का प्रभाव ? जब प्यार की परिभाषा भी स्पष्ट नही होती तब प्यार कैसे हो जाता है ? कम उम्र म...

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फूल बना हथियार By S Bhagyam Sharma

यह उपन्यास जासूसी तो है ही पर बहुत ही इंटरेस्टिंग है। बड़े-बड़े मुखोटे लगाकर बिजनेसमैन क्या-क्या बदमाशियां करते हैं वही नहीं बड़े-बड़े डॉक्टर से भी कई बार इसमें शामिल होते हैं। पैस...

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जीवन वीणा By Anangpal Singh Bhadoria

वीणा घर में रखी पुरानी , लेकिन नहीं बजाना आया । सारा घर उस पर चिल्लाया,जिस बच्चे ने हाथ लगाया।। जीवन वीणा के तारों की रीति -नीति नहिं हमने जानी । वीणा घर में रखी पुरानी, कदर न उसकी...

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ज़िन्दगी की धूप-छाँव By Harish Kumar Amit

ख़ुशियों का एहसास

शनिवार होने के कारण दफ़्तर में छुट्टी थी. घर में था, पर तनाव बेहद ज़्यादा था. कुछ परेशानियाँ दफ़्तर की थीं, कुछ घर की. ज़िन्दगी जैसे एक बहुत बड़ी मुसीबत लगने लगी थी...

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कन्‍हर पद माल -शास्त्रीय रागों पर आधारित पद By ramgopal bhavuk

हमारे राम चार वर्ष की अवस्‍था से चार वर्ष पिछोर में रहे वहीं विद्या का आरम्‍भ हुआ। दो बार श्री कालिन्‍द्री पर यज्ञ में जनता जनार्दन की सेवा का सौभाग्‍य प्राप्‍त हुआ। पहली बार रघुरा...

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रत्नावली-संस्कृतानुवादकः पं.गुलामदस्तगीरः By रामगोपाल तिवारी

ऐतिहासिकग्रन्थानां नायकनायिकानां चरित्रचित्रणविषये लेखनस्य परम्परा भारतीयसाहित्यक्षेत्रे समादृता अस्ति। आदिकाव्यस्य रामायणस्य उपजीविकाव्यमस्ति गोस्वामितुलसीदासेन रचितम् ‘रामचरितमान...

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मन के मोती By Ashish Kumar Trivedi

यह मेरी कहानियों का संग्रह है यह सभी कहानियां जीवन के विभिन्न मनोभावों को दिखाती हैं. जीवन के उतार चढ़ाव में डटे रहने वा उम्मीद न छोड़ने की प्रेरणा देती हैं।

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बेपनाह By Seema Saxena

“शुभी सुनो, कहाँ हो तुम ? आओ यहाँ मेरे पास आकर बैठो ।” मम्मी की हल्की सी आवाज उसके कानों में पड़ी।

हुंह ! बुलाने दो मम्मी को, मैं नहीं जा रही । शुभी मन ही मन बड़बड़ाई ।

“शुभी आओ...

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प्रेमम पिंजरम By Srishtichouhan

मौसम की आवारगी में खोई हू और आज भी मै डायरी में तुम्हारे आने की उम्मीद में लिख रही हूं , यह डायरी जिसमें तुमसे जुड़ी हर बात लिखते ही जा रही , मुझे यकीन है कि तुम आओगे जरूर , 1946 क...

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कौन है ख़लनायक By Ratna Pandey

कभी कभी हम जीवन में ऐसे दो राहे पर आकर रुक जाते हैं कि समझ ही नहीं आता कि अब किधर जायें। ऐसे ही दो राहे पर खड़ी थी रुपाली जिसके एक तरफ़ प्रियांशु था और दूसरी तरफ़ अजय। उनमें से कौन उस...

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बारिश की बूंदें और वो By ANOKHI JHA

यह कहानी है अनायास हुई मुलाकात की, जिसमें दो जीवन एक दूसरे से जुड़ जाते हैं। बारिश की बूँदें जब धरती पर गिरती हैं, तो कई यादें, एहसास और सपने भी संग लाती हैं। इस कहानी में, हम मिले...

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मेरा भारत लौटा दो By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

दो शब्‍द-

प्‍यारी मातृभूमि के दर्दों से आहत होकर, यह जनमानस पुन: शान्ति, सुयश और गौरव के उस युग-युगीन आनन्‍द के सौन्‍दर्य की अनुभूति की चाह में अपने खोए हुए अतीत को, पुन: याद कर...

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वो अनकही बातें - सेंकेड सीज़न मिसालें इश्क By RACHNA ROY

दोस्तों आपने मेरी कहानी वो अनकही बातें को आप लोगों ने बहुत ही सराहा था।आप सबके लिए मैं एक बार फिर से लेकर आ गई हुं इसका सेकेंड सीजन पर कहानी का नाम कुछ हट कर है।।।
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प्यार के इन्द्रधुनष By Lajpat Rai Garg

आज मनमोहन को मन मारकर कार्यालय आना पड़ा था। उसके बॉस का सख़्त आदेश न होता तो इस समय वह आने वाली मीटिंग की फाइल तैयार करने की बजाय अपनी पत्नी रेनु के पास अस्पताल में होता। आज सुबह ज...

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भीगे पंख By Mahesh Dewedy

यह कहानी विभिन्न मन-स्थितियों मं जी रहे तीन ऐसे पात्रों की कहानी है जो असामान्य जीवन जीने को अभिशप्त हैं।
थामस ए. हैरिस नामक अमेरिका के प्रसिद्ध मनोचिकित्सक ने अपनी विश्वविख्यात प...

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पके फलों का बाग़ By Prabodh Kumar Govil

बाग़ के फल अब पकने लगे थे। लेकिन माली भी बूढ़ा होने लगा। माली तो अब भी मज़े में था, क्योंकि बूढ़ा होने की घटना कोई एक अकेले उसी के साथ नहीं घटी थी। जो उसके सामने पैदा हुए वो भी बूढ...

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हर्जाना By Ratna Pandey

आज की यह रात अमावस की काली अंधियारी रात थी। इस रात के बीच में बिजली की चमक अँधेरे का सीना चीरती हुई धरती पर आ गिरती कभी मद्धम कभी भीषण। बादल नाराज़ लग रहे थे, ऐसा लग रहा था इस भयानक...

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टोरंटो (कनाडा) यात्रा संस्मरण By Manoj kumar shukla

हमने अपने जीवन काल में भारत के अनेक शहरों एवं पर्यटन स्थलों का भ्रमण ट्रेन व बस माध्यम से किया। पर विदेश यात्रा जाने का यह पहला अवसर था वह भी हवाई जहाज से। हमारी यह उड़ान हवाई जहाज...

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एक नया रास्ता By Kishanlal Sharma

"यह कौन है?"राजन के साथ आयी युवती को देखकर कल्पना बोली थी।
"यह सुनीता है,"राजन अपने साथ आयी युवती का परिचय कल्पना से कराते हुए बोला,"और सुनीता मेरी पत्नी है &#...

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बजरंग बत्तीसी – समीक्षा व छंद By Ram Bharose Mishra

बजरंग बत्तीसी के रचनाकार हैं महंत जानकी दास जी । “वह काव्य शक्ति में भी सिद्ध थे। उनकी अन्य काव्य कृतियां हैं जैसे राम रसायन, काव्य सुधाकर,ऋतु तरंग,विरह दिवाकर, रस कौमुदी, सुमति पच...

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मुझे न्याय चाहिए By Pallavi Saxena

शारीरिक विकलांगता किसी का मुंह नहीं देखती ना ही किसी में कोई लिंग भेद ही करती है. यहाँ मैं विकलांगता शब्द का प्रयोग कर रही हूँ जो देखने, पढ़ने, सुनने, आदि में कठोर शब्द है बहुत से ल...

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प्रतिशोध- By Saroj Verma

दूर पहाड़ों के बीच बसा एक राज्य जिसका नाम पुलस्थ है, धन-धान्य से परिपूर्ण, जहां की प्रजा के मुंख पर सदैव प्रसन्नता वास करती है,उस राज्य के राजा है हर्षवर्धन,जो आज पड़ोसी राज्य के र...

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चोलबे ना By Rajeev Upadhyay

चच्चा खीस से एकमुस्त लाल-पीला हो भुनभुनाए जा रहे थे मगर बोल कुछ भी नहीं रहे थे। मतलब एकदम चुप्प! बहुत देर तक उनका भ्रमर गान सुनने के बाद जब मेरे अन्दर का कीड़ा कुलबुलाने लगा। अन्त म...

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दिल से दिल तक By Sonali Rawat

‘‘हर्ष,अब क्या होगा?’’ आभा ने कराहते हुए पूछा. उस की आंखों में भय साफसाफ देखा जा सकता था. उसे अपनी चोट से ज्यादा आने वाली परिस्थिति को ले कर घबराहट हो रही थी.

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मोतीबाई - (एक तवायफ़ माँ की कहानी) By Saroj Verma

"माँ" मेरे हिसाब से ये एक ही ऐसा शब्द है,जिस पर दुनिया टिकी हुई है,मानव इतिहास के जन्म के समय से ही स्त्री माँ बनती आई है और मातृत्व को जीती आई है,ये अलग बात है कि स्त्री...

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पक्षीराज By Pooja Singh

इंसानी दुनिया से अलग है एक दूसरी दुनिया" पक्षीलोक "यहाँ के लोग दिखते तो आम लोग जैसे ही है पर आम इंसान जैसे है भी नही इनका आधा चेहरा पक्षी जैसा है और बड़े बड़े पंख है ।ये लो...

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परम पूज्य स्वामी हरिओम तीर्थ जी महाराज By रामगोपाल तिवारी

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जहाँ चाह हो राह मिल ही जाती है By Ratna Pandey

सेठ हीरा लाल अपनी पत्नी गायत्री के साथ रोज़ की ही तरह आज भी प्रातः काल सैर पर निकले थे। बारिश के दिन थे, बहुत ही खूबसूरत मौसम, ठंडी पवन, शरीर और मन को लुभा रही थी। प्रातः के लगभग पा...

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किसी ने नहीं सुना By Pradeep Shrivastava

किसी ने नहीं सुना -प्रदीप श्रीवास्तव भाग 1 रक्षा-बंधन का वह दिन मेरे जीवन का सबसे बड़ा अभिशप्त दिन है। जो मुझे तिल-तिल कर मार रहा है। आठ साल हो गए जेल की इस कोठरी में घुट-घुटकर मरते...

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इस दश्‍त में एक शहर था By Amitabh Mishra

इस दश्‍त में एक शहर था अमिताभ मिश्र स्‍वतंत्र भारत की सबसे बड़ी परिघटना संयुक्‍त परिवारों का टूटना और एकल परिवार का बनना है गजानन माधव मुक्तिबोध प्रस्तावना या भूमिका (इतिहास और भूगो...

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प्यार ऐसा भी By सीमा बी.

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चौपड़े की चुड़ैलें By PANKAJ SUBEER

चौपड़े की चुड़ैलें (कहानी : पंकज सुबीर) (1) हवेली वैसी ही थी जैसी हवेलियाँ होती हैं और घर वैसे ही थे, जैसे कि क़स्बे के घर होते हैं। कुछ कच्चे, कुछ पक्के। इस क़स्बे से ही हमारी कहानी...

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हुक्म और हसरत By Diksha mis kahani

हुक्म था — बचाओ, हसरत थी — छीन लो... और मोहब्बत कभी इजाज़त नहीं मांगती।"
"प्यारे Parahearts परिवार, अध्याय 7 में मुझसे अनजाने में प्रातिलिपि पर रेटिंग लिख दी गई, जबकि मेरा...

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भीतर का जादू By Mak Bhavimesh

उम्ब्रालूना के एकांत द्वीप पर, जहाँ आपस में जुड़ी परछाइयाँ अनकहे रहस्य समेटे हुए थीं, एक मनोरम कहानी सामने आती हैं। इसके किनारे, कोमल उतार-चढ़ाव और एक रहस्यमय समुद्र के प्रवाह से द...

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स्पर्श By Saroj Verma

क्या कहा तुमने ? तुम सेठ रघुवरदयाल की बेटी के संग ब्याह नहीं करोगें,अगर तुम ऐसा नहीं कर सकते तो मेरे घर में तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं है,रामनारायण जी अपने बेटे मधुसुदन से बोले।। बा...

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Silent Hearts By InkImagination

पहली मुलाक़ातसियोल की एक ठंडी शाम थी। आसमान पर हल्के बादल छाए थे, और हवा में कॉफ़ी की खुशबू तैर रही थी। शहर की चमकती रोशनी और हल्की ठंडक के बीच यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी एक शांत आश्...

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बेटी की अदालत By Ratna Pandey

18 साल की स्वीटी के सामने एक बहुत ही विकट समस्या थी। वह समस्या थी मम्मी या पापा किसके साथ उसे अपना आगे का जीवन बिताना है। उसकी मम्मी अलका और पापा गौरव के बीच रोज़ होते झगड़ों के कार...

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प्रेम दीवानी आत्मा By Rakesh Rakesh

आयु में अपने से दो वर्ष बड़ी पड़ोस में रहने वाली अंकिता को जब उसके कॉलेज में साथ पढ़ने वाला विक्रम बोलता है "आप गुलाबी साड़ी में बहुत खूबसूरत लग रही हो" तो उसकी यह बात सुनक...

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घर की मुर्गी By AKANKSHA SRIVASTAVA

अक्सर ससुराल में नई बहू के आते ही उसे जिम्मेदारी के नाम पर अकेले ही हजारों कामो के लिए सौप दिया जाता हैं। बिना यह सोचें कि वह अभी इस घर मे नयी है। हर लड़की को मायके की आजादी से निकल...

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मार्क्स - Season-1 By ARUANDHATEE GARG मीठी

मैथ्स टीचर एक स्टूडेंट को पूरी क्लास के सामने बुरी तरह से डांटते हुए ।

सोहन सर ( मैथ्स टीचर ) - ये क्या है नादिर.....???? तुम्हें समझ नहीं आता, कि ये क्लास 12th है । अभी तक तुमन...

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रामचर्चा By Munshi Premchand

राम चर्चा प्रेमचंद द्वारा लिखी गयी बच्चो की पुस्तक है ये पुस्तक लिखने में उनका मुख्य उदेश्य था कि भगवान राम के गुणों को बच्चों तक पहुचाएँ इसी लिए एक वार्तालाप के रूप में इस पुस्त...

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छुटकी दीदी By Madhukant

पात्र परिचय -

सलोनी - छुटकी दीदी

भाग्या - बड़ी बहन

ज्योत्सना - माँ

अमर - भाग्या का पति

देवी सहाय - नाना

शारदा देवी - नानी

सीताराम - माँ का चचेरा भाई

सुकांत...

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तेरे शहर के मेरे लोग By Prabodh Kumar Govil

( एक )जबलपुर आते समय मन में ठंडक और बेचैनियों का एक मिला- जुला झुरमुट सा उमड़ रहा था जो मुंबई से ट्रेन में बैठते ही मंद- मंद हवा के झौंकों की तरह सहला भी रहा था और कसक भी रहा था।ईम...

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ये तुम्हारी मेरी बातें By Preeti

"सुनो, कहां हो तुम"?

"सुबह घर से निकलते वक्त बता कर आया था , भूल गई "?

"सीधे सीधे जवाब देने में दिक्कत है क्या कोई "?

"आज अचानक से मेरी जासूसी...

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पश्चाताप. By Ruchi Dixit

"पश्चाताप " यह रचना मैने प्रतिलिपि पर वेवसीरीज के तौर पर लिखी थी जिसे अब बिना परिवर्तित करे मै उपन्यास की रूप मातृभारती पर देने जा रही हूँ | प्रतिलिपि पर मैने इसे दस भागो...

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मैं पापन ऐसी जली! By Saroj Verma

सात सुरों के मेल को सरगम कहा जाता है,ये एक ऐसी ही लड़की की कहनी है जिसका नाम सरगम है,जिसका जीवन उसके नाम की तरह संगीतमय था जो स्वरबद्ध और तालबद्ध था लेकिन फिर उसके जीवन के सुरो का त...

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एक-रात एक-राज़ By silent Shivani

खिड़की से ठंडी हवा और बारिश की बूंदें,, आरोही के मुंह छू कर जा रही थी,, गुमसुम खडी आरोही,,, मन में क ई सवाल लिए चुपचाप बारिश को देखे जा रही थी,,

आरोही तुम्हें सर्दी लग जायेगी,,...

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Dream Love By Hanika

हाय! कितना हैंडसम लड़का है। हे भगवान! बस एक बार मिलादो प्लीज।
हनिका जो की मिडिल क्लास फैमिली से है। जो खुद से ही बातें कर रही होती है। वो जिस लड़के की बात कर रही होती है, वो कोई...

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नादान मोहब्बत By Lakshmi Narayan Panna

नादान मोहब्बत( प्रस्तावना-प्यार की परिभाषा )क्या प्यार समझदारों का खेल है या शारीरिक रसायनों का प्रभाव ? जब प्यार की परिभाषा भी स्पष्ट नही होती तब प्यार कैसे हो जाता है ? कम उम्र म...

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फूल बना हथियार By S Bhagyam Sharma

यह उपन्यास जासूसी तो है ही पर बहुत ही इंटरेस्टिंग है। बड़े-बड़े मुखोटे लगाकर बिजनेसमैन क्या-क्या बदमाशियां करते हैं वही नहीं बड़े-बड़े डॉक्टर से भी कई बार इसमें शामिल होते हैं। पैस...

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